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Tuesday, 17 January 2023

स्टीफन डगलस केर:'पारस' प्रशिक्षक





स्टीफन डगलस केर:'पारस' प्रशिक्षक


 एक होता है पारस पत्थर। जिस चीज को छू ले सोने की बन जाए। बेशकीमती हो जाए। अनमोल हो जाए। कुछ लोग भी पारस होते हैं। वे चीजों को छू भर लें दीप्त होने लगती हैं। सोने की माफिक चमकने लगती हैं। स्टीफेन डगलस केर ऐसे ही प्रशिक्षक हैं। पारस हैं। उन्होंने गोल्डन स्टेट वारियर्स के खिलाड़ियों को छुआ,सितारे बनकर चमकने लगे। गोल्डन स्टेट वारियर्स टीम को छुआ,सफलता की असाधारण चमक से सबको चकाचौंध दिया।

बीते शुक्रवार 13 जनवरी की रात एनबीए के 2022-23 के रेगुलर सीजन में वेस्टर्न कांफ्रेंस में सान एंटोनियो स्पर्स की टीम अपने अरीना अलामो डोम में गोल्डन स्टेट वारियर्स की टीम को होस्ट कर रही थी। इस सीजन पिछली चैंपियन गोल्डन स्टेट वारियर्स की टीम पूरी तरह से फॉर्म में नहीं है और उसकी अच्छी शुरुआत नहीं रही। लेकिन इस मैच में वारियर्स ने शानदार खेल दिखाया और उसने मेजबान स्पर्स को 144-113 से हरा दिया। इस मैच को देखने के लिए रिकॉर्ड संख्या में दर्शक उपस्थित थे। कुल 68,323 दर्शक।

दरअसल एक कोच के रूप में स्टीव केर की रेगुलर सीजन में ये 450वीं जीत थी। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए ऐसी ही रिकॉर्ड ब्रेकिंग दर्शकों की उपस्थिति और शानदार जीत की दरकार थी। निसंदेह स्टीव केर एनबीए के महानतम प्रशिक्षकों में से एक हैं।

एनबीए के पिछले सीजन 2021-22 में स्टेट वारियर्स की टीम बोस्टन सेल्टिक्स को 4-2 से हराकर पिछले आठ सालों में चौथी बार और अपने फ्रेंचाइजी इतिहास की सातवीं चैंपियनशिप जीत रही थी। आठ सालों में चौथी बार। स्टीव ने गोल्डन स्टेट को छू जो लिया था। वे उसके कोच जो बन गए थे।

स्टीव 2014-15 के सीजन में स्टेट वारियर्स के पहली बार हेड कोच बने और पहली बार में ही उसको चैंपियन बना दिया। ऐसा करने वाले एनबीए के 75 वर्षों के इतिहास में केवल सातवें प्रशिक्षक थे।उल्लेखनीय है फाइनल में वे लेब्रोन जेम्स कैवेलियर्स को हरा कर ये जीत हासिल कर रहे थे।डब नेशन 40 साल बाद चैंपियन बन रही थी। इतना ही नहीं उन्होंने डब नेशन को लगातार 05 साल तक एनबीए के फाइनल में पहुंचाया। 2014 के बाद 2017,2018 और 2022 में स्टेट वारियर्स को चैंपियनशिप दिलाई।

सच तो ये है 2014 के सीजन से पहले डब नेशन एक बहुत ही औसत टीम थी। लेकिन इस सीजन उस टीम के हेड कोच बनते ही उन्होंने टीम को औसत टीम से चैंपियन टीम में रूपांतरित कर दिया। 

बिला शक वे एक महानतम प्रशिक्षकों की श्रेणी में शुमार हो चुके हैं। ये इस तथ्य से भी जाना जा सकता है कि 2022 में एनबीए की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर एनबीए ने सार्वकालिक 15 सर्वश्रेष्ठ कोचों की एक सूची जारी की जिसमें स्टीव केर भी एक थे। और वे एकमात्र वर्तमान सक्रिय कोच थे। इससे पहले 1916 के सीजन में उन्हें एनबीए के सर्वश्रेष्ठ कोच का खिताब मिल चुका था।

इतना ही नहीं 2022 में जब एक कोच के रूप में चौथी रिंग प्राप्त कर रहे थे तो कुल मिलाकर वे अपनी नवीं रिंग प्राप्त कर रहे थे। पांच खिलाड़ी के रूप में और चार कोच के रूप में। वे एनबीए के एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्होंने कोच और खिलाड़ी के रूप में चार चार रिंग (खिताब ) जीती हैं।

