Monday, 22 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी_10

 



फीफा विश्व कप 2026 का ग्यारहवां दिन। कल भी संघर्षपूर्ण मुकाबले। शानदार जीत भी और चकित कर देने वाले परिणाम भी। इन मुकाबलों के चलते कुछ आगे बढ़ने के रास्ते तय हुए। कुछ की वापसी सुनिश्चित हुई।  तो कुछ के भविष्य अधर में लटक गए। मैदान में खिलाड़ियों के संघर्ष और स्टेडियम में दर्शकों की मैदान में चल रही गतिविधियों से संगति के रंग बिखरते रहे। हर्ष-विषाद,आस-निराश, होनी-अनहोनी के बीच झूलते खिलाड़ी और उनके समर्थक दिन का हासिल। और इन सब के केंद्र में था फुटबॉल का खेल और उसके विश्व कप का ग्यारहवां दिन।

एक

स्पेन ने पिछले मैच की निराशा को झटका और उम्मीद का दामन थाम खेल की लय को पकड़ा। और फिर लय को टूटने ना दिया। पिछले मैच में स्पेन की टीम पहली बार विश्व कप में क्वालीफाई करने वाली एक छोटे से देश की टीम से पार नहीं पा सकी थी। उसे केप वर्डे के साथ मैच 0-0 पर अनिर्णीत समाप्त करना पड़ा था। लेकिन आज सऊदी अरब को 4-0 से हराकर बताया क्यों उसे इस बार के संभावित विजेताओं में बताया जा रहा है।

मैच की शुरुआत में ही लामिन यामाल ने डैनी ओल्मो के शानदार पास पर 10वें मिनट में गोल दागकर स्पेन को बढ़त दिला दी। इस गोल के साथ ही वह स्पेन के विश्व कप इतिहास में सबसे कम उम्र के गोल करने वाले खिलाड़ियों में से एक बन गए। सऊदी अरब के पास स्पेन के आक्रमण का कोई जवाब नहीं था। स्पेन के मिकेल ओयार्ज़ाबल ने 30 वें मिनट में कॉर्नर पर एक और गोल कर बढ़त दुगुनी कर दी। तीन मिनट बाद ही स्पेन ने एक शानदार मूव बनाया और ओयार्ज़ाबल ने एक और गोल कर स्पेन को 3-0 की बढ़त दिला दी।

सऊदी अरब की वापसी की सारी उम्मीदें दोबारा खेल  शुरू होने के चार मिनट बाद ही उस समय खत्म हो गईं जब डिफेंडर हसन अल्तम्बक्ती ने गेंद अपने ही गोल में डाल दी और स्कोर स्पेन के पक्ष में 4-0 हो गया। स्पेन की आज की सऊदी अरब पर जीत पहले मैच में केप वर्डे के खिलाफ ड्रॉ के बाद हुई आलोचना का करारा जवाब है। इस जीत के साथ स्पेन चार अंकों के साथ ग्रुप में शीर्ष पर पहुंच गया।

उधर केवल डेढ़ लाख आबादी वाले देश केप वर्डे ने अपने पहले विश्व कप में कल भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उसने दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे के साथ 2-2 से ड्रॉ खेलकर एक और महत्वपूर्ण अंक अर्जित किया। उरुग्वे से ड्रॉ खेलकर केप वर्डे ने बताया कि स्पेन के साथ गोलरहित ड्रॉ खेलना महज इत्तफाक या तुक्का नहीं था। केप वर्डे पूरी टीम भरे पूरे आत्मविश्वास से खेल रही थी।

आज के उनके खेल की विशेषता ये थी कि आज उन्होंने स्पेन के खिलाफ रक्षात्मक खेल के बजाए आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि उनके पास एक बेहतरीन रक्षा पंक्ति ही नहीं,बल्कि एक बेहतर आक्रमण भी है और उन्हें हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। विशेष रूप से उन्होंने काउंटर अटैक से कई शानदार मूव बनाए।

पहले बढ़त केप वर्डे ने ही ली, केविन पिना के गोल से। लेकिन मैक्सी अरौजो और अगस्टिन कैनोबियो ने उरुग्वे के लिए दो गोल कर उरुग्वे को आगे कर दिया। दूसरे हॉफ में हेलियो वारेला ने दूसरा गोलकर केप वर्डे को बराबरी पर ला दिया। वे अंत तक रक्षात्मक नहीं हुए। वे लगातार आक्रमण करते रहे और अंतिम क्षणों तक जीत के लिए खेलते रहे। अंततः मैच बराबरी पर छूटा। केप वर्डे के लिए ये एक और यादगार मैच बन गया

