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Saturday, 1 November 2025

कुछ सपने देर से पूरे होते हैं,पर होते हैं।

 


ये खेल सत्र मानो कुछ खिलाड़ियों की दीर्घावधि से लंबित पड़ी अधूरी इच्छाओं के पूर्ण होने का सत्र है। 

कुछ सपने देर से पूरे होते हैं,पर होते हैं।

याद कीजिए विराट कोहली को। उनके पास सब कुछ था। अगर कुछ नहीं था तो एक अदद आईपीएल ट्रॉफी नहीं थी। 2025 का सीजन आया और रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु ने आईपीएल जीत लिया। एक अधूरी साध पूरी हुई।

35 साल के सुरजीत नरवाल के पास भी क्या कुछ नहीं था। देश के सबसे बेहतरीन डिफेंडर में उनका नाम था। दो एशियाई गोल्ड मेडल थे। इससे पहले प्रो कबड्डी के नौ सत्र वे खेल चुके थे। आंकड़ों के हिसाब से दूसरे सबसे बेहतरीन डिफेंडर। फजल अत्रिचल के बाद सबसे ज्यादा टैकल प्वाइंट। पांच सौ का आंकड़ा छूते हुए। इस दौरान पुनेरी पलटन और बेंगलुरु बुल्स के कप्तान भी रहे।

लेकिन इतना होने के बावजूद अगर उनके पास कुछ नहीं था तो नौ सीजन खेलने के बावजूद कोई खिताब उनके नाम नहीं था। यहां तक कि कोई फाइनल भी उन्हें नसीब ना हुआ।

तब साल 2025 का प्रो कबड्डी का 12वां सत्र आया। दबंग दिल्ली से जुड़े और एक अपूर्ण इच्छा पूर्णता में बदल गई। एक सपना साकार हुआ। एक खिताब उनके माथे सजा। एक ट्रॉफी उनके हाथ सजी। एक ट्रॉफी को उनके होठों ने स्पर्श किया।

आज फाइनल में दबंग दिल्ली ने एक रोमांचक मैच में पुनेरी पलटन को 30-28 अंकों से परास्त कर अपना दूसरा खिताब जीता और टीम ने इस खिताब को सुरजीत को समर्पित कर दिया।

सुरजीत विशेषज्ञ राइट कवर डिफेंडर हैं और अपनी आक्रामकता और अग्रिम टैकल के लिए जाने जाते हैं। डैश उनका सिग्नेचर मूव है जिसमें वे निर्णायक तरीके से रेडर को कोर्ट से बाहर धकेल कर आउट कर देते हैं। वे लीग के सबसे शानदार रक्षात्मक खिलाड़ियों में से एक हैं। वे अब तक 34 हाई फाइव और 26 सुपर टैकल कर चुके हैं।

कुछ सपने देर से पूरे होते हैं,पर होते हैं।

सुरजीत को पहला खिताब मुबारक और दबंग दिल्ली को अपना दूसरा।

Tuesday, 2 September 2025

प्रो कबड्डी लीग 2025_2 देवांक दलाल और मूंछ उमेठने का नया स्वैग

 



'प्रो कबड्डी लीग' के सीजन 11 के सर्वश्रेष्ठ रेडर देवांक दलाल ने सीजन 12 की शुरुआत ठीक वहां से की है,जहां उन्होंने सीजन 11 खत्म किया था।

बीती रात सीजन 12 का छठा मैच पिछले साल की चैंपियन 'हरियाणा स्टीलर्स' और 'बंगाल वॉरियर्स' के बीच था,जो इन दोनों ही टीमों का इस सीजन का पहला मैच था। इस मैच में वॉरियर्स ने स्टीलर्स को 54-44 अंकों से हरा दिया। इस मैच में वॉरियर्स के कप्तान देवांक दलाल ने शानदार 21 अंक बनाए। 

 दो साल पहले सर में लगी जानलेवा चोट से उबर कर पिछले सीजन में 'पटना पायरेट्स' की तरफ से खेलते हुए देवांक ने कुल 25 मैचों में 301 अनेक बनाए थे जिसमें 18 सुपर टेन थे, जो एक रिकॉर्ड है। उनका प्रति मैच औसत 12 अंकों का था। तमिल थलाइवा के खिलाफ एक मैच में उन्होंने 25 अंक अर्जित किए थे।

