Saturday, 4 July 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 19: काबो वर्डे




अक्सर चीजें मृत्यु के बाद अधिक खूबसूरत लगने लगती हैं। अधिक प्रिय हो आती हैं। 

कई बार हार भी इतनी प्रभावशाली होती है जीत पृष्ठभूमि में चली जाती है। 

ये फीफा कप चाहे जो जीते। लेकिन इस विश्व कप का वो दृश्य क्रिएट हो चुका है जो अब फुटबॉल प्रेमियों के मानस से कभी नहीं मिटने वाला है। 

एक पल आकर हमेशा के लिए रुक गया है जिसे अब कभी नहीं बीतना है। 

वाह काबो वर्डे। 

आह काबो वर्डे।

आपने इस विश्व कप से विदा ली है। हमारे दिलों से नहीं।

"Bu ta fika gravadu na nos korason pa sempre. Un abrasu di dipidida."

Friday, 3 July 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 18

 


क्रिकेट खेल को सबसे ज्यादा अनिश्चितताओं का खेल कहा गया है कि जब तक आखिरी बॉल ना फेंक दी जाए तब तक कोई परिणाम तय नहीं समझना चाहिए।

लेकिन इन दिनों रात रात भर जागकर फुटबॉल देखने वाले कहेंगे ये बात तो फुटबॉल के खेल पर भी उतनी ही लागू होती। कि फुटबॉल का कोई भी परिणाम उस समय तक तय नहीं माना जा सकता जब तक कि मैच समाप्ति की व्हिस्ल ना बज जाए।

एक

बुधवार को फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ 32 में अटलांटा स्टेडियम में इंग्लैंड का मुकाबला कांगो डीआर से था। मैच में इंग्लैंड फेवरिट था। लेकिन कांगो के खिलाड़ियों ने शुरूआत ही आक्रामक रुख अपनाया। सात मिनट बीतते बीतते बायन सिपेंगा को बॉक्स के बाएं फ्लैंक में एक पास मिला और उनका शानदार ग्राउंडेड शॉट इंग्लैंड के एक डिफेंडर और गोली की छकाते हुए गोल के जाल में जा धंसा। कांगो डीआर ने एक गोल की बढ़त से इंग्लैंड की टीम को ही नहीं पूरे स्टेडियम को सकते में डाल दिया। 

अगले 68 मिनट इंग्लैंड की आक्रामक पंक्ति का कांगो डीआर के गोलकीपर लियोनेल म्पासी के बीच मुकाबला था। इस दौरान इंग्लैंड विश्व कप के इतिहास में सबसे बड़ी अपमानजनक हार से बचने के लिए लगातार आक्रमण कर रही थी और गोलकीपर लियोनेल म्पासी कांगो की ऐतिहासिक जीत के लिए प्रतिबद्ध गोल के सामने अभेद्य दीवार बने खड़े थे। इस 68 मिनट के समय में उन्होंने इंग्लैंड को रोकने के लिए कई शानदार बचाव किए।

कांगो एक इतिहास रचने और इंग्लैंड एक अपमानजक हार से केवल 15 मिनट की दूरी पर थे कि कप्तान हैरी केन ने 75 वें मिनट में गार्डन के क्रॉस पर हेडर से गोलकर स्कोर 1-1 कर दिया। उसके बाद भी लगा कि मैच एकस्ट्रा टाइम में जा रहा है कि 86वें मिनट में हैरी केन ने मैच का एक और गोल दाग दिया। केन ने  बॉक्स के किनारे पर गेंद को अपने कब्जे में लिया, घूमे, आगे बढ़े और अपने दाहिने पैर से जोरदार शॉट लगाकर म्पासी को पछाड़ते हुए इंग्लैंड को बड़े संकट से उबार लिया।

बिल्कुल किनारे आकर कांगो डी आर की नाव डूब गई। एक सपना दुःस्वप्न में बदल गया। एक इतिहास बनते बनते रह गया।

अगर अभी भी फुटबॉल की अनिश्चितता में कोई संदेह हो तो फिर सिएटल में हुए बेल्जियम और सेनेगल के बीच हुए मैच को देखना चाहिए।

बेल्जियम अपने ग्रुप में शीर्ष पर रहा था,जबकि सेनेगल की टीम अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर रही थी और तीसरे स्थान पर रहने वाली शीर्ष आठ टीमों में होने के कारण नॉक आउट दौर में पहुंची थी।

मैच में बेल्जियम को संभावित विजेता माना जा रहा। था। लेकिन मैच में पहले बढ़त सेनेगल ने बनाई, हबीब डियारा के 25वें मिनट में किए गए गोल से। इसके बाद दूसरे हाफ के छह मिनट बाद इस्माइला सार ने टूर्नामेंट के सबसे बेहतरीन गोलों में से एक गोलकर सेनेगल की बढ़त को दोगुना कर दिया। 

सेनेगल ने मैच के अधिकांश हिस्से में दबदबा बनाए रखा और बेल्जियम का अप्रत्याशित रूप से टूर्नामेंट से बाहर होना तय लग रहा था। अब सेनेगल की जीत केवल चार मिनट दूर थी कि 86वें मिनट में स्थानापन्न  बेल्जियम के रोमेलु लुकाकू ने गोल करके अंतर कम किया। इस गोल के महज तीन मिनट बाद, 89वें मिनट में यूरी टिलेमैन्स ने बराबरी का गोल दागकर मैच को अतिरिक्त समय तक पहुंचा दिया। 

अब पेनल्टी शूटआउट से कुछ ही सेकंड पहले, अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में टिलेमैन्स को पेनल्टी बॉक्स के अंदर गिरा दिया गया। वीएआर समीक्षा के बाद, रेफरी ने बेल्जियम को पेनल्टी दी। टिलेमैन्स ने अतिरिक्त समय के पांचवें मिनट में गोल दाग दिया। बेल्जियम ने ये मुकाबला 3-2 से जीत लिया।

बेल्जियम का ये तीसरा गोल फीफा विश्व कप के इतिहास में सबसे देर से किया गया गोल था और ये मुकाबला प्रतियोगिता के सबसे यादगार नॉकआउट मुकाबलों में से एक।

दो

ये सेनेगल के दुर्भाग्य का अकेला उदाहरण नहीं था। दुर्भाग्य है कि मानो उसका साया बन उसके साथ कदमताल कर रहा हो। 

इस वर्ष के अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के फाइनल में सेनेगल ने मेज़बान मोरक्को को हरा दिया था। लेकिन बाद में कॉन्फेडरेशन ऑफ अफ्रीकी फुटबॉल के अपील बोर्ड ने सेनेगल से खिताब छीनकर मोरक्को को विजेता घोषित कर दिया। इसके पीछे का मुख्य कारण यह था कि मैच के अंतिम क्षणों में विवादास्पद पेनल्टी दिए जाने के विरोध में सेनेगल की टीम और कोच ने लगभग 15 मिनट के लिए मैदान छोड़ दिया था, जो कि नियमों के खिलाफ था।

इतना ही नहीं इससे भी पहले 2018 के विश्व कप में सेनेगल की टीम ग्रुप चरण के बाद 'फेयर प्ले' नियमों के आधार पर बाहर हो गई थी। ग्रुप में जापान और सेनेगल दोनों के चार चार अंक थे और गोल अंतर भी समान था। तो फैसला फेयर प्ले नियम के आधार पर हुआ जिसमें सेनेगल बाहर हो गया क्योंकि सेनेगल को जापान से अधिक येलो कार्ड मिले थे।

तीन

खेलों में भारत के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खराब प्रदर्शन के लिए अक्सर संसाधनों की कमी और सुविधाओं की कमी का रोना सुनाई देता है। लेकिन सेनेगल की टीम और उसका शानदार प्रदर्शन इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि परिश्रम,लगन, दृढ़ इच्छा शक्ति और पैशन हो तो संसाधनों की कमी भी आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

सेनेगल की टीम को संसाधनों के अभाव में विश्व कप से पहले और विश्व कप के दौरान बहुत सारी कठिनाइयों से गुजरना पड़ा है। विश्व कप के दौरान सेनेगल की फुटबॉल टीम को समय पर वेतन न मिलने, घटिया होटल और खराब खाने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा। कोच पापे थियाव बिना किसी आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट के काम कर रहे थे और उन्हें छह महीनों तक उनका वेतन नहीं दिया गया। इसके अलावा अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के फाइनल मुकाबले में विरोध स्वरूप मैदान छोड़ने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई का दंश भी टीम पर भारी पड़ा। कोच समेत कई मुख्य खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाए जाने से टीम की तैयारी बुरी तरह प्रभावित हुई।

इतनी सारी समस्याओं से जुझते हुए जो शानदार प्रदर्शन टीम ने दिखाया वो कमाल का है।

चार

विश्व कप के दौरान विभिन्न टीमों के समर्थकों और प्रशंसकों के मैच से पहले और जीत के बाद शानदार जश्न मनाते देखा है और उनके खूबसूरत दृश्यों को भी। लेकिन जब ये जोश उन्माद में बदल जाता है तो कुछ बदरंग और भयावह तस्वीरें सामने आती हैं।

 पहले नॉक आउट मैच में सह मेजबान मेक्सिको की टीम ने इक्वेडोर पर 2-0 से ऐतिहासिक विजय दर्ज की और चालीस साल बाद प्री क्वार्टर फाइनल में पहुंचे। इसका जश्न मनाने के लिए एक साथ 14 लाख से ज्यादा लोग मेक्सिको सिटी की सड़कों पर आ गए। भीड़े दम घुटने से टीम के तीन प्रशंसकों की मृत्यु हो गई। 

फुटबॉल विश्व कप दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन है और इसे वैश्विक सांस्कृतिक एकता  का भी वाहक माना जाता है। लेकिन सबसे ज्यादा हिंसक घटनाएं भी फुटबॉल के खेल में ही होती हैं। दरअसल जब जोश उन्माद बदल जाता है,सह अस्तित्व की भावना विद्वेष में बदल जाता है,वैश्विक भावना संकीर्ण राष्ट्र वाद में बदल जाती है और आपसी भाई चारा नस्लवाद में बदल जाता है, तो हिंसक घटनाएं जन्म लेती ही हैं। ये विश्व कप भी ऐसी घटनाओं से अछूता नहीं रहा।

नॉक आउट दौर में जब मोरक्को ने नीदरलैंड को हराया तो हेग में कुछ हिंसक घटनाएं हुई। नीदरलैंड में  बड़ी संख्या में मोरक्को के प्रवासी हैं लगभग चार लाख। इसमें नीदरलैंड के हारने नीदरलैंड्स के कई शहरों में हिंसक झड़पें और उपद्रव हुए। मोरक्को की जीत के जश्न के दौरान हेग  जैसे शहरों में भारी हिंसा भड़क गई, जिसके कारण पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। 

ये निश्चित ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

Wednesday, 1 July 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 16: ओरलैंडो गिल



ये विश्व कप जितना फॉरवर्ड्स का है,उतना ही गोलकीपर्स का भी है। जितना मेस्सी,क्रिश्चियनों रोनाल्डो,म्बापे,हॉलैंड,विनिसियस जूनियर, उस्मान डेंबेले,इस्माइल सैबारी, यामल का है,उतना ही वोजिन्हा, एलॉय रूम, अलिरेजा वेइरानवंद और ग्रेगोर कोबेल  का भी है। 

विश्व कप की प्रीमियर गोलकीपर्स की इस जमात में अब एक नाम ओरलैंडो गिल का नाम भी जुड़ गया जर्मनी के खिलाफ पैराग्वे की जीत के हीरो उनके  छह फीट छह इंच लंबे भारतीय मूल के गोलकीपर ओरलैंडो गिल थे जिन्होंने पेनाल्टी शूट आउट में  दो शानदार बचाव किए और पैराग्वे की ऐतिहासिक जीत को संभव बनाया। फिलहाल मैदान के अंदर शानदार रक्षण के अलावा वे इस बात को लेकर के लिए भी चर्चा में हैं कि अपनी खराब आर्थिक दशा के कारण अपने बेटे के जन्म के समय उन्हें अपनी अंडर 20 जर्सी,जूते और अपने अन्य उपकरण बेच दिए थे।

प्रसिद्धि का एक परिणाम ये होता है कि आपके जीवन के अनछुए, अनचिह्ने पहलू सार्वजनिक हो जाते हैं। और एक समय के बाद वे किंवदंतियों की तरह उद्धृत किए जाने लगते हैं।

फिलहाल ओरलैंडो दो गोल पोस्टों के बीच खड़े नए हीरो हैं।

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 15 : इस्माइल सैबारी

 


आज नीदरलैंड और मोरक्को के बीच मैच का निर्णय पेनाल्टी शूट आउट से हुआ। यहां भी चार-चार पेनाल्टी के बाद स्कोर 2-2 की बराबरी था। नीदरलैंड की तरफ से पांचवीं पेनाल्टी क्रिसेंसियो समरविले ने ली और बॉल बाहर मार दी। अब हार जीत का सारा दारोमदार एक खिलाड़ी पर था जो मोरक्को की पांचवीं पेनाल्टी ले रहा था। उसका नाम था इस्माइल सैबारी। उसने अपना संतुलन बनाए रखा। उसने शॉट लिया और बॉल नीदरलैंड के गोलकीपर की डाइव की विपरीत दिशा में गोल के बाएं ओर जाल में उलझा दी।

नीदरलैंड के विरुद्ध मोरक्को की इस जीत के नायक इस्माइल थे, इस्माइल सेबारी। वो इस्माइल सेबारी जो डच लीग के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। जो डच फुटबॉल क्लब इंडोहोवेन से खेलते हैं। वो इस्माइल सेबारी जो बचपन में अस्थि संबंधी विकार के कारण ठीक से खड़े भी नहीं हो पाते थे। जिन्हें बचपन में चलने और खड़े होने के लिए 'ऑर्थोटिक ब्रेस' का प्रयोग करना पड़ता था। वो इस्माइल सेबारी जिसने तब भी हार नहीं मानी और फुटबॉल खेलना शुरू किया। और जब बेल्जियम की एंडरलेक्ट टीम के लिए ट्रायल दिया तो मोटापे की वजह से सिलेक्शन ना हो सका। उन्होंने तब भी हार नहीं मानी और खेलना जारी रखा। वही इस्माइल सेबारी आज राष्ट्र की उम्मीद है,टीम का नायक हैं, विश्व कप के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में शुमार हैं,फुटबॉल प्रेमियों का हीरो है।

अपने पहले विश्व कप में चार मैचों में चार गोल। पहले मैच में ब्राजील के विरुद्ध 1-1 से ड्रॉ में गोल, स्कॉटलैंड के विरुद्ध 1-0 से जीत में 71वें सेकंड में इस विश्व कप का दूसरा सबसे तेज गोल, हैती के विरुद्ध 4-2 से जीत में एक गोल,और नीदरलैंड के विरुद्ध सबसे महत्वपूर्ण पेनाल्टी पर गोल।

क्या ही कमाल खिलाड़ी है। 

दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति के आगे हर बाधा बेमानी हो जाती है।



Tuesday, 30 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 14: उलटफेर का दिन



 फीफा विश्व कप फुटबॉल 2026 के नॉक आउट चरण के पहले दिन ही सोमवार को जो कुछ हुआ,उसमें कुछ भी अप्रत्याशित नहीं था। इसकी प्रस्तावना पिछले 18 दिनों से लिखी जा रही थी। कुराकाओ और केप वर्डे जैसी टीमों ने अपने खेल और अपने तेवर से ये स्पष्ट कर दिया था कि बड़ी से बड़ी टीम अपनी जीत को ग्रांटेड नहीं ले सकती। यहां हर जीत को अर्जित करना पड़ता है मेहनत, संघर्ष और हुनर से। ये पहले ही तय हो गया था कि अगला दौर किस इंटेंसिटी से खेला जाने वाला है। इंटेंसिटी इसलिए भी कि यहां से किसी भी टीम के लिए वापसी करने का कोई रास्ता नहीं है। अब सिर्फ और सिर्फ करो या मरो। ना कम ना ज्यादा। केवल दो परिणाम हार या जीत। दो रास्ते आगे बढ़ो या घर वापस हो लो।

नॉक आउट दौर के पहले दिन चार मुकाबले हुए। चार में से दो मैचों का निर्णय 120 मिनट के खेल के बाद पेनाल्टी शूट आउट से हुआ। बाकी दो मैचों का निर्णय भी 90 मिनट के बाद इंजरी टाइम में खेल समापन की आखिरी व्हिस्ल बजने से बस पहले। दो उलटफेर हुए और एक होते होते बचा तो मेजबान टीम के आगे बढ़ने का क्रम जारी रहा।

एक

पहले बात नीदरलैंड और मोरक्को के बीच हुए मैच की। मैच शुरू से संघर्षपूर्ण था। मैच का पहला गोल 71 वें मिनट में नीदरलैंड के स्टार खिलाड़ी कोडी गेपको ने किया। 90 मिनट तक ये बढ़त बरकरार रही। जब लगा कि रोनाल्ड कोमेन की टीम अगले दौर में जा रही है तो इंजरी टाइम में 91वें मिनट मोरक्को के ईसा डिओप के गोलकर स्कोर बराबर कर दिया। मैच एकस्ट्रा टाइम में गया पर स्कोर  1-1 ही रहा। 


अब निर्णय पेनाल्टी शूट आउट से होना था। पेनाटली शूट आउट में भी चार चार पेनाल्टी के बाद स्कोर 2-2 पर बराबर था। नीदरलैंड की तरफ से पांचवीं पेनाल्टी क्रिसेंसियो समरविले ने ली और बॉल बाहर मार दी। अब हार जीत का सार दारोमदार एक खिलाड़ी पर था जो मोरक्को की पांचवीं पेनाल्टी ले रहा था। उसका नाम था इस्माइल सैबारी। उसने अपना संतुलन बनाए रखा। उसने शॉट लिया और बॉल नीदरलैंड के गोलकीपर की डाइव की विपरीत दिशा में गोल के बाएं और जाल में उलझा दी।

मोरक्को पेनाल्टी शूटआउट 3-2 से जीत चुका था। उसने एक इतिहास रच दिया था। इस बार डच टीम को हरा कर। उसने बताया कि पिछले विश्व कप में सेमीफाइनल तक का उनका सफर कोई संयोग नहीं था। इस जीत के नायक इस्माइल थे इस्माइल सेबारी। वो इस्माइल सेबारी जो डच लीग के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। जो डच फुटबॉल क्लब इंडोहोवेन से खेलते हैं। वो इस्माइल सेबारी जो बचपन में अस्थि संबंधी विकार के कारण ठीक से खड़े भी नहीं हो पाते थे। जिन्हें बचपन में चलने और खड़े होने के लिए 'ऑर्थोटिक ब्रेस' का प्रयोग करना पड़ता था। वो इस्माइल सेबारी जिसने तब भी हार नहीं मानी और फुटबॉल खेलना शुरू किया। और जब बेल्जियम की एंडरलेक्ट टीम के लिए ट्रायल दिया तो मोटापे की वजह से सिलेक्शन ना हो सका। उन्होंने तब भी हार नहीं मानी और खेलना जारी रखा। वही इस्माइल सेबारी आज राष्ट्र की उम्मीद है,टीम का नायक हैं, विश्व कप के सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में शुमार हैं,फुटबॉल प्रेमियों का हीरो है। अपने पहले ही विश्व कप में चार गोल। अपने पहले मैच में ब्राजील के  खिलाफ 1-1 ड्रॉ में गोल,स्कॉटलैंड के खिलाफ 1-0 से जीत में 71वें सेकंड में गोल, हैती के विरुद्ध 4-2 से जीत में गोल और नीदरलैंड के विरुद्ध सबसे महत्वपूर्ण पेनाल्टी पर गोल। कमाल का खिलाड़ी है।

दूसरी ओर नीदरलैंड्स के लिए वर्ल्ड कप का मैच अतिरिक्त समय में या पेनल्टी शूटआउट में हारना दुर्भाग्य या किसी शाप की बात है। ये अविश्वसनीय आ ही लगता है कि नीदरलैंड ने 2010 के बाद से विश्व कप का कोई भी मैच निर्धारित समय सीमा में नहीं हारा है। आज के मैच से पहले उसके नाम 10 जीत और पांच ड्रॉ दर्ज हैं। और वो जब भी हारी, एकस्ट्रा टाइम में ही हारी फिर चाहे वो 2014 के सेमीफाइनल और 2022 के क्वार्टरफाइनल में अर्जेंटीना से पेनल्टी शूटआउट में हार हो या फिर आज मोरक्को से हार हो।

दो

एशिया ओशियाना क्षेत्र से दो टीमें नॉक आउट में पहुंची थीं - जापान और ऑस्ट्रेलिया। कल जापान का  सफर खत्म हुआ और एशिया की आधी उम्मीद भी। आधी इसलिए कि अभी ऑस्ट्रेलिया बाकी है। ब्राजील और जापान के बीच एक बेहद रोमांचक और कड़ा मुकाबला हुआ। जापान हारे जरूर लेकिन कड़े संघर्ष के बाद। एक सम्मानजनक हार। कि हारे जरूर पर दिल जीत लिया।

पहला गोल जापान ने 29वें मिनट में किया। जापानी मिडफील्डर काइशु सानो ने मध्य मैदान से एक पास बहुत ही शानदार तरीके से इंटरसेप्ट किया और शानदार गोल दाग कर जापान को एक गोल से बढ़त दिला दी। हॉफ टाइम तक यही स्कोर रहा। दूसरे हॉफ में ब्राजील की टीम बदली दिखाई दी। उसने जापानी गोल पर आक्रमणों की झाड़ी लगा दी। जल्द ही इसका लाभ मिला और कशमीरो ने शानदार गोलकर स्कोर बराबर कर दिया। उसके बाद  90 मिनट तक कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। जब ये लगने लगा कि मैच एक्स्ट्रा टाइम में जाएगा तो इंजरी टाइम में 95वें मिनट में मार्टीनेली ने गोलकर ब्राजील को 2-1 से जीत दिला दी। 

ये निश्चित है मैच अतिरिक्त समय में जाता या फिर पेनाल्टी से निर्णय होता, तो कुछ भी हो सकता था। ब्राजील ने बहुत करीबी जीत हासिल की और एक अपसेट वाले दिन में खुद को बड़े अपसेट से बचा लिया।

तीन

दिन का सबसे बड़ा उलटफेर पैराग्वे ने किया। उसने जर्मनी की टीम को पेनाल्टी शूट में 4-3 से हराकर पहली बार प्री क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। ये पैराग्वे के फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर था।

समय-समय की बात है। कोई एक समय होता था जब जर्मनी से प्रतियोगिता को जीत लेने की उम्मीद की जाती थी। वो आठ बार विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुका है और चार बार जीत चुका है। वो यूरोपीय चैंपियनशिप के भी छह फाइनल खेल चुका हैं जिसमें से तीन उसने जीते हैं। प्रतियोगिता के शुरू होने के समय पैराग्वे की विश्व रैंकिंग 41वीं थी और जर्मनी 10 वें पायदान पर था। लेकिन पहले चरण ने एक बात स्पष्ट कर दी थी कि बड़ी टीम होना,फेवरिट होना या  जीत का समृद्ध इतिहास होना जीत की गारंटी नहीं है।

गेंद पर 75 प्रतिशत नियंत्रण के बावजूद पहला गोल 42वें  मिनट में पैराग्वे के स्ट्राइकर जूलियो एनसिसो ने किया। जबकि सुव्यवस्थित आक्रमण के बावजूद जर्मनी की टीम गोल नहीं कर पाई। जर्मनी की तरफ से बराबरी का गोल काई होवर्ट्ज ने 54 वें मिनट में हेडर से किया। मैच के अतिरिक्त समय में भी गोल ना होने के कारण पेनाल्टी शूट से निर्णय हुआ। यहां भी इतिहास जर्मनी के साथ था। जर्मनी ने विश्व कप के अब तक हुए अपने चारों पेनाल्टी शूट जीते थे। लेकिन यहां पैराग्वे ने पैनल्टी शूट में 4-3 से हारकर विश्व कप का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया।

चार

तीनों सह मेजबान देशों के लिए प्रतियोगिता अभी तक बेहतरीन रही है। मेक्सिको,यूएस और कनाडा तीनों ही देशों ने नॉक आउट के लिए क्वालीफाई कर लिया है। और अब नॉक आउट के पहले मैच में मेजबान कनाडा ने दक्षिण अफीका को हराकर प्रीक्वार्टर फाइनल प्रवेश कर लिया है,जहाँ उसका मुकाबला मोरक्को से होगा।

ये भी एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक मैच था। लेकिन कोई भी टीम पूरे समय में गोल करने में सफल नहीं हो सकी। जब ये लगने लगा कि मैच अतिरिक्त समय में जाएगा,तब इंजरी टाइम में 92 वें मिनट में कनाडा के कप्तान स्टीफन यूस्टाक्वियो ने गोलकर टीम को जीत दिला दी।

तो अब प्री क्वार्टर फाइनल की चार टीमें निश्चित हो चुकी हैं - कनाडा,पैराग्वे,मोरक्को और ब्राजील। इसके साथ ही एक मैच भी निश्चित हो चुका है-कनाडा और मोरक्को का। पहले दिन के मैचों के परिणाम ये उदघोष कर रहे हैं 'पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त'।


Monday, 29 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 13:प्रथम चरण



 किसी भी प्रतियोगिता के दौरान अनेक ऐसे दृश्यों और क्षणों की निर्मिति होती है जो लोगों की स्मृति का एक बड़ा हिस्सा घेर लेते हैं। वे इतने प्रभावशाली होते हैं कि लोगों की स्मृति में हमेशा के लिए चस्पां हो जाते हैं। और जीत से निर्मित दृश्य या क्षण पृष्ठभूमि में चले जाते हैं या खो जाते हैं। अगर आप फीफा विश्व कप का इतिहास उठाकर देखेंगे तो पता लगेगा कि विश्व कप के सबसे यादगार पल वे शायद ही कभी होते हों जिनमें कोई टीम ट्रॉफी उठाती है। विश्व कप 2026 भी शायद ही इसका अपवाद बने। 

1950 में माराकांजो त्रासदी, 1994 में रॉबर्टो बैजियो द्वारा ब्राजील के खिलाफ चूका गया पेनल्टी शॉट,1986 में माराडोना का हैंड ऑफ गॉड गोल और गोल ऑफ सेंचुरी,2006 में जिनेदिन ज़िदाने का हेड बट,2014 में ब्राजील की सेमीफाइनल में जर्मनी से 1-7 हार जैसे कितने ही क्षण हैं, जो जीत से ज्यादा स्मृति में जगह घेरते हैं,और कहीं गहरे पैठ जाते हैं।

प्रतियोगिता का पहला चरण लीग स्टेज समाप्त हो चुका है। 48 में से 12 टीमें घर वापस जा चुकी हैं। और नॉक आउट स्टेज की 32 टीमें और उनके 16 मुकाबले तय हो चुके हैं। फीफा विश्व कप के इस पहले चरण (लीग स्टेज) के समाप्त होते ना होते खूबसूरत और शक्तिशाली दृश्यों की निर्मिति हो चुकी है, जो लोगों के जेहन में उतर चुके हैं, और स्थायी जगह बना चुके हैं।

एक

प्रतियोगिता शुरू होने से पहले इसकी सफलता पर कई प्रश्नचिह्न लगे थे। अनेक विवादास्पद मुद्दे,उनका विरोध और प्रतियोगिता के बायकाट की अपील,कड़े आव्रजन नियम,टिकट घोटाला व टिकटों के बेतहाशा बढ़े हुए दाम और उत्तरी अमेरिका की भीषण गर्मी जैसे कुछ ऐसे कारण थे जिनकी वजह से इसकी सफलता को संदेह की नजर से देखा जा रहा था। लेकिन फुटबॉल की लोकप्रियता ने इन सभी कारणों को बहुत पीछे छोड़ दिया और अमेरिका में इस आयोजन ने लोकप्रियता के नए मानक स्थापित किए।

 16 जून को विश्व कप के इतिहास में किसी एक दिन में स्टेडियम में उपस्थित दर्शकों की संख्या का एक नया रिकॉर्ड बना,32 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर। उस दिन उपस्थित दर्शकों की संख्या 2 लाख 81 हज़ार थी। उसके 6 दिन बाद 22 जून को चार स्टेडियमों में दर्शकों की कुल संख्या 2 लाख 88 हज़ार तक पहुंच गई। ये इस महा आयोजन की सफलता के सबसे प्रामाणिक प्रतिमान हैं।

स्टेडियमों के भीतर ही नहीं बाहर भी इसी तरह के दृश्य बने। टीमों के समर्थकों ने मैच के आयोजन शहरों में शानदार मार्च के अद्भुत दृश्यों की निर्मिति की। इन शहरों की सड़कों के दौड़ती भागती जिंदगी के नीरस उबाऊ दृश्यों को इन भाग लेने वाली टीमों के समर्थकों ने उत्साह,उमंग और जोश के रंगीन नजारों में बदल दिया। फीफा अधिकारियों के अनुसार केवल पहले चरण की समाप्ति के बाद इन फ़न फेस्टवलों में भाग लेने वाले समर्थकों की संख्या 20 लाख के पार हो गई है। ये एक आश्चर्यचकित कर देने वाला आंकड़ा है।

दो

मैदान से बाहर जो दृश्य दर्शक अपने उत्साह और ज़ुनून से बना रहे थे, मैदान में वही काम खिलाड़ी अपने खेल से कर रहे थे। इस बार पहली बार इतनी बड़ी संख्या में टीमें विश्व कप फाइनल्स में भाग ले रही हैं। 32 के मुकाबले इस बार 48 टीमें भाग ले रहीं हैं। आशंका थी कि इससे बहुत सारी कमजोर टीमों की भागीदारी होगी और इसका असर खेल की गुणवत्ता और प्रतियोगिता की साख और स्तर पर पड़ेगा। पर ये आशंका निर्मूल सिद्ध हुई।

इस विश्व कप की अब तक की सबसे सुंदर कहानी केप वर्डे की टीम ने लिखी। केप वर्डे अटलांटिक महासागर में अफ्रीका के पश्चिमी तट से लगभग 600 किलोमीटर दूर 10 सोलोमन द्वीप एक खूबसूरत देश। आबादी केवल पांच लाख। उसने अपने पहले ही मैच में स्पेन के साथ गोलरहित ड्रॉ खेलकर दुनिया को विस्मित कर दिया। 40 साल के गोलकीपर वोज़िन्हा गोल के सामने चट्टान की तरह खड़े हो गए कि स्पेन की एक ना चली। उन्होंने सात बचाव किए। वे राष्ट्रीय हीरो बन गए और पूरी दुनिया उनकी फैन। इंस्टा पर उनके फॉलोअर्स की संख्या अब  50 हजार से बढ़कर 17 मिलियन हो गई है।

दुनिया को लगा शायद ये एक संयोग हो। तब अगला मैच उरुग्वे के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला। केविन पिना ने भी 31 मीटर की दूरी से शानदार फ्री किक लगाकर देश का पहला विश्व कप गोल दागा और हेलियो वारेला ने बेंच से आकर दूसरे हाफ में बराबरी का गोल दागा। और उसके बाद सऊदी अरब से गोल रहित ड्रॉ। अपने ग्रुप में दूसरा स्थान और पहले ही विश्व कप में नॉक आउट में दौर में। ये छोटे से देश द्वारा लिखी गई फुटबॉल की एक बड़ी सी कहानी है।

एक और केवल डेढ़ लाख की आबादी और 444 किलोमीटर वर्ग में फैले छोटे से खूबसूरत कैरेबियन द्वीप कुराकाओ ने भी खेल के सुंदर दृश्य रचे। कुराकाओ ने टूर्नामेंट की शुरुआत जर्मनी से 1-7 से हार के साथ की थी। उस मैच में ही पहले हॉफ में स्कोर 1-1 था। उसने विश्व कप के पहले ही मैच में अपना पहला विश्व कप गोल किया। उसके बाद इक्वेडोर से अपना मैच गोलरहित ड्रॉ खेला। लेकिन कुराकाओ के लिए यह ड्रॉ भी ऐतिहासिक था। विश्व कप का पहला अंक अर्जित किया। ये उनके गोलकीपर एलॉय रूम का मैच था। एलोय रूम ने अपने खेल से कुराकाओ को मैच में बनाए रखा और टीम को ड्रॉ हासिल करने में मदद की। उन्होंने रिकॉर्ड 15 बचाव किए।

मिस्र ने न्यूजीलैंड को 3-1 से हराया। मिस्र की ये जीत इस मायने में ऐतिहासिक थी कि देश को विश्व कप में पहली जीत हासिल करने के लिए 92 साल इंतजार करना पड़ा था। इस जीत में लिवरपूल के मोहम्मद "मो" सलाह ने अहम भूमिका निभाई थी।

पहले दौर में ईरान के प्रदर्शन की चर्चा जरूर की जानी चाहिए। वे शत्रु देश में बहुत ही कठिन परिस्थितियों में खेल रहे थे जिन्हें फीफा से कोई मदद नहीं मिल रही थी। वे भले ही अगले दौर के लिए क्वालीफाई ना कर पाए हों लेकिन इतनी कठिन और होस्टाइल परिस्थितियों में उनका प्रदर्शन अच्छा ही कहा जाएगा। उन्होंने बेल्जियम से गोलरहित ड्रॉ खेला। इसके अलावा मिस्र से 1-1 से और न्यूजीलैंड से 2-2 से ड्रॉ खेला। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ईरान को एक भी मैच न हारने के बावजूद ग्रुप स्टेज में ही टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। यह उस टीम के लिए एक दुखद अंत था जिसने बहादुरी से संघर्ष किया। कभी कभी भाग्य भी बहादुरी का साथ नहीं देता है।

ईरान की टीम को मैक्सिको के तिजुआना में बेस कैंप बनाना पड़ा था क्योंकि अमेरिका ने अपने यहां रुकने की अनुमति नहीं दी थी। जबकि उसके सारे मैच अमेरिका में थे और मैचों के लिए उसे लंबी यात्राएं करनी पड़ रही थी। कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों के देश में प्रवेश पर कथित तौर पर रोक लगा दी गई है। 

स सबके बावजूद सोफी स्टेडियम में बेल्जियम के साथ 0-0 से ड्रॉ के बाद ईरान ने अपने व्यवहार से प्रशंसकों का दिल जीत लिया। रवाना होने से पहले ईरान ने लॉस एंजिल्स के आतिथ्य सत्कार के लिए और अपने प्रशंसकों को धन्यवाद देते हुए लॉकर रूम में एक  हस्तलिखित नोट छोड़ा "हम गर्व के साथ लॉस एंजिल्स आए, सम्मान के साथ प्रतिस्पर्धा की और गरिमा के साथ विदा हो रहे हैं।" इसी खेल भावना से खेल खेल रह पाते हैं।

विश्व कप के शुरुआत में एशियाई देशों ने अच्छा खेल दिखाया। पहले कई दिन कोई भी एशियाई टीम अपना मैच नहीं हारी। लेकिन जैसे जैसे प्रतियोगिता आगे बढ़ी एशियाई टीम पिछड़ती गईं। एशियाई फुटबॉल महासंघ से नौ टीमें ने विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया था लेकिन केवल जापान और ऑस्ट्रेलिया ही नॉकआउट चरण में पहुंचने में सफल रहे। ग्रुप स्टेज में जापान एशियाई फुटबॉल का सबसे सकारात्मक पक्ष रहा। कोच हाजिमे मोरियासु की जापानी टीम ने ग्रुप एफ में 5 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। उसने ट्यूनीशिया को 4-0 हराया और नीदरलैंड के साथ 2-2 से और स्वीडन से 1-1 से ड्रॉ खेला। अब राउंड ऑफ 32 में "ब्लू समुराई" का मुकाबला ब्राजील से होगा। दूसरी टीम ऑस्ट्रेलिया की है।