दो

दिन का अप्रत्याशित परिणाम केवल मियामी स्टेडियम में ग्रुप एच के उरुग्वे और केप वर्डे के मध्य खेले गए मैच के परिणाम से ही नहीं आया, बल्कि बी सी प्लेस स्टेडियम वैंकूवर से भी आया। यहां खेले गए ग्रुप जी के एक मैच में  मिस्र ने न्यूजीलैंड को 3-1 से हराकर फीफा विश्व कप में अपनी पहली जीत हासिल की।

मैच के पहले हॉफ में न्यूजीलैंड की टीम ने खेल पर  प्रभावी नियंत्रण रखा। गेंद पर यथासंभव नियंत्रण रखा  और लंबे शॉट लगाए। ओशिनिया टीम के फिन सुरमन ने 15वें मिनट में बैक अहमद फतूह को चकमा देकर एक जोरदार हेडर से गेंद नेट में डाल दी। ये बढ़त न्यूजीलैंड ने पूरे हाफ में कायम रखी। लेकिन मिस्र ने दूसरे हाफ में शानदार वापसी की। 58वें मिनट में मोहम्मद हनी के दाहिनी ओर से आए क्रॉस पर मुस्तफा जिको ने हेडर से गोल करके स्कोर बराबर कर दिया। इसके नौ मिनट बाद आखिरकार सालेह ने दर्शकों की लंबी प्रतीक्षा का अंत किया और उन्हें उत्साह से भर दिया,जब दाहिनी ओर से आगे बढ़ते हुए जिको के साथ वन-टू पास खेलते हुए गेंद को दूर के कोने में डाल दिया। सालेह ने 81वें मिनट में पुनः गोल करने की कोशिश की, लेकिन उनका ये शॉट गोल के ऊपर से निकल गया। इस शॉट के परिणामस्वरूप मिस्र को कॉर्नर मिला। सालेह ने सब्स्टीट्यूट ट्रेज़ेगुएट को पास दिया और उन्होंने डाइव लगाकर हेडर से गोल कर दिया। 

मिस्र की टीम अब न्यूजीलैंड को 3-1 से हराकर चार अंकों के साथ ग्रुप शीर्ष पर पहुंच गई है।

ग्रुप जी का दूसरे मैच बेल्जियम और ईरान के बीच गोल रहित ड्रॉ रहा। बेल्जियम ने मैच पर काफी हद तक नियंत्रण बनाए रखा, लेकिन ईरानी गोलकीपर अलीरेज़ा बेइरानवंद ने शानदार प्रदर्शन किया। 66वें मिनट में नाथन न्गोय को रेड कार्ड मिलने के बाद बेल्जियम की मुश्किलें और बढ़ गईं। लेकिन ईरान इस  बढ़त का फायदा नहीं उठा सका। 

अब बेल्जियम और ईरान दोनों के दो-दो अंक हैं, जबकि न्यूजीलैंड के पास एक अंक है। जबकि मिस्र चार अंकों के साथ शीर्ष पर है। ये ग्रुप पूरी तरह खुला है। ग्रुप स्टेज के मैचों का एक दौर शेष रहते हुए, न तो ग्रुप जी और न ही ग्रुप एच में टीमों के भाग्य का  फैसला हुआ है कि कौन आगे बढ़ेगा और कौन वापस जायेगा। ऐसे में सभी आठ टीमों का अभी भी काफी कुछ दांव पर लगा है।

०००

केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा के लिए विश्व कप यादगार हो गया है। स्पेन के खिलाफ गोलरहित अनिर्णीत खेलने के बाद उरुग्वे के साथ भी 2-2 से अनिर्णीत खेला। इन दोनों ही मैचों में वोजिन्हा का प्रदर्शन लाजवाब रहा है। अपने शानदार प्रदर्शन के बाद वे फुटबॉल प्रेमियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो रहे हैं। विश्व कप से पहले इंस्टा पर उनके 50 हजार से भी कम फॉलोअर थे, जो अब बढ़कर 15.2 मिलियन हो गए हैं। आल टाइम सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले गोलकीपरों की फेहरिस्त में वे अब पांचवें स्थान पर आ गए हैं।

