Monday, 29 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 12:प्रथम चरण



 किसी भी प्रतियोगिता के दौरान अनेक ऐसे दृश्यों और क्षणों की निर्मिति होती है जो लोगों की स्मृति का एक बड़ा हिस्सा घेर लेते हैं। वे इतने प्रभावशाली होते हैं कि लोगों की स्मृति में हमेशा के लिए चस्पां हो जाते हैं। और जीत से निर्मित दृश्य या क्षण पृष्ठभूमि में चले जाते हैं या खो जाते हैं। अगर आप फीफा विश्व कप का इतिहास उठाकर देखेंगे तो पता लगेगा कि विश्व कप के सबसे यादगार पल वे शायद ही कभी होते हों जिनमें कोई टीम ट्रॉफी उठाती है। विश्व कप 2026 भी शायद ही इसका अपवाद बने। 

1950 में माराकांजो त्रासदी, 1994 में रॉबर्टो बैजियो द्वारा ब्राजील के खिलाफ चूका गया पेनल्टी शॉट,1986 में माराडोना का हैंड ऑफ गॉड गोल और गोल ऑफ सेंचुरी,2006 में जिनेदिन ज़िदाने का हेड बट,2014 में ब्राजील की सेमीफाइनल में जर्मनी से 1-7 हार जैसे कितने ही क्षण हैं, जो जीत से ज्यादा स्मृति में जगह घेरते हैं,और कहीं गहरे पैठ जाते हैं।

प्रतियोगिता का पहला चरण लीग स्टेज समाप्त हो चुका है। 48 में से 12 टीमें घर वापस जा चुकी हैं। और नॉक आउट स्टेज की 32 टीमें और उनके 16 मुकाबले तय हो चुके हैं। फीफा विश्व कप के इस पहले चरण (लीग स्टेज) के समाप्त होते ना होते खूबसूरत और शक्तिशाली दृश्यों की निर्मिति हो चुकी है, जो लोगों के जेहन में उतर चुके हैं, और स्थायी जगह बना चुके हैं।

एक

प्रतियोगिता शुरू होने से पहले इसकी सफलता पर कई प्रश्नचिह्न लगे थे। अनेक विवादास्पद मुद्दे,उनका विरोध और प्रतियोगिता के बायकाट की अपील,कड़े आव्रजन नियम,टिकट घोटाला व टिकटों के बेतहाशा बढ़े हुए दाम और उत्तरी अमेरिका की भीषण गर्मी जैसे कुछ ऐसे कारण थे जिनकी वजह से इसकी सफलता को संदेह की नजर से देखा जा रहा था। लेकिन फुटबॉल की लोकप्रियता ने इन सभी कारणों को बहुत पीछे छोड़ दिया और अमेरिका में इस आयोजन ने लोकप्रियता के नए मानक स्थापित किए।

 16 जून को विश्व कप के इतिहास में किसी एक दिन में स्टेडियम में उपस्थित दर्शकों की संख्या का एक नया रिकॉर्ड बना,32 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर। उस दिन उपस्थित दर्शकों की संख्या 2 लाख 81 हज़ार थी। उसके 6 दिन बाद 22 जून को चार स्टेडियमों में दर्शकों की कुल संख्या 2 लाख 88 हज़ार तक पहुंच गई। ये इस महा आयोजन की सफलता के सबसे प्रामाणिक प्रतिमान हैं।

स्टेडियमों के भीतर ही नहीं बाहर भी इसी तरह के दृश्य बने। टीमों के समर्थकों ने मैच के आयोजन शहरों में शानदार मार्च के अद्भुत दृश्यों की निर्मिति की। इन शहरों की सड़कों के दौड़ती भागती जिंदगी के नीरस उबाऊ दृश्यों को इन भाग लेने वाली टीमों के समर्थकों ने उत्साह,उमंग और जोश के रंगीन नजारों में बदल दिया। फीफा अधिकारियों के अनुसार केवल पहले चरण की समाप्ति के बाद इन फ़न फेस्टवलों में भाग लेने वाले समर्थकों की संख्या 20 लाख के पार हो गई है। ये एक आश्चर्यचकित कर देने वाला आंकड़ा है।

दो

मैदान से बाहर जो दृश्य दर्शक अपने उत्साह और ज़ुनून से बना रहे थे, मैदान में वही काम खिलाड़ी अपने खेल से कर रहे थे। इस बार पहली बार इतनी बड़ी संख्या में टीमें विश्व कप फाइनल्स में भाग ले रही हैं। 32 के मुकाबले इस बार 48 टीमें भाग ले रहीं हैं। आशंका थी कि इससे बहुत सारी कमजोर टीमों की भागीदारी होगी और इसका असर खेल की गुणवत्ता और प्रतियोगिता की साख और स्तर पर पड़ेगा। पर ये आशंका निर्मूल सिद्ध हुई।

इस विश्व कप की अब तक की सबसे सुंदर कहानी केप वर्डे की टीम ने लिखी। केप वर्डे अटलांटिक महासागर में अफ्रीका के पश्चिमी तट से लगभग 600 किलोमीटर दूर 10 सोलोमन द्वीप एक खूबसूरत देश। आबादी केवल पांच लाख। उसने अपने पहले ही मैच में स्पेन के साथ गोलरहित ड्रॉ खेलकर दुनिया को विस्मित कर दिया। 40 साल के गोलकीपर वोज़िन्हा गोल के सामने चट्टान की तरह खड़े हो गए कि स्पेन की एक ना चली। उन्होंने सात बचाव किए। वे राष्ट्रीय हीरो बन गए और पूरी दुनिया उनकी फैन। इंस्टा पर उनके फॉलोअर्स की संख्या अब  50 हजार से बढ़कर 17 मिलियन हो गई है।

दुनिया को लगा शायद ये एक संयोग हो। तब अगला मैच उरुग्वे के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला। केविन पिना ने भी 31 मीटर की दूरी से शानदार फ्री किक लगाकर देश का पहला विश्व कप गोल दागा और हेलियो वारेला ने बेंच से आकर दूसरे हाफ में बराबरी का गोल दागा। और उसके बाद सऊदी अरब से गोल रहित ड्रॉ। अपने ग्रुप में दूसरा स्थान और पहले ही विश्व कप में नॉक आउट में दौर में। ये छोटे से देश द्वारा लिखी गई फुटबॉल की एक बड़ी सी कहानी है।

एक और केवल डेढ़ लाख की आबादी और 444 किलोमीटर वर्ग में फैले छोटे से खूबसूरत कैरेबियन द्वीप कुराकाओ ने भी खेल के सुंदर दृश्य रचे। कुराकाओ ने टूर्नामेंट की शुरुआत जर्मनी से 1-7 से हार के साथ की थी। उस मैच में ही पहले हॉफ में स्कोर 1-1 था। उसने विश्व कप के पहले ही मैच में अपना पहला विश्व कप गोल किया। उसके बाद इक्वेडोर से अपना मैच गोलरहित ड्रॉ खेला। लेकिन कुराकाओ के लिए यह ड्रॉ भी ऐतिहासिक था। विश्व कप का पहला अंक अर्जित किया। ये उनके गोलकीपर एलॉय रूम का मैच था। एलोय रूम ने अपने खेल से कुराकाओ को मैच में बनाए रखा और टीम को ड्रॉ हासिल करने में मदद की। उन्होंने रिकॉर्ड 15 बचाव किए।

मिस्र ने न्यूजीलैंड को 3-1 से हराया। मिस्र की ये जीत इस मायने में ऐतिहासिक थी कि देश को विश्व कप में पहली जीत हासिल करने के लिए 92 साल इंतजार करना पड़ा था। इस जीत में लिवरपूल के मोहम्मद "मो" सलाह ने अहम भूमिका निभाई थी।

पहले दौर में ईरान के प्रदर्शन की चर्चा जरूर की जानी चाहिए। वे शत्रु देश में बहुत ही कठिन परिस्थितियों में खेल रहे थे जिन्हें फीफा से कोई मदद नहीं मिल रही थी। वे भले ही अगले दौर के लिए क्वालीफाई ना कर पाए हों लेकिन इतनी कठिन और होस्टाइल परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन अच्छा ही कहा जाएगा। उन्होंने बेल्जियम से गोलरहित ड्रॉ खेला। इसके अलावा मिस्र से 1-1 से और न्यूजीलैंड से 2-2 से ड्रॉ खेला। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ईरान को एक भी मैच न हारने के बावजूद ग्रुप स्टेज में ही टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। यह उस टीम के लिए एक दुखद अंत था जिसने बहादुरी से संघर्ष किया। कभी कभी भाग्य भी बहादुरी का साथ नहीं देता है।

ईरान की टीम को मैक्सिको के तिजुआना में बेस कैंप बनाना पड़ा था क्योंकि अमेरिका ने अपने यहां रुकने की अनुमति नहीं दी थी। जबकि उसके सारे मैच अमेरिका में थे और मैचों के लिए उसे लंबी यात्राएं करनी पड़ रही थी। कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के देश में प्रवेश पर कथित तौर पर रोक लगा दी गई है। 

स सबके बावजूद सोफी स्टेडियम में बेल्जियम के साथ 0-0 से ड्रॉ के बाद ईरान ने अपने व्यवहार से प्रशंसकों का दिल जीत लिया। रवाना होने से पहले ईरान ने लॉस एंजिल्स के आतिथ्य सत्कार के लिए और अपने प्रशंसकों को धन्यवाद देते हुए लॉकर रूम में एक  हस्तलिखित नोट छोड़ा "हम गर्व के साथ लॉस एंजिल्स आए, सम्मान के साथ प्रतिस्पर्धा की और गरिमा के साथ विदा हो रहे हैं।" इसी खेल भावना से खेल खेल रह पाते हैं।

विश्व कप के शुरुआत में एशियाई देशों ने अच्छा खेल दिखाया। पहले कई दिन कोई भी एशियाई टीम अपना मैच नहीं हारी। लेकिन जैसे जैसे प्रतियोगिता आगे बढ़ी एशियाई टीम पिछड़ती गईं। एशियाई फुटबॉल महासंघ से नौ टीमें ने विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया था लेकिन केवल जापान और ऑस्ट्रेलिया ही नॉकआउट चरण में पहुंचने में सफल रहे। ग्रुप स्टेज में जापान एशियाई फुटबॉल का सबसे सकारात्मक पक्ष रहा। कोच हाजिमे मोरियासु की जापानी टीम ने ग्रुप एफ में 5 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। उसने ट्यूनीशिया को 4-0 हराया और नीदरलैंड के साथ 2-2 से और स्वीडन से 1-1 से ड्रॉ खेला। अब राउंड ऑफ 32 में "ब्लू समुराई" का मुकाबला ब्राजील से होगा। दूसरी टीम ऑस्ट्रेलिया की है।

एशियाई टीमों के विपरीत अफ्रीकी टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया है और 10  अफ्रीकी टीमों में से 9 टीमें अगले दौर में पहुंच गई हैं। दक्षिण अमेरिका की 6 में से 5 टीमें, यूरोप की 16 में से 13 टीमें और CONCACAF क्षेत्र की 6 में से 3 टीमों ने नॉकआउट दौर में पहुंची हैं। यहां उल्लेखनीय है कि तीनों सह मेजबान देश अमेरिका,कनाडा और मेक्सिको अगले दौर में पहुंच गए हैं।

तीन

अगर विश्व का सबसे बड़ा खेल आयोजन हो रहा है और इसमें विश्व की सबसे बेहतरीन टीमें भाग ले रही हैं तो ज़ाहिर है कि दुनिया भर के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी और प्रतिभाओं का जमावड़ा भी वहां होगा ही। सारी दुनिया की निगाहें इन पर और इनके  प्रदर्शन पर लगी रहेंगी। ये सिर्फ अपने राष्ट्र की उम्मीदों का बोझ लिए ही यहाँ नहीं आते हैं,बल्कि दुनिया भर के प्रशंसकों की उम्मीदों का भार भी अपने कंधों पर धरे  आते हैं। लेकिन ये दबाव उन्हें और अधिक अच्छा करने की प्रेरणा देता है। वे इस बोझ तले दब नहीं जाते। यही बात उन्हें महान बनाती हैं। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी उम्मीदों और दबाव के बोझ तले नहीं दबते, बल्कि वे इसका भरपूर आनंद लेते हैं।

इस प्रतियोगिता में शामिल सभी महान खिलाड़ी यथा लियोनेल मेस्सी , क्रिस्टियानो रोनाल्डो, किलियन म्बाप्पे , एर्लिंग हालैंड , हैरी केन , विनीसियस जूनियर , लामिन यामल , माइकल ओलिस ऐसा ही कर रहे हैं। ये सारे सितारे यहां जबदस्त खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ ने शानदार शुरुआत की। कुछ की शुरुआत थोड़ी फीकी रही। और कुछ को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। 


बसे पहले बात मेस्सी की। वे अपना छठवां विश्व कप खेल रहे हैं। यूँ तो उनका पिच पर होना भर ही उनके चाहने वालों के लिए पर्याप्त होता,क्योंकि उनको लोग इस प्रतियोगिता में अंतिम बार देख रहे हैं। लेकिन फुटबॉल का ये जादूगर अविश्वसनीय रूप से कमाल दर कमाल किए जा रहा है। मेस्सी ने 2026 के विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत अल्जीरिया के खिलाफ एक शानदार हैट्रिक के साथ की। फिर मजबूत ऑस्ट्रियाई टीम के खिलाफ दो गोल दागे। दो मैचों में पांच गोल। जॉर्डन के विरुद्ध वे पूरे समय खेल कर अपने आंकड़ों को और अधिक अविश्वसनीय बना सकते थे। लेकिन मेस्सी अपने आप में अकेले हैं। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को तरजीह दी। वे साठ मिनट के बाद पिच पर आए और फ्री किक से एक शानदार गोल कर पुनः अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। वे इस इस विश्व कप में अब तक तीन मैचों में छह गोल कर चुके हैं। विश्व कप में कुल 19 गोल। विश्व कप के लगातार सात मैचों में गोल। उनकी ये एक बेमिसाल शुरुआत है। याद रखें कि मेस्सी 39 साल के हैं और वे विश्व के सबसे बड़े मंच पर अपने खेल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं।

शानदार शुरुआत करने वाले अन्य सितारे हैं किलियन म्बाप्पे, एर्लिंग हालैंड और हैरी केन। इन सभी ने अपने शुरुआती मैचों में दो-दो गोल दागे। घाना के खिलाफ इंग्लैंड के गोल रहित ड्रॉ में केन गोल करने में नाकाम रहे, वहीं म्बाप्पे और हालैंड ने इराक और सेनेगल के खिलाफ अपनी-अपनी जीत में दो-दो गोल दागकर शानदार प्रदर्शन जारी रखा। लेकिन ओलिसे ने अभी तक गोल नहीं किया है,पर निसंदेह वे फ्रांस के लिए शानदार खेल दिखाया है। वे फ्रांसीसी आक्रमण की सबसे मजबूत कड़ी हैं। डेंबेले ने भी नॉर्वे के खिलाफ शानदार हैट्रिक की।

दूसरी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लामिन यामल ने पहले मैच में कमजोर शुरुआत के बाद वापसी की। डीआर कांगो से मैच 1-1 से ड्रॉ के बाद रोनाल्डो आलोचनाओं का शिकार हुए। लेकिन अगले मैच में दो गोल दाग कर आलोचकों के मुंह बंद कर दिए। इसी तरह यामल ने भी केप वर्डे के खिलाफ कमजोर शुरुआत कर अगले मैच में अच्छा प्रदर्शन किया।

मोरक्को के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ में विनीसियस जूनियर ने शानदार प्रदर्शन से गोल कर एक महत्वपूर्ण अंक दिलाया। इसके बाद विनी ने हैती के खिलाफ भी उसी लय को बरकरार रखा और एक गोल करने के साथ-साथ एक बेहतरीन असिस्ट भी किया।

इस पहले चरण में स्टार खिलाड़ी अपने रंग में आ चुके हैं। और अगले दौर के लिए अपने पैरों का जादू दिखाने को तैयार हो रहे हैं।

चार


ये चरण गुलाबी रंग में रंगा नजर आया। गुलाबी रंग को सामान्यतः लड़कियों के साथ जोड़ा जाता है। लेकिन इस विश्व कप में ये रंग अपना जलवा बिखेर रहा है। अब इसे अघोषित रूप से इसे विश्व कप का आधिकारिक रंग माना जा रहा है। जूते बनाने वाले सभी प्रमुख कंपनियों नाइकी, एडिडास, प्यूमा सभी ने इस विश्व कप में अपने नए कलेक्शन लॉच किए हैं और सभी ने खिलाड़ियों को गुलाबी रंग के जूते उपलब्ध कराए हैं। यही कारण है कि इस समय ज्यादातर टीमों के खिलाड़ी चमकीले गुलाबी रंग के जूतों में नजर आ रहे हैं। और फुटबॉल मैदान गुलाबी रंग में रंगे नज़र आ रहे हैं।  इन टीमों में इंग्लैंड, जापान, अर्जेंटीना,पुर्तगाल,फ्रांस और मेजबान यूएस की टीम भी शामिल हैं। हालांकि मेस्सी सफेद रंग के जूतों में ही नजर आ रहे हैं। 

दरअसल बरसों के शोध और मार्केटिंग अनुभव के बाद लगभग सभी जूते बनाने वाली कंपनियां इस निष्कर्ष पर पहुँची हैं कि फुटबॉल मैदान पर ब्राइट पिंक अन्य किसी भी रंग के मुकाबले अधिक प्रभावी होते हैं। क्योंकि घास के हरे रंग के कंट्रास्ट में पिंक कलर टीवी,मोबाइल पर हर जगह अधिक चमकता और ध्यान खींचता है।

बस अब देखना है कि नॉक आउट में ये पिंक किसे सूट करता है। कौन जीत की पिंकी आभा लिए आगे बढ़ता है और किसके चेहरे हार की टीस से मलिन हो अपनी गुलाबी आभा खो बैठेंगे।

पांच

विश्व कप का सबसे विवादास्पद नियम हाइड्रेशन ब्रेक विश्व कप के इस पहले चरण में फुटबॉल खिलाड़ियों और विशेषज्ञों के बीच सबसे चर्चित विषय बना रहा। इस बार दोनों हॉफ में एक हाइड्रेशन ब्रेक का प्रावधान किया गया है। दरअसल इसके पीछे असल मकसद विज्ञापनों के लिए समय निकालना है। लेकिन इस ब्रेक का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि इससे खेल की रिदम, उसकी लय भंग होती है। खिलाड़ियों की भी और दर्शकों की भी। विवाद का विषय ये इसलिए बना कि इस ब्रेक को वहां भी दिया जा रहा है जहां इसकी  जरूरत नहीं है। जहां मौसम अपेक्षाकृत काफी ठंडा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले तो इसे दिया ही नहीं जाना चाहिए। अगर दिया भी जाए तो वहां जहां मौसम काफी गर्म है। यानी , जब मौसम और परिस्थितियां इसकी मांग करती हैं तो ही हाइड्रेशन ब्रेक लेना समझदारी भरा कदम है। लेकिन वैंकूवर जैसे स्थानों पर जहाँ  तापमान 17 डिग्री के आस पास रहता है, इस ब्रेक का क्या ही औचित्य हो सकता है।