आखिर एक प्रशिक्षक के रूप में उनकी सफलता का राज क्या था। दरअसल वे एक उम्दा खिलाड़ी भी थे जो तमाम बेहतरीन प्रशिक्षकों के अधीन और विशेष रूप से महानतम प्रशिक्षक फिल जैक्सन के अधीन खेले थे। उनसे मिले सारे अनुभवों के आधार पर डब नेशन को प्रशिक्षित किया और एक उम्दा टीम में परिवर्तित कर दिया।

एक प्रशिक्षक के रूप में उनकी रणनीति का प्रमुख औज़ार था 'त्रिकोणीय आक्रामक तकनीक'।
पहले शिकागो बुल्स और फिर सान एंटोनियो स्पर्स से खेलते हुए जो ट्राई एंगुलर ऑफेंसिव  तकनीक (त्रिकोणीय आक्रामण शैली) से वे रूबरू हुए, उसका परिवर्धित  रूप स्टेट वारियर्स की टीम को दिया और उसे सर्वश्रेष्ठ टीम के रूप में परिवर्तित कर दिया।

त्रिकोणीय आक्रमण तकनीक बास्केटबॉल की एक ऐसी तकनीक या खेल प्रविधि है जिसमें कोई टीम एक विंग से आक्रामक मूव बनाती है जिसमें पास,ड्रिबलिंग और खिलाड़ियों के मूवमेंट के बिंदुओं को जोड़ेंगे तो वे अनेकानेक त्रिकोण बनाएंगे। और इस तरह से आक्रामक टीम बास्केट करने और अंक अर्जित करने के आसान मौकों की निर्मिति करती है। इस तकनीक में जिस विंग में खेल होता है(स्ट्रांग विंग) उसमें तीन खिलाड़ी होते हैं और जिस विंग में खेल नहीं होता है (वीक विंग),उसमें दो खिलाड़ी। 

ये एक ऐसा तरल कॉम्बिनेशन है जिसमें टीम के पांचों खिलाड़ी शामिल होते हैं और इसमें कोई भी खिलाड़ी किसी भी स्थान पर खेल सकता है और एक दूसरे की पोजीशन ले सकता है। इसमें खिलाड़ी की आई क्यू मायने रखती है और दो खिलाड़ियों के बीच का स्पेस भी। ये एक कठिन लेकिन बहुत ही कारगर प्रविधि है जिससे कई टीमें चैंपियन बनी हैं।

इस आक्रमण शैली या प्रविधि को इज़ाद करने वाले दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के सैम बैरी माने जाते हैं जिसे आगे चलकर कंसास राज्य के मुख्य प्रशिक्षक टेक्स विंटर ने आगे बढ़ाया जो बैरी के अधीन खेले थे। बाद में शिकागो बुल्स के हेड कोच और दुनिया के महानतम प्रशिक्षकों में से एक फिल जैक्सन ने इसे अपनाया और इस तकनीक को प्रसिद्ध कर दिया।

दरअसल 1985 में टेक्स विंटर शिकागो बुल्स में सहायक प्रशिक्षक बन गए और मुख्य कोच फिल जैक्सन के साथ मिलकर त्रिकोणीय आक्रमण तकनीक को लागू किया। परिणाम था कुल 11 एनबीए  चैंपियनशिप। 06 शिकागो बुल्स के साथ और 05 लॉस एंजिलिस लेकर्स के साथ। 

यही वो समय था जब स्टीव केर एक खिलाड़ी के रूप में पहले बुल्स और फिर स्पर्स के साथ कैरियर बना रहे थे और उस तकनीक से रूबरू भी हो रहे थे जिस का प्रयोग करके उन्हें आगे खुद की प्रशिक्षित टीम को चैंपियन बनाना था।

वे भले ही एनबीए के महानतम खिलाड़ियों में से ना रहे हों लेकिन उम्दा खिलाड़ी अवश्य रहे और एक खिलाड़ी के रूप में कुल पांच रिंग जीती। तीन बुल्स के साथ और दो स्पर्स के साथ। 