निःसंदेह वे एक शानदार रेडर हैं। लम्बा कद और शारीरिक सौष्ठव उनकी रेड को मारक बनाता है। जबकि उनकी गति और चपलता उसे धार देती है। और उनका संयमित एटीट्यूड उनकी रेड बेहद सफल बनाता है।

पहले ही मैच में शानदार प्रदर्शन दिखता है कि वे इस सीजन भी अपना जलवा दिखाने को तैयार हैं। वे इस साल के सबसे मंहगे भारतीय खिलाड़ी है जिन्हें इस सीजन 2.20 करोड़ मिले हैं। इसी साल फरवरी में उन्होंने दिल्ली में आयोजित 71वीं राष्ट्रीय कबड्डी चैंपियनशिप सेना को जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इस प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी खिलाड़ी घोषित किए गए।

फिलहाल वे प्रो कबड्डी लीग के 12वें संस्करण के नए सेंसेशन हैं। और क्रिकेट के गब्बर की तरह मूछें उमेठना नया स्वैग।

प्रो कबड्डी लीग 2025_1



इसमें कोई शक नहीं है कि आईपीएल के बाद प्रो कबड्डी लीग भारत की दूसरी सबसे सफल लीग है। लीग ने गाँव जवार के इस खेल को ना केवल खूब लोकप्रिय बनाया है, बल्कि उसे ग्लैमरस भी बनाया है। सबसे बड़ी बात खिलाड़ियों के पास अच्छा पैसा भी आया है। इस साल की ऑक्शन के हीरो ईरान के शादलू हैं जिन्हें गुजरात जायंट्स  ने 2.23 करोड़ में खरीदा है,जबकि देवांक दलाल को बंगाल वॉरियर्स ने 2.20 करोड़ में खरीदा है। शादलू को लगातार तीसरे साल दो करोड़ से ज्यादा मिला है। वैसे इस बार रिकॉर्ड 10 खिलाड़ियों को एक करोड़ से अधिक मिले हैं।


इंग्लिश प्रीमियर लीग और प्रो कबड्डी लीग दोनों हॉटस्टार पर लाइव दिखाई जा रही है। अगर इसके आंकड़ों को लोकप्रियता का कोई पैमाना माने, तो इस समय लाइव चल रहे चार प्रीमियर लीग मैच के कुल दर्शक 7 लाख 31हजार हैं जबकि यूपी योद्धा और तेलुगु टाइटंस के बीच प्रो के मैच के दर्शक इस समय 24 लाख हैं।


Tuesday, 1 March 2022

प्रो कबड्डी लीग_06 दबंग दिल्ली धमाल दिल्ली



ये एक नए चैंपियन का उदय था। अब दबंग दिल्ली केसी टीम प्रो कबड्डी सीजन 08 की नई चैंपियन थी। दिल्ली का स्टार खिलाड़ी नवीन एक्सप्रेस के जिस चेहरे से सीजन 07 के फाइनल के बाद आंसू झर रहे थे,उससे आज खुशियां बिखर बिखर जा रही थीं। पिछला टूटा सपना अब हक़ीक़त बन उसका अपना जो था। एक रोमांचक मैच में दिल्ली ने पटना को 37-36 अंकों से हराकर सीजन 08 का चैंपियन बनने का गौरव जो हासिल कर लिया था।


आज सीजन 08 का फाइनल इस सीजन की सबसे सफल और कंसिस्टेंट प्रदर्शन करने वाली दो टीमों पटना पाइरेट्स और दिल्ली दबंग के बीच खेला गया। इन दो टीमों के टाइटल 'पाइरेट्स' और 'दबंग'कहीं से भी सकारात्मक ध्वनि नहीं निकालते हैं। पाइरेट्स मने समुद्री लुटेरे और दबंग मने अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल करने वाला। लेकिन दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने अपने शानदार खेल से बहुत ही सकारात्मकता उत्पन्न की। उन दोनों ही टीमों के खिलाड़ियों ने अपने शानदार खेल से बताया ये शब्द नहीं बल्कि कर्म होता जो स्प्रिट बनाता या प्रदर्शित करता है। उन्होंने अपने खेल से इन शब्दों से भी सकारात्मक ध्वनि उत्पन्न करा दी। उन्होंने बताया कि शक्ति शब्दों में नहीं कर्म में होती है।