०००

मेस्सी ने अपने पहले ही मैच में हैट्रिक लगाई और वे क्लोसे के साथ विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। लेकिन इस मैच में उनके द्वारा किया गया एक टैकल विवाद का कारण बन गया है। अल्जीरिया के विरुद्ध खेले गए मैच के 31वें मिनट में मेसी ने अल्जीरिया के कप्तान आईसा मैंडी की पिंडली और एच्लीस टेंडन पर स्टड्स-अप टैकल किया था, जिससे वह ज़मीन पर गिर गए। पोलिश रेफरी शिमोन मार्सिनियाक ने इसे केवल एक सामान्य फाउल दिया और मेसी को पीला या लाल कार्ड नहीं दिखाया। वीएआर ने भी इसे अनदेखा किया। अब इस घटना की अल्जीरियाई फुटबॉल महासंघ ने फीफा से औपचारिक रूप से शिकायत कर दी है कि यह टैकल स्पष्ट रूप से रेड कार्ड के योग्य था।

०००

और अंत में चलते चलते बात आइवरी कोस्ट के स्टार खिलाड़ी यान डियोमांडे की। 19 वर्षीय डियोमांडे अपने के लिए विश्व कप में शानदार खेल दिखा रहे हैं। जब किसी खिलाड़ी को खेलते हुए देखा जाता है तो उसके खेल को, उसकी योग्यता को,उसकी प्रतिभा को उसकी मैदान में गलतियों और कमियों को लक्षित किया जाता है। यहां तक पहुंचने के उसके संघर्ष,उसकी मेहनत,उसके जीवन की कठिनाइयां,कष्ट, दुश्वारियां और उसकी भावनाएं अलक्षित रह जाती हैं। डियोमांडे अपनी गरीबी और अभावों से संघर्ष कर कड़ी मेहनत के बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं। लेकिन इस संघर्ष में उनका कुछ ऐसा छूटा कि वे संगदिल बन गए। उनकी अपनी सबसे बड़ी  प्रेरणास्रोत 15 वर्षीया छोटी बहन की मृत्यु उनकी अनुपस्थिति में हो गई। फिर 17 जून को 'द प्लेयर्स ट्रिब्यून' में अपनी बहन रोक्सेन के लिए मार्मिक और बेहद ईमानदार पत्र लिखा। उन्होंने उसमें लिखा "फुटबॉल के मैदान पर मैं जो कुछ भी करता हूं, वह आपके लिए है," । ये पत्र मन में करुणा की धारा बहा देता है। ये पत्र जरूर पढ़ा जाना चाहिए। एक ऐसा पत्र जैसा कोई दूसरा नहीं लिखा गया।



फीफा विश्व कप 2026 डायरी_09

 


फीफा विश्व कप 2026 का दसवां दिन। 

फुटबॉल का सबसे बड़ा महाकुंभ अब रोमांचक दौर में प्रवेश कर रहा है। खिलाड़ी मैदान में पसीना बहा रहे है। खिताबी जंग के लिए खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहा रहे हैं और प्रतियोगिता अधिक रोचक और संघर्षपूर्ण होती जा रही है। जहां फॉरवर्ड गोलों के बहाने कीर्ति का परचम लहरा रहे हैं वहीं गोलची खम ठोककर कर उनको चुनौती दे रहे हैं। जैसे-जैसे नॉकआउट का सफर करीब आ रहा है वैसे वैसे आगे बढ़ाने के लिए रोमांच और संघर्ष चरम पर पहुंच रहा है। 

एक

फीफा विश्व कप के दसवें दिन मैक्सिको के मॉन्टेरी स्टेडियम में ग्रुप एफ का जापान और ट्यूनीशिया के बीच खेला गया दिन का आखिरी मैच कई मायने में महत्वपूर्ण था।  सबसे महत्वपूर्ण तो इसलिए कि ये विश्व कप प्रतियोगिता के इतिहास का 1000वां मैच। इस मैच को जापान की टीम ने ट्यूनीशिया को 4-0 से हराकर एक महत्वपूर्ण मुकाबल जीत लिया और अगले नॉक आउट दौर में लