Thursday, 9 July 2026

खेल डायरी_01: उम्र


 कुछ लोगों पर उम्र इस खूबसूरती से गिरती है उनका व्यक्तित्व और अधिक उभरकर आता है। उनके लिए उम्र एक गिनती भर रह जाती है।

कल रात दुनिया के दो अलग अलग कोनों में उम्र के 39वें पड़ाव पर उम्र को धता बताते हुए दो खिलाड़ी सफलता की एक सी लेकिन अलग अलग खूबसूरत कहानी लिख रहे थे। 

मेस्सी अटलांटा में अपने पैरों की कलम को फुटबॉल की रोशनाई में डुबोकर जो इबारत फुटबॉल की पीठ पर लिख रहे थे,वैसी ही इबारत नोवाक जोकोविक विंबलडन में अपने रैकेट के कलम से बॉल की रोशनाई में डुबोकर टेनिस कोर्ट के वक्ष पर लिख रहे थे।

मेस्सी  केवल 15 मिनट में एक असिस्ट और गोल से एक हारी बाजी को जीत में बदल देते हैं। 79 मिनट तक मिस्र से 0-2 से पिछड़ने के बाद 3-2 से जीत असंभव को संभव बनाना था। ये मेस्सी के अनुभवी नेतृत्व,संयम और परिपक्वता की कहानी है।


उधर लन्दन में उम्र के ठीक इसी पड़ाव पर नोवाक जोकोविच विंबलडन के इतिहास का सबसे लंबा क्वार्टर फाइनल जीतकर विंबलडन के अपने 15वें सेमीफाइनल में जगह पक्की कर इतिहास रचते है। जोकोविच ने 05 घंटे और 15 मिनट तक चले असाधारण मैच में फेलिक्स ऑगर-एलियासिमे को 7-6 (12-10), 3-6, 6-3, 6-7 (4-7), 7-6 (10-4) से हराया। 

बढ़ती उम्र भी ना कितनी खूबसूरत रंगों में सामने आती है।


Wednesday, 8 July 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 23: राउंड ऑफ 16

 



फीफा विश्व कप 2026 का एक और दौर समाप्त हुआ। प्री क्वार्टर फाइनल के आठ मैच पूरे हुए। इस तरह कुल 104 मैचों में से 97 मैच इतिहास में दर्ज़ हुए। अपने टूटे सपनों को बटोरे 40 टीमें इस महासमर से विदा हुईं। शेष बचे सात मैचों में फुटबॉल का नया इतिहास रचने के लिए आठ टीमें खम ठोंके मैदान में अभी भी जमी हैं।

बीते चार दिनों में 16 टीमों ने वो वायदा शिद्दत से निभाया जो पहले दो चरणों की जीत में इन टीमों ने अपने खेल के माध्यम से अपने समर्थकों और फुटबॉल के चाहने वालों से किया था। इन चार दिनों और आठ मैचों में वो सब कुछ था जो जिसकी पूर्व पीठिका पहले दो चरणों के खेल ने लिखी थी।  

यहां गोलों की रिमझिम बरसात थी। चूकों की गहरी शीत थी। एकस्ट्रा टाइम का खेल था। पेनाल्टी शूटआउट था। रेड कार्ड थे। वीएआर था। उससे उपजे विवाद थे। कुछ सितारों का विश्व कप के आसमान से अस्त हो जाना था।  कुछ सितारों की चमक अभी भी आँखें चौंधियाती थी। नए सितारों का उदय भी हुआ चाहता था। कुछ टीमें थीं कि अपने खेल से प्रशंसकों के मन में  ही घर कर लेना चाहती थीं। तो कुछ टीमें थीं कि फुटबॉल चाहने वाले दिल से बाहर किए जाते थे। आगे बढ़ने की उमंग थी। विदाई की उदासी भी। कुछ की आंखों में सपनों के टूटने से बच जाने से उपजे आंसू थे। कुछ की आंखों में सपने किरच किरच हो जाने का पानी था। इन सबके बीच फुटबॉल का खेल था और उसका रोमांच अपने उरूज पर था।

एक

इस दौर के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण और इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज़ हो जाने वाले दृश्य फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों की आंखों के पानी से बने थे। कुछ की आंख विछोह से भीगी थीं,कुछ की सपनों के टूट जाने से और कुछ की सपनों के टूटने टूटते बच जाने से। ये फुटबॉल के इतिहास की सबसे गाढ़ी स्मृतियां हैं।