खेलों के बारे में नेल्सन मंडेला का एक बहुत प्रसिद्ध कथन है "खेलों में लोगों को इस तरह एकजुट करने की शक्ति है जैसी शायद ही किसी और चीज में हो।” स्टेडियमों के अंदर और बाहर से जिस तरह की खूबसूरत तस्वीरें आ रही हैं, वे मंडेला के कथन की पुष्टि करती प्रतीत होती हैं। दुनिया के कोने कोने से अपनी टीमों के समर्थन में लोग इन तीन मेजबान देशों में आ रहे हैं जिसमें हर धर्म,नस्ल, देश और उम्र के लोग शामिल हैं। यहां वे मेजबान देशों की सांस्कृतिक विशेषताओं का आनंद उठा रहे हैं है,आत्मसात कर रहे है, जश्न मना रहे हैं। आज की युद्धग्रस्त और विभाजित दुनिया में इसी की सबसे ज्यादा जरूरत है।

फिलहाल फीफा विश्व कप के 17 दिन के इस पहले चरण ने भविष्य की पीठ पर शानदार फुटबॉल खेल की इबारत लिख दी है। जिसे अगले चरण में एक महाकाव्य में बदल जाना है।



Sunday, 28 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 12: उभरता सितारा यान डियोमांडे




अफ्रीका के और अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों ने दुनिया में फुटबॉल खेल और फुटबॉल खेल की दुनिया बदल दी है। भौगोलिक दुश्वारियां, उपनिवेशीय शासन द्वारा छोड़ी गई बदगुमानिया,सैन्य शासकों और तानाशाहों के बदमग्जियां,उनसे छुटकारा पाने के लिए अनवरत गृहयुद्ध और इन सब के चलते घोर अव्यवस्था और भयावह निर्धनता के बीच जीने के लिए दुर्दमनीय जिजीविषा और अंतिम सांस तक हार ना मानने के धैर्य और हौसले की जरूरत होती है। और अफ्रीकी खिलाड़ी जब इन्हीं खूबियों और जीवट के साथ खेल के मैदान में उतरते हैं,तो वे दुनिया के सबसे बेहतरीन एथलीट बन जाते हैं। शायद यही कारण है कि मध्यम और लंबी दूरी के दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली व प्रसिद्ध धावक और दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली फुटबॉलर अफ्रीका से ही आते हैं।

प्रतिभाएं जो डार्क कॉन्टिनेंट रह जाती हैं,उनमें से कुछ के नाम रोशन हो बुलंदियों के आसमान में सितारे से टंक जाते है, बाकी गुमनामियों के अंधेरे में खो जाते हैं। लेकिन उनमें से भी बहुत सारे एक बेहतर जीवन और सुंदर भविष्य का सपना लिए,जीवन का जोखिम उठाए, अपनी धरती से बहुत-बहुत दूर दुनिया के खुशहाल मुल्कों में जा पहुंचते हैं। जीवन के एक नए सफर पर। इनमें से भी कुछ केवल खुशहाल जीवन तक सीमित रह आते हैं और कुछ शोहरत की बलंदी पर जा पहुंचते हैं। ऐसी ही बलंदी पर पहुंचने वाला एक अफ्रीकी सितारा है आइवरी कोस्ट का 19 साल का विंगर यान डियोमोंड़े।

अमेरिका में चल रहे 23वें फीफा कप में 15 जून को फिलाडेल्फिया में आइवरी कोस्ट और इक्वेडोर का मुकाबला था। इसमें आइवरी कोस्ट ने इक्वेडोर को 1-0 से हरा दिया। इस पूरे मैच में यान डियोमोंड़े ने अपनी शानदार ड्रिबल और गति से इक्वेडोर की रक्षापंक्ति को दबाव में रखा। उन्हें 'मैन ऑफ़ द मैच' घोषित किया गया। 19 साल के युवा का ये फीफा विश्व कप में स्वप्निल आगाज़ था। इससे पहले उन्होंने बुंदेसलीगा में आरबी लीपजिग की और से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 13 गोल और 9 असिस्ट की। इस प्रदर्शन के आधार पर उन्हें 'रूकी ऑफ द ईयर' का खिताब भी मिला। अब वे मौजूदा ट्रांसफर विंडो में एक सबसे चर्चित खिलाड़ी हैं जिन्हें लीवरपूल और सेंट जर्मन जैसे फुटबॉल क्लब साइन करना चाहते हैं।

यान डियोमोंड़े का कैरियर इस समय जितना चमकदार है,उससे कहीं अधिक कड़े संघर्ष और कठिनाइयों का उनका यहां तक पहुंचने का सफर रहा है। उनकी इन ऊंचाइयों तक पहुंचने और सफलता की कहानी दरअसल गरीबी,संसाधनों की कमी,परिवार से विछोह,कड़े परिश्रम और संघर्ष की कहानी है। ये कहानी एक बहन के एक अटूट विश्वास को बनाए रखने की कहानी भी है और उससे किए गए वायदे को निभाने की कहानी भी है। ये खुली आंखों से देखे गए सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी है।

एक कहानी जो आइवरी कोस्ट के सबसे बड़ी आबादी वाले शहर आबिदजान के गरीब और बाहरी इलाके सिकोजी में सन 2006 से शुरू होती है। जहाँ यान का जन्म होता है और बचपन शहर की भीषण गर्मी और धूल भरी तेज़ हवाओं के बीच कच्ची पक्की सड़कों पर नंगे पैर फुटबॉल की सरगम गाते बीतता है। फुटबॉल एक ऐसा खेल जो गरीब से गरीब की मन की भाषा पढ़ लेता है। एक ऐसा खेल जिसकी लय की भाषा हर कोई सीख लेता है।

एक तरफ यान डियोमोंड़े का फुटबॉल प्रेम और उसकी बहन रोक्सेन का उसकी प्रतिभा में अटूट विश्वास है। तो दूसरी तरफ एक छोटे से घर में 25 सदस्यों के साथ रहवास है। गरीबी है। संसाधनों को अभाव है। पर फुटबॉल का प्रेम ऐसा है कि रात को सबके सो जाने के बाद धीमी आवाज में टीवी पर फुटबॉल देखते हुए फुटबॉल के हुनर को जानने की,सीखने की कोशिश करते बड़ा होता है।

दरअसल वो एक द्वैत को जीते हुए बड़ा हो रहा होता है। एक तरफ कठोर यथार्थ है। दूसरी तरफ रोमानी स्वप्न। लेकिन उसका दृढ़ संकल्प और उसमें उसकी बहन का विश्वास ऐसा है कि रूक्ष यथार्थ भी उसके सपनों को जला नहीं पाता। वो सीआर सेवन का दीवाना है। अपनी जर्सी पर नंबर सात अंकित कर लेता है,पर उसकी स्टाइल है कि दोस्त उसे रॉबर्टो कार्लोस कह कर पुकारते है। पर इससे फर्क क्या ही पड़ना था। दोनों भाई बहन फ्रांस जाने,सीआर सेवन जैसा सबसे बड़ा फुटबॉलर बनने, एक कार, एक बड़ा सा घर और एक लग्जरी जीवन जीने के सपने संजोते रहते हैं जिसमें बहन को कोई चिंता नहीं करनी थी।

उधर वे सपने देखते हुए बड़े हो रहे होते हैं और इधर उनके पिता परिवार का साथ छोड़ देते हैं। वे परिवार को छोड़कर फ्रांस चले जाते हैं। यान डियोमोंड़े का लक्ष्य और दुष्कर हो आता है। लेकिन वो हार नहीं मानता। अब वो घर परिवार से दूर घाना सीमा के समीप एक फुटबॉल अकादमी में प्रवेश लेता है। उस समय उसकी उम्र नौ वर्ष होती है। इस उम्र में परिवार से दूर जाना  आपसे बड़े त्याग की अपेक्षा रखता है। वो ऐसा करने सफल होता है। जीवन की दुश्वारियां वहां भी कम ना थी। वे और उनके साथी अक्सर पेट भरने के लिए खेतों से आलू चुराया करते थे। जिसे वे आज बैंक लूट की संज्ञा देते हैं।

इन्हीं दुश्वारियों में वे फुटबॉल के गुर सीखते बड़े हो रहे थे। और फिर 15 साल की उम्र में उनकी असाधारण प्रतिभा उन्हें यूएस के फ्लोरिडा स्थित डीएमई फुटबॉल अकादमी ले आती है। घर से हजारों किमी दूर जाना और रहना एक किशोर के लिए बहुत कठिन था। यहां बिल्कुल अलग दुनिया थी। उन्हें अंग्रेजी बिल्कुल नहीं आती थी। सांस्कृतिक अलगाव था। लेकिन कोई भी कठिनाई इतनी बड़ी नहीं होने वाली थी जो उन्हें उनके संकल्प से डिगा सके। वे राह में आने वाली हर कठिनाई से और ज्यादा निखरते चले गए। यहां वे एक खिलाड़ी के रूप में ही परिपक्व हो रहे थे,बल्कि एक व्यक्ति के रूप भी अनुभवी हो रहे थे।