उन्होंने खिलाड़ी के रूप में अपने कॅरियर की शुरुआत एरिज़ोना वाइल्डकैट्स के साथ किया। उसके बाद 1986 में वे फीबा विश्व कप जीतने वाली अमेरिकी टीम के सदस्य थे। इस उपलब्धि ने उनके लिए प्रोफेशनल बनने का रास्ता खोल दिया। उन्हें 1988 में सबसे पहले फीनिक्स संस ने ड्राफ्ट किया। लेकिन 26 मैचों के बाद वे क्लीवलैंड कैवेलियर्स को ट्रेड कर दिए गए। उनका खिलाड़ी के रूप में स्वर्णिम काल 1993 में उस समय शुरू हुआ जब वे शिकागो बुल्स में शामिल हुए। उस समय उस टीम में माइकेल जॉर्डन थे और कोच थे फिल जैक्सन। बुल्स के साथ उन्होंने 1996,1997 और 1998 में तीन रिंग जीती। उसके बाद वे सान एंटोनियो स्पर्स के साथ जुड़े और 1999 में चौथी रिंग जीती। उन्होंने खिलाड़ी के रूप में अपनी पांचवी रिंग 2003 में एक बार फिर स्पर्स के साथ जीती। 

जिस समय 2003 में 15 सीजन के बाद उन्होंने खिलाड़ी के रूप में अपने कॅरियर का समापन किया उस समय वे एक हज़ार से ज़्यादा मैच खेल चुके थे। हालांकि उसमें से केवल 30 मैचों में उन्होंने फर्स्ट फाइव से शुरुआत की। वे थ्री पॉइंटर के  चैंपियन थे। 1997 में उन्होंने थ्री पॉइंटर चैंपियनशिप जीती। उनका थ्री पॉइंटर का कॅरियर औसत 45.4 है जो एनबीए का अब तक का सर्वश्रेष्ठ औसत है। बाद में उनके प्रशिक्षण में स्टीफेन करी ने थ्री पॉइंटर में विशेषज्ञता हासिल की।


स्टीफेन डगलस केर(स्टीव केर) का जन्म लेबनान की राजधानी में हुआ था। 1984 में जब उनके पिता मैल्कम एच केर बेरूत की अमेरिकन यूनिवर्सिटी के  प्रेसिडेंट थे,चरमपंथी गुट ने उनकी हत्या कर दी। उस समय स्टीव केर 18 साल के थे। इस घटना ने उनकी जीवन और उनकी सोच पर गहरा प्रभाव डाला। एक साक्षात्कार में वे कह रहे थे 'पिता की हत्या से पहले मेरा जीवन अभेद्य था। बुरी घटनाएं दूसरों के जीवन मे घटित होती हैं। मैं सोचता था मैं ऐसी घटनाओं से परे हूँ और मेरा परिवार भी।' इस घटना ने उन्हें और अधिक मानवीय बना दिया और दूसरों के दुःख दर्द के प्रति अतिरिक्त संवेदनशील भी।

इसीलिए वे अमेरिकी गन कल्चर के घोर विरोधी बने। उन्होंने अमेरिका में हुई हर गोलीबारी पर चिंता जाहिर करते और ऐसी हर घटना पर भावुक और विचलित हो जाते। अमेरिकी संसद में 'गन नियंत्रण विधेयक' पर रिपब्लिकंस के उसे रोकने के प्रयास को अमेरिकी जनता को बंधक बनाने का प्रयास कहा। उन्होंने 'ब्लैक लाइव्स मैटर्स'का भी समर्थन किया और शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन भी। उन्होंने हमेशा'श्वेत सर्वोच्चता'का विरोध किया।

ये सही है कि महान खिलाड़ी बिल रसेल की तरह एक खिलाड़ी के रूप में वे  11 रिंग नहीं जीत सके और ना ही महानतम कोच फिल जैक्सन की तरह एक कोच के रूप में 11 रिंग जीती हैं,पर एक खिलाड़ी और कोच के रूप में संयुक्त रूप से अब तक 09 रिंग जीत चुके हैं और इस रूप में वे औरों से बहुत आगे हैं और अलग भी। कोई उनके आस पास भी नहीं टिकता। फिर उनका संवेदनशील व्यक्तित्व उन्हें असाधारण की श्रेणी में ला खड़ा करता है।
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बिला शक वे 'पारस' है। एक 'पारस प्रशिक्षक'।जिन्होंने गोल्डन स्टेट वरियर्स की टीम को छुआ और उसे सोने की टीम में बदल दिया। वे अभी 57 वर्ष के हैं और एक कोच के रूप में एक लंबा समय उनके पास है। आगे आगे देखिए होता है क्या।