पहला दृश्य, मेस्सी की आंखों का नम होना। उनकी आंखों में ये आंसू खुशी से उपजे थे। एक अप्रत्याशित हार और विश्व कप को बचाने के सपने के टूटते टूटते रह जाने की खुशी से उपजे आंसू। अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।मिस्र की टीम इस बार ग़ज़ब हौसले और मजबूती के साथ आई थी। उसने न्यूजीलैंड को हराकर विश्व कप की अपनी पहली जीत हासिल की। पहली बार नॉक आउट में प्रवेश किया। और उसके बाद चैंपियन अर्जेंटीना को  हराकर इस प्रतियोगिता का सबसे बड़ा उलटफेर किया ही चाहती थी कि एक दूसरा इतिहास रचा गया।

अटलांटा स्टेडियम में खेले गए इस ऐतिहासिक मुकाबले में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना 78 वें  मिनट तक 0-2 से पीछे चल रही थी। लेकिन मैच के आखिरी मिनटों में अविश्वसनीय वापसी करते हुए जीत दर्ज की। इस दौरान मेस्सी अपनी उम्र से संघर्ष करते हुए एक साधारण खिलाड़ी की तरह लगते रहे, जो गोलपोस्ट पर जगह बनाने और विपक्षी डिफेंडरों की भीड़ में गोल के अवसर बनाने की असफल कोशिश करता दिखा। लेकिन वे शानदार नेतृत्वकर्ता हैं। उन्होंने अंतिम समय तक हार नहीं मानी। अंततः 79 वें मिनट में एक शानदार पास रोमियों को दिया जिसने हेडर से गोलकर अर्जेंटीना के लिए मोमेंटम बना दिया। उसके बाद मेस्सी का बाएं पैर का सिगनेचर शॉट आया और 83 वें मिनट में बराबरी हुई। इंजरी टाइम में  एंजो फर्नांडीज ने हेडर से गोलकर जीत पक्की कर दी। आखिरी 15 मिनट में मेस्सी ने बताया कि वे क्यों गोट हैं।

आंखों में पानी सिर्फ मेस्सी के नहीं था। ये पानी नेमार की आंखों में भी था। नॉर्वे ने पांच बार की चैम्पियन ब्राजील को 2-1 से हराकर बड़ा उलटफेर किया। इसमें तीनों गोल दो बड़े सितारों ने किए। गोल मशीन एर्लिंग हालैंड ने 79 और 90वें मिनट में गोलकर नॉर्वे को अजेय बढ़त दिला दी। जबकि इंजरी टाइम में पेनाल्टी से नेमार ने गोलकर इस हार के अंतर को कम किया।

जहां हालैंड के इस विश्व कप में कुल सात गोल हुए और वे गोल्डन बूट की दौड़ में बने हुए हैं,वहीं नेमार का विश्व को जीतने का सपना टूट गया। मैच समाप्ति के बाद नेमार अपनी नम आंखों से अपनी खेल पारी की समाप्ति की घोषणा कर रहे थे। और पूरी दुनिया हतप्रभ दुखी मन से उनको विदाकर रही थी। हमारे दौर का एक और महान सितारा जो पेले की शानदार विरासत को आगे बढ़ा रहा था,मैदान से विदा हो रहा था।

एक और सितारा आंखों से मोती टपकाता विश्व कप को अलविदा कह रहा था। एक और महानतम खिलाड़ी विश्व कप को जीतने के अधूरे अरमान लिए फुटबॉल प्रेमियों से विश्व कप में कभी ना दीखने के लिए विदा ले रहा था। ये पुर्तगाल का क्रिस्टियानो रोनाल्डो था। उसकी टीम एक बहुत प्रतीक्षित मैच में स्पेन की टीम से 0-1 से हारकर इस विश्व कप से बाहर हो गई थी। स्पेन और पुर्तगाल का ये मुकाबला बहुत बड़ा माना जा रहा था। लेकिन ये इस विश्व कप के सबसे नीरस मुकाबलों में से एक था जिसमें मैच के इंजरी टाइम में 91वें मिनट में मेरीनो ने गोलकर स्पेन पुर्तगाल को हरा दिया। ये मैच अब केवल और केवल रोनाल्डो की विदाई के लिए जाना जाएगा।

स्पेन से हार के बाद रोनाल्डो का विश्व कप न जीत पाने का ग़म उनकी आंखों से बह रहा था। उनके साथी उन्हें अकेला छोड़ टनल में जा चुके थे। और तब 18 साल के उनके प्रतिद्वंदी लामिने यमल ने उनको अपने गले से लगाया और उनके दुख को साझा किया। आप क्रिस्टियानो से प्यार कर सकते या घृणा कर सकते है। लेकिन उनकी महानता को उनसे कोई नहीं छीन सकता। विश्व कप ट्रॉफी उनकी जीती ट्रॉफी में एक और अंक की बढ़ोत्तरी भर होती बाकी उसका उनके पास ना होने से उनकी महानता पर क्या ही फर्क पड़ता है।

फुटबॉल इन्हीं दृश्यों से खूबसूरत बना हुआ है।

दो

ये दौर तीन मेजबान देशों की इस प्रतियोगिता से विदाई का दौर भी ठहरा। 

इंग्लैंड और मेक्सिको के बीच एक ऐसा रोमांचक मुकाबला हुआ जो अब तक के विश्व कप का सबसे बेहतरीन मैच था। क्या ही शानदार मैच था ये। अविश्वसनीय माहौल। नाटकीय गोल। एक पेनल्टी। एक रेड कार्ड। एक और पेनल्टी। आधे घंटे से अधिक समय तक आक्रामक दर आक्रमण और घबराई हुई रक्षा पंक्ति का खेल। अंतिम 46 मिनट में 10 बनाम 11 की टक्कर। परिणाम इंग्लैंड तीन गोल। मेक्सिको दो गोल। 

कितना दुखद था कि एक टीम प्रतियोगिता से बाहर हो रही थी।

इंग्लैंड केवल एक मैच भर नहीं जीत रहीं थी बल्कि अपनी विश्व कप जीतने की राह की बहुत बड़ी बाधा पार कर रही थी। वो सिर्फ मेक्सिको की टीम से ही नहीं खेल रही थी, बल्कि स्टेडियम में मौजूद 80 हजार दर्शकों और उनके शोर के विरुद्ध भी खेल रही थी। वो सात हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित एस्टाडियो एज़्टेका पर वायु दाब, तापमान में बदलाव और ऑक्सीजन की कमी से भी लड़ रही थी। इन परिस्थितियों में भी ट्यूशेल की टीम ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो पहले किसी ने नहीं किया था। उन्होंने एस्टाडियो एज़्टेका में मैक्सिको के खिलाफ विश्व कप का मैच जीत लिया था। 

और बेल्जियम ने तो कमाल ही कर दिखाया। उसने मेजबान यूएस की मजबूत मेजबान टीम को 4-1 से रौंद ही दिया था। ये कमाल हुआ कैसे। क्या इसका श्रेय डोनाल्ड ट्रम्प को जाना चाहिय। शायद हां या ना भी। उन्होंने फीफा से यूएस के सबसे सफल फॉरवर्ड  फोलारिन बालोगुन  को बोस्निया के विरुद्ध मैच में मिले रेड कार्ड के कारण एक मैच के प्रतिबंध को रद्द करवा दिया। इससे बेल्जियम की टीम पर गहरा प्रभाव पड़ा और पूरी टीम को एकजुट कर दिया। बेल्जियम जिसका कि प्रतियोगिता में अब तक प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा था,शानदार प्रदर्शन किया। अमेरिकी टीम पर 4-1 की जीत बेल्जियम के उच्च कोटि के खेल और उनके दबदबे की कहानी कहती है। मैच में जो कुछ हुआ वो मैदान के भीतर से ज्यादा मैदान के बाहर की घटनाओं का परिणाम था। 

ये एक टीम से ज्यादा एक व्यक्ति की हार थी जिसकी प्रतिष्ठा एक बार फिर मुँह बाये जमीन पर औंधी पड़ी थी।

राउंट ऑफ 16 की शुरुआत ही एक सह मेजबान कनाडा की हार से हुई। अफ्रीका की एकमात्र आगे बढ़ी टीम मोरक्को ने आसानी से 3-0 से हराया। मोरक्को की टीम क्वार्टर फाइनल में तो जरूर पहुंची पर इस मैच में उसे एक बड़ा झटका लगा। उनकी टीम आगे बढ़ गई, लेकिन उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। मैच के पहले हॉफ के हाइड्रेशन ब्रेक से ठीक पहले उन्हें हैमस्ट्रिंग में चोट लग गई। 25 वर्षीय इस खिलाड़ी ने मोरक्को के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे थे और गोल कर रहे थे। एक हफ्ते पहले ही बायर्न म्यूनिख ने उन्हें अनुबंधित किया था। उनके स्टार खिलाड़ी इस्माइल सैबारी केवल इस मैच से ही नहीं बल्कि पूरी प्रतियोगिता से बाहर हो गए हैं। 

तीन

एक और जहां इस दौर में शानदार और यादगार मैच हुए वहीं दो मैच बेहद नीरस रहे। स्पेन और पुर्तगाल का मैच नीरस रहा लेकिन वो रेगुलर टाइम में ही समाप्त हो गया। लेकिन स्विट्ज़रलैंड और कोलंबिया के बीच मुकाबला तो अतिरिक्त समय से निकल कर पेनाल्टी शूटआउट तक गया। ये मैच कैसा रहा इसको इस बात से समझा जा सकता है कि रेगुलर खेल के 90 मिनट में दोनों टीमों के कुल मिलाकर सिर्फ चार शॉट ही गोल पर लगे। जेम्स रोड्रिगेज और लुइस डियाज जैसे खिलाड़ियों के होने के बावजूद कोलंबिया की टीम स्विस डिफेंस को भेद नहीं पाई। स्विस टीम ने भी बीच-बीच में कुछ अच्छे प्रयास किए, लेकिन कोई खतरनाक हमला नहीं कर पाई। पेनाल्टी शूट आउट में स्विट्ज़रलैंड ने कोलंबिया को 4-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।

चार

फिलाडेल्फिया की भीषण गर्मी में खेले गए मैच में चैंपियनशिप की सबसे प्रबल दावेदार फ्रांस की टीम ने  पैराग्वे की टीम को 1-0 से हराया। फ्रांस का एक अनुशासित रक्षात्मक पैराग्वे टीम से सामना था जिसने फ्रांस को कड़ी टक्कर दी और उसे गोल करने या शॉट लेने की कोई जगह नहीं दी। ये पैराग्वे की वही मजबूत दीवार थी जिसने जूलियन नागेल्समैन की जर्मनी टीम और उनकी रणनीति को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था और राउंड ऑफ 32 में बड़ा उलटफेर कर सबको चौंका दिया था।

पैराग्वे के रक्षात्मक खेल के अलावा आक्रामक और फिजिकल खेल के कारण  सितारों से सजी फ्रांसीसी टीम मैच के अधिकांश समय तक पैराग्वे के गोल पर कोई गंभीर खतरा उत्पन्न नहीं कर पाई। लेकिन 70वें मिनट में म्बाप्पे पेनल्टी क्षेत्र में घुसे और गिर पड़े। पहले उनके विरुद्ध कोई फाउल नहीं दिया गया लेकिन वीएआर के जरिए उस फैसले की समीक्षा की गई और उसे पलट दिया गया। फ्रांस को पेनल्टी किक दी गई। म्बाप्पे ने पेनल्टी को गोल में बदल दिया। ये इस मैच का एकमात्र गोल था। इस मैच में भी पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने शानदार बचाव किए। 

इस मैच में पैराग्वे की टीम ने बेहद आक्रामक और शारीरिक खेल दिखाया। फ्रांस के खिलाड़ियों को चोटिल करने और रोकने के लिए उन्होंने हर हथकंडा अपनाया जिसे  'डर्टी' खेल बताया गए और इसे लेकर मैच के बाद काफी विवाद भी हुआ।

पांच

क्वार्टर फाइनल में पहुंची आठ टीमों में से छह टीमें यूरोप की हैं। इसके अलावा एक टीम दक्षिण अमेरिका से अर्जेंटीना और अफ्रीका से मोरक्को है। ये समीकरण फुटबॉल में अभी भी यूरोपीय प्रभुत्व की कहानी कहता है।

छह

और चलते चलते बात टिकटों की कीमतों की। विश्व कप के शुरू होने से पहले टिकटों की बहुत ज्यादा कीमत और उनकी काला बाजारी की बहुत चर्चा थी। लेकिन मेजबान अमेरिका की हार और पुर्तगाल के बाहर हो जाने के तुरंत बाद ही सेकेंडरी मार्केट में 60 फीसद से भी कम हो गई हैं। अब क्वार्टर फाइनल के लिए टिकट की कीमत 2950 डॉलर प्रति टिकट से घटकर 1200 डॉलर प्रति टिकट हो गई है। सबसे सस्ती टिकट फ्रांस और मोरक्को क्वार्टर फाइनल मैच की है जिसकी कीमत लोकप्रिय और भरोसेमंद सेकेंडरी टिकट मार्केटप्लेस टिक पिक में 989 डॉलर से शुरू है।



