हंगरी के बुडापेस्ट में आयोजित विश्व एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप के दौरान पुरुषों की जैवलिन थ्रो में जीतकर टर्की एयरलाइंस से घर वापसी करते समय श्रीलंका के एथलीट रूमेश थरंगा पथिरागे के जैवलिन टूट जाने की ख़बर खूब चर्चा में है।
इससे याद आया कि दक्षिण पूर्वी एशियाई देश एथलेटिक्स में कहां स्टैंड करते हैं। कुछ साल पहले तक ये देश विश्व एथलेटिक्स परिदृश्य पर कहीं नहीं थे। यदा कदा अपनी उपस्थिति दर्ज़ करा पाते थे। लेकिन एक इवेंट और तीन एथलीटों ने सारा परिदृश्य बदल दिया। ये इवेंट हैं - जैवलिन थ्रो। और एथलीट हैं - नीरज चोपड़ा,अरशद नदीम और रूमेश थरंगा पथिरागे।
सबसे पहले नीरज चोपड़ा आए। वे 2016 में 86.48 मी नए रिकॉर्ड के साथ अंडर ट्वेंटी विश्व चैंपियन बने। 2020 के टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड और 2024 के पेरिस ओलंपिक में सिल्वर जीता। 2023 बुडापेस्ट में विश्व चैंपियन बने और 2022 ज्यूरिख में डायमंड लीग का स्वर्ण जीता। 90 मीटर उनका जिंक्स था जिसे अंततः 2025 में दोहा डायमंड लीग में पार किया और 90.23 मी की अपनी बेस्ट थ्रो की।
उसके बाद अरशद नदीम आए पाकिस्तान से। उन्होंने 2023 की विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर जीता। पेरिस में रिकॉर्ड 92.97 मी के साथ ओलंपिक चैंपियन बने। उनकी ये उपलब्धि इस मायने में उल्लेखनीय है कि उन्हें नीरज चोपड़ा की तरह ना तो उच्च स्तरीय प्रशिक्षण हासिल था और ना ही उपकरण। यहां तक कि वे पेरिस ओलंपिक में क्राउड फंडिंग के जरिए पहुंच सके।
और फिर आए रूमेश थरंगा पथिरागे श्रीलंका से। वे क्रिकेट छोड़कर एथलेटिक्स में आए। वे पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब उभरे जब अगस्त 2025 में भुवनेश्वर में आयोजित 2025 इंडियन ओपन में 86.50 मीटर के थ्रो के साथ नया श्रीलंकाई राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। फिर इस साल ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड जीता। बुडापेस्ट में विश्व अल्टीमेट चैंपियनशिप जीती और ब्रुसेल्स में आयोजित डायमंड लीग जीती। उनका सर्वश्रेष्ठ 92.62 मी है और वे तीनों में सबसे ज़्यादा कंसिस्टेंट हैं। उन्होंने इस साल ही तीन नब्बे प्लस थ्रो की हैं। वे तीनों में सबसे प्रतिभाशाली है।
फिलहाल तो नीरज,नदीम और नए चैंपियन रूमेश विश्व जैवलिन परिदृश्य पर राज कर रहे हैं।
बस सवाल इतना कि कब तक।

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