Thursday, 18 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी ०६ : चैंपियनों का जादू

 

दिन चाहे कोई भी हो,पहले से लेकर अंतिम तक,फुटबॉल प्रेमियों के लिए अच्छे फुटबॉल का आकर्षण कहां कम होता है! ये तो दिन ब दिन बढ़ता जाता है। सातवें दिन भी फुटबॉल का रोमांच,उसकी अनिश्चितता,उसका आकर्षण, कहां कम था।सबसे बड़ा आकर्षण तो रोनाल्डो ही होने वाले थे। उनके पीछे भी तो एक लंबी लाइन लगी थी। ब्रूनो फर्नांडीस, हैरी केन, जूड बेलिंगहैम, लुका मोड्रिक, इवान पेरिसिक, लुइस डियाज़, जेम्स रोड्रिगेज़ और एंटोनी सेमेन्यो भी।

एक

इंग्लैंड ने अपना एकमात्र फीफा विश्वकप 1966 में जीता था।  उसके बाद वो कभी विश्व कप नहीं जीत पाई। लेकिन कमाल ये है कि हर विश्व कप में विश्व कप जीतने की फेवरिट टीमों में शुमार रही है। हैरी केन की अगुवाई वाली इंग्लैंड की टीम इस बार भी सबसे फेवरिट टीमों में से एक है। और कल अपने पहले ग्रुप मैच में इसने दिखाया कि क्यों इसे इस बार की सबसे फेवरिट टीमों में शुमार किया जा रहा है। 

इंग्लैंड के सामने रूस में 2018 में आयोजित विश्वकप की फाइनलिस्ट लुका मॉड्रिच की टीम क्रोशिया थी। इंग्लैंड ने क्रोशिया पर 4-2 से शानदार जीत हासिल की। ये दो बड़ी टीमों के बीच एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक मैच था। इस मैच में जीत हासिल कर इंग्लैंड ने बताया कि इस बार वे अपनी जीत के प्रति कितने गंभीर है। निसंदेह थ्री लायंस की जीत के नायक कप्तान हैरी केन ही रहे। पहले दो गोल उन्होंने ही किए। हैरी केन का बायर्न म्यूनिख के साथ ये साल बहुत ही शानदार रहा था। और वो ही फॉर्म उन्होंने यहां जारी रखी।

पहले हाफ में में मैच बराबरी पर छूटा। इंग्लैंड ने दो बार बढ़त ली लेकिन क्रोशिया ने दोनों बार बराबरी कर ली। दूसरे हाफ ने इंग्लैंड की टीम ने आक्रामक रुख दिखाया। मैच शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद जूड बेलिंगहैम ने थ्री लायंस को 3-2 से आगे कर दिया। फिर मार्कस रैशफोर्ड ने 85वें मिनट में गोलकर स्कोर 4-2 कर दिया। इंग्लैंड की यह शानदार शुरुआत है। अगर आप इंग्लैंड की टीम के प्रसंशक है तो अपनी फिंगर क्रॉस रखिए और इंग्लैंड को आगे बढ़ते देखते रहिए।

दो

स्पेन की तरह पुर्तगाल की टीम भी इस बार विश्व कप जीतने की सबसे संभावना वाली टीमों में से एक है। फिर इस टीम का क्रिश्चियनों रोनाल्डो इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वे छठी बार विश्व कप में भाग ले रहे हैं मेस्सी की तरह। निसंदेह वे भी अपने करियर की समाप्ति विश्व कप जीतकर ही करना चाहते होंगे। मेस्सी के शानदार प्रदर्शन के बाद सबकी निगाहें ना केवल पुर्तगाल के बल्कि रोनाल्डो के प्रदर्शन पर भी थीं।

पुर्तगाल का ये मैच अफ्रीकी टीम डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से था। वे 52 साल बाद विश्व कप में खेल रहे थे। 1974 में उन्होंने जेरे नाम की पहचान के साथ विश्व कप में भाग लिया था और सब सहारा अफ्रीका की विश्व कप में भाग लेने वाली पहली टीम थी।

कांगो पर पुर्तगाल की आसान जीत की संभावना थी। जैसे स्पेन की केप वर्डे पर आसान जीत की संभावना की जा रही थी। पर हुआ इसके उलट। ठीक वैसे ही जैसे स्पेन के साथ हुआ। दो ऐसी टीमें जो विश्व रैंकिंग में पहली पांच पायदानों पर हों और जिनकी  फ्रांस के बाद सबसे ज्यादा विश्व कप जीतने की संभावना व्यक्त की जा रही हो,उन्होंने अपने से बहुत कमजोर और बहुत नीचे की रैंकिंग वाली टीमों के साथ ड्रॉ खेला।

अंतर केवल इतना था कि पुर्तगाल और कांगो के बीच मैच 1-1 की समाप्ति पर छूटा जबकि स्पेन और केप वर्डे का मैच गोलरहित था। एक और अंतर था। स्पेन और जीत के बीच केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा थे। जिन्होंने शानदार बचाव किए और रातोंरात स्टार खिलाड़ी बन गए। लेकिन पुर्तगाल का आक्रमण फिनिश लाइन तक आ ही नहीं पाया। कांगो के गोलकीपर को टेस्ट ही नहीं किया जा सका। वोजिन्हा की तरह क्या कांगो के गोलकीपर को कोई जान पाया। स्पेन और पुर्तगाल के आक्रमण में यही अंतर था। 

आक्रमण की शुरुआत पुर्तगाल ने की और छठवें मिनट में ही पेड्रो नेटो के शानदार क्रॉस पर जोआओ नेवेस ने गोल दागकर बढ़त दिला दी। इसके बाद कांगो की टीम रक्षात्मक हो गई और खेल में पकड़ पुर्तगाल ने बना ली। लेकिन उसने खेल धीमा कर दिया। पुर्तगाल की इस सुस्ती का फायदा कांगो ने उठाया और हाफ टाइम से पहले आर्थर मासुअकू के सुंदर पास पर योआने विस्सा ने हेडर से गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया।

दूसरे हाफ में कांगो ने पहले हॉफ से बेहतर खेल दिखाया जबकि पुर्तगाल का आक्रमण बिखर गया। वे ना तो वे कोई सही मूव बना पाये और ना ही गोल। मैच बराबरी पर छूटा और पुर्तगाल ने एक महत्वपूर्ण अंक खोया।

जहां तक रोनाल्डो की बात है,वे बिल्कुल भी अपने रंग में नहीं दिखाई पड़े। वे गेम पर किसी भी तरह का प्रभाव छोड़ने में असफल रहे। वे 90 मिनट के खेल में गोल पर केवल तीन अटेम्प ले पाए और वे तीनों ही टारगेट पर नहीं रहे। 

दरअसल ये दो दिन में दो यूरोपीय बड़ी और शक्तिशाली फुटबॉल टीमों को सफल अफ्रीकी चुनौती थी।