फीफा विश्व कप 2026 डायरी 22:रोनाल्डो विश्व कप से विदा

 


क्रिस्तियानो रोनाल्दो को आप पसंद करें या ना करें, ये व्यक्तिगत चॉइस हो सकती है। आप उनसे प्यार करें या घृणा,ये भी व्यक्तिगत पसंद हो सकती है। लेकिन ये तथ्य अटल सत्य है कि वो फुटबॉल खेल के महानतम खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने फुटबॉल को फुटबॉल बनाया। इस बात से भी उनकी महानता पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्होंने कोई विश्व कप जीता या नहीं।

नेमार ने विश्व कप नहीं जीता। अल्फ्रेडो डी स्टेफानो ने नहीं जीता,फेरेंक पुस्कास ने नहीं जीता,जोहान क्रूएफ ने नहीं जीता, मिशेल प्लातिनी ने नहीं जीता,रॉबर्टो बैजियो ने नहीं जीता। लेकिन क्या उनके महान होने में किसी तरह का कोई संदेह किसी को भी है।

ये बात इसलिए कि मौजूदा विश्व कप में स्पेन से हार के बाद उनकी एक सम्मानजनक विदाई बनती थी, जो उनके साथियों ने ही नहीं की। पूरी टीम उन्हें छोड़कर सीधे टनल में जा पहुंची,उनके साथियों से अधिक संवेदनशीलता तो स्पेन के खिलाड़ियों ने दिखाई। खुद लामिन यामाल उन्हें सांत्वना और सम्मान दे रहे थे। ये एक महानतम खिलाड़ी के साथ बेहद असंवेदनशील व्यवहार था। ये खेल भावना कतई नहीं हो सकती।

चाहे जो हो मेरे तईं तो मेस्सी दिल है तो रोनाल्दो दिमाग। दिल लियोनेस मेस्सी से प्यार करता है,पर दिमाग रोनाल्दो का सम्मान। मेस्सी कोई कलात्मक अभिव्यक्ति है, तो रोनाल्दो वैज्ञानिक सूत्र। मेस्सी किसी कृति का भाव पक्ष है तो रोनाल्दो उसका शिल्प। 

मेस्सी जिस खेल का महान खिलाड़ी है ना तुम उसके चैंपियन हो। और चैंपियन ही रहोगे। 

अदेउस दे रोनाल्दो दा कोपा मुंदो।

Tuesday, 7 July 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 21: पोएटिक जस्टिस




बेल्जियम की टीम द्वारा यूनाइटेड स्टेट्स की टीम को 4-1 से रौंद दिया जाना 'पोएटिक जस्टिस' है। बोस्निया के विरुद्ध मैच में यूएस के सबसे बड़े और मुख्य स्ट्राइकर बालोगन को रेड कार्ड मिला। रेड कार्ड मिलते ही उस खिलाड़ी का स्वतः ही अगला मैच ना खेलना तय हो जाता है। लेकिन बालोगन की ये सजा एक साल के लिए स्थगित कर दी गई। कमाल की बात है कि इस स्थगन के लिए फीफा की और से किसी भी तरह का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।

सी विश्व कप अब तक 11 और खिलाड़ियों को भी रेड कार्ड मिले हैं और वे सस्पेंशन की सजा भुगत रहे हैं। इसमें कतर के असीम मडिबो भी शामिल हैं। इस फाउल में कनाडा के इस्माइल कोने के पैर में फ्रक्चर हो गया था। असीम मडिबो पर पांच मैचों का प्रतिबंध लगा है जबकि उनका टेकल उतना खतरनाक प्रकृति का नहीं था। चोट लगना कुछ हद तक संयोग था।

फीफा विश्व कप में अब तक लगभग 190 रेड कार्ड खिलाड़ियों को मिले हैं। बालोगन से पहले केवल एक खिलाड़ी ऐसे हैं जिनकी सज़ा सस्पेंड की गई हैं और वे है विश्व के महानतम खिलाड़ियों में एक ब्राजील के गरींचा जिन्हें ये इम्युनिटी 1962 के विश्व कप में मिली थी जब अनुशासनात्मक कमेटी ने उनकी सजा को स्थगित कर दी थी।