एशियाई टीमों के विपरीत अफ्रीकी टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया है और 10  अफ्रीकी टीमों में से 9 टीमें अगले दौर में पहुंच गई हैं। दक्षिण अमेरिका की 6 में से 5 टीमें, यूरोप की 16 में से 13 टीमें और CONCACAF क्षेत्र की 6 में से 3 टीमों ने नॉकआउट दौर में पहुंची हैं। यहां उल्लेखनीय है कि तीनों सह मेजबान देश अमेरिका,कनाडा और मेक्सिको अगले दौर में पहुंच गए हैं।

तीन

अगर विश्व का सबसे बड़ा खेल आयोजन हो रहा है और इसमें विश्व की सबसे बेहतरीन टीमें भाग ले रही हैं तो ज़ाहिर है कि दुनिया भर के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी और प्रतिभाओं का जमावड़ा भी वहां होगा ही। सारी दुनिया की निगाहें इन पर और इनके  प्रदर्शन पर लगी रहेंगी। ये सिर्फ अपने राष्ट्र की उम्मीदों का बोझ लिए ही यहाँ नहीं आते हैं,बल्कि दुनिया भर के प्रशंसकों की उम्मीदों का भार भी अपने कंधों पर धरे  आते हैं। लेकिन ये दबाव उन्हें और अधिक अच्छा करने की प्रेरणा देता है। वे इस बोझ तले दब नहीं जाते। यही बात उन्हें महान बनाती हैं। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी उम्मीदों और दबाव के बोझ तले नहीं दबते, बल्कि वे इसका भरपूर आनंद लेते हैं।

इस प्रतियोगिता में शामिल सभी महान खिलाड़ी यथा लियोनेल मेस्सी , क्रिस्टियानो रोनाल्डो, किलियन म्बाप्पे , एर्लिंग हालैंड , हैरी केन , विनीसियस जूनियर , लामिन यामल , माइकल ओलिस ऐसा ही कर रहे हैं। ये सारे सितारे यहां जबदस्त खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ ने शानदार शुरुआत की। कुछ की शुरुआत थोड़ी फीकी रही। और कुछ को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। 


बसे पहले बात मेस्सी की। वे अपना छठवां विश्व कप खेल रहे हैं। यूँ तो उनका पिच पर होना भर ही उनके चाहने वालों के लिए पर्याप्त होता,क्योंकि उनको लोग इस प्रतियोगिता में अंतिम बार देख रहे हैं। लेकिन फुटबॉल का ये जादूगर अविश्वसनीय रूप से कमाल दर कमाल किए जा रहा है। मेस्सी ने 2026 के विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत अल्जीरिया के खिलाफ एक शानदार हैट्रिक के साथ की। फिर मजबूत ऑस्ट्रियाई टीम के खिलाफ दो गोल दागे। दो मैचों में पांच गोल। जॉर्डन के विरुद्ध वे पूरे समय खेल कर अपने आंकड़ों को और अधिक अविश्वसनीय बना सकते थे। लेकिन मेस्सी अपने आप में अकेले हैं। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को तरजीह दी। वे साठ मिनट के बाद पिच पर आए और फ्री किक से एक शानदार गोल कर पुनः अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की। वे इस इस विश्व कप में अब तक तीन मैचों में छह गोल कर चुके हैं। विश्व कप में कुल 19 गोल। विश्व कप के लगातार सात मैचों में गोल। उनकी ये एक बेमिसाल शुरुआत है। याद रखें कि मेस्सी 39 साल के हैं और वे विश्व के सबसे बड़े मंच पर अपने खेल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं।

शानदार शुरुआत करने वाले अन्य सितारे हैं किलियन म्बाप्पे, एर्लिंग हालैंड और हैरी केन। इन सभी ने अपने शुरुआती मैचों में दो-दो गोल दागे। घाना के खिलाफ इंग्लैंड के गोल रहित ड्रॉ में केन गोल करने में नाकाम रहे, वहीं म्बाप्पे और हालैंड ने इराक और सेनेगल के खिलाफ अपनी-अपनी जीत में दो-दो गोल दागकर शानदार प्रदर्शन जारी रखा। लेकिन ओलिसे ने अभी तक गोल नहीं किया है,पर निसंदेह वे फ्रांस के लिए शानदार खेल दिखाया है। वे फ्रांसीसी आक्रमण की सबसे मजबूत कड़ी हैं। डेंबेले ने भी नॉर्वे के खिलाफ शानदार हैट्रिक की।

दूसरी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लामिन यामल ने पहले मैच में कमजोर शुरुआत के बाद वापसी की। डीआर कांगो से मैच 1-1 से ड्रॉ के बाद रोनाल्डो आलोचनाओं का शिकार हुए। लेकिन अगले मैच में दो गोल दाग कर आलोचकों के मुंह बंद कर दिए। इसी तरह यामल ने भी केप वर्डे के खिलाफ कमजोर शुरुआत कर अगले मैच में अच्छा प्रदर्शन किया।

मोरक्को के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ में विनीसियस जूनियर ने शानदार प्रदर्शन से गोल कर एक महत्वपूर्ण अंक दिलाया। इसके बाद विनी ने हैती के खिलाफ भी उसी लय को बरकरार रखा और एक गोल करने के साथ-साथ एक बेहतरीन असिस्ट भी किया।

इस पहले चरण में स्टार खिलाड़ी अपने रंग में आ चुके हैं। और अगले दौर के लिए अपने पैरों का जादू दिखाने को तैयार हो रहे हैं।

चार


ये चरण गुलाबी रंग में रंगा नजर आया। गुलाबी रंग को सामान्यतः लड़कियों के साथ जोड़ा जाता है। लेकिन इस विश्व कप में ये रंग अपना जलवा बिखेर रहा है। अब इसे अघोषित रूप से इसे विश्व कप का आधिकारिक रंग माना जा रहा है। जूते बनाने वाले सभी प्रमुख कंपनियों नाइकी, एडिडास, प्यूमा सभी ने इस विश्व कप में अपने नए कलेक्शन लॉच किए हैं और सभी ने खिलाड़ियों को गुलाबी रंग के जूते उपलब्ध कराए हैं। यही कारण है कि इस समय ज्यादातर टीमों के खिलाड़ी चमकीले गुलाबी रंग के जूतों में नजर आ रहे हैं। और फुटबॉल मैदान गुलाबी रंग में रंगे नज़र आ रहे हैं।  इन टीमों में इंग्लैंड, जापान, अर्जेंटीना,पुर्तगाल,फ्रांस और मेजबान यूएस की टीम भी शामिल हैं। हालांकि मेस्सी सफेद रंग के जूतों में ही नजर आ रहे हैं। 

दरअसल बरसों के शोध और मार्केटिंग अनुभव के बाद लगभग सभी जूते बनाने वाली कंपनियां इस निष्कर्ष पर पहुँची हैं कि फुटबॉल मैदान पर ब्राइट पिंक अन्य किसी भी रंग के मुकाबले अधिक प्रभावी होते हैं। क्योंकि घास के हरे रंग के कंट्रास्ट में पिंक कलर टीवी,मोबाइल पर हर जगह अधिक चमकता और ध्यान खींचता है।

बस अब देखना है कि नॉक आउट में ये पिंक किसे सूट करता है। कौन जीत की पिंकी आभा लिए आगे बढ़ता है और किसके चेहरे हार की टीस से मलिन हो अपनी गुलाबी आभा खो बैठेंगे।

पांच

विश्व कप का सबसे विवादास्पद नियम हाइड्रेशन ब्रेक विश्व कप के इस पहले चरण में फुटबॉल खिलाड़ियों और विशेषज्ञों के बीच सबसे चर्चित विषय बना रहा। इस बार दोनों हॉफ में एक हाइड्रेशन ब्रेक का प्रावधान किया गया है। दरअसल इसके पीछे असल मकसद विज्ञापनों के लिए समय निकालना है। लेकिन इस ब्रेक का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि इससे खेल की रिदम, उसकी लय भंग होती है। खिलाड़ियों की भी और दर्शकों की भी। विवाद का विषय ये इसलिए बना कि इस ब्रेक को वहां भी दिया जा रहा है जहां इसकी  जरूरत नहीं है। जहां मौसम अपेक्षाकृत काफी ठंडा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले तो इसे दिया ही नहीं जाना चाहिए। अगर दिया भी जाए तो वहां जहां मौसम काफी गर्म है। यानी , जब मौसम और परिस्थितियां इसकी मांग करती हैं तो ही हाइड्रेशन ब्रेक लेना समझदारी भरा कदम है। लेकिन वैंकूवर जैसे स्थानों पर जहाँ  तापमान 17 डिग्री के आस पास रहता है, इस ब्रेक का क्या ही औचित्य हो सकता है।

खेलों के बारे में नेल्सन मंडेला का एक बहुत प्रसिद्ध कथन है "खेलों में लोगों को इस तरह एकजुट करने की शक्ति है जैसी शायद ही किसी और चीज में हो।” स्टेडियमों के अंदर और बाहर से जिस तरह की खूबसूरत तस्वीरें आ रही हैं, वे मंडेला के कथन की पुष्टि करती प्रतीत होती हैं। दुनिया के कोने कोने से अपनी टीमों के समर्थन में लोग इन तीन मेजबान देशों में आ रहे हैं जिसमें हर धर्म,नस्ल, देश और उम्र के लोग शामिल हैं। यहां वे मेजबान देशों की सांस्कृतिक विशेषताओं का आनंद उठा रहे हैं है,आत्मसात कर रहे है, जश्न मना रहे हैं। आज की युद्धग्रस्त और विभाजित दुनिया में इसी की सबसे ज्यादा जरूरत है।

फिलहाल फीफा विश्व कप के 17 दिन के इस पहले चरण ने भविष्य की पीठ पर शानदार फुटबॉल खेल की इबारत लिख दी है। जिसे अगले चरण में एक महाकाव्य में बदल जाना है।



Sunday, 28 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 12: उभरता सितारा यान डियोमांडे




अफ्रीका के और अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों ने दुनिया में फुटबॉल खेल और फुटबॉल खेल की दुनिया बदल दी है। भौगोलिक दुश्वारियां, उपनिवेशीय शासन द्वारा छोड़ी गई बदगुमानिया,सैन्य शासकों और तानाशाहों के बदमग्जियां,उनसे छुटकारा पाने के लिए अनवरत गृहयुद्ध और इन सब के चलते घोर अव्यवस्था और भयावह निर्धनता के बीच जीने के लिए दुर्दमनीय जिजीविषा और अंतिम सांस तक हार ना मानने के धैर्य और हौसले की जरूरत होती है। और अफ्रीकी खिलाड़ी जब इन्हीं खूबियों और जीवट के साथ खेल के मैदान में उतरते हैं,तो वे दुनिया के सबसे बेहतरीन एथलीट बन जाते हैं। शायद यही कारण है कि मध्यम और लंबी दूरी के दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली व प्रसिद्ध धावक और दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली फुटबॉलर अफ्रीका से ही आते हैं।

प्रतिभाएं जो डार्क कॉन्टिनेंट रह जाती हैं,उनमें से कुछ के नाम रोशन हो बुलंदियों के आसमान में सितारे से टंक जाते है, बाकी गुमनामियों के अंधेरे में खो जाते हैं। लेकिन उनमें से भी बहुत सारे एक बेहतर जीवन और सुंदर भविष्य का सपना लिए,जीवन का जोखिम उठाए, अपनी धरती से बहुत-बहुत दूर दुनिया के खुशहाल मुल्कों में जा पहुंचते हैं। जीवन के एक नए सफर पर। इनमें से भी कुछ केवल खुशहाल जीवन तक सीमित रह आते हैं और कुछ शोहरत की बलंदी पर जा पहुंचते हैं। ऐसी ही बलंदी पर पहुंचने वाला एक अफ्रीकी सितारा है आइवरी कोस्ट का 19 साल का विंगर यान डियोमोंड़े।

अमेरिका में चल रहे 23वें फीफा कप में 15 जून को फिलाडेल्फिया में आइवरी कोस्ट और इक्वेडोर का मुकाबला था। इसमें आइवरी कोस्ट ने इक्वेडोर को 1-0 से हरा दिया। इस पूरे मैच में यान डियोमोंड़े ने अपनी शानदार ड्रिबल और गति से इक्वेडोर की रक्षापंक्ति को दबाव में रखा। उन्हें 'मैन ऑफ़ द मैच' घोषित किया गया। 19 साल के युवा का ये फीफा विश्व कप में स्वप्निल आगाज़ था। इससे पहले उन्होंने बुंदेसलीगा में आरबी लीपजिग की और से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 13 गोल और 9 असिस्ट की। इस प्रदर्शन के आधार पर उन्हें 'रूकी ऑफ द ईयर' का खिताब भी मिला। अब वे मौजूदा ट्रांसफर विंडो में एक सबसे चर्चित खिलाड़ी हैं जिन्हें लीवरपूल और सेंट जर्मन जैसे फुटबॉल क्लब साइन करना चाहते हैं।

यान डियोमोंड़े का कैरियर इस समय जितना चमकदार है,उससे कहीं अधिक कड़े संघर्ष और कठिनाइयों का उनका यहां तक पहुंचने का सफर रहा है। उनकी इन ऊंचाइयों तक पहुंचने और सफलता की कहानी दरअसल गरीबी,संसाधनों की कमी,परिवार से विछोह,कड़े परिश्रम और संघर्ष की कहानी है। ये कहानी एक बहन के एक अटूट विश्वास को बनाए रखने की कहानी भी है और उससे किए गए वायदे को निभाने की कहानी भी है। ये खुली आंखों से देखे गए सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी है।

एक कहानी जो आइवरी कोस्ट के सबसे बड़ी आबादी वाले शहर आबिदजान के गरीब और बाहरी इलाके सिकोजी में सन 2006 से शुरू होती है। जहाँ यान का जन्म होता है और बचपन शहर की भीषण गर्मी और धूल भरी तेज़ हवाओं के बीच कच्ची पक्की सड़कों पर नंगे पैर फुटबॉल की सरगम गाते बीतता है। फुटबॉल एक ऐसा खेल जो गरीब से गरीब की मन की भाषा पढ़ लेता है। एक ऐसा खेल जिसकी लय की भाषा हर कोई सीख लेता है।

एक तरफ यान डियोमोंड़े का फुटबॉल प्रेम और उसकी बहन रोक्सेन का उसकी प्रतिभा में अटूट विश्वास है। तो दूसरी तरफ एक छोटे से घर में 25 सदस्यों के साथ रहवास है। गरीबी है। संसाधनों को अभाव है। पर फुटबॉल का प्रेम ऐसा है कि रात को सबके सो जाने के बाद धीमी आवाज में टीवी पर फुटबॉल देखते हुए फुटबॉल के हुनर को जानने की,सीखने की कोशिश करते बड़ा होता है।

दरअसल वो एक द्वैत को जीते हुए बड़ा हो रहा होता है। एक तरफ कठोर यथार्थ है। दूसरी तरफ रोमानी स्वप्न। लेकिन उसका दृढ़ संकल्प और उसमें उसकी बहन का विश्वास ऐसा है कि रूक्ष यथार्थ भी उसके सपनों को जला नहीं पाता। वो सीआर सेवन का दीवाना है। अपनी जर्सी पर नंबर सात अंकित कर लेता है,पर उसकी स्टाइल है कि दोस्त उसे रॉबर्टो कार्लोस कह कर पुकारते है। पर इससे फर्क क्या ही पड़ना था। दोनों भाई बहन फ्रांस जाने,सीआर सेवन जैसा सबसे बड़ा फुटबॉलर बनने, एक कार, एक बड़ा सा घर और एक लग्जरी जीवन जीने के सपने संजोते रहते हैं जिसमें बहन को कोई चिंता नहीं करनी थी।

उधर वे सपने देखते हुए बड़े हो रहे होते हैं और इधर उनके पिता परिवार का साथ छोड़ देते हैं। वे परिवार को छोड़कर फ्रांस चले जाते हैं। यान डियोमोंड़े का लक्ष्य और दुष्कर हो आता है। लेकिन वो हार नहीं मानता। अब वो घर परिवार से दूर घाना सीमा के समीप एक फुटबॉल अकादमी में प्रवेश लेता है। उस समय उसकी उम्र नौ वर्ष होती है। इस उम्र में परिवार से दूर जाना  आपसे बड़े त्याग की अपेक्षा रखता है। वो ऐसा करने सफल होता है। जीवन की दुश्वारियां वहां भी कम ना थी। वे और उनके साथी अक्सर पेट भरने के लिए खेतों से आलू चुराया करते थे। जिसे वे आज बैंक लूट की संज्ञा देते हैं।

इन्हीं दुश्वारियों में वे फुटबॉल के गुर सीखते बड़े हो रहे थे। और फिर 15 साल की उम्र में उनकी असाधारण प्रतिभा उन्हें यूएस के फ्लोरिडा स्थित डीएमई फुटबॉल अकादमी ले आती है। घर से हजारों किमी दूर जाना और रहना एक किशोर के लिए बहुत कठिन था। यहां बिल्कुल अलग दुनिया थी। उन्हें अंग्रेजी बिल्कुल नहीं आती थी। सांस्कृतिक अलगाव था। लेकिन कोई भी कठिनाई इतनी बड़ी नहीं होने वाली थी जो उन्हें उनके संकल्प से डिगा सके। वे राह में आने वाली हर कठिनाई से और ज्यादा निखरते चले गए। यहां वे एक खिलाड़ी के रूप में ही परिपक्व हो रहे थे,बल्कि एक व्यक्ति के रूप भी अनुभवी हो रहे थे।

अब उन्होंने यूरोप के क्लबों में अपना भविष्य तलाश करने की कोशिश की। उन्होंने बोर्नमाउथ,चेल्सी,रेंजर्स, ओलंपियाकोस और क्रिस्टल पैलेस जैसे क्लबों में ट्रायल दिया और समय बिताया। लेकिन अभी भी कठिनाइयाँ खत्म होने का नाम नहीं ले रही थीं। सब जगह उनकी प्रतिभा की प्रसंशा तो खूब होती लेकिन कोई अनुबंध उन्हें ना मिल पाता। इधर उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई और अंततः उन्हें वापस अपने देश लौटना पड़ा। बिना सफलता के घर लौटना उनके लिए बड़े दुख का वायस था। उनका विश्वास डगमगा रहा था। लेकिन उनकी बहन का उनकी प्रतिभा में अटूट विश्वास था।

और तब जनवरी 2025 में उन्हें स्पेनिश क्लब लेगनेस से उनका करार हुआ। लेकिन उनका करार पूरा होने से पहले ही उनकी बहन का निधन हो गया। ये उनके लिए सबसे बड़ा दुख था। उन्होंने वो बहन खो दी थी जिसने उनकी प्रतिभा को उस समय पहचान लिया था और उस पर आंख मूंदकर विश्वास किया था जब दुनिया भर के कोच,मैनेजर और उनके प्रसंशक उनका नाम तक नहीं जानते थे। लेकिन उन्होंने अपने सबसे बड़े दुख को प्रेरणा में बदल दिया। उसके बाद से उनका हर गोल अपनी बहन के लिए था।

उस बसंत जब उन्होंने एस्पियोनल के खिलाफ अपने पेशेवर करियर का पहला गोल किया तो उनकी आंखों से पानी बरस पड़ा। ये उनकी बहन की याद थी। उन्होंने कहा कि "मेरा सपना था कि मैं उसे खुश और गौरवान्वित करूँ।"

उनकी बहन का जाना उनके लिए उनके एक हिस्से का  अलग हो जाना था। अब उनके लिए खेल के मायने बदल गए हैं। भौतिक सुख उनके लिए अब महत्वहीन हो गए हैं जिसके सपने उन्होंने कभी बहन के साथ देखे थे। अब उनका हर मूव,हर पास,हर गोल बहन की स्मृति बचाए रखने का, उनमें बहन के विश्वास को बनाए रखने का जरिया भर रह गया है।

यान डियोमोंड़े का आबिदजान की डामर वाली कठोर,उष्णता और धूल भरी गलियों से फिलाडेल्फिया के एयरकंडीशंड स्टेडियम और मखमली हरी घास के मैदान तक का सफर एक तिलस्मी कथा सी प्रतीत होती है। वे अब एक फुटबॉल जगत का चमकता सितारा हैं जिसका भविष्य उज्जवल है। 

उनकी सफलता की कहानी युवा फुटबॉलर के लिए प्रेरणास्रोत का काम करती रहेगी। ऐसी अद्भुत अनगिनत कहानियां मिलकर फुटबॉल खेल का महाकाव्य रचती हैं और उसे अधिक सगीतात्मक,खूबसूरत और स्वीकार्य बनाती है।


फीफा विश्व कप 2026 डायरी 19: काबो वर्डे

अक्सर चीजें मृत्यु के बाद अधिक खूबसूरत लगने लगती हैं। अधिक प्रिय हो आती हैं।  कई बार हार भी इतनी प्रभावशाली होती है जीत पृष्ठभूमि में चली जा...