अब उन्होंने यूरोप के क्लबों में अपना भविष्य तलाश करने की कोशिश की। उन्होंने बोर्नमाउथ,चेल्सी,रेंजर्स, ओलंपियाकोस और क्रिस्टल पैलेस जैसे क्लबों में ट्रायल दिया और समय बिताया। लेकिन अभी भी कठिनाइयाँ खत्म होने का नाम नहीं ले रही थीं। सब जगह उनकी प्रतिभा की प्रसंशा तो खूब होती लेकिन कोई अनुबंध उन्हें ना मिल पाता। इधर उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई और अंततः उन्हें वापस अपने देश लौटना पड़ा। बिना सफलता के घर लौटना उनके लिए बड़े दुख का वायस था। उनका विश्वास डगमगा रहा था। लेकिन उनकी बहन का उनकी प्रतिभा में अटूट विश्वास था।

और तब जनवरी 2025 में उन्हें स्पेनिश क्लब लेगनेस से उनका करार हुआ। लेकिन उनका करार पूरा होने से पहले ही उनकी बहन का निधन हो गया। ये उनके लिए सबसे बड़ा दुख था। उन्होंने वो बहन खो दी थी जिसने उनकी प्रतिभा को उस समय पहचान लिया था और उस पर आंख मूंदकर विश्वास किया था जब दुनिया भर के कोच,मैनेजर और उनके प्रसंशक उनका नाम तक नहीं जानते थे। लेकिन उन्होंने अपने सबसे बड़े दुख को प्रेरणा में बदल दिया। उसके बाद से उनका हर गोल अपनी बहन के लिए था।

उस बसंत जब उन्होंने एस्पियोनल के खिलाफ अपने पेशेवर करियर का पहला गोल किया तो उनकी आंखों से पानी बरस पड़ा। ये उनकी बहन की याद थी। उन्होंने कहा कि "मेरा सपना था कि मैं उसे खुश और गौरवान्वित करूँ।"

उनकी बहन का जाना उनके लिए उनके एक हिस्से का  अलग हो जाना था। अब उनके लिए खेल के मायने बदल गए हैं। भौतिक सुख उनके लिए अब महत्वहीन हो गए हैं जिसके सपने उन्होंने कभी बहन के साथ देखे थे। अब उनका हर मूव,हर पास,हर गोल बहन की स्मृति बचाए रखने का, उनमें बहन के विश्वास को बनाए रखने का जरिया भर रह गया है।

यान डियोमोंड़े का आबिदजान की डामर वाली कठोर,उष्णता और धूल भरी गलियों से फिलाडेल्फिया के एयरकंडीशंड स्टेडियम और मखमली हरी घास के मैदान तक का सफर एक तिलस्मी कथा सी प्रतीत होती है। वे अब एक फुटबॉल जगत का चमकता सितारा हैं जिसका भविष्य उज्जवल है। 

उनकी सफलता की कहानी युवा फुटबॉलर के लिए प्रेरणास्रोत का काम करती रहेगी। ऐसी अद्भुत अनगिनत कहानियां मिलकर फुटबॉल खेल का महाकाव्य रचती हैं और उसे अधिक सगीतात्मक,खूबसूरत और स्वीकार्य बनाती है।


Tuesday, 23 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी_11


विश्व कप का बारहवां दिन। 


यहां टीमों के बीच स्पर्धा है। यहां खिलाड़ियों के बीच स्पर्धा है। जीत है। हार है। रिकार्डों का बनना है। रिकार्डों का टूटना है। एक ऐसा दिन जिसमें जितना कड़ा संघर्ष टीमों के बीच था,उससे ज्यादा संघर्ष खिलाड़ियों के स्टेटस,उनके रिकॉर्डों के बनने बिगड़ने ,उनकी प्रतिष्ठा के ऊपर नीचे होने का था। एक बार फिर अर्जेंटीना,फ्रांस और नॉर्वे की टीम ही मैदान में नहीं थीं,बल्कि तीन सुपर स्टार मेस्सी,म्बापे और हालैंड भी मैदान में थे। सुपर टीमें थी। उनका जादू था। सुपर स्टार थे । उनका जादू था। और पूरी दुनिया में उनके समर्थक थे जो उस जादू को अपनी आंखों से देख रहे थे।

अर्जेंटीना ने ऑस्ट्रिया को 2-0 हराया। फ्रांस ने इराक़ को 3-0 से हराया। नॉर्वे ने सेनेगल को 3-2 से हराया। दिन के आखिरी मैच में अल्जीरिया ने जॉर्डन को 2-1 से हराया। अर्जेंटीना,फ्रांस और नॉर्वे की टीम नॉक आउट दौर के लिए आगे बढ़ी। नॉक आउट दौर की 6 टीम पक्की हुई।

लेकिन यहां लोगों की रुचि टीमों में कहीं अधिक अपने चहेते स्टार खिलाड़ियों के परफॉर्मेंस पर थी। टीमों के मैचों के परिणाम लोगों के अनुमान में लगभग सुनिश्चित ही थे। बशर्ते कोई बड़ा उलटफेर ना हो जाता। जिज्ञासा स्टार खिलाड़ियों के प्रदर्शन की थी। और उन्हें इस बार भी निराश नहीं होना पड़ा। यहां पिछले दौर की तरह तीनों स्टार खिलाड़ियों का जलवा कायम रहा। उन्होंने ठीक वहा से शुरू किया जहां से उन्होंने पिछले दौर को खत्म किया था।

सबसे बड़ा सवाल ये था क्या मेस्सी की गोल कर पाएंगे ।क्या वे क्लोसे से आगे निकल पाएंगे। क्या वे विश्व कप का 17 वाँ गोल कर पाएंगे। इसका जवाब मार्च के नवें मिनट में ही मिला। लोगों के दिलों की धड़कने बढ़ी। जब मेस्सी का 17 वाँ गोल निश्चित मान बैठे तो मेस्सी ने पेनाल्टी बाहर मार दी। आखिर मेस्सी भी है तो मानव ही ना। फिर उसने ये पेनाल्टी पहली बार मिस थोड़े ही ना की थी। इससे पहले भी दो बार विश्व कप में कर चुके थे। विश्व कप में वे सात में से अब तीन पेनाल्टी जाया कर चुके हैं।

लेकिन वो जादूगर ही क्या जो अपना जादू ना दिखाए।

मेस्सी ने मैच के 38वें मिनट में एक शानदार पास-एंड-गो मूव के जरिए गोल किया। यह गोल शानदार टीम वर्क और रणनीति का बेहतरीन उदाहरण था। फाकुंडो मेडिना ने बॉक्स के अंदर  गेंद थियागो अल्माडा को दी लेकिन उसने वो गेंद छोड़ दी मेस्सी के लिए और मेस्सी ने गेंद गोल में पहुंचा दी। वे क्लोसे को पीछे छोड़ रहे थे और विश्व कप के लगातार छह मैचों में स्कोर करने के रिकॉर्ड की बराबरी कर रहे थे। मैच समाप्त होने से पूर्व इंजरी टिमी में एक गोल और किया। वे 18 गोल पर पहुंचे।

उसके बाद दो अलग अलग मैचों में म्बापे और हालैंड ने भी अपना जादू बरकरार रखा। दोनों ने ही अपनी टीम के लिए दो दो गोल किए। म्बापे अब 16 पर पहुंच चुके हैं। ये एक नई प्रतिद्वंदिता है। इस बार रोनाल्डो की जगह म्बापे हैं। लेकिन मेस्सी वहीं हैं।

म्बापे और हालैंड दोनों ही गोल मशीन हैं। वे क्रिस्टियानो रोनाल्डो की परम्परा के खिलाड़ी है। वे पावर और गति में जीते हैं। ये उनका अर्जन है। ये तकनीक और विज्ञान का उत्पाद है। वे अपने खेल से आपको रोमांच से भर देते है,भय उत्पन्न होने की सीमा तक। वे अपने शॉट्स में ताकत का बेमिसाल उपयोग करते हैं। उनके खेल से आप रोमांचित हो सकते हो,आनंदित नहीं हो सकते। उससे रस नहीं बरसता। 

तो फिर वो आनंद कहां मिलता है। वो मेस्सी के पैरों से टपकता है। मेस्सी के खेल से बहता है। वे रोमांचित नहीं करते,उत्तेजना नहीं पैदा करते। मेस्सी ने खेल को अर्जित नहीं किया है। वो उनमें कुदरती तौर पर है। प्रतिभा जो जन्म से साथ होती है। स्वाभाविक। उनके खेल में कोमलता है। सहजता है। स्थायित्व है। वे बॉल को ऐसे बरतते हैं कि वो उनकी दोस्त है।

मेस्सी और दूसरी और म्बापे,हॉलैंड या फिर रोनाल्डो के खेल का अंतर कला और विज्ञान का अंतर है। सहजता और गति का अंतर है। कोमलता और पावर का अंतर है। ये स्वाभाविकता और कृत्रिमता का अंतर है। ये लोक और शास्त्रीयता का अंतर है। खेल के जादूगर सभी है पर उनके जादू की प्रॉपर्टीज़ अलग है।मैथड अलग हैं। 

तो अभी बहुत समय है। एक और महीना बाकी है। बस इनके जादू के बरसते रंगों से मन को रंगते रहिए।



Monday, 22 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी_10

 