तीन

घाना और पनामा के बीच का मुकाबला दो बड़े अंतर वाली टीमों के बीच का मुकाबला था। ये 34 वीं रैंक का 73 वीं रैंक से मुकाबला था। वैसे भी घाना की टीम ने पिछले छह मुकाबलों में से एक भी नहीं जीता था। उनके कोच कार्लोस क्विरोज तीन महीने पहले ही जुड़े थे। उनकी एकमात्र उम्मीद मैनचेस्टर सिटी के स्टार विंगर एंटोनी सेमेन्या थे।

पहले हॉफ में पनामा की टीम ने शानदार खेल दिखाया और गोली की बार-बार परीक्षा ली। घाना के गोली लॉरेंस जिगी लगातार व्यस्त रहे और उन्होंने कई शानदार बचाव किए। बेहतरीन खेल के बावजूद पनामा की टीम गोल करने में असफल रही। ये घाना की खुशकिस्मती ही थी। दूसरे हॉफ में घाना की टीम ने भी जोर लगाया लेकिन स्टार खिलाड़ी सेमेन्या नहीं चल पाए। जब ऐसा लग रहा था कि मैच गोलरहित अनिर्णीत रहेगा,तो इंजरी टाइम में ब्रैंडन थॉमस-असांटे ने डिफेंडर को चकमा देकर कालेब यिरेनकी को पास दिया जिन्होंने आसानी से गोल कर दिया। 

ये घाना के लिए एक यादगार जीत बन गई।

चार

उज्बेकिस्तान की टीम ने विश्व कप के लिए पहली बार क्वालीफाई किया है। कल उनके विश्व कप के पहले मुकाबले में उनका सामना एक बेहतरीन टीम कोलंबिया से होना था। निश्चित ही एशियाई टीम के लिए ये मुकाबला कठिन साबित होने वाला था। और हुआ भी। उनके लिए संतोष की बात है कि उन्होंने लगभग चालीस मिनटों तक  कोलंबिया के अटैक का हिम्मत से मुकाबला किया और अपना गोल सुरक्षित रखा। पर बायर्न म्यूनिख के लुइस डियाज़ ने रक्षात्मक पंक्ति को भेदने में सफलता पाई और उनके शानदार पास पर डैनियल मुनोज़ ने गोल कर टीम को बढ़त दिला दी। 

दूसरे हॉफ में 60वें मिनट में उज़्बेकिस्तान के  अब्बोसबेक फैज़ुल्लायेव ने गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया। पर यह बराबरी सिर्फ पांच मिनट तक ही कायम रही। 65वें मिनट में लुइस डियाज़ ने गोल कर कोलंबिया को फिर से बढ़त दिला दी। के. कैमपाज ने इंजरी टाइम में गोल कर स्कोर 3-1 कर दिया।

उजबेकिस्तान की टीम भले ही हार गई हो, लेकिन उसने कोलंबिया की टीम को कड़ी टक्कर दी।  उज्बेकिस्तान ने दूसरे हाफ में कई मौके गोल करने के बनाए,लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। अन्यथा कोलंबिया की टीम मुश्किल में पड़ सकती थी।

लुइस डियाज़ को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया, क्योंकि उनके गोल और असिस्ट ने उनकी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एफसी बायर्न म्यूनिख के यह एक शानदार दिन था। पहले हैरी केन और फिर लुईस डियाज ने शानदार खेल दिखाया।

Wednesday, 17 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी ०५ : चैंपियनों का जादू

 

प्रतियोगिता का छठा दिन। चैंपियन टीमों का दिन।उनके शानदार आगाज का दिन। स्टार खिलाड़ियों का दिन। उनके बेहतरीन प्रदर्शन का दिन। गोलों की बरसात का दिन। टीमों का विश्व कप में लंबे अंतराल के बाद वापसी के जश्न का दिन। रिकॉर्ड बनने और और टूटने का दिन। एर्लिंग हालैंड,किलियन म्बाप्पे  और मेस्सी के शानदार खेल का दिन । और,और मेस्सी के जादू का दिन।

एक 


सबसे पहले मेस्सी का जादू। उन्होंने बताया कि क्यों उन्हें सार्वकालिक महानतम खिलाड़ी कहा जाता है। दिन का तीसरा मैच पिछली चैंपियन अर्जेंटीना का अल्जीरिया से था। इससे पहले अर्जेंटीना विश्व कप बचाने के प्रयास में दो बार अपने पहले ही मैच में हार चुकी थी। लेकिन इस बार टीम में मेस्सी थे और उनके खेल का जादू था। अर्जेंटीना ने 3-0 से अपना ये मैच जीता। ये तीनों गोल मेस्सी के पैर से आए। ये मेस्सी  की विश्व कप की पहली और अर्जेंटीना की तरफ से 11वीं हैट्रिक थी।

आज मेस्सी की गति और मूवमेंट कमाल का था। वे अगले सप्ताह 39 साल के हो रहे है। उनकी टीम अब नई रणनीति से खेल रही है। जिसमें उन्हें साथी खिलाड़ियों और कोच का भरपूर सहयोग मिल रहा है।मियामी फुटबॉल क्लब में भी और अर्जेंटीना की टीम में भी। वे उनकी ऊर्जा बचाने के लिए अधिक मेहनत कर रहे हैं। अब मेस्सी मिडफील्ड से नहीं खेल रहे हैं बल्कि विपक्षी हाफ में और विपक्षी बॉक्स के बाहर से खेल रहे हैं। आज उनका पहला गोल बॉक्स से बाहर से आया। बाएं पैर का शॉट दो खिलाड़ियों के बीच से कर्व बनाते हुए गोल के दाहिने कोने में जाल में धंस गया जिसका गोलकीपर के पास कोई जवाब नहीं था। क्या ही दर्शनीय शॉट था ये। दूसरा गोल बहुत आसान था जो उन्होंने गोलकीपर के डिफ्लेशन से मिली गेंद को आसानी से गोल डाल दिया। लेकिन उनका क्या स्वाग था। कितने इत्मीनान से  गेंद गोल में सरकाई। ये ये मेस्सी की सहजता और इत्मीनान था कि गोल इतना आसान दिख रहा था। मैच के 76वें मिनट में मेस्सी का तीसरा गोल आया। ये एक शानदार जमीनी शॉट था। इस हैट्रिक के बाद वे अब मिरोसलाव क्लोसे के विश्व कप में सर्वाधिक 16 गोल की बराबरी पर हैं। खेल खत्म होने के बाद उनके कोच लियोनेल स्कालोनी  कह रहे थे "लियो के बारे में मेरे पास शब्द नहीं हैं। मैं क्या कहूँ? वह अविश्वसनीय है। फुटबॉल जगत में हर कोई उसे देखना चाहता है और इसका आनंद लेता है।”