क्रिस्टियानो रोनाल्डो को आयरलैंड के खिलाफ विश्व कप क्वालीफायर मैच में सीधे रेड कार्ड के कारण 3 मैचों का प्रतिबंध मिला था। हालांकि यहां भी फीफा ने उनके शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए 2 मैचों का प्रतिबंध एक साल की अवधि के लिए निलंबित कर दिया था जिससे वह 2026 विश्व कप के शुरुआती मैचों में खेल पाए। फिलहाल वे भी विश्व कप से बाहर हो चुके हैं।

और हां, मूर्खाधिपति महाराज मुंह के बल औंधे पड़े हैं।

Saturday, 4 July 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 19: काबो वर्डे




अक्सर चीजें मृत्यु के बाद अधिक खूबसूरत लगने लगती हैं। अधिक प्रिय हो आती हैं। 

कई बार हार भी इतनी प्रभावशाली होती है जीत पृष्ठभूमि में चली जाती है। 

ये फीफा कप चाहे जो जीते। लेकिन इस विश्व कप का वो दृश्य क्रिएट हो चुका है जो अब फुटबॉल प्रेमियों के मानस से कभी नहीं मिटने वाला है। 

एक पल आकर हमेशा के लिए रुक गया है जिसे अब कभी नहीं बीतना है। 

वाह काबो वर्डे। 

आह काबो वर्डे।

आपने इस विश्व कप से विदा ली है। हमारे दिलों से नहीं।

"Bu ta fika gravadu na nos korason pa sempre. Un abrasu di dipidida."

Friday, 3 July 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 18

 


क्रिकेट खेल को सबसे ज्यादा अनिश्चितताओं का खेल कहा गया है कि जब तक आखिरी बॉल ना फेंक दी जाए तब तक कोई परिणाम तय नहीं समझना चाहिए।

लेकिन इन दिनों रात रात भर जागकर फुटबॉल देखने वाले कहेंगे ये बात तो फुटबॉल के खेल पर भी उतनी ही लागू होती। कि फुटबॉल का कोई भी परिणाम उस समय तक तय नहीं माना जा सकता जब तक कि मैच समाप्ति की व्हिस्ल ना बज जाए।

एक

बुधवार को फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ 32 में अटलांटा स्टेडियम में इंग्लैंड का मुकाबला कांगो डीआर से था। मैच में इंग्लैंड फेवरिट था। लेकिन कांगो के खिलाड़ियों ने शुरूआत ही आक्रामक रुख अपनाया। सात मिनट बीतते बीतते बायन सिपेंगा को बॉक्स के बाएं फ्लैंक में एक पास मिला और उनका शानदार ग्राउंडेड शॉट इंग्लैंड के एक डिफेंडर और गोली की छकाते हुए गोल के जाल में जा धंसा। कांगो डीआर ने एक गोल की बढ़त से इंग्लैंड की टीम को ही नहीं पूरे स्टेडियम को सकते में डाल दिया। 

अगले 68 मिनट इंग्लैंड की आक्रामक पंक्ति का कांगो डीआर के गोलकीपर लियोनेल म्पासी के बीच मुकाबला था। इस दौरान इंग्लैंड विश्व कप के इतिहास में सबसे बड़ी अपमानजनक हार से बचने के लिए लगातार आक्रमण कर रही थी और गोलकीपर लियोनेल म्पासी कांगो की ऐतिहासिक जीत के लिए प्रतिबद्ध गोल के सामने अभेद्य दीवार बने खड़े थे। इस 68 मिनट के समय में उन्होंने इंग्लैंड को रोकने के लिए कई शानदार बचाव किए।

कांगो एक इतिहास रचने और इंग्लैंड एक अपमानजक हार से केवल 15 मिनट की दूरी पर थे कि कप्तान हैरी केन ने 75 वें मिनट में गार्डन के क्रॉस पर हेडर से गोलकर स्कोर 1-1 कर दिया। उसके बाद भी लगा कि मैच एकस्ट्रा टाइम में जा रहा है कि 86वें मिनट में हैरी केन ने मैच का एक और गोल दाग दिया। केन ने  बॉक्स के किनारे पर गेंद को अपने कब्जे में लिया, घूमे, आगे बढ़े और अपने दाहिने पैर से जोरदार शॉट लगाकर म्पासी को पछाड़ते हुए इंग्लैंड को बड़े संकट से उबार लिया।

बिल्कुल किनारे आकर कांगो डी आर की नाव डूब गई। एक सपना दुःस्वप्न में बदल गया। एक इतिहास बनते बनते रह गया।