फीफा विश्व कप 2026 का ग्यारहवां दिन। कल भी संघर्षपूर्ण मुकाबले। शानदार जीत भी और चकित कर देने वाले परिणाम भी। इन मुकाबलों के चलते कुछ आगे बढ़ने के रास्ते तय हुए। कुछ की वापसी सुनिश्चित हुई।  तो कुछ के भविष्य अधर में लटक गए। मैदान में खिलाड़ियों के संघर्ष और स्टेडियम में दर्शकों की मैदान में चल रही गतिविधियों से संगति के रंग बिखरते रहे। हर्ष-विषाद,आस-निराश, होनी-अनहोनी के बीच झूलते खिलाड़ी और उनके समर्थक दिन का हासिल। और इन सब के केंद्र में था फुटबॉल का खेल और उसके विश्व कप का ग्यारहवां दिन।

एक

स्पेन ने पिछले मैच की निराशा को झटका और उम्मीद का दामन थाम खेल की लय को पकड़ा। और फिर लय को टूटने ना दिया। पिछले मैच में स्पेन की टीम पहली बार विश्व कप में क्वालीफाई करने वाली एक छोटे से देश की टीम से पार नहीं पा सकी थी। उसे केप वर्डे के साथ मैच 0-0 पर अनिर्णीत समाप्त करना पड़ा था। लेकिन आज सऊदी अरब को 4-0 से हराकर बताया क्यों उसे इस बार के संभावित विजेताओं में बताया जा रहा है।

मैच की शुरुआत में ही लामिन यामाल ने डैनी ओल्मो के शानदार पास पर 10वें मिनट में गोल दागकर स्पेन को बढ़त दिला दी। इस गोल के साथ ही वह स्पेन के विश्व कप इतिहास में सबसे कम उम्र के गोल करने वाले खिलाड़ियों में से एक बन गए। सऊदी अरब के पास स्पेन के आक्रमण का कोई जवाब नहीं था। स्पेन के मिकेल ओयार्ज़ाबल ने 30 वें मिनट में कॉर्नर पर एक और गोल कर बढ़त दुगुनी कर दी। तीन मिनट बाद ही स्पेन ने एक शानदार मूव बनाया और ओयार्ज़ाबल ने एक और गोल कर स्पेन को 3-0 की बढ़त दिला दी।

सऊदी अरब की वापसी की सारी उम्मीदें दोबारा खेल  शुरू होने के चार मिनट बाद ही उस समय खत्म हो गईं जब डिफेंडर हसन अल्तम्बक्ती ने गेंद अपने ही गोल में डाल दी और स्कोर स्पेन के पक्ष में 4-0 हो गया। स्पेन की आज की सऊदी अरब पर जीत पहले मैच में केप वर्डे के खिलाफ ड्रॉ के बाद हुई आलोचना का करारा जवाब है। इस जीत के साथ स्पेन चार अंकों के साथ ग्रुप में शीर्ष पर पहुंच गया।

उधर केवल डेढ़ लाख आबादी वाले देश केप वर्डे ने अपने पहले विश्व कप में कल भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उसने दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे के साथ 2-2 से ड्रॉ खेलकर एक और महत्वपूर्ण अंक अर्जित किया। उरुग्वे से ड्रॉ खेलकर केप वर्डे ने बताया कि स्पेन के साथ गोलरहित ड्रॉ खेलना महज इत्तफाक या तुक्का नहीं था। केप वर्डे पूरी टीम भरे पूरे आत्मविश्वास से खेल रही थी।

आज के उनके खेल की विशेषता ये थी कि आज उन्होंने स्पेन के खिलाफ रक्षात्मक खेल के बजाए आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि उनके पास एक बेहतरीन रक्षा पंक्ति ही नहीं,बल्कि एक बेहतर आक्रमण भी है और उन्हें हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। विशेष रूप से उन्होंने काउंटर अटैक से कई शानदार मूव बनाए।

पहले बढ़त केप वर्डे ने ही ली, केविन पिना के गोल से। लेकिन मैक्सी अरौजो और अगस्टिन कैनोबियो ने उरुग्वे के लिए दो गोल कर उरुग्वे को आगे कर दिया। दूसरे हॉफ में हेलियो वारेला ने दूसरा गोलकर केप वर्डे को बराबरी पर ला दिया। वे अंत तक रक्षात्मक नहीं हुए। वे लगातार आक्रमण करते रहे और अंतिम क्षणों तक जीत के लिए खेलते रहे। अंततः मैच बराबरी पर छूटा। केप वर्डे के लिए ये एक और यादगार मैच बन गया

दो

दिन का अप्रत्याशित परिणाम केवल मियामी स्टेडियम में ग्रुप एच के उरुग्वे और केप वर्डे के मध्य खेले गए मैच के परिणाम से ही नहीं आया, बल्कि बी सी प्लेस स्टेडियम वैंकूवर से भी आया। यहां खेले गए ग्रुप जी के एक मैच में  मिस्र ने न्यूजीलैंड को 3-1 से हराकर फीफा विश्व कप में अपनी पहली जीत हासिल की।

मैच के पहले हॉफ में न्यूजीलैंड की टीम ने खेल पर  प्रभावी नियंत्रण रखा। गेंद पर यथासंभव नियंत्रण रखा  और लंबे शॉट लगाए। ओशिनिया टीम के फिन सुरमन ने 15वें मिनट में बैक अहमद फतूह को चकमा देकर एक जोरदार हेडर से गेंद नेट में डाल दी। ये बढ़त न्यूजीलैंड ने पूरे हाफ में कायम रखी। लेकिन मिस्र ने दूसरे हाफ में शानदार वापसी की। 58वें मिनट में मोहम्मद हनी के दाहिनी ओर से आए क्रॉस पर मुस्तफा जिको ने हेडर से गोल करके स्कोर बराबर कर दिया। इसके नौ मिनट बाद आखिरकार सालेह ने दर्शकों की लंबी प्रतीक्षा का अंत किया और उन्हें उत्साह से भर दिया,जब दाहिनी ओर से आगे बढ़ते हुए जिको के साथ वन-टू पास खेलते हुए गेंद को दूर के कोने में डाल दिया। सालेह ने 81वें मिनट में पुनः गोल करने की कोशिश की, लेकिन उनका ये शॉट गोल के ऊपर से निकल गया। इस शॉट के परिणामस्वरूप मिस्र को कॉर्नर मिला। सालेह ने सब्स्टीट्यूट ट्रेज़ेगुएट को पास दिया और उन्होंने डाइव लगाकर हेडर से गोल कर दिया। 

मिस्र की टीम अब न्यूजीलैंड को 3-1 से हराकर चार अंकों के साथ ग्रुप शीर्ष पर पहुंच गई है।

ग्रुप जी का दूसरे मैच बेल्जियम और ईरान के बीच गोल रहित ड्रॉ रहा। बेल्जियम ने मैच पर काफी हद तक नियंत्रण बनाए रखा, लेकिन ईरानी गोलकीपर अलीरेज़ा बेइरानवंद ने शानदार प्रदर्शन किया। 66वें मिनट में नाथन न्गोय को रेड कार्ड मिलने के बाद बेल्जियम की मुश्किलें और बढ़ गईं। लेकिन ईरान इस  बढ़त का फायदा नहीं उठा सका। 

अब बेल्जियम और ईरान दोनों के दो-दो अंक हैं, जबकि न्यूजीलैंड के पास एक अंक है। जबकि मिस्र चार अंकों के साथ शीर्ष पर है। ये ग्रुप पूरी तरह खुला है। ग्रुप स्टेज के मैचों का एक दौर शेष रहते हुए, न तो ग्रुप जी और न ही ग्रुप एच में टीमों के भाग्य का  फैसला हुआ है कि कौन आगे बढ़ेगा और कौन वापस जायेगा। ऐसे में सभी आठ टीमों का अभी भी काफी कुछ दांव पर लगा है।

०००

केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा के लिए विश्व कप यादगार हो गया है। स्पेन के खिलाफ गोलरहित अनिर्णीत खेलने के बाद उरुग्वे के साथ भी 2-2 से अनिर्णीत खेला। इन दोनों ही मैचों में वोजिन्हा का प्रदर्शन लाजवाब रहा है। अपने शानदार प्रदर्शन के बाद वे फुटबॉल प्रेमियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो रहे हैं। विश्व कप से पहले इंस्टा पर उनके 50 हजार से भी कम फॉलोअर थे, जो अब बढ़कर 15.2 मिलियन हो गए हैं। आल टाइम सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले गोलकीपरों की फेहरिस्त में वे अब पांचवें स्थान पर आ गए हैं।

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मेस्सी ने अपने पहले ही मैच में हैट्रिक लगाई और वे क्लोसे के साथ विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। लेकिन इस मैच में उनके द्वारा किया गया एक टैकल विवाद का कारण बन गया है। अल्जीरिया के विरुद्ध खेले गए मैच के 31वें मिनट में मेसी ने अल्जीरिया के कप्तान आईसा मैंडी की पिंडली और एच्लीस टेंडन पर स्टड्स-अप टैकल किया था, जिससे वह ज़मीन पर गिर गए। पोलिश रेफरी शिमोन मार्सिनियाक ने इसे केवल एक सामान्य फाउल दिया और मेसी को पीला या लाल कार्ड नहीं दिखाया। वीएआर ने भी इसे अनदेखा किया। अब इस घटना की अल्जीरियाई फुटबॉल महासंघ ने फीफा से औपचारिक रूप से शिकायत कर दी है कि यह टैकल स्पष्ट रूप से रेड कार्ड के योग्य था।