22 दिसम्बर से शुरू हुए सीजन 08 में दिल्ली और पटना दोनों टीमों ने शानदार खेल दिखाया और सीधे सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया। पटना 86 अंकों के साथ पहले और उससे 11 अंक कम 75 अंकों के साथ दिल्ली दूसरे स्थान पर रही। सेमीफाइनल में भी पटना ने यूपी योद्धा पर और दिल्ली ने बेंगलुरु बुल्स पर चैंपियन की तरह ही जीत हासिल की थी। 


पटना तीन बार की चैंपियन थी और चौथी बार फाइनल में पहुंची थी। उसके पास राम मेहर जैसे शानदार कोच थे जिन्होंने प्रदीप नरवाल जैसे चैंपियन खिलाड़ी को बनाया था। लेकिन इस बार प्रदीप पटना के साथ नहीं थे जिन्होंने उसे तीन बार चैंपियन बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन प्रदीप की कमी उस टीम को नहीं खली। भले ही उनके पास कोई स्टार इस बार नहीं था। लेकिन इसी कमी को उन्होंने अपनी ताकत बनाया। वे एक यूनिट के रूप में खेले। युवा ईरानी खिलाड़ी शादलू के रूप में शानदार डिफेंडर और सचिन तंवर और गुमान सिंह के रूप में बेहतरीन रेडर ने टीम की अगुवाई की। हालांकि उनके एक बेहतरीन अनुभवी खिलाड़ी मोनू गोयत ज्यादातर समय बेंच पर बैठे रहे। लेकिन हर खिलाड़ी ने जीत में अपना योगदान किया और टीम को लगभग अजेय बना दिया। वो बहुत ही संतुलित टीम थी।


दूसरी और दिल्ली की टीम भी बहुत संतुलित थी। वो सितारों से भरी थी। उसके पास एक्सप्रेस की तेजी वाला नवीन कुमार जैसे शानदार युवा रेडर थे और मंजीत छिल्लर जैसे शानदार डिफेंडर और कैम्पेनर भी थे जिनके प्रो लीग में सबसे ज़्यादा टैकल पॉइंट हैं। नवीन ने शानदार शुरुआत की और लगातार सात मैचों में सुपर 10 बना 28 मैचों में लगातार सुपर 10 बनाने का अद्भुत रिकॉर्ड बनाया। दुर्भाग्य से नवीन को चोट लगी और वो कई मैच नहीं खेल पाए। लेकिन उनकी अनुपस्थिति में एक नए स्टार का उदय हुआ। ये विजय मलिक थे। 



          इस तरह दोनों टीमों के अपने प्लस थे। पटना 86 अंकों के साथ पहले स्थान पर थी और वो सेमीफाइनल में योद्धा टीम को आसानी से हराकर फाइनल में पहुंची थी। सबसे बड़ा प्लस उसके पास तीन बार के चैंपियन होने का अनुभव था। दूसरी और दिल्ली की टीम संघर्षपूर्ण मैच में बुल्स को हराकर फाइनल में ज़रूर पहुंची थी। लेकिन उसके चैंपियन खिलाड़ी नवीन की चोट के बाद वापसी हो चुकी थी और वो फॉर्म में आ चुके थे।सेमीफाइनल में उन्होंने शानदार सुपर 10 से टीम को फाइनल में पहुंचाया था। लेकिन उनका सबसे बड़ा प्लस वो मनोवैज्ञानिक बढ़त थी जो दोनों लीग मैच में पटना टीम को हराकर हासिल की थी।

आज का फाइनल मैच निसंदेह एक बेहतरीन मैच था। जैसा एक फाइनल मैच को होना चाहिए था। एक ऐसा मैच जो धीरे धीरे सींझते हुए चरम रोमांच पर पहुंचा। ये मैच पटना के पक्ष में शुरू होता हुआ बीच में सम पर पहुंचा और बिल्कुल अंत में हल्का सा,केवल एक अंक भर दिल्ली के पक्ष में झूल गया। 