अगर अभी भी फुटबॉल की अनिश्चितता में कोई संदेह हो तो फिर सिएटल में हुए बेल्जियम और सेनेगल के बीच हुए मैच को देखना चाहिए।

बेल्जियम अपने ग्रुप में शीर्ष पर रहा था,जबकि सेनेगल की टीम अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर रही थी और तीसरे स्थान पर रहने वाली शीर्ष आठ टीमों में होने के कारण नॉक आउट दौर में पहुंची थी।

मैच में बेल्जियम को संभावित विजेता माना जा रहा। था। लेकिन मैच में पहले बढ़त सेनेगल ने बनाई, हबीब डियारा के 25वें मिनट में किए गए गोल से। इसके बाद दूसरे हाफ के छह मिनट बाद इस्माइला सार ने टूर्नामेंट के सबसे बेहतरीन गोलों में से एक गोलकर सेनेगल की बढ़त को दोगुना कर दिया। 

सेनेगल ने मैच के अधिकांश हिस्से में दबदबा बनाए रखा और बेल्जियम का अप्रत्याशित रूप से टूर्नामेंट से बाहर होना तय लग रहा था। अब सेनेगल की जीत केवल चार मिनट दूर थी कि 86वें मिनट में स्थानापन्न  बेल्जियम के रोमेलु लुकाकू ने गोल करके अंतर कम किया। इस गोल के महज तीन मिनट बाद, 89वें मिनट में यूरी टिलेमैन्स ने बराबरी का गोल दागकर मैच को अतिरिक्त समय तक पहुंचा दिया। 

अब पेनल्टी शूटआउट से कुछ ही सेकंड पहले, अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में टिलेमैन्स को पेनल्टी बॉक्स के अंदर गिरा दिया गया। वीएआर समीक्षा के बाद, रेफरी ने बेल्जियम को पेनल्टी दी। टिलेमैन्स ने अतिरिक्त समय के पांचवें मिनट में गोल दाग दिया। बेल्जियम ने ये मुकाबला 3-2 से जीत लिया।

बेल्जियम का ये तीसरा गोल फीफा विश्व कप के इतिहास में सबसे देर से किया गया गोल था और ये मुकाबला प्रतियोगिता के सबसे यादगार नॉकआउट मुकाबलों में से एक।

दो

ये सेनेगल के दुर्भाग्य का अकेला उदाहरण नहीं था। दुर्भाग्य है कि मानो उसका साया बन उसके साथ कदमताल कर रहा हो। 

इस वर्ष के अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के फाइनल में सेनेगल ने मेज़बान मोरक्को को हरा दिया था। लेकिन बाद में कॉन्फेडरेशन ऑफ अफ्रीकी फुटबॉल के अपील बोर्ड ने सेनेगल से खिताब छीनकर मोरक्को को विजेता घोषित कर दिया। इसके पीछे का मुख्य कारण यह था कि मैच के अंतिम क्षणों में विवादास्पद पेनल्टी दिए जाने के विरोध में सेनेगल की टीम और कोच ने लगभग 15 मिनट के लिए मैदान छोड़ दिया था, जो कि नियमों के खिलाफ था।

इतना ही नहीं इससे भी पहले 2018 के विश्व कप में सेनेगल की टीम ग्रुप चरण के बाद 'फेयर प्ले' नियमों के आधार पर बाहर हो गई थी। ग्रुप में जापान और सेनेगल दोनों के चार चार अंक थे और गोल अंतर भी समान था। तो फैसला फेयर प्ले नियम के आधार पर हुआ जिसमें सेनेगल बाहर हो गया क्योंकि सेनेगल को जापान से अधिक येलो कार्ड मिले थे।

तीन

खेलों में भारत के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खराब प्रदर्शन के लिए अक्सर संसाधनों की कमी और सुविधाओं की कमी का रोना सुनाई देता है। लेकिन सेनेगल की टीम और उसका शानदार प्रदर्शन इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि परिश्रम,लगन, दृढ़ इच्छा शक्ति और पैशन हो तो संसाधनों की कमी भी आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

सेनेगल की टीम को संसाधनों के अभाव में विश्व कप से पहले और विश्व कप के दौरान बहुत सारी कठिनाइयों से गुजरना पड़ा है। विश्व कप के दौरान सेनेगल की फुटबॉल टीम को समय पर वेतन न मिलने, घटिया होटल और खराब खाने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा। कोच पापे थियाव बिना किसी आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट के काम कर रहे थे और उन्हें छह महीनों तक उनका वेतन नहीं दिया गया। इसके अलावा अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के फाइनल मुकाबले में विरोध स्वरूप मैदान छोड़ने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई का दंश भी टीम पर भारी पड़ा। कोच समेत कई मुख्य खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाए जाने से टीम की तैयारी बुरी तरह प्रभावित हुई।