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और अंत में चलते चलते बात आइवरी कोस्ट के स्टार खिलाड़ी यान डियोमांडे की। 19 वर्षीय डियोमांडे अपने के लिए विश्व कप में शानदार खेल दिखा रहे हैं। जब किसी खिलाड़ी को खेलते हुए देखा जाता है तो उसके खेल को, उसकी योग्यता को,उसकी प्रतिभा को उसकी मैदान में गलतियों और कमियों को लक्षित किया जाता है। यहां तक पहुंचने के उसके संघर्ष,उसकी मेहनत,उसके जीवन की कठिनाइयां,कष्ट, दुश्वारियां और उसकी भावनाएं अलक्षित रह जाती हैं। डियोमांडे अपनी गरीबी और अभावों से संघर्ष कर कड़ी मेहनत के बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं। लेकिन इस संघर्ष में उनका कुछ ऐसा छूटा कि वे संगदिल बन गए। उनकी अपनी सबसे बड़ी  प्रेरणास्रोत 15 वर्षीया छोटी बहन की मृत्यु उनकी अनुपस्थिति में हो गई। फिर 17 जून को 'द प्लेयर्स ट्रिब्यून' में अपनी बहन रोक्सेन के लिए मार्मिक और बेहद ईमानदार पत्र लिखा। उन्होंने उसमें लिखा "फुटबॉल के मैदान पर मैं जो कुछ भी करता हूं, वह आपके लिए है," । ये पत्र मन में करुणा की धारा बहा देता है। ये पत्र जरूर पढ़ा जाना चाहिए। एक ऐसा पत्र जैसा कोई दूसरा नहीं लिखा गया।



फीफा विश्व कप 2026 डायरी_09

 


फीफा विश्व कप 2026 का दसवां दिन। 

फुटबॉल का सबसे बड़ा महाकुंभ अब रोमांचक दौर में प्रवेश कर रहा है। खिलाड़ी मैदान में पसीना बहा रहे है। खिताबी जंग के लिए खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहा रहे हैं और प्रतियोगिता अधिक रोचक और संघर्षपूर्ण होती जा रही है। जहां फॉरवर्ड गोलों के बहाने कीर्ति का परचम लहरा रहे हैं वहीं गोलची खम ठोककर कर उनको चुनौती दे रहे हैं। जैसे-जैसे नॉकआउट का सफर करीब आ रहा है वैसे वैसे आगे बढ़ाने के लिए रोमांच और संघर्ष चरम पर पहुंच रहा है। 

एक

फीफा विश्व कप के दसवें दिन मैक्सिको के मॉन्टेरी स्टेडियम में ग्रुप एफ का जापान और ट्यूनीशिया के बीच खेला गया दिन का आखिरी मैच कई मायने में महत्वपूर्ण था।  सबसे महत्वपूर्ण तो इसलिए कि ये विश्व कप प्रतियोगिता के इतिहास का 1000वां मैच। इस मैच को जापान की टीम ने ट्यूनीशिया को 4-0 से हराकर एक महत्वपूर्ण मुकाबल जीत लिया और अगले नॉक आउट दौर में लगभग परिपूर्ण पहुंच गई है।

पहले दौर में जापान नीदरलैंड के साथ प्रभावशाली 2-2 के ड्रॉ के यहां पहुंचा था,जबकि ट्यूनीशिया स्वीडन के खिलाफ खराब प्रदर्शन करते हुए 5-1 से हार गया था। ट्यूनीशिया कभी भी ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ पाए हैं और इस हार के बाद इस बार भी वे ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गए।

मैच से पहले सभी की निगाहें ट्यूनीशिया के नए कोच हेर्वे रेनार्ड पर थीं। सब इस बात को जानने के इच्छुक थे कि सबरी लामौची को बर्खास्त करने के बाद चार दिनों के भीतर उन्होंने टीम में रक्षात्मक रूप से क्या सुधार किए हैं।

इस पराजय ने बताया कुछ खास नहीं। जापान ने सिर्फ चार मिनट बाद ही दाइची कामादा के गोल से बढ़त बना ली और पहले हाफ में अपना दबदबा कायम रखा। आधे घंटे के बाद स्ट्राइकर अयासे उएदा के शानदार गोल ने जापान को 2-0 की बढ़त दिला दी। वे शानदार खेल रहे थे।

जापान ने 69वें मिनट में एक और शानदार गोल के साथ स्कोर 3-0 कर दिया। इस बार जुन्या इटो ने गोल दागा। मैच के अंतिम क्षणों में उएदा ने गोल लाइन पर खड़े ट्यूनीशिया के दो डिफेंडरों के ऊपर से हेडर मारकर चौथा गोल दाग दिया। विश्व कप में किसी एशियाई टीम द्वारा बनाए गए गोलों की संख्या अब तक की सबसे अधिक चार गोल है।

जापान में पिछले वर्षों में तमाम प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए और मजबूत टीम बनाई। इस के बावजूद वो विश्व कप में कभी भी राउंड ऑफ 16 से आगे नहीं बढ़ पाया है। इस टीम से इस सूखे को खत्म करने की उम्मीद इसलिए भी बांधती है कि हाजिमे मोरियासु की इस टीम ने पिछले साल अक्टूबर में ब्राजील को हराया था और अभी मार्च में वेम्बले में इंग्लैंड को हराने वाला पहला एशियाई देश बन गया।

हालांकि इस प्रतियोगिता के शुरू होने से पहले ही उनके तीन प्रमुख खिलाड़ियों काओरू मितोमा, ताकुमी मिनामिनो और वतारू एंडो के चोटिल हो जाने से उनके विश्व कप अभियान को धक्का लगा। इसके अलावा पहले मैच में घुटने में चोट लगने के कारण इस मैच में जापान को अपने एक और स्टार खिलाड़ी ताकेफुसा कुबो के बिना खेलना पड़ा। लेकिन उनके बिना भी जापान ने शानदार प्रदर्शन किया। जापान की और से कीटो नाकामुरा ने अप्रत्याशित रूप से शानदार प्रदर्शन करते हुए नीदरलैंड के खिलाफ गोल किया और यहां कमाडा के गोल में असिस्ट किया।

इस जीत के बाद वे राउंड ऑफ 32 की तैयारी कर सकते हैं।

दो

इससे पहले ग्रुप एफ के ही एक अन्य मैच में नीदरलैंड ने जापान के विरुद्ध ड्रॉ मैच की निराशा से उबरते हुए स्वीडन को 5-1 से हराकर शानदार जीत हासिल की।  नीदरलैंड की टीम की ये कहकर आलोचना की जारही थी कि उसका रक्षण तो बहुत मजबूत है लेकिन उनका आक्रमण धारदार नहीं है। लेकिन इस मैच में पांच गोल कर बताया कि उनकी अग्रिम पंक्ति भी शानदार है। इस मैच में डच टीम में उत्साह और आक्रामकता का संगम देखने को मिला।इस टीम ने विजय दुंदुभी बजा दी है।

ब्रायन ब्रोबे के शुरुआती दो गोल और उसके बाद कोडी गाक्पो के दूसरे हाफ में दो और गोल और क्रिसेंसियो समरविले के अंतिम गोल की मदद से नीदरलैंड्स ने ये शानदार जीत हासिल की। स्वीडन की तरफ से एकमात्र गोल खेल के 59वें मिनट में स्थानापन्न खिलाड़ी एंथोनी एलंगा ने किया। पहले मैच में स्वीडन ने ट्यूनीशिया को इतने ही अंतर से हराया था और आत्मविश्वास से भरी थी। लेकिन आज उसका खेल बिखर गया और उसके खिलाड़ी मैदान पर प्रभाव छोड़ने में असफल रहे।

तीन

टोरंटो स्टेडियम में ग्रुप-ई में जर्मनी और आइवरी कोस्ट के बीच एक संघर्षपूर्ण मैच हुआ। इस मैच में जर्मनी ने आधे समय तक एक गोल से पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी करते हुए आइवरी कोस्ट को 2-1 से हरा दिया। 

दोनों टीमों ने आक्रामक शुरुआत की। जर्मनी ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और लगातार मौके बनाने की कोशिश की। लेकिन आइवरी कोस्ट की मजबूत रक्षापंक्ति से जर्मनीबेक फॉरवर्ड पार नहीं पा सके। मैच का पहला गोल 30वें मिनट  फ्रेंक कैसी ने किया और आइवरी कोस्ट को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद जर्मनी ने बराबरी के लिए अनेक प्रयास किए पर उसे सफलता नहीं मिली।

दूसरे हाफ में जर्मनी ने की जोरदार वापसी की। जर्मनी के कोच ने जूलियन नागेल्समैन ने दूसरे हाफ में एक अहम बदलाव किया। उन्होंने स्टटगार्ट के फॉरवर्ड डेनिज़ उन्दाव को मैदान पर उतारा। यही वह कदम साबित हुआ जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।। 68वें मिनट में सब्स्टीट्यूट डेनिज उन्दाव ने शानदार गोल दागकर जर्मन टीम को 1-1 की बराबरी दिला दी। इस गोल के बाद मुकाबला और रोमांचक हो गया। लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। अब मुकाबला ड्रॉ होने ही जा रहा था कि इंजरी टाइम में

फेलिक्स एनमेचा के पास पर डेनिज उन्दाव ने शानदार टर्न लेते हुए सटीक शॉट लगाया और गेंद को गोल में पहुंचा दिया। उन्दाव का यह दूसरा गोल था। जर्मनी की टीम अगले दौर के लिए क्वालीफाई कर गई।