मेस्सी के खेल को देखकर अनायास ही मोहिंदर अमरनाथ की याद आती है। हालांकि वे मेस्सी के कद के खिलाड़ी नहीं थे। लेकिन उनकी बेटिंग में कमाल का एलिगेंस था,नफासत थी। उसकी बारबरी कोई क्रिकेट खिलाड़ी नहीं कर सकता। उनके पास कोई भी गेंद खेलने के लिए इतना अधिक समय होता था कि आप गेंद को बल्ले से टकराने का इंतजार करते होते थे। वो ही नफासत उनकी गेंदबाजी में थी। बिल्कुल ऐसा ही एलिगेंस, वैसी ही नफासत मेस्सी के खेल में दिखाई देती है। उनकी गति में एक लय है। एलिगेंस है। उनके पास गेंद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय होता है,फिर चाहे उन्हें पास करना हो या गोल पर अटेम्प्ट करना हो। यही उनके खेल को दर्शनीय बनता है। एकदम एफर्टलेस। आज के तीनों गोल ऐसे ही थे।

 दरअसल कुछ लोगों को उम्र सूट करती है। ढलती उम्र उन्हें अधिक आकर्षक,अधिक ऊर्जावान और अधिक प्रतिभाशाली बनाती है। फिर वे फिर रोजर फेडरर हो,नोवाक जोकोविच हो, लेब्रान जेम्स हो, केविन डूरंट हों या फिर स्टीफन करी हों। और अब मेस्सी भी। 39 साल में क्या ही शानदार खेल रहे हैं। ये उनका छठा विश्व कप है। 

दो 

फ्रांस की टीम हमेशा से अपने कंपोजीशन के लिए चर्चित रही है। टीम में इस समय 21 खिलाड़ी अफ्रीकी मूल के हैं। फ्रांस की टीम जिस ऊंचाई पर है,उसे मुख्यत इन अश्वेत खिलाड़ियों ने ही बनाया है। फ्रांस की 1998 में विश्व कप की जीत में ज़िनेदिन ज़िदान, पैट्रिक विएरा और मार्सेल देसैली जैसे कई अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों का महत्वपूर्ण योगदान था। 2018 की जीत में भी किलियन म्बाप्पे,पॉल पोग्बा,एन्गोलो काँटे,ब्लेस मटुइडी,उस्मान डेम्बेले,सैमुअल उमटिटी जैसे खिलाड़ियों का योगदान था।

लेकिन टीम के इसी कंपोजिशन को लेकर धुर दक्षिणपंथी टीम की आलोचना करते रहे हैं। 1998 की जीत के बारे में दक्षिणपंथी राजनेता जीन-मैरी ले पेन ने कहा था कि विजयी टीम सही मायने में "फ्रांसीसी" नहीं थी। कतर के 2022 विश्व कप के फाइनल में अर्जेंटीना के हाथों फ्रांस की हार में पेनल्टी चूकने के बाद अश्वेत खिलाड़ी ऑरेलियन चोउमेनी और किंग्सले कोमन को ना केवल नस्लीय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा बल्कि उनकी फ्रांसीसी पहचान पर भी सवाल उठे।

इस बार भी चर्चा में फ्रांसीसी टीम का कंपोजिशन और उनके स्टार खिलाड़ी किलियन म्बाप्पे का प्रदर्शन ही था। फ्रांस 2022 में अर्जेंटीना से हार गया लेकिन किलियन म्बाप्पे ने अपने शानदार खेल से फ्रांस को लगभग जिता ही दिया था। कल किलियन म्बाप्पे ने वहीं से शुरू किया, जहां 2022 में छोड़ा था। उन्होंने सेनेगल पर फ्रांस की जीत में  दो गोल दागे। विश्व कप में उनके दागे गए कुल गोल 14 हो गए और उन्होंने मेस्सी को कुछ समय के लिए पीछे छोड़ दिया। ये किलियन म्बाप्पे और फ्रांस की शानदार शुरुआत थी।

तीन


नॉर्वे 1998 के बाद पहली बार विश्व कप में भाग ले रहा था और उसने बहुत ही शानदार तरीके के विश्व कप में वापसी का जश्न मनाया, इराक को 4-1 से हरा कर। नॉर्वे की टीम की दो कारणों से चर्चा थी। एक, गोल मशीन मैनचेस्टर सिटी के स्ट्राइकर अर्लिंग हॉलैंड के कारण। ये उनका पहला विश्व कप था। और उन्होंने अपनी जबरदस्त फॉर्म को यहां भी जारी रखा। उन्होंने दो शानदार गोल कर विश्व कप में अपने करियर के आग़ाज़ का जश्न मनाया। दो, वाइकिंग थीम के लिए। वाइकिंग नॉर्वे का एक मध्यकालीन योद्धा है। सुप्रसिद्ध छायाकार डेविड यारो ने मैच से पहले पूरी टीम को वाइकिंग वेश भूषा में शूट किया जिसमें पूरी टीम वाइकिंग योद्धाओं की तरह पारंपरिक ढाल, तलवारों और कवच में है। टीम प्रबंधन की तरफ से  कहा गया कि इस थीम का उद्देश्य टीम में एकता, लचीलेपन और नॉर्वे की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाना है। लेकिन इसकी आलोचना भी खूब हो रही है इस आधार पर कि ये पुरुषवादी और उग्र सोच है। लेकिन ये थीम खूब लोकप्रिय हो रहा है।

चार

ऑस्ट्रिया की टीम ने भी 28 साल बाद विश्व कप में वापसी का जश्न अपनी प्रतिद्वंदी टीम जॉर्डन को 3-1 हरा कर मनाया। 

ये दिन एशिया की दो टीमों की हार का दिन भी था। आज इराक और जॉर्डन दोनों ने अपने मैच हारे। इससे पहले किसी भी एशियाई टीम ने इस विश्व कप में कोई मैच नहीं हारा था।

पांच

केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा स्पेन के खिलाफ अपने शानदार खेल के कारण सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहे हैं। फिलहाल इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर की संख्या 10 मिलियन यानी एक करोड़ पहुंच गई है। लेकिन सोशल मीडिया ट्रेंड होने वाले वे अकेले नहीं हैं।

अर्जेंटीना के इंफ्लूएंसर एल्सकार्सो ने उपहास करते हुए अपने फॉलोअर्स से कहा इस विश्व कप में न्यूजीलैंड के राइट बैक टिम पेन के बहुत कम फॉलोअर्स है। उन्हें फॉलो करें। देखते ही देखते उनके फॉलोअर्स की संख्या पांच हज़ार से बढ़कर 58 लाख हो गई। इसका अधिक फायदा उनके कैरियर को हुआ। वे चर्चित हो गए। उनकी कीर्ति कई क्लबों तक पहुंची। चर्चा है वे जल्द ही पैराग्वे के क्लब ओलंपिया से जुड़ने वाले हैं।



Tuesday, 16 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी ०४ : ज़मीं पर पाँव पड़ते नहीं मेरे

 

       खेल की खूबसूरती ही ये है, कोई एक दिन जो खिलाड़ी का नहीं होता वो रसातल में होता है, और कोई एक दिन जो उसका हो तो वो आसमाँ पर होता है। कोई एक दिन का खेल, कोई एक मैच आपको चाँद पर बैठा देता है। 90 मिनट का समय केवल एक मैच का समय भर नहीं होता। ये एक खिलाड़ी की पूरी जिंदगी की मेहनत होती है। उसका पूरा जीवन होता  है। उसके द्वारा देखे गए सपने होते हैं और उन सपनों को साकार करने का समय होता है।