दोनों टीमों ने आज बहुत ही सतर्क शुरुआत की। टॉस पटना ने जीता और नवीन ने पहली रेड में ही बोनस अंक लेकर अपने इरादे जाहिर कर दिए।लेकिन पटना में जल्द ही 4-1 की बढ़त बनाई। उसके  बाद दिल्ली को आल आउट कर 12-08 की।  पहला हाफ पटना के पक्ष में 17-15 पर खत्म हुआ। ये अंकों का अंतर सिर्फ आल आउट बोनस अंकों का था। वरना दोनों के 12-12 रेड और 1-1 टैकल पॉइंट थे। पहले हाफ में दोनों का डिफेंस नहीं चल पाया जो दोनों ही टीमों की बड़ी ताकत थी। 29वें मिनट तक पटना 24-21 से आगे थी। ठीक इसी पॉइंट पर विजय एक सुपर रेड करते हैं और 03 अंकों के साथ स्कोर 24-24 करते हैं। विजय की ये सुपर रेड मैच का टर्निंग पॉइंट था। मैच में पहली बार दिल्ली पटना की बराबरी पर आती है। उसके बाद नवीन रेड में एक अंक जुटाते हैं और पहली बार दिल्ली को 25-24 से बढ़त दिलाते हैं। इस अंक के साथ वे अपना सुपर 10 पूरा करते हैं। नवीन का सुपर 10 पूरा करने का इससे बेहतरीन मौका और क्या हो सकता था। अब पासा पलट चुका था। मैच चरम रोमांच पर पहुंच चुका था। तीन मिनट रहते दिल्ली की बढ़त 35-30 की हो चुकी थी जिसका अंत 37-36 पर दिल्ली के पक्ष में हुआ।


आप जानते हैं बड़े खिलाड़ी वे होते जो टीम के लिए सही समय पर डिलीवर करते हैं। जब खिलाड़ी सही समय पर डिलीवर करते हैं तभी टीम जीतती है। पटना की टीम बहुत हद तक शादलू के शानदार डिफेंस पर निर्भर थी और आज शादलू नहीं चले। लेकिन दिल्ली एक्सप्रेस नवीन ने शानदार खेल दिखाया तथा एक और सुपर 10 लगाकर टीम को विजयी बनाया। उन्होंने कुल 13 अंक जुटाए। लेकिन आज के सुपर हीरो विजय मलिक रहे। उन्होंने आज दो सुपर रेड की और एक टैकल अंक सहित कुल 14 अंक जुटाए।

ये प्रो लीग का एक शानदार सीजन था। निसंदेह इससे कबड्डी का एक शानदार भविष्य झांक रहा है। इस सीजन 12 टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। तमाम मैच टाई हुए। क्लोज मैच हुए। जो टीमें क्वालीफाई राउंड के पहले चरण में पिछड़ रही थीं,उन्होंने दूसरे चरण में शानदार वापसी की। पुनेरी पलटन और गुजरात जायंट जैसी टीमों ने शुरुआती असफलता से पार पाते हुए प्ले ऑफ के लिए क्वालीफाई किया तो पिछला चैंपियन बेंगाल वारियर्स प्ले ऑफ के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर सका।

हम जानते हैं कि एक घटना व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। ऐसा ही कुछ खेलों के साथ भी हो सकता है। अब देखिए ना 1983 विश्व कप क्रिकेट में भारत की जीत भारत में क्रिकेट के भाग्य को बदल देती है। इस जीत से बड़े शहरों तक सीमित खेल गली मोहल्लों का खेल बनकर धर्म सरीखा हो जाता है। भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी कृत्रिम सतह पर खेले जाने के एक निर्णय भर से भारतीय हॉकी ही नहीं बल्कि एशियाई हॉकी ही पतन के गर्त में चली जाती है।          

 ठीक ऐसे ही एक निर्णय एक और खेल के चरित्र को बदल देता है। ये 2014 में कबड्डी के लिए एक लीग शुरू करने का निर्णय था। ये कबड्डी के भाग्य को बदल देता है। भारत मे अनेक खेलों में लीग शुरू हुई। लेकिन ये आईपीएल के बाद सबसे लोकप्रिय लीग बन गयी। पहले सीजन ही इसे 45 मिलियन दर्शक मिले जो बढ़कर 55 मिलियन से ज़्यादा पहुंच चुके हैं।