चार

कल का सबसे शानदार मुकाबला कंसास सिटी में खेला गया इक्वाडोर और काराकाओ के बीच का मैच था। इस मैच ने केप वर्डे और स्पेन के बीच हुए मैच की याद दिला दी। वो मैच बिना किसी गोल के अनिर्णीत रहा था और इस मैच मैच में केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा ने शानदार प्रदर्शन किया था। ठीक इसी तरह का प्रदर्शन कल काराकाओ ने इक्वाडोर के विरुद्ध किया। ये मैच भी इक्वाडोर के प्रबल दावेदार होने के बावजूद 0-0 से समाप्त हुआ। इसमें भी गोलकीपर एलोय रूम ने अद्भुत प्रदर्शन किया और इक्वाडोर को कोई गोल नहीं करने दिया। इस तरह काराकाओ ने विश्व कप का पहला अंक हासिल किया। रूम ने इक्वाडोर के खिलाड़ियों को गोल करने से रोकने के लिए 15 बचाव किए, जो विश्व कप के इतिहास में एक ही मैच में किए गए दूसरे सबसे अधिक बचाव हैं और अतिरिक्त समय के बिना किसी भी विश्व कप मैच में सबसे अधिक हैं।

इस प्रतियोगिता में इस बार गोलों की झमाझम बरसात हो रही है। इस सीजन में हुए 33वें  मैच में गोलों का शतक बन गया जो पिछले 68 वर्षों में सबसे तेज है। सौंवा गोल नीदरलैंड और स्वीडन के बीच हुए मैच में नीदरलैंड के कोडी गैपको ने किया जो नीदरलैंड का तीसरा गोल था। 1958 के बाद किसी भी विश्व कप में इस बार सबसे कम मैचों में 100 गोल हुए हैं। इस विश्व कप में गोल करने की शुरुआत मेक्सिको के जूलियन क्विनोनेस ने 12 जून को साउथ अफ्रीका के विरुद्ध गोल करके की थी।

फीफा विश्व कप 2026 डायरी_08

 


फीफा विश्व कप 2026 का नौवां दिन। अभी तक टीमों के पास दो विकल्प थे। एक आगे जाने का। दूसरा ठहरकर इंतजार करने का कि उनके पास कौन सा विकल्प रहेगा आगे जाने का या वापस जाने का।यहां से टीमों के लिए वापस जाने का विकल्प खुल रहा था। अब से केवल आगे बढ़ने के उल्लास का कोलाहल ही सुनाई नहीं देगा, बल्कि वापसी की उदास पदचापें भी सुनाई देगी। यहां से उम्मीदों के रंग कुछ और गुलाबी होंगे तो उम्मीदों के चिटकने के स्याह रंग भी नजर आने लगेंगे। कुछ की उम्मीदों के पंखों को ऊंची उड़ान भरने की आजादी होगी। कुछ के सपनों की परवाज खत्म होगी।

एक

ब्राजील फीफा विश्व कप की सबसे सफल टीम है जिसने सबसे ज्यादा  पांच बार विश्व कप जीता है, बल्कि एकमात्र ऐसी टीम है जिसने हर बार विश्व कप फाइनल्स में भाग लिया। एक ऐसी टीम जो हमेशा ही आकर्षण के केंद्र में होती है। जिससे उसके प्रशंसकों को बहुत ज्यादा अपेक्षाएं होती हैं। ब्राजील ने विश्व कप के अपने पहले मैच में अपने समर्थकों को निराश किया था। उन्होंने मोरक्को के साथ 1-1 से ड्रॉ खेला था। लेकिन कल फ़िलाडेल्फिया में अपने दूसरे मैच में शानदार प्रदर्शन किया और हैती की टीम को 3-0 से पराजित किया। ब्राजील की टीम अपने रंग में लौट चुकी है। उसने अपनी लय पा ली है जिसके लिए वो जानी जाती है। 

सेलेकाओ ने हैती के विरुद्ध शुरू से ही खेल पर नियंत्रण बनाए रखा और पहले हाफ में ही तीन गोल कर मैच का नतीजा तय कर दिया। ब्राजील के तेज आक्रमण और लगातार दबाव का सामना करने में हैती को काफी मशक्कत करनी पड़ी। 

इस मैच से पहले,दिन के दूसरे मैच में मोरक्को ने स्कॉटलैंड को 1-0 से हराया। मोरक्को ने शुरुआत से ही मैच पर अपना दबदबा बनाए रखा। टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और स्कॉटलैंड को संभलने का मौका नहीं दिया। मुकाबले की शुरुआत में ही स्कॉटलैंड के डिफेंस से चूक हुई। स्कॉटिश कप्तान ग्रांट हैनली सही पोजीशन में नहीं थे, जिसका पूरा फायदा मोरक्को ने उठाया। ब्राहिम डियाज के बेहतरीन पास पर इस्माइल सैबारी ने तेजी से आगे बढ़ते हुए शानदार शॉट लगाया और गेंद को गोल पोस्ट के भीतर भेज दिया। ये गोल 71वें सेकेंड में आया जो इस विश्व कप का सबसे तेज गोल था। हालांकि कुछ देर बार इसे विश्व कप का सबसे तेज गोल की जगह दूसरा सबसे तेज गोल हो जाना था।

ग्रुप सी के इन दो मुकाबलों के परिणामस्वरूप हैती के नॉकआउट चरण में पहुंचने की कोई भी संभावना नहीं रह गई। इस तरह हैती इस प्रतियोगिता से बाहर होने वाली पहली टीम बन गई है।

दो

दिन का पहला मैच सिएटल में मेजबान अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच था। इस मैच में अमेरिका ने शानदार खेल दिखाते हुए ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराकर नॉक आउट के लिए अपनी जगह पक्की कर ली है। विश्व कप के इतिहास में यह दूसरा मौका है, जब अमेरिका ने प्रतियोगिता के लगातार पहले दो मैचों में जीत हासिल की। अमेरिका ने पहले मैच में पैराग्वे को 4-1 से हराया था। 

अमेरिका ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा। इस दबाव के चलते 11वें मिनट में ही अमेरिका को इसका फायदा भी मिला। ऑस्ट्रेलिया के डिफेंडर कैमरन बर्गेस फोलारिन बालोगुन के शॉट का बचाव करते हुए अपना ही गोल कर बैठे। उसके बाद दूसरा गोल पहले हाफ के अंतिम क्षणों में आया। 

पहले हाफ में ही 0-2 से पिछड़ने के बाद दूसरे हाफ में ऑस्ट्रेलिया ने गोल करने के कई प्रयास किए, लेकिन टीम को सफलता नहीं मिल सकी। अमेरिका के डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया को वापसी करने का कोई मौका नहीं दिया। 

तीन

आज के सबसे महत्वपूर्ण मुकाबले में पैराग्वे ने बड़ा उलटफेर करते हुए तुर्की को 1-0 से हरा दिया। पैराग्वे ने अपनी इस शानदार जीत से ग्रुप की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है और टीम की नॉकआउट दौर में खेलने की उम्मीदों को कायम रखा है।

मुकाबले की शुरुआत होते ही पैराग्वे ने आक्रामक तेवर दिखाए। मैच के दूसरे मिनट में मैथियास गलार्जा ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर गेंद को गोल में पहुंचा दिया। महज 65 सेकंड में आया यह गोल टूर्नामेंट के सबसे तेज गोल था। इससे पहले आज ही खेले गए मैच में मोरक्को के सैबारी के 71सेकेंड में किए गए गोल को पीछे छोड़ दिया। तुर्की के गोलकीपर उगुरकान काकिर गेंद की दिशा भांपने में नाकाम रहे और उनकी टीम शुरुआती झटके से उबर नहीं सकी।

हालांकि शुरुआती गोल खाने के बाद तुर्की ने खेल पर पकड़ बनाने की कोशिश की।  टीम ने गेंद पर नियंत्रण रखा और लगातार हमले किए। 33वें मिनट में मेर्ट मुल्डुर का हेडर गोलपोस्ट से टकराकर बाहर आ गया, जिससे तुर्की बराबरी का सुनहरा अवसर गंवा बैठा। दूसरे हाफ में अर्दा गुलेर और केनान यिल्डिज ने भी कई बार पैराग्वे के डिफेंस को चुनौती दी, लेकिन गोलकीपर ऑरलैंडो गिल और रक्षापंक्ति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए हर प्रयास को विफल कर दिया। तुर्की पूरे मैच में गोल के लिए संघर्ष करती रही। पैराग्वे के अनुभवी खिलाड़ी मिगुएल अल्मिरोन को रेड कार्ड के कारण बाहर जाना पड़ा और इसके बाद पैराग्वे को पूरा दूसरा हाफ 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। इसके बावजूद तुर्की इसका फायदा नहीं उठा सकी। 

चार

इस विश्व कप का अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर आज हुआ। तुर्की की टीम आज अपना दूसरा मैच पैराग्वे से हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गई। इस टीम को अंडरडॉग माना जा रहा था और ये माना जा रहा था कि ये टीम इस बार अंतिम आठ तक तो पहुंचेगी ही। हैती के बाद विश्वकप से बाहर होने वाली तुर्की दूसरी टीम है। तुर्की की टीम में बहुत ही प्रतिभाशाली और स्टार खिलाड़ी थे। स्पेनिश क्लब रियल मैड्रिड के लिए खेलने वाले युवा मिडफील्डर अर्दा गुलेर के सबसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में से एक हैं। इंटर मिलान के अनुभवी कप्तान हकन चालहानोग्लु शानदार मिडफील्डर थे और अपनी फ्री-किक और प्लेमेकिंग के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। बेसिकटास और बेनफिका में अपना जलवा बिखेरने वाले मिडफील्डर  ओर्कुन कोककु  टीम के मुख्य रणनीतिकारों में से थे। और ब्राइटन और फेनरबाहस के बेहतरीन डिफेंडर फेरडी कादियोग्ल भी इस टीम में शामिल थे।