एक

     इस बात को केप वर्डे के 40 साल के गोलकीपर जोसिमर जोस एवोरा  डायस से बेहतर और कौन समझ सकता है। इस समय वे खुद को धरती पर कहां पा रहे होंगे। वे तो खुद को चांद की सतह पर चलता हुआ महसूस कर रहे होंगे। 

        केप वर्डे अटलांटिक महासागर में अफ्रीका के पश्चिमी तट से लगभग 600 किलोमीटर दूर 10 ज्वालामुखीय द्वीपों का एक खूबसूरत देश है। उस ने पहली बार विश्व कप फाइनल्स के लिए क्वालीफाई किया है। वे कल विश्व कप का अपना पहला मैच खेल रहे थे। विश्व नंबर दो और इस बार के विश्व चैंपियन बनने की सबसे अधिक संभावना वाली और सबसे शक्तिशाली टीमों में से एक स्पेन से खिलाफ। एक दिन पहले कुछ कमजोर टीमों का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा था। काराकाओ जर्मनी से 1-7 से हारी थी और स्वीडन की टीम ने ट्यूनीशिया को 5-1 से हराया था। स्पेन के लिए ये मैच केक वॉक समझा जा रहा था जिसे स्पेन को बड़े अंतर से जीत जाना था। लेकिन केप वर्डे ने शानदार खेल दिखाया। उनका रक्षण अभेद्य था जिसे स्पेन के अग्रिम पंक्ति के  खिलाड़ी भेदने असफल रहे। 

          केप वर्डे  की विश्व रैंकिंग 67वीं है। इसलिए विश्व नंबर दो टीम के कोच लुइस डे ला फुएंते अपने स्टार खिलाड़ी लमिन यामल और निकी  विलियम्स को फर्स्ट इलेवन में शामिल नहीं किया। लेकिन केप वर्डे की टीम ने दूसरे हाफ में उन दोनों को उतारने के लिए मजबूर कर दिया। वे मैदान में उतरे। पर नतीजा वही रहा। वे भी केप वर्डे के रक्षण को भेद नहीं पाए। मैच अंततः गोल रहित अनिर्णीत समाप्त हो गया। ये इस विश्व कप का पहला बड़ा अप्रत्याशित परिणाम था। 


           दरअसल स्पेन के स्ट्राइकर्स और केप वर्डे के गोल के बीच एक खिलाड़ी था। उसका नाम था जोसिमर जोस एवोरा  डायस और जिसे हम वोजिन्हा के नाम से बेहतर जानते हैं। वोजिन्हा ने स्पेन के हर आक्रमण को नाकाम कर दिया। उनके इस खेल पर प्रभाव को इस तथ्य से बेहतर समझा जा सकता है कि स्पेन के खिलाड़ियों ने 27 प्रयास गोल पर किए। उनमें से 10 शॉट टारगेट पर थे। और टारगेट वाले दस शॉट में से आठ बॉक्स के अंदर से लिए गए शॉट थे। वोजिन्हा हर बार गेंद और गोल के बीच दीवार बने खड़े रहे। वे इस मैच के हीरो थे।

          मैच समाप्ति के बाद वोजिन्हा मैदान पर लेट गए। उनकी आंखों से पानी बह रहा था। मानो वे अपने उन मोतियों सरीखे आँसुओं से मैदान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे हों। मैच के बाद वे कह रहे थे "मैंने अपना पूरा जीवन इसी के लिए, इसी पल के लिए, इसी सपने के लिए मेहनत की है"। वे अभी तक पुर्तगाल के क्लब चावेज़ के लिए तीसरी डिवीजन लीग में खेल रहे हैं। लेकिन इस वर्ल्ड कप के बाद उनके लिए दुनिया वो दुनिया नहीं होगी जो इस विश्व कप से पहले थी। अब उनकी एक दूसरी दुनिया होगी। इस मैच से पहले उनके इंस्टाग्राम पर केवल  पचास हजार फॉलोअर थे और अब छह मिलियन  यानी साठ लाख से भी ज्यादा।

दो

       जितनी शानदार दिन की शुरुआत हुई केप वर्डे और स्पेन के मैच से उतना  शानदार दिन का समापन हुआ ईरान और न्यूजीलैंड के मैच से । ये एक रोमांचक और संघर्षपूर्ण मैच था। और न्यूजीलैंड के हाल फिलहाल के फुटबॉल इतिहास के यादगार पल। उन्होंने अपनी से ऊंची रैंकिंग ईरान को 2-2 की बराबरी पर रोक दिया। 

           न्यूजीलैंड ने एलिना जस्ट के गोलों से दो बार बढ़त ली और ईरान ने दोनों बार बराबरी की। 

          ईरान ये मैच अमेरिका ईरान युद्ध के समापन की घोषणा के कुछ ही समय बाद खेल रहा था। उड़ान की टीम को अमेरिका ने अपने देश में रुकने की अनुमति नहीं दी है। उन्होंने मेक्सिको में अपना बेस कैंप बनाया हुआ है। जबकि उन्हें अपने तीनों लीग मैच अमेरिका में खेलने है। वे करीब 30 घंटे पहले ही लॉस एंजिलिस में पहुंचे थे। एक शत्रु देश में और होस्टाइल वातावरण में मैच खेलने का क्या ही भयावह अनुभव रहा होगा। लेकिन मैच के बाद मन ऑफ द मैच खिलाड़ी रहे ईरान के रामिन रेज़ाँ ने एक सवाल का क्या ही शानदार जवाब दिया - 'ईरान में जो मुश्किलें हैं, वो हमारी मुश्किलें हैं, उससे आपका लेना-देना नहीं है।'

तीन

       दिन के बाकी दो मैच भी अनिर्णीत रहे। बेल्जियम और मिस्र का मैच 1-1 की बराबरी पर छूटा। जबकि सऊदी अरब और उरुग्वे का मैच भी 1-1 पर ड्रॉ रहा। फीफा विश्व कप ऐसा 58 साल बाद हो रहा था कि एक दिन में खेले गए सभी चारों मैच अनिर्णीत रहे हों। इससे पहले सन 1958 में स्वीडन में हुए विश्व कप में हुआ था। तब 15 जून को खेले गए चार मैच अनिर्णीत रहे थे। उस समय भी एक मैच जो स्वीडन और वेल्स के बीच खेला गया था वो 0-0 की बराबरी पर रहा था। इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट जर्मनी बनाम नॉर्दर्न आयरलैंड 2-2 की बराबरी पर तथा पराग्वे बनाम यूगोस्लाविया मैच 3-3 की बराबरी पर छूटा था।