लीग ने इसे केवल लोकप्रिय ही नहीं बनाया। बल्कि इसका चरित्र ही बदल दिया। किसी समय का ये गवईं खेल अब इलीट खेल के रूप में बदल गया है। किसी समय मिट्टी पर नंगे पैर खेले जाने वाला खेल अब शानदार मैट पर ब्रांडेड जूते पहनकर खेला जाने वाला खेल बन गया है। इसमें अब पैसा और ग्लैमर दोनों का समावेश हो गया है। अब इसमें खिलाड़ी करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। प्रदीप नरवाल को इस बार यूपी योद्धा ने डेढ़ करोड़ से भी ज़्यादा रुपये दिए। उसने अब अपने खिलाड़ियों के करोड़पति बनने के सपने को हक़ीक़त में बदल दिया है। इसके खिलाड़ी क्रिकेट या फिल्मी सितारों की तरह स्टारडम का स्टेटस पा रहे हैं। अब इसके खिलाड़ी शानदार हेयर और बेयर्ड कट में दिखाई देने लगे हैं। अब कबड्डी में भी राहुल चौधरी, सिद्धार्थ देसाई, प्रदीप नरवाल, नवीन कुमार,पवन सेहरावत,शादलू और मनिंदर जैसे आइडल खिलाड़ी मौजूद हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश,दिल्ली और हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में जगह जगह खुल रही कबड्डी की अकादमियां इस बात की ताईद करती हैं कि खेल का भविष्य उज्जवल है।

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खेल को मिली लोकप्रियता मुबारक हो

और 

लीग को नया चैंपियन भी मुबारक ।


प्रो कबड्डी लीग_05

 


कल प्रो कबड्डी सीजन आठ के सेमीफाइनल मैच खेले गए। दोनों मैच अपनी प्रकृति में भिन्न थे पर समान परिणाम वाले। दोनों मैचों में बेहतरीन टीम ने जीत हासिल की।

पहला सेमीफाइनल पटना पाइरेट्स और यूपी योद्धा के बीच था। पाइरेट्स ने योद्धा को लगभग एकतरफा मुकाबले में 38-27 अंकों से हरा दिया। ये मुकाबला स्टार खिलाड़ी बनाम टीम का था। योद्धा में प्रदीप नरवाल,सुरेंद्र गिल और आशु अंग जैसे स्टार थे तो दूसरी तरफ पाइरेट्स में कोई स्टार नहीं है। प्रदीप नरवाल ने पाइरेट्स को तीन बार चैंपियन बनाया था।लेकिन इस बार वे योद्धा के लिए खेल रहे थे। पाइरेट्स के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं था। लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। वे एक यूनिट के रूप में खेल रहे थे। और उन्होंने अपने खेल से दिखाया कि टीम गेम में एक यूनिट के रूप में टीम किसी भी स्टार से बड़ी होती है। पूरे सीजन पाइरेट्स ने शानदार  प्रदर्शन किया। 


दरअसल इस मैच में चौथा टाइटल दांव पर था। या तो पाइरेट्स को चौथे टाइटल का दावेदार बनना था या फिर पाइरेट्स के पूर्व स्टार  प्रदीप नरवाल को। जीत पटना पाइरेट्स की हुई। कल पाइरेट्स ने शुरू में में ही 4-0 की बढ़त ले ली। उसके बाद योद्धा को आल आउट कर I1-4 की बढ़त ले ली। आधे समय तक पाइरेट्स की बढ़त 23 -09 की हो चुकी थी। 

दूसरे हाफ में भी स्थिति वैसी ही रही। पाइरेट्स ने तीन अंक और जुटाए और बढ़त 17 अंकों की कर ली। इसके बाद योद्धा ने कुछ संघर्ष करने की कोशिश की। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। दरअसल पटना की टीम को प्रदीप का शानदार खेल ही हरा सकता था। वैसा खेल जैसा प्रदीप ने पुनेरी पलटन के खिलाफ दिखाया था। लेकिन प्रदीप एक बार फिर खराब खेले और केवल 04 अंक जुटा पाए। दरअसल प्रदीप का खराब खेलना योद्धा का हार जाना था।  पाइरेट्स की और से युवा खिलाड़ी गुमान सिंह ने 08  रेड अंक और पहला सीजन खेल रहे ईरानी खिलाड़ी मोहम्मद रेज़ा ने 06 टैकल अंक हासिल किए। ये दोनों पटना पाइरेट्स के  और लीग के नए उभरते सितारे हैं। दरअसल बड़े सितारों का डूबना नए सितारों के उदय का रास्ता बनाता है।