Friday, 23 July 2021

बक्स इन सिक्स





इतिहास अपने को दोहराता है'। ये वाक्य हम बार बार दोहराते जाते हैं। और खेलों की बात करते हुए तो ऐसा निश्चित तौर पर होना ही होता है। 2018 में रूस में विश्व कप फुटबॉल फाइनल्स खेला जा रहा था। फ्रांस की टीम में 19 साल का एक अफ्रीका मूल का खिलाड़ी था एम बापे। लीग मैच में पेरू के विरुद्ध उसने फाइनल्स का अपना पहला गोल किया तो विश्व कप में फ्रांस की तरफ से गोल करने वाला सबसे युवा खिलाड़ी था। उसके बाद क्वार्टर फाइनल मेस्सी की अर्जेंटीना के विरुद्ध दो गोल किए और उसे 4-3 से हराकर विश्व कप से बाहर कर दिया। उसे 'मैन ऑफ द मैच' घोषित किया गया। फिर फाइनल में  25 मीटर से एक शानदार गोल किया। इस प्रकार अपने शानदार प्रदर्शन से उसने फ्रांस को विजेता ही नहीं बनाया बल्कि वो विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ युवा फुटबॉलर भी चुना गया। 

2021 में यूरोप से सैकड़ों मील दूर अमेरिका में एनबीए में मिलवॉकी बक्स की टीम में अफ्रीकी मूल का युवा ग्रीक खिलाड़ी गिनिस अंतेतोकोम्पो था। वो मैच दर मैच शानदार खेल रहा था और अपनी टीम को एनबीए फाइनल्स में पहुंचा रहा था।

फाइनल में मिलवॉकी बक्स का मुकाबला फीनिक्स सन्स से था। बेस्ट ऑफ सेवन सीरिज में सन्स पहले दो मैच जीत चुकी थी। और लग रहा था कि 53 सालों के इतिहास में अपना पहला एनबीए खिताब बस जीतने ही जा रही है। लेकिन नियति और अंतेतोकोम्पो को ये मंज़ूर नहीं था। उसने अगले तीन मैचों में शानदार खेल का मुज़ाहिरा किया और अब बक्स 3-2 आगे थी।

और तब पिछले बुधवार की रात को सीरीज के छठवें मैच में मिलवॉकी बक्स'फिसर्व फोरम'एरीना में फीनिक्स सन्स को होस्ट कर रही थी। यहां पर मानो अंतेतोकोम्पो ने  तय कर लिया था कि सातवें मैच में वापस फीनिक्स नहीं जाना है और फाइनल्स यहीं खत्म कर देना है। और यही हुआ भी। मैच की ज़ब अंतिम व्हिसिल बजी तो स्कोर  बक्स के पक्ष में 105-98 था। बक्स की टीम फाइनल्स 4-2 से जीतकर 50 सालों के लंबे अंतराल के बाद दूसरी बार चैंपियन बन गयी थी और अंतेतोकोम्पो फाइनल्स के एमवीपी।

इस मैच में अंतेतोकोम्पो ने 50 अंक बनाए। 14 रीबाउंड्स लिए और 05 शॉट्स ब्लॉक किए। ये एनबीए फाइनल्स के इतिहास के सबसे शानदार प्रदर्शनों में से एक था। फाइनल्स में उसका औसत प्रति गेम 35.2अंक,13.2रीबाउंड्स और 5.0असिस्ट का था। वो एनबीए इतिहास में केवल तीसरा खिलाड़ी है और सबसे युवा भी जिसे  एमवीपी, फाइनल्स एमवीपी और बेस्ट डिफेंडर ऑफ द ईयर' तीनों खिताब प्राप्त हुए हैं। वो एक आल राउंड खिलाड़ी है। जो एक तरफ शानदार शूटिंग करता है और रिकॉर्ड अंक अर्जित करता है तो दूसरी तरफ शानदार डिफेंस भी करता है और विपक्षी टीम के सामने किसी चट्टान की तरह अड़ा रहता है।

 लेकिन मिलवॉकी बक्स की इस जीत में एक और खिलाड़ी ने योगदान किया। वो था ख्रिस मिडलटन। वे दोनों एक साथ बक्स में 2013 में शामिल हुए थे। पहले अंतेतोकोम्पो ड्राफ्ट हुए और उसके लगभग 34 दिन बाद टीम में अदला बदली के माध्यम से पिस्टन से बक्स में आए।