चार 

       और अंत में बात एशियाई टीमों टीमों की। इस विश्व कप में एशियाई टीमों ने बेहद शानदार और ऐतिहासिक शुरुआत की है और अभी तक कोई भी टीम कोई मैच नहीं हारी है। इस बार एशियाई फुटबॉल महासंघ (AFC) से रिकॉर्ड नौ टीमें भाग ले रही हैं।अब तक के मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार खेल दिखाते हुए तुर्की को 2-0 से हराया। जापान ने नीदरलैंड्स जैसी मजबूत यूरोपीय टीम के खिलाफ कड़ा मुकाबला करते हुए 2-2 से ड्रॉ खेला। कतर ने स्विट्जरलैंड के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेलकर अपना पहला विश्व कप अंक हासिल किया। सऊदी अरब ने उरुग्वे जैसी दिग्गज टीम को 1-1 से बराबरी पर रोक दिया। ईरान ने भी न्यूजीलैंड के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मैच 2-2 से ड्रॉ कराया।

एक बड़ा सवाल सभी फुटबॉल प्रेमियों के मस्तिष्क में जरूर आता होगा कि फीफा ट्रॉफी यूरोप और दक्षिण अमेरिका से बाहर कब और कहां जाएगी।



Monday, 15 June 2026

फीफा विश्व कप २०२६ डायरी ०३: एक खूबसूरत परंपरा



    जिस तरह से दुनिया भर के प्रसंशक अपनी टीमों की हौंसला अफजाई के लिए अमेरिका,कनाडा और मेक्सिको पहुंच रहे हैं,वो फीफा विश्व कप 2026 के सुंदर दृश्य रच रहे हैं। बोस्निया हर्जेगोविना के हजारों समर्थकों ने जिस तरह से यूरोप से आकर टोरंटो में मार्च किया वो जितने सुंदर दृश्य को बना रहे थे ठीक वैसे ही खूबसूरत दृश्य न्यूयार्क की सड़कों पर ब्राजील के समर्थक भी निर्मित कर रहे थे। 

एक

    लेकिन सबसे खूबसूरत दृश्य जापानी टीम के समर्थक बना रहे हैं।

    जापानी लोग अपने संयमित और अनुशासित और सरल जीवल के लिए जाने जाते हैं। वे फुटबॉल के मैदान पर भी सार्वजनिक जीवन की सुचिता और गरिमा के दृष्टांत बना रहे हैं। जापानी समर्थकों ने 1998 फ्रांस में हुए विश्व कप फुटबॉल के दौरान  शानदार परम्परा कायम की । वे स्टेडियम को खेल के अंत में वैसा ही साफ़ सुथरा छोड़ कर आते है,जैसा कि उन्हें मिला था। वे मैच के बाद दर्शकों द्वारा छोड़ी गई खाने पीने की चीजों और बाकी फैलाई गई गंदगी को साफ करने के बाद ही स्टेडियम छोड़ते हैं। प्रतियोगिता के चौथे दिन जापान और नीदरलैंड का मैच था। एक बेहतरीन मैच हुआ। 18वें नंबर की विश्व रैंकिंग टीम जापान ने विश्व रैंकिंग में नंबर आठ की टीम से कड़ा मुकाबला किया। मैच में जापान की टीम दो बार पिछड़ी, लेकिन दो बार गोलकर बराबरी पर आई। मैच 2-2 गोल की बराबरी पर छूटा। लेकिन सुंदर दृश्य उनके समर्थक बना रहे थे जिन्होंने मैच की समाप्ति की व्हिस्ल बजते ही वे स्टेडियम साफ करने में जुट गए। खुद फीफा ने अपने एक्स हैंडल पर जापानी समर्थकों की स्टेडियम साफ करने की एक वीडियो पोस्ट की है।

दो

   


कैरेबियन सागर में वेनेजुएला से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर एक बहुत छोटा सा अदभुत प्राकृतिक सौंदर्य वाला एक स्वायत्त देश है काराकाओ। इसका क्षेत्रफल है करीब 450 @वर्ग किलोमीटर और कुल जनसंख्या है एक लाख साठ हज़ार। इसने पहली बार फाइनल्स के लिए क्वालीफाई किया है और अब तक क्वालीफाई करने वाला सबसे छोटा देश है। इस समय इसकी विश्व रैंकिंग 82वीं है। चौथे दिन काराकाओ का विश्व कप का पहला मैच चार बार की चैम्पियन जर्मनी से था। हालांकि ये मैच वे 1-7 से हार गए। लेकिन इस मैच का एक सबसे खूबसूरत क्षण था जर्मनी के खिलाफ़ किया गए पहला और एकमात्र गोल था। जर्मनी के फेलिक्स नेमचा ने छठवें मिनट में ही एक शानदार घुमावदार शॉट से जर्मनी को  1-0 की बढ़त दिला दे। लेकिन 21वें मिनट में कराकाओ के लिवानो कॉमेनेंशिया ने बॉक्स के किनारे से बाये पैर से एक शानदार शॉट लगाया जिसे जर्मनी के गोल कीपर मैनुअल नेउर। नहीं रोक पाये और कॉमेनेंशिया ने अपना नाम इतिहास में लिखा लिया।

तीन

    इस बार विश्व कप में खूब गोल हो रहे हैं। पहले चार दिनों में कुल 14 लीग मैच में कुल 38 गोल हुए है। प्रति मैच 3.17 की औसत से। सबसे कम गोल वाला मैच में स्कॉटलैंड ने हैती को 1-0 से हराया। जबकि सबसे ज्यादा गोल वाले मैच में जर्मनी ने कराकाओ को 7-1 से हराया। एडुआर्डो लगियानो एक जगह कहते हैं “मैं दुनिया भर में घूमता हूँ, हाथ फैलाए हुए, और स्टेडियमों में प्रार्थना करता हूँ: 'भगवान के लिए, एक शानदार मूव तो बनाओ।' और जब भी मैदान पर बेहतरीन फुटबॉल देखने को मिलती है, तो मैं इस चमत्कार के लिए ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ, और मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह मूव किस टीम या देश के खिलाड़ी ने किया है।”

   हर फुटबॉल प्रेमी यही चाहता है एक शानदार मूव और  उससे बना एक गोल। और उसे क्या चाहिए। कुछ भी तो नहीं। यही उसकी चरम आनन्दानुभूति है।



फीफा विश्व कप २०२६ डायरी ०२: छोटे देशों की बड़ी बातें

 

   बोस्निया और हर्जेगोविना दक्षिण पूर्वी यूरोप के बाल्कन प्रायद्वीप का 34 लाख की आबादी वाला बहुत ही छोटा और नया देश है जिसकी स्थापना युगोस्लाविया की विघटन प्रक्रिया में 1995 के डेटन समझौते के तहत हुई. 

    इस छोटे से देश ने इस बार के विश्व कप में 2014 के बाद दूसरी बार क्वालीफाई किया है और ग्रुप बी में मेज़बान कनाडा, स्विट्ज़रलैंड और ईरान के साथ रखा गया है. विश्व कप में इसके प्रदर्शन पर विशेष नजर रखी जानी चाहिए. क्योंकि विश्व कप में क्वालीफायर में दिग्गज टीमों को हराकर यहां तक पहुंची है.

   अगर इस बार चार बार की विश्व चैंपियन और  'कैटेनेसियो' जैसी अभेद्य रक्षा पद्धति को ईजाद करने वाले तथा जीनो डोफ़ व बुफों जैसे गोलकीपर और बरेसी, पाओली माल्दिनी, फेबियो कैनावरो व चेलिनी जैसे डिफेंडर देने वाली इटली की टीम लगातार तीसरी बार विश्व कप  में क्वालीफाई नहीं कर सकी, तो इसका कारण ये टीम है जिसने अपने नए कोच पूर्व राष्ट्रीय टीम कप्तान सर्गेज बारबारेज़ के नेतृत्व में प्ले ऑफ फाइनल में इटली को हराया था. इससे पहले सेमीफाइनल वेल्स की टीम को जबक प्रारंभिक मैचों में रुमानिया को हराया और ऑस्ट्रिया से ड्रॉ खेला. 

      बीती रात मेजबान कनाडा के विरुद्ध एक रोमांचक मैच में शानदार रक्षण दिखाते हुए 1-1 से ड्रॉ खेला. मैच का पहला गोल 21वें मिनट में बोस्निया के जोवो लुकिच ने कॉर्नर पर हेडर से किया. जबकि कनाडा की और से बराबरी का गोल 78वें मिनट में कनाडा के लीजेंड खिलाड़ी काइल लाएं ने किया. लारिन कनाडा के लिए सबसे ज्यादा गोल करने करने वालों में दुआरे नंबर पर हैं. लेकिन उन्हें फर्स्ट इलेवन में जगह नहीं मिली. लेकिन जैसे ही उन्हें स्थानापन्न के रूप में मैदान में जगह मिली दो मिनट के भीतर बराबरी का गोल कर अपनी महत्ता सिद्ध कर दी.

      कनाडा में विश्व कप का ये शानदार आगाज़ था. मैच से पूर्व दोनों टीमों के समर्थकों ने परंपरागत रूप से  मैच से पहले मार्च करके टोरंटो की सड़कों को नीले और लाल रंग से पेंट कर दी थी. ये अद्भुत दृश्य थे.

      फिलहाल तीन विश्व कप में कनाडा का ये पहला अंक था और सात मैचों में हार के बाद पहला ड्रा. 

       ये लाल और नीले के बीच मुकाबला था. आग और पानी का मुकाबला. रक्षण और आक्रमण का मुकाबला. एक बराबरी का मुकाबला।



Friday, 12 June 2026

जसपाल राणा:लक्ष्य जो नहीं उन्हें नहीं चुकना था

 



बहुत बार लिखे से बहुत बहुत ज्यादा गंभीर और महत्वपूर्ण बात छायाकार के कैमरे की आँख से पकड़ा गया कोई एक लम्हा या कोई एक फ्रेम बोल देता है। वे ऐसे अविस्मरणीय और यादगार लम्हे अपने कैमरे से कैद कर देते हैं कि वे आपके दिलोदिमाग पर हमेशा के लिए चस्पां हो जाते हैं। ऐसे लम्हे जिन्हें शब्दों में बांधा ही नहीं जा सकता। किसी भाषा में व्यक्त नहीं किया जा सकता सिवाय छायाचित्र के।

आज जब हमारे समय के एक बहुत ही महत्वपूर्ण और जाने माने निशानेबाज जसपाल राणा ने इतनी कम उम्र में इस फानी दुनिया को अलविदा कह दिया तो उनके दो ऐसे ही अविस्मरणीय छायाचित्र लगातार आंखों के सामने घूम रहे हैं। ये दो चित्र उनके पूरे खेल जीवन को कहने के लिए पर्याप्त हैं।

एक


पहला छायाचित्र 2024 के पेरिस ओलंपिक का है। पेरिस में मनु भाकर निशानेबाजी में एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने की अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करती हैं। ऐसा कारनामा करने वाली वे एकमात्र भारतीय एथलीट होती हैं। उसके बाद वे रेंज से वापस जा रही होती हैं। उनके साथ उनके कोच जसपाल राणा हैं। ये उसी समय का छायाचित्र है। जसपाल बहुत ही सजग और सीधे बैठे हैं और मनु आँखें बंद किये बेपरवाह सी उनके काँधे पर सर टिकाए हैं।

गुरु शिष्य संबंध को इससे बेहतर ढंग से और किसी भी तरह नहीं कहा जा सकता था या यूं कहें कि नहीं कहा जा सकता है। मानो अपने शिष्य की सारी जिम्मेदारी,सारा बोझ गुरु अपने कांधे उठाए है। उधर मनु भाकर का चेहरा निश्चिंतता और खुशी दमक रहा है। उनको अपने गुरु पर इस कदर विश्वास है कि गुरु का कांधा उसे हर फ़िक्र और हर चिंता से मुक्त कर देता है। इतना ही नहीं गुरु अपना कांधा प्रस्तुत कर इतना स्पेस भी देता है कि अभी अभी जो अविस्मरणीय उपलब्धि उसने हासिल की है,उसे अपनी बंद आंखों से फिर फिर जी ले। बंद आंखों से उस उपलब्धि को जी लेने का अनिर्वचनीय सुख उनके चेहरे से छलका छलका जाता है। 

 गुरु शिष्या का ये संबंध इकहरा नहीं है। बल्कि द्वंदात्मक है। वहाँ केवल समर्पण,लगाव और प्रतिबद्धता भर नहीं है, बल्कि मत विभिन्नता,मन मुटाव और अलगाव भी है।  टोक्यो ओलंपिक से पहले जसपाल राणा को जूनियर टीम का हाई परफॉर्मेंस प्रशिक्षक नियुक्त किया जाता है और मनु भाकर भी उनकी प्रशिक्षु होती हैं। लेकिन दिल्ली में आयोजित विश्व निशानेबाजी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले इवेंट्स को लेकर मनमुटाव होता है। उनके रास्ते अलग अलग हो जाते हैं। ये मनमुटाव टोक्यो ओलंपिक के दौरान चरम पर पहुंच जाता है जब मनु भाकर की राइफल इवेंट के बीच में खराब हो जाती है और उन्हें इवेंट बीच में ही छोड़ना पड़ता है।

लेकिन दोनों को एक दूसरे की जरूरत है। गुरु शिष्या की प्रतिभा को पहचानता है और शिष्या गुरु की महिमा को। मनु को अपनी गलती का अहसास होता है। वो फिर फिर जसपाल के पास लौटती है और प्रशिक्षण शुरू करती है। नतीजा दुनिया के सामने होता है।

दरअसल ये कहानी ये बताती है कि वे आला दर्जे के प्रशिक्षक थे। अहंकार उन्हें छू नहीं गया था। वे अपने प्रशिक्षु की प्रतिभा को ना केवल पहचानते थे, बल्कि उसे तराशना भी जानते थे। उन्होंने मनु भाकर को स्वीकार कर उन्हें ऊँचाइयों तक पहुंचाया। जब उन्हें जूनियर टीम का प्रशिक्षक बनाया गया तो उन्होंने बड़ी संख्या में निशानेबाजों की प्रतिभा को निखारा  जिन्होंने आगे चलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपूर्व उपलब्धियां हासिल की। इनमें मनु भाकर के अलावा सौरव चौधरी,अनीश भानवाला पिंकी यादव जैसे नाम शामिल हैं। 