दूसरा सेमीफाइनल दिल्ली दबंग और बेंगलुरु बुल्स के बीच था। पहले सेमीफाइनल के उलट ये एक संघर्षपूर्ण मैच था। ये दो सितारों की भिड़ंत का,उनके कौशल के द्वंद का मैच था। एक तरफ इस सीजन के सबसे अधिक रेड अंक जुटाने वाले बुल्स के पवन सहरावत थे तो दूसरी और शानदार युवा रेडर नवीन कुमार थे। दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया। नवीन ने 14 रेड अंक जुटाए तो पवन ने 18 रेड अंक लिए। अंतर केवल साथियों के सहयोग  का था। पवन टीम के लिए अकेले संघर्ष कर रहे थे। बुल्स के जिस डिफेंस ने एलिमिनेटर मैच में गुजरात जायंट को बांध कर रख दिया था,उसके इस मैच में खुद हाथ बंध गए थे। दूसरी तरफ नवीन को साथियों का साथ मिला। यही कारण था दिल्ली की दबंगई ने बेकाबू बुल्स को काबू में कर लिया और मैच 40-35 अंकों से जीत लिया।

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अब शुक्रवार को पटना पाइरेट्स अपने चौथे खिताब के लिए खेलेगी तो दिल्ली दबंग का ये बैक टू बैक लगातार दूसरा फाइनल होगा। नवीन का पिछली बार बेंगाल वारियर्स से हार के बाद ज़ार ज़ार रोना किसे भूला होगा। उनकी आंखों से पानी इस बार भी बहना लाज़मी है। देखना बस इतना है कि इन आंसुओं में मुस्कुराहट घुली होगी या उदासी।

और हां हिंदी अखबारों ने फिर निराश किया। 

Tuesday, 22 February 2022

प्रो कबड्डी लीग 04

 

                कल प्रो कबड्डी लीग सीजन आठ के प्लेऑफ एलिमिनेशन के दो मैच खेले गए। बेंगलुरु बुल्स और यूपी योद्धा की जीत एकतरफा रही। ये दो स्टार- पवन सहरावत और प्रदीप नरवाल के मैच थे। बड़े खिलाड़ी वही हैं जो बड़े अवसरों पर डिलीवर करें। ऑफ कलर प्रदीप ने सही समय पर डिलीवर लिया। पवन तो शानदार फॉर्म में हैं ही।अब ये सुकून है कि इन दोनों का जादू देखने का अवसर अभी भी आपके पास है।













               पुनेरी पलटन और गुजरात जाइन्ट्स खराब शुरुआत के बाद भी प्ले ऑफ में पहुंचने में सफल रहे। लेकिन हरियाणा स्टील्र्स और पिछली विजेता बंगाल वारियर्स का प्लेऑफ में ना पहुंचना बताता है लीग के प्रारंभिक मुकाबले वाकई कठिन और संघर्षपूर्ण थे और ये भी कि लीग का स्तर काफी ऊंचा है।

००००

        लेकिन दुख इस बात का है कि किसी हिंदी दैनिक में खेल ख़बरों में कबड्डी या वॉलीबॉल लीग की छोटी बड़ी कोई खबर ही नहीं है। कमाल की प्राथमिकताएं हैं अखबार और मीडिया की। ये वही मीडिया है जिसने आईपीएल की खरीद फरोख्त की खबरें भी शानदार तरीके से शाया की थीं।

Sunday, 16 January 2022

प्रो कबड्डी लीग 03

 



 कबड्डी मैच का 'सुपर 10'क्रिकेट मैच का शतक है। 'सुपर 10' मने एक मैच में 10 रेड पॉइंट बनाना। टेस्ट क्रिकेट में वेस्टइंडीज के एवर्टन वीक्स ने लगातार 05 शतक (1948-49) और ओडीआई में कुमार संगकारा ने  04 शतक (2015) लगाए हैं। लेकिन नवीन कुमार ने आज जब यूपी योद्धा के खिलाफ जब 18 रेड अंक बनाये तो ये उनका लगातार 28 वां 'सुपर 10' था।

वे 'नवीन एक्सप्रेस'यूं ही नहीं कहलाते। वे सबसे कम उम्र और सबसे कम 46 मैचों में 500 रेड पॉइंट अर्जित करने वाले खिलाड़ी बने। इस सीजन वे अब तक सबसे ज़्यादा रेड पॉइंट बनाने वाले खिलाड़ी हैं। उनके 07 मैचों में 123 रेड अंक है।

2018 में सीजन 6 से शुरू करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे जिनका जन्म सन 2000 में हुआ था। 6.6लाख की फीस से शुरू करने वाले इस खिलाड़ी को इस बार दिल्ली दबंग ने 90 लाख की फीस के साथ रिटेन किया है।

सीजन 7 में 23 मैचों में से 22 में 'सुपर 10'लगाने वाले इस खिलाड़ी ने कुल 301 अंक अर्जित कर टीम को फाइनल में पहुंचाया। पर फाइनल में 18 अंकों के शानदार प्रदर्शन के बाद भी टीम को नही जीता पाए थे। हार के बाद जार जार रोने की उनकी मासूम तस्वीरें सीजन 7 की सबसे आइकोनिक तस्वीरें थी। शायद वे वो हार भुला नहीं पाए और जब 29 दिसम्बर 2021 को एक बार फिर सीजन 08 में बंगाल वारियर्स के सामने थे तो इमोशन्स बहुत हावी थे। इस मैच में उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर ना केवल 24 रेड पॉइंट बनाए बल्कि वारियर्स को 52-35 से लगभग रौंद ही दिया।


'रनिंग टच'सिग्नेचर वाले इस खिलाड़ी को रेड करते देखना किसी ट्रीट से कम नहीं है। दरअसल वे 'छल कबड्डी' को 'एक्सप्रेस कबड्डी'में बदलने वाले खिलाड़ी हैं और सीजन 8 के सबसे शानदार खिलाड़ी भी।




प्रो कबड्डी लीग 02




            डुबकियां आपको सिर्फ डुबाती ही नहीं है बल्कि शोहरत की बलंदियों पर भी पहुंचाती हैं। और आपके ऊपर पैसों की बरसात भी कराती है। आखिर 'डुबकी किंग' प्रदीप नरवाल को 'यू पी योद्धा' टीम ने एक करोड़ पैंसठ लाख में यूहीं नहीं खरीदा है। प्रदीप जब विपक्षी डिफेंडर्स की मजबूत चेन के नीचे से 'डुबकी' लगाकर अपने पाले में पहुंचते हैं तो विपक्षी खेमा हतप्रभ रह जाता है।

००

प्रदीप नरवाल प्रो कबड्डी लीग के सबसे सफल रेडर हैं और 1200 रेडर अंक बटोरने वाले पहले खिलाड़ी भी। तमिल थलाइवा के खिलाफ उन्होंने अपना  12सौवां अंक लिया। फिलहाल उनके 1256 रेड अंक हैं। उनके सर्वाधिक 61 सुपर टेन भी हैं। वे बाकी खिलाड़ियों से मीलों आगे हैं। दूसरे नंबर पर राहुल चौधरी हैं जो एक हज़ार के आंकड़े पर भी नहीं पहुंचे हैं।

००

हाँ,सीजन 08 में प्रदीप अभी पूरी तरह से फॉर्म में नहीं आए हैं। और ये भी कि इस बार नवीन गोयत और पवन सेहरावत के सामने 'ऑफ कलर' से  दीख रहे हैं। लेकिन धीरे धीरे प्रदीप रंग में आ रहे हैं।

तो आप भी डुबकी लगाइए कबड्डी की रिकॉर्ड डुबकियों

 में।

००००००

और हाँ याद रखिए रिकॉर्ड केवल क्रिकेट में  ही नहीं बनते और खेलों में भी बनते हैं। कबड्डी के रिकॉर्ड भी रोचक होते हैं।




प्रो कबड्डी लीग 01



 जिस तरह से क्रिकेट मुख्यतः बल्लेबाजों का खेल है,वैसे ही कबड्डी रेडर्स का खेल है। अनूप कुमार से राहुल चौधरी तक रेडर्स ही कबड्डी का चेहरा हैं। प्रो कबड्डी सीजन_8 में नवीन कुमार,पवन सेहरावत, अर्जुन देसवाल, सिद्धार्थ देसाई,मनिंदर सिंह,वी अजीथ कुमार,विकास कंडोला और अभिषेक सिंह रोमांच के पर्याय बन गए हैं।

क्रिकेट प्रेमी कबड्डी को भी फॉलो कर सकते हैं।

नागोया एशियाड:उल्लेखनीय प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कोई भी एक जीत,कोई भी एक पदक जीत लेना मायने रखता है। ये उस टीम या उस एथलीट की योग्यता,प्रतिभा और उसके कठिन पर...