 इस साल का ईस्टर्न कांफेरेंस का फाइनल बक्स और अटलांटा हॉक्स के बीच था। सीरीज 2-2 से बराबरी के बाद पांचवे गेम में अंतेतोकोम्पो को चोट लगी तो ये मिडलटन ही था जिसने ट्रू हॉलिडे के साथ मिलकर गेम 5 और 6 में बक्स को जीत दिलाई और एनबीए के फाइनल में पहुंचाया। बात यहीं खत्म नहीं होती। उसके बाद एनबीए फाइनल में  2-0 से पिछड़ने के बाद तीसरे गेम में अंतेतोकोम्पो ने 41 अंक बना कर अपनी टीम बक्स को जीत दिलाई तो चौथे महत्वपूर्ण गेम में मिडलटन ने 40 अंक बनाकर जीत दिलाई। ये फाइनल्स में केवल तीसरी जोड़ी थी जिसने 40+अंक बनाए। जीत के बाद उनके साथी ट्रू हॉलिडे ने कहा 'मिडलटन हमारा दिल है और अंतेतोकोम्पो आत्मा। इनकी वजह से ही हम आज यहां हैं।'


दरअसल ये जोड़ी अपनी टीम के लिए 1971 में करीम अब्दुल जब्बार और ऑस्कर रोबर्टसन द्वारा किए गए कारनामे को दोहरा रही थी। 1971 में करीम-रोबर्टसन की जोड़ी ने अपनी टीम को एनबीए में शामिल होने के तीन साल के भीतर ही चैंपियन बना दिया था। इसके बाद दोबारा चैंपियन बनने के लिए मिलवॉकी को आधी सदी तक इंतज़ार करना पड़ा।

इस बार की फाइनल की दोनों टीमों के बीच बहुत कुछ साझा था। दोनों ही टीमें 1968 में एनबीए में एक्सपेंशन टीम के तौर पर शामिल हुए थीं। दोनों ही तीसरा फाइनल खेल रही थीं।  इससे पहले फीनिक्स 1976 और 1993 फाइनल में पहुंची थी। जबकि बक्स 1971 और 1974 में। अंतर बस इतना था कि बक्स एक बार 1971 में चैंपियन बन चुकी थी और फीनिक्स सन्स को इसका अभी भी इंतज़ार था और अभी भी है। हालांकि फीनिक्स इस बार बेहतर टीम थी और बेहतर प्रदर्शन के साथ एनबीए के फाइनल में पहुंची थी,पर किस्मत और अंतेतोकोम्पो बक्स के साथ थे।

'इट्स कमिंग होम'गीत आपको याद होगा। ये गीत इंग्लिश फुटबॉल का एंथम बन गया है। हर बड़ी प्रतियोगिता में इंग्लिश टीम की जीत की आशा में इस गीत को उसके समर्थक गाते हैं। ठीक इसी तरह से 'बक्स इन सिक्स' बक्स समर्थकों के लिए सबसे पसंदीदा फ्रेज बन गया,जो इस बार पूरे फाइनल्स के दौरान एरीना के भीतर और एरीना के बाहर गूंजता रहा। और जब छठे गेम में बक्स फीनिक्स को हरा कर दूसरी बार चैंपियन बन रहे थे तो इस फ्रेज से पूरा मिलवॉकी शहर गुंजायमान हो रहा था।

इंग्लिश फुटबॉल प्रेमियों के लिए 'इट्स कमिंग होम'का सपना भला ही पूरा ना हो पाया हो पर बक्स समर्थकों के लिए 'बक्स इन 6'चरितार्थ हो रहा था।

एनबीए में नए सितारे अंतेतोकोम्पो के उदय का जश्न तो बनता ही है। तो जश्न मनाइये और एनबीए के नए चैंपियन मिलवॉकी बक्स को बधाई दीजिए। और हां ये कहना मत भूलिएगा --
                   'बक्स इन सिक्स'
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ब्रैंडन जेंनिंग्स दरअसल मिलवॉकी का अहम खिलाड़ी था जिसने 2013 में  एक बेहतर टीम मियामी हीट्स के विरुद्ध प्ले ऑफ सीरीज में 6वें गेम में बक्स टीम की जीत की भविष्यवाणी की थी। हालांकि ये भविष्यवाणी उस समय फलीभूत नहीं हुई लेकिन तभी से ये बक्स समर्थकों के लिए एक बड़ी चाहना बन गयी और उनके बीच लोकप्रिय फ्रेज बन गया 'बक्स इन सिक्स'।

Saturday, 15 June 2019

क्वाही का जादू बनाम चोटों का दंश



लगभग 15 दिन पहले जब एनबीए फाइनल्स गोल्डन स्टेट्स वारियर्स और टोरंटो रप्टर्स के बीच होना तय पाया गया था उस समय बास्केटबॉल के सभी बड़े विशेषज्ञ और जानकार ये अटकललें लगा रहे थे की 'बेस्ट ऑफ सेवन' का फाइनल्स आखिर कितने गेमों में खत्म हो जाएगा।ज़्यादातर विशेषज्ञों का मानना था कि ये फाइनल्स 6 गेमों में समाप्त होगा।और अमेरिका के कैलिफोर्निया के ओरेकल एरीना में बृहस्पतिवार की रात्रि में रप्टर्स टीम वारियर्स को 114 के मुकाबले 110 अंको से हराकर एनबीए 2019 का समापन किया तो विशेषज्ञों के अटकलें सच्चाई में तब्दील हो गईं थीं।बस फ़र्क़ सिर्फ इतना था कि जीतना वारियर्स को था जीत रप्टर्स गई।
दरअसल रप्टर्स लगभग आधी रात को जब 4 के मुकाबले 2 गेमों से वारियर्स को हराकर एनबीए के नए चैंपियन बन रहे थे तो तो वे वहां से हज़ारों मील दूर टोरंटो में खुशियों और उत्साह का सवेरा ला रहे थे। ये पहला अवसर था जब लैरी ओ ब्रायन ट्रॉफी देश से बाहर की यात्रा कर रही है।टोरंटो रप्टर्स एकमात्र विदेशी फ्रेंचाइजी है और इसके 24 साल के इतिहास में पहली बार टीम फाइनल्स में पहुंची और ट्रॉफी अपने नाम की।
12 महीने पहले लियोनार्ड क्वाही के फ्री एजेंट हो जाने के बाद जब रप्टर्स ने सान एंटोनियो स्पर्स से अपने लिए ट्रेड किया तो शायद ही किसी को ये अनुमान हो कि वे एक इतिहास की निर्मिती करने जा रहे हैं। वे उन्हें उनके शानदार खेल के लिए फाइनल्स का एमवीपी (मोस्ट वैलुएबल प्लेयर) घोषित किया गया तो ऐसा करने वाले एनबीए इतिहास के अब्दुल जब्बार क्रीम और लेब्रोन जेम्स के बाद ऐसे तीसरे खिलाड़ी थे जो दो अलग अलग टीमों से फाइनल्स  एमवीपी घोषित किया गया।दरअसल उन्होंने अपने खेल की शानदार कलाओं से वारियर्स के किले थॉम्पसन,डुरंट और स्टीफन करी की कलाओं की चमक को इस कदर फीका कर दिया कि खुद तो पूर्णिमा के चाँद से एनबीए के आसमान में छा गए और बाकी खिलाड़ी दूज और तीज की चंद्र कला भर से रह गए।  इतना ही नहीं जब क्वाही जब रप्टर्स को जॉइन कर रहे थे उन्होंने शहयड ही सोचा होगा कि वे एक इतिहास को दोहराते हुए एक उम्मीदों के  बड़े संहारक के रूप में स्थापित हो जाएंगे। 2012 में वे सान एंटोनियो स्पर्स की और से फाइनल्स मियामी हीट के विरुद्ध खेल रहे थे। मियामी हीट में उस समय लेब्रोन जेम्स और ड्वाने वेड जैसे खिलाड़ी खेल रहे थे। उस समय स्पर्स ने हीट को हराकर लगातार तीसरे साल चैंपियन बनने से रोक दिया था।और आज ठीक उसी तरह का कारनामा दोहरा रहे थे वारियर्स को लगातार तीसरे साल और पिछले पांच ससलों में चौथी बार चैंपियन बनने से रोक दिया।
इसमें कोई शक नही रप्टर्स की ये जीत जितनी क्वाही,सीएकम,लारी और मार्क गसोल के खेल की वजह से है उतनी ही वारियर्स के सबसे उम्दा खिलाड़ी दो बार के एमवीपी केविन डुरंट तथा अन्य खिलाड़ियों की चोट के कारण भी है। पर आदुनिक खेलों में चोट एक अनिवार्य चीज है और जीत तो जीत होती है।एनबीए को एक नया चैंपियन मुबारक।

Monday, 25 March 2019

'ये वो कतई नहीं था जो हम चाहते थे'



'ये वो कतई नहीं था जो हम चाहते थे'
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कल रात लॉस एंजिल्स लेकर्स के ब्रुकलिन नेट्स से 111-106 से हारने के बाद लेब्रोन जेम्स कह रहे थे "ये वो नही थP जिसके लिए हमें अनुबंधित किया गया था"और निसंदेह उनके चाहने वाले उनके इन्हीं शब्दों को अपने मन में दोहरा रहे होंगे "हाँ बिल्कुल, ये वो नहीं था जो हम चाहते थे"। क्या कोई भी विश्व कप फुटबॉल फाइनल्स की मेस्सी के बिना कल्पना कर सकता है। क्या किसी क्रिकेट विश्व कप की बिना सचिन के कल्पना की जा सकती थी। बिना राफेल नडाल के फ्रेंच ओपन की कल्पना की जा सकती है क्या। नहीं ना। तो फिर एनबीए पोस्ट सेशन की बिना लेब्रोन के कैसे कल्पना की जा सकती है। लेकिन यथार्थ कल्पना की तरह रंगीन और कोमल नहीं होता। यथार्थ का रंग धूसर और प्रकृति रूक्ष होती है। और यथार्थ यही है कि 2004-5 के बाद फाइनल्स की तो बात ही छोड़िए लेब्रोन जेम्स पोस्ट सेशन में भी नहीं दिखाई देंगे क्योंकि इस हार के बाद लेकर्स टीम की नॉकआउट में पहुंचने की कोई भी संभावना खत्म हो गई है।

दरअसल कुछ खिलाड़ी खेल का पर्याय बन जाते हैं। हॉकी की ध्यानचंद के बिना,क्रिकेट की ब्रैडमैन के बिना,फुटबॉल की पेले और माराडोना के बिना,बैडमिंटन की रूडी हार्तोनो और लिम स्वी किंग के बिना,टेनिस की रॉड लेबर के बिना या बास्केटबॉल की माइकेल जॉर्डन के बिना कल्पना की जा सकती है क्या। हां कालांतर में  खिलाड़ी उन्हें चुनौती देते  हैं और वे उनके समकक्ष आकर खुद भी लीजेंड बन जाते हैं। सचिन या मेस्सी और रोनाल्डो या रोजर फेडरर या लिन डान और ली चोंग वेई  या बोवलेंडर ऐसे ही लीजेंड हैं और ठीक इनकी तरह बास्केटबॉल में लेब्रोन जेम्स भी।
लेब्रोन ने पिछले चार सालों तक अकेले दम पर क्लीवलैंड केवलियर्स को फाइनल्स तक पहुंचाया और एक खिताब दिलाया। इस बार जब उन्होंने लेकर्स को जॉइन किया तो लगा कि लेकर्स के दिन बहुरने वाले हैं और कोबे ब्रायंट व शकील ओ नील वाले दिन लौटने वाले हैं। पर ऐसा हुआ नहीं। दरअसल लेब्रोन के कंधे अब झुकने लगे हैं और सांस उखड़ने।

जो भी हो इन गर्मियों में जब आप स्टीफेन करी,जेम्स हार्डन,केविन डुरंट, अन्थोनी डेविस से लेकर रसेल वेस्टब्रूक,क्वाहि लियोनार्ड और जोएल एम्बिड के खेल से रोमांचित हो रहे होंगे आपके दिल का एक कोना लेब्रोन की अनुपस्थिति के  उदासी भरे अहसास से जार जार हो रहा होगा।

Saturday, 9 June 2018

वारियर्स




इस जून आसमान से तो ठीक वैसी ही आग बरस रही है जैसी उम्मीद थी। पर ज़मीन से जिस आग के निकलने की उम्मीद थी,वैसी निकली नहीं। खेल के मैदान में खिलाड़ियों के कौशल,हुनर,जोश और ज़ज्बे की टकराहटों से निकली आग में वो तपिश महसूस ही नहीं हुई। अगर पेरिस के रोलां गैरों की लाल मिट्टी पर नडाल केवल एक सेट की कीमत पर फाइनल में पहुँच गए तो एनबीए का फाइनल 'एंटी क्लाईमैक्स' का और दो देसी कहावतों 'अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता' तथा 'संगठन में ही शक्ति है' का महज़ एक नैरेटिव बन कर रह गया।


                                                      आज सुबह जब क्वीकें लॉन्स एरिना के सेंटर कोर्ट में लेब्रोन जेम्स की अगुआई में क्लीवलैंड कैवेलियर्स की टीम बेस्ट ऑफ़ सेवन के फाइनल्स के चौथे गेम में खेलने उतरी होगी तो उसके दिमाग में लैरी ओ ब्रायन ट्रॉफी से ज़्यादा अपना सम्मान बचाने की चिंता रही होगी। वे सीरीज में 3-0 से पिछड़ रहे थे।दूसरी और वारियर्स ये गेम जीत कर ट्रॉफी पर पिछले चार सालों में तीसरी बार और लगातार दूसरी बार अपने नाम कर लेने को बेताब होंगे। अंततः बाज़ी वारियर्स ने मारी और 108-85 से जीत कर लगभग एकतरफा मुक़ाबले में कैवेलियर्स को 4-0  से हरा दिया।पिछले चार सालों से एनबीए फाइनल्स का ठिकाना क्वीकें  लॉन्स और ओरेकल एरिना के सेंटर कोर्ट ही होते आये हैं। 2014-15 और 2015-16 के पहले दो मुकाबले जहाँ इन दो टीमों के साथ साथ स्टीफन करी और लेब्रोन जेम्स के मध्य प्रतिद्वंदिता के लिए भी याद किये जाते हैं तो 2016-17 का मुकाबला केविन डुरंट  और लेब्रोन जेम्स की ऐतिहासिक प्रतिद्वंदिता के लिए याद किया जाता है। लेकिन 2017-18 के इस सीजन में ये मुकाबला एनबीए के समकालीन इतिहास की सबसे शानदार टीम गोल्डन स्टेट वारियर्स और महानतम खिलाड़ी लेब्रोन जेम्स के बीच तब्दील हो गया था। 


                             जेम्स का ये लगातार आठवां और कुल मिलाकर नवां फाइनल्स था। उन्होंने अकेले अपने डैम पर कैवेलियर्स को ईस्टर्न कांफेरेंस के फाइनल में ही नहीं पहुँचाया बल्कि उसे जीता कर एक बार फिर फाइनल्स में वारियर्स के मुक़ाबिल कैवेलियर्स को खड़ा कर दिया। फाइनल्स के पहले ही मुकाबले में जब खेल अतिरिक्त समय तक पहुंचा तो लगा मुकाबले की तपिश बहुतों को झुलसा देने वाली है। लेकिन यहां एंटी क्लाइमेक्स होता है और अगले तीन तीन गेम में कैवेलियर्स आत्म समर्पण कर देती है। ऐसा लगने लगा टीम का बोझ अकेले ढ़ोते ढ़ोते मानो लेब्रोन की सांस फूल गयी हो। उनका मुकाबला  करी,थॉम्पसन,डुरंट और ड्रेमोन्ड ग्रीन की अभेद्य दीवार से था और इस दीवार को भेद पाना उनके अकेले के बस की बात नहीं था। वारियर्स ने कैवेलियर्स को हराकर बताया कि टीम गेम में कोई एक खिलाड़ी मायने नहीं रखती बल्कि पूरी टीम का प्रयास मायने रखता है।
फिलहाल इस सुनहरी टीम को सुनहरी सफलता की सुनहरी बधाई।

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 और हाँ, नियति बेजाँ क्रूर भी होती है। 2012 में लेब्रोन मियामी हीट्स के लिए खेल रहे थे और डुरंट ओकलाहामा सिटी थंडर्स के लिए।उस समय लेब्रोन ने डुरंट को अपनी पहली रिंग से वंचित कर दिया था। समय बदला।डुरंट  2016-17 में वारियर्स  की टीम में शामिल हुए और एक बार फिर फाइनल्स में लेब्रोन के मुक़ाबिल हुए। बार नियति डुरंट के साथ थी। उसने रिंग ही नहीं जीती बल्कि फाइनल्स के एमवीपी भी बने।नियति यहीं नहीं रुकी।डुरंट ने पिछले साल वाला कारनामा फिर दोहराया।लेब्रोन के मुक़ाबिल एक और रिंग जीती,एक बार फिर फाइनल्स के एमवीपी करार दिए गए। 
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पर ! आह,ये क्या ! रोलां गैरों के फिलिप कार्टियर मैदान पर स्लोअने स्टीफेंस की हार ! इस हार ने तो मानो वारियर्स की जीत की तपिश को मंद ही कर दिया। पर विश्वास है कल नडाल की जीत इस कमी की भरपाई कर पाएगी। और विशवास मानिये नडाल की लाल बजरी पर 11वीं जीत के बाद कल फिर यहीं आपसे मुलाक़ात होगी। 

नागोया एशियाड:उल्लेखनीय प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कोई भी एक जीत,कोई भी एक पदक जीत लेना मायने रखता है। ये उस टीम या उस एथलीट की योग्यता,प्रतिभा और उसके कठिन पर...