उनके असामयिक निधन से बड़ी संख्या में होनहार प्रशिक्षुओं को एक बहुत ही योग्य प्रशिक्षक की कमी हमेश सालती रहेगी।

दो

ये 2006 के दोहा एशियाई खेलों का है। इस प्रतियोगिता में उन्होंने तीन सोने के और एक चांदी का तमगा जीता था। ये प्रदर्शन उन्होंने उस समय किया था जब अन्य भारतीय निशानेबाज बहुत अच्छ प्रदर्शन नहीं कर रहे थे और वे खुद बीमार थे। वे सेंटर-फायर पिस्टल स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड बनाने के कगार पर थे, लेकिन जसपाल अपने आखिरी दो निशानों पर केवल 9 अंक ही हासिल कर पाए और विश्व रिकॉर्ड बनाने से चूक गए लेकिन सोना तो जीता ही। इस उपलब्धि के बाद वे किसी बच्चे की तरह फूट फूट कर रोये। उस समय उनके चेहरे पर बाल सुलभ भोलापन था। उन आँसुओं के पीछे छिपी आत्म संतुष्टि और खागी को सहज ही महसूस किया जा सकता था। उनके आंख से छलके आंसू कह रहे थे कि भावनाओं के अतिरेक से धैर्य का बांध टूट ही जाता है,फिर चाहे दुख हो सुख।

उन्होंने एक शूटर के रूप में असाधारण उपलब्धियां हासिल की। उनकी मुख्य स्पर्धा 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल थी। उन्होंने 1994 से 2006 तक कुल 15 पदक जीते हैं, जिनमें 9 स्वर्ण पदक, 4 रजत पदक और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। उनका सबसे सफल प्रदर्शन 2002 में मैनचेस्टर में रहा, जहां उन्होंने छह पदक जीते थे। जसपाल के नाम भारत के सबसे अधिक पदक जीतने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के एथलीट के रूप में रिकॉर्ड है, उन्होंने चार संस्करणों में कुल 15 पदक जीते हैं, जिनमें नौ स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं। 1994 में मिलान में जूनियर विश्व चैंपियनशिप के दौरान जसपाल के घुटने पर दर्दनाक फोडा निकल आया था, जिससे उनके लिए खड़े होना भी असहनीय हो गया था। फिर भी उन्होंने अविस्मरणीय प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता और जूनियर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की।

निसंदेह वे भारत के सबसे सफल और बड़े निशानेबाजों में थे। लेकिन उनकी उपलब्धियों का महत्व पदकों की संख्या में उतना नहीं जितना इस बात में है कि एक महंगे खेल को जिसमें अब तक धनवानों और राजघरानों का प्रभुत्व था,साधारण और आम व्यक्ति के लिए उपलब्ध कराया। 

तीन

वे हमेशा खिलाड़ियों के पक्ष और उनके हितों के लिए खड़े रहे। 2017 में इंपोर्टेड  शूटिंग उपकरणों पर  जीएसटी लागू होने पर वे उसके सबसे मुखर आलोचकों में से एक थे। उनका मानना था कि इन पर भारी कर लगाने से शूटिंग युवा खिलाड़ियों के लिए बेहद महंगी हो जाएगी और उभरती प्रतिभाओं को नुकसान होगा।

चार

एक प्रशिक्षक, एक निशानेबाज और खेल वो खिलाड़ियों के प्रवक्ता के रूप में उनकी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनकी कमी हर क्षेत्र में खलेगी। ये उम्र उनके जाने की कतई नहीं थी। लेकिन होनी को कोई टाल नहीं सकता।

उनका असामयिक निधन भारतीय खेल और विशेष रूप से शूटिंग में एक बड़ा निर्वात बनाता है।

उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

Thursday, 11 June 2026

फीफा विश्व कप २००२६ डायरी ०१ : पूर्वावलोकन

 



उरुग्वे के सुप्रसिद्ध लेखक पत्रकार एडुआर्डो गैलियानो फुटबॉल खेल के अनन्य प्रेम में थे। उन्होंने फुटबॉल पर एक अद्भुत किताब लिखी है 'फुटबॉल इन सन एंड शैडो'। ये शायद फुटबॉल पर लिखी सबसे शानदार किताब है। फुटबॉल का महाकाव्य। इसमें फुटबॉल का जुनून,उसका रोमांच,उसका उत्साह और जोश ही नहीं दिखाई देता,बल्कि उसकी कलात्मकता और रागात्मकता की गूंज भी सुनाई देती है। उसमें उन्होंने एक जगह लिखा 'फुटबॉल एक धर्म है, जिसके अपने देवी-देवता और रीति-रिवाज हैं।'

भारत में खेल प्रेमियों के लिए भले ही क्रिकेट धर्म हो,लेकिन ये सच है कि पूरे संसार के खेल प्रेमियों का धर्म फुटबॉल ही है। जाहिरा तौर पर फुटबॉल धर्म है तो उसके असंख्य चाहने वाले अनुयायी भी होंगे जिन्होंने अपनी अपनी पसंद के खिलाड़ियों को देवत्व का आरोपण किया होगा और उनके देश को किसी देवथान की तरह पूजा होगा। 

जब एक धर्म हुआ,उसके कोटि कोटि देवता हुए,असंख्य अनुयायी हुए, देवथान हुए, तो कितने ही सारे धर्मोत्सव भी होते ही होंगे न। तो इसका सबसे बड़ा उत्सव हुआ फीफा विश्व कप। फुटबॉल का महाकुंभ। हर चार साल में लगने वाला। इस बार ये कुंभ उत्तरी अमेरिका में। 

यूनाइटेड स्टेट्स,कनाडा और मेक्सिको में संयुक्त रूप से आयोजित होने वाला ये विश्व कप सबसे बड़ा आयोजन। फीफा कप का 23वां संस्करण। विश्व भर की कुल 48 टीमें। अब तक की सर्वाधिक। 

इन 48 देशों के खिलाड़ी 16 स्थानों के 16 मैदानों पर अपने एक जोड़ी पैर, एक अदद सिर और एक बॉल 'ट्रायोंडा' के साथ अथक परिश्रम से अर्जित स्किल और जादू सरीखे हुनर के प्रदर्शन को बेताब हुए जाते हैं।


हरे भरे मैदान हैरतअंगेज कारनामों के प्रदर्शन का साक्षी बनने के लिए पैरों के जादुगरों के इंतजार से बेज़ार हुए जाते हैं। मैदानों की आउटलाइंस इन कारनामों की सीमा तय करने में व्यस्त हुई जाती हैं। गोलपोस्ट सीना ठोंक कर अपने मेहमानों को अपने हुनर से उन्हें भेदने की चुनौती देते हुए खड़े दीख पड़ते हैं। और स्टेडियमों के स्टैंड हैं कि अपने मेहमानों के स्वागत में पलकें बिछाए आतुर हुए जाते हैं।

एक इंतजार है जो अब खत्म हुआ चाहता है। एक व्हिसल है कि बजा चाहती है और एक पर्दा है महोत्सव का, जो उठा चाहता है। 

यहाँ पीठ पर लदी अतीत की सुनहरी स्मृतियां होंगी। मस्तिष्क को मथता वर्तमान का खुरदुरा यथार्थ होगा। और दिल में पैठे भविष्य के रोमानी स्वप्न होंगे।

यहां प्रशिक्षकों की रणनीतियों की बाजीगरी होगी। विज्ञान की निश्चितता होगी। तकनीक की कारगुजारियां होंगी। और इन सब के योग से निखरी खिलाड़ियों की अद्भुत कला की रस वर्षा से सराबोर होते दर्शक होंगे।

अपनी विशिष्ट पहचान लिए विभिन्न रंगों की जर्सियां होंगी। खिलाड़ियों की पहचान बताते पीठ और सीने पर अंक होंगे। और राष्ट्रों की पहचान जताते लहराते रंग बिरंगे परचम होंगे।

यहां जोश होगा। उत्साह होगा। जुनून होगा। रोमांच होगा। खेल मुकाबलों की निश्चितता होगी और परिणामों की अनिश्चितता होगी। जीत की खुशी होगी। पराजय की उदासी भी। आंसू खुशी के भी बहेंगे और दुख के भी।

यहां पराभव की ओर जाते और फीफा वर्ल्ड कप में अंतिम बार भाग लेते उम्रदराज खिलाड़ी होंगे।

अर्जेंटीना के लियोनस मैसी होंगे।

पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो होंगे।

क्रोएशिया के लुका मोड्रिच  होंगे

स्कॉटलैंड के गोलकीपर क्रेग गॉर्डन होंगे।

मेक्सिको के गुइलेर्मो ओचोआ होंगे।

 बोस्निया और हर्जेगोविना के ईडिन जिको होंगे

और यहां अपनी प्रतिभा की झलक दिखाते भविष्य के उभरते सितारे युवा खिलाड़ी भी होंगे।

यहां मेक्सिको के गिल्बर्टो मोरा होंगे।

स्पेन के यामल होंगे।

जर्मनी के क्रिएटिव लेनार्ट कार्ल होंगे।

सेनेगल के अटैकर इब्राहिम म्बाये होंगे।

मिस्र के हमजा अब्देलकरीम होंगे।

दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए क्लच ईगल होगा। जायु जगुआर होगा। मैपल मूस होगा।


मशहूर संगीतकार डेविड गुएटा और गायक एंड्रिया बोसेली का तैयार किया गीत ' डीएनए ' की स्वरलहरिया दिलों की धड़कन बढ़ाने के लिए फ़िज़ा में तैर रही होंगी। तो कोलंबियाई सुपरस्टार शकीरा और बर्ना बॉय का ' दाई दाई ' गीत आपके उत्साहवर्धन के स्टूडियों में गूंज रहे होंगे। इन पर थिरकते खिलाड़ी भी होंगे और दर्शक भी।

यहां राष्ट्र तो उपस्थित होंगे ही बल्कि पूरे के पूरे महाद्वीप अपनी विशिष्ट शैली के साथ उपस्थित होंगे। आर्यन प्रजाति और दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होने का बोध लिए शारीरिक बनावट में लंबे,शक्तिशाली पावर गेम का नियंता यूरोप होगा। साम्यवाद के बैनर तले बना मानस और कारीगरों वाला हुनर लिए कलात्मक खेल दिखाता दक्षिण अमेरिका होगा। कठिन और दुरूह भूगोल,निर्धनता, आर्थिक बदहाली और दुनिया के भीषण गृह युद्धों से उद्भूत कठिनतम परिस्थितियों से पाई जिजीविषा वाला, कभी हार ना मानने का अफ्रीकी संघर्ष होगा। गरम और उमस भरी जलवायु से उत्पन्न अलसाया सा, धीमा सा एशिया होगा। और अपने अकड़ और हेकड़ी से भरा  स्वभाव और रफ टफ खेल लिए उत्तरी अमेरिका भी होगा।

यहां अपनी टीम के लिए विभिन्न मूल,जाति, प्रजाति,संस्कृतियों और देशों के भेदभाव भुलाता सांस्कृतिक समभाव होगा। एकता होगी। भाई चारा होगा। यहां अपनी टीमों के समर्थन में उग्र राष्ट्रवाद,झगड़े ,दंगे और बैर, वैमनस्य भी होगा।

यहां केवल खेल भर नहीं होगा। फुटबॉल भर भी नहीं होगा। बल्कि यहां राजनीति होगी। कूटनीति होगी।  अर्थव्यवस्था होगी। शिद्दत के साथ बाज़ार खड़ा होगा। सॉफ्ट पावर होगी। अधिकाधिक समावेशी खेल और समाज बनाने के उद्देश्य से 32 के बजाय 48 टीमें होंगी। और ग्रीनलैंड और तमाम मुद्दों के मद्देनजर बायकॉट के प्रयास और अपीलें  भी होंगी। 

इस आयोजन के कारण पर्यावरण का पहुँचते नुक़सान का मुद्दा उपस्थित होगा। कड़े वीजा और आव्रजन नियमों के कारण समर्थकों के अमेरिका में प्रवेश का विरोध होगा। महंगे टिकटों की मार से प्रभावित खेल प्रेमी होंगे। अमेरिका और मेक्सिको में चरमपंथियों से सुरक्षा का सवाल मुंह बाए खड़ा होगा।

सोमालिया के शीर्ष फीफा फुटबॉल रेफरी उमर अब्दुलकादिर अर्टान को आने से रोकने वाला असंवेदनशील अमेरिकी प्रशासन सवालों के कटघरे में खड़ा होगा। और अपने तीनों लीग मैच अमेरिका में खेलने वाली ईरान की टीम को अमेरिका में ना रुकने देने वाला धृष्ट और बदगुमान राष्ट्रध्यक्ष भी होगा।

फुटबॉल का जुनून होगा। इन सब के बीच फुटबॉल की श्रेष्ठता के लिए  104 मुकाबले होंगे। और एक चैंपियन होगा। 

यानी कि फुटबॉल खेल के भीतर एक पूरी की पूरी भरी पूरी दुनिया समाई होगी।

 हां भारत में इस आयोजन के देखने के लिए जी टीवी 

नए नए लॉन्च हुए स्पोर्ट्स चैनल होंगे। और इसे देखने के लिए 799 रुपये का एक रिचार्ज होगा।

और क्या होगा?

अपने देवता मेस्सी और देवथान अर्जेंटीना  की जीत की कामना लिए

विकल्प के तौर पर पेले और गरींचा की थाती के लिए और नेमार के लिए ब्राजील की जीत की कामना लिए

और तीसरे विकल्प के तौर पर लीजेंड रोनाल्डो की विदाई के लिए पुर्तगाल की जीत की कामना लिए 

हम भी मौजूद होंगे।

फीफा विश्व कप 2026 डायरी ०६ : चैंपियनों का जादू

  दिन चाहे कोई भी हो,पहले से लेकर अंतिम तक,फुटबॉल प्रेमियों के लिए अच्छे फुटबॉल का आकर्षण कहां कम होता है! ये तो दिन ब दिन बढ़ता जाता है। सात...