इतनी सारी समस्याओं से जुझते हुए जो शानदार प्रदर्शन टीम ने दिखाया वो कमाल का है।

चार

विश्व कप के दौरान विभिन्न टीमों के समर्थकों और प्रशंसकों के मैच से पहले और जीत के बाद शानदार जश्न मनाते देखा है और उनके खूबसूरत दृश्यों को भी। लेकिन जब ये जोश उन्माद में बदल जाता है तो कुछ बदरंग और भयावह तस्वीरें सामने आती हैं।

 पहले नॉक आउट मैच में सह मेजबान मेक्सिको की टीम ने इक्वेडोर पर 2-0 से ऐतिहासिक विजय दर्ज की और चालीस साल बाद प्री क्वार्टर फाइनल में पहुंचे। इसका जश्न मनाने के लिए एक साथ 14 लाख से ज्यादा लोग मेक्सिको सिटी की सड़कों पर आ गए। भीड़े दम घुटने से टीम के तीन प्रशंसकों की मृत्यु हो गई। 

फुटबॉल विश्व कप दुनिया का सबसे बड़ा खेल आयोजन है और इसे वैश्विक सांस्कृतिक एकता  का भी वाहक माना जाता है। लेकिन सबसे ज्यादा हिंसक घटनाएं भी फुटबॉल के खेल में ही होती हैं। दरअसल जब जोश उन्माद बदल जाता है,सह अस्तित्व की भावना विद्वेष में बदल जाता है,वैश्विक भावना संकीर्ण राष्ट्र वाद में बदल जाती है और आपसी भाई चारा नस्लवाद में बदल जाता है, तो हिंसक घटनाएं जन्म लेती ही हैं। ये विश्व कप भी ऐसी घटनाओं से अछूता नहीं रहा।

नॉक आउट दौर में जब मोरक्को ने नीदरलैंड को हराया तो हेग में कुछ हिंसक घटनाएं हुई। नीदरलैंड में  बड़ी संख्या में मोरक्को के प्रवासी हैं लगभग चार लाख। इसमें नीदरलैंड के हारने नीदरलैंड्स के कई शहरों में हिंसक झड़पें और उपद्रव हुए। मोरक्को की जीत के जश्न के दौरान हेग  जैसे शहरों में भारी हिंसा भड़क गई, जिसके कारण पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। 

ये निश्चित ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

Wednesday, 1 July 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 16: ओरलैंडो गिल



ये विश्व कप जितना फॉरवर्ड्स का है,उतना ही गोलकीपर्स का भी है। जितना मेस्सी,क्रिश्चियनों रोनाल्डो,म्बापे,हॉलैंड,विनिसियस जूनियर, उस्मान डेंबेले,इस्माइल सैबारी, यामल का है,उतना ही वोजिन्हा, एलॉय रूम, अलिरेजा वेइरानवंद और ग्रेगोर कोबेल  का भी है। 

विश्व कप की प्रीमियर गोलकीपर्स की इस जमात में अब एक नाम ओरलैंडो गिल का नाम भी जुड़ गया जर्मनी के खिलाफ पैराग्वे की जीत के हीरो उनके  छह फीट छह इंच लंबे भारतीय मूल के गोलकीपर ओरलैंडो गिल थे जिन्होंने पेनाल्टी शूट आउट में  दो शानदार बचाव किए और पैराग्वे की ऐतिहासिक जीत को संभव बनाया। फिलहाल मैदान के अंदर शानदार रक्षण के अलावा वे इस बात को लेकर के लिए भी चर्चा में हैं कि अपनी खराब आर्थिक दशा के कारण अपने बेटे के जन्म के समय उन्हें अपनी अंडर 20 जर्सी,जूते और अपने अन्य उपकरण बेच दिए थे।

प्रसिद्धि का एक परिणाम ये होता है कि आपके जीवन के अनछुए, अनचिह्ने पहलू सार्वजनिक हो जाते हैं। और एक समय के बाद वे किंवदंतियों की तरह उद्धृत किए जाने लगते हैं।

फिलहाल ओरलैंडो दो गोल पोस्टों के बीच खड़े नए हीरो हैं।

खेल डायरी_01: उम्र

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