पांच

गुलाबी रंग को सामान्यतः लड़कियों के साथ जोड़ा जाता है। लेकिन इस विश्व कप में ये रंग अपना जलवा बिखेर रहा है। अब इसे अघोषित रूप से इसे विश्व कप का आधिकारिक रंग माना जा रहा है। जूते बनाने वाले सभी प्रमुख कंपनियों नाइकी, एडिडास, प्यूमा सभी ने इस विश्व कप में अपने नए कलेक्शन लॉच किए हैं और सभी ने खिलाड़ियों को गुलाबी रंग के जूते उपलब्ध कराए हैं। यही कारण है कि इस समय ज्यादातर टीमों के खिलाड़ी चमकीले गुलाबी रंग के जूतों में नजर आ रहे हैं। और फुटबॉल मैदान गुलाबी रंग में रंगे नज़र आ रहे हैं।  इन टीमों में इंग्लैंड, जापान, अर्जेंटीना,पुर्तगाल,फ्रांस और मेजबान यूएस की टीम भी शामिल हैं। हालांकि मेस्सी सफेद रंग के जूतों में ही नजर आ रहे हैं। 

दरअसल बरसों के शोध और मार्केटिंग अनुभव के बाद लगभग सभी जूते बनाने वाली कंपनियां इस निष्कर्ष पर पहुँची हैं कि फुटबॉल मैदान पर ब्राइट पिंक अन्य किसी भी रंग के मुकाबले अधिक प्रभावी होते हैं। क्योंकि घास के हरे रंग के कंट्रास्ट में पिंक कलर टीवी,मोबाइल पर हर जगह अधिक चमकता और ध्यान खींचता है।

बस अब देखना है कि ये पिंक सूट किसे करता है। कौन जीत की पिंकी आभा लिए आगे बढ़ता है और किसके चेहरे हार की टीस से मलिन हो अपनी गुलाबी आभा खो बैठेंगे।

Friday, 19 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 07 : दूसरे दौर की शुरुआत

 


फीफा विश्व कप 2026 का आठवां दिन। लीग स्टेज का दूसरा चरण शुरू हो गया है। जैसे जैसे समय आगे बढ़ रहा है संघर्ष अधिक सघन,अधिक तीव्र और अधिक कठिन होते जा रहा है। हनीमून पीरियड अब टीमों के लिए भी और खिलाड़ियों के  लिए खत्म हो गया है। अब परिणाम अधिक निर्णायक होते जा रहे हैं। करो या मरो वाली स्थिति में खेल पहुंच रहा है, जिसमें अब एक छोटी सी गलती भी आगे बढ़ने के रास्ते बंद कर सकती है। उम्मीद की लौ बुझ सकती है। जीत के सपने बिखर सकते हैं।

एक

कतर में आयोजित पिछले विश्व कप की तुलना में मेजबान अधिक सफल हो रहे हैं। पिछली बार मेजबान कतर लीग स्टेज में ही तीनों मैच हारकर बाहर हो गया था। लेकिन यहां तीनों होस्ट अगले चरण जाने की कोशिश में हैं। अगले चरण में यानी राउंड ऑफ 32 में पहुंचने वाली सह मेजबान मेक्सिको पहली टीम बन गई है। कनाडा भी अपने ग्रुप में शीर्ष पर है। यूएस ने अपना पहला मैच जीतकर उम्मीदें बढ़ा दी है।

कल के दिन के आखिरी मैच में मेक्सिको ने ग्वाडालाजारा में एक तनावपूर्ण और संघर्ष भरे मुकाबले में दक्षिण कोरिया को एक 1-0 से हराकर लगातार दूसरी जीत हासिल की। इस ग्रुप कल का एक दूसरा मैच दक्षिण अफ्रीका और चेक गणराज्य के बीच 1-1 से अनिर्णीत रहा। इस कारण से मेक्सिको का इस ग्रुप में शीर्ष पर रहना निश्चित हो गया है।

दक्षिण कोरिया के गोलकीपर किम सेउंग ग्यू की एक गलती टीम की हार का कारण बन गई। दूसरे हॉफ के 50वें मिनट में गोलकीपर किम के हाथ से फिसली गेंद पर लुईस रोमो ने गोलकर मैक्सिको को बढ़त दिला दी। ये मैच का एकमात्र गोल था। एक गोल से पिछड़ने के बाद दक्षिण कोरिया ने वापसी की जोरदार कोशिश की। मैच के अंतिम कुछ समय में गोलकीपर राउल रेंगल ने दो शानदार बचाव किए और अपनी गोलशीट क्लीन रखी।

दो

प्रतियोगिता के दूसरे सह मेजबान कनाडा ने भी अपनी आगे बढ़ने की उम्मीद बनाए रखी है। उसने आज कतर को 6-0 से हरा दिया। ये मैच कतर के लिए उनकी शर्मनाक हार,उनके रफ टफ खेल के कारण दो रेड कार्ड के बाद केवल नौ खिलाड़ियों से खेलना, और उनके खिलाड़ी मोहम्मद मनाई द्वारा आत्मघाती गोल के लिए याद किया जाएगा तो कनाडा के लिए जोनाथन डेविड की हैट्रिक और उनके प्रमुख मिडफील्डर इस्माइल कोने को असिम मदीबो की टक्कर के बाद बाएं पैर के निचले हिस्से में लगी गंभीर चोट के लिए याद किया जायेगा।

मेस्सी के बाद कनाडा के डेविस हैट्रिक लगाने वाले इस प्रतियोगिता के दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। डेविस अपने  शांत और संयमित स्वभाव के कारण 'द आइसमैन' के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने हैट्रिक बनाने का सौ साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है। इससे पहले CONCACAF के अंतर्गत आने वाली टीमों में अमेरिका के टीम के बर्ट पटेनाउड ने 1930 में उरुग्वे में आयोजित विश्व कप में ये कारनामा किया था।

तीन

स्विट्जरलैंड की टीम ने बोस्निया व हर्जेगोविना के विरुद्ध मैच में अपनी लय प्राप्त कर ली है। उसने ये मैच 4-1 से जीता। ये मैच इस बात के लिए जाना जाएगा कि इस मैच के पांचों गोल खेल के 74वें मिनट के बाद आए।

मैच के अधिकांश समय तक स्विस टीम बोस्निया के आक्रमण को भेदने के लिए संघर्ष करती रही और गोलकीपर निकोला वासिलज ने उन्हें बार-बार निराश किया। अंततः 74वें मिनट में निर्णायक क्षण आया जब रुबेन वर्गास के क्रॉस से स्थानापन्न खिलाड़ी जोहान मंज़ांबी ने गोल दाग दिया। मंज़ाम्बी के मैदान में आने से मैच का रुख बदल गया। उन्होंने दो गोल किए।

चार



और अंत में बात एक फुटबॉल दर्शक की। यूँ तो दुनिया भर से फुटबॉल देखने और अपनी टीम का समर्थन करें अमेरिका पहुंच रहे हैं। लेकिन जर्मनी के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र कार्ल्सरुहे के जैकब अल्बर्टी की बात ही अलग है। ये हवाई यात्रा के माध्यम से नहीं बल्कि साइकिल से ह्यूस्टन पहुंचे हैं, 14 जून को जर्मनी और केप वर्डे मैच देखने के लिए। इस यात्रा में उन्हें दो साल का समय लगा, 25000 किमी की दूरी तय की, चार महाद्वीप और 27 देशों को पार किया। 

26 साल के जैकब ने अगस्त 2024 में एक लक्ष्य के साथ अपनी यात्रा शुरू की। लक्ष्य था दुनिया भर की यात्रा करते हुए फीफा विश्व कप 2026 के समय तक यूएस पहुंचना। ये एक ऐसा लक्ष्य था जो अंततः फुटबॉल प्रेम की असाधारण कहानी बन गई। वे कहते हैं "मेरे लिए फुटबॉल का मतलब है कभी हार न मानना, लगातार संघर्ष करते रहना और एकजुट रहना। विश्व कप की तरह हर देश एक साथ आते हैं, मिलकर जश्न मनाता है, और यही फुटबॉल की खूबसूरती है।”

फुटबॉल के प्रति ये लगाव,ये जुनून,ये प्यार ही फुटबॉल की खूबसूरती है, जो फुटबॉल को केवल एक खेल भर नहीं रहने देता, बल्कि लोगों के जीवन का एक अविभाज्य हिस्सा बना देता है।

और चलते चलते ये की वोजिन्हा के फॉलोअर 13 मिलियन हो गए हैं।उधर टिम पेन के कोलंबिया में जाने की खबर कन्फर्म हो गई है।



फीफा विश्व कप 2026 डायरी 12:प्रथम चरण

 किसी भी प्रतियोगिता के दौरान अनेक ऐसे दृश्यों और क्षणों की निर्मिति होती है जो लोगों की स्मृति का एक बड़ा हिस्सा घेर लेते हैं। वे इतने प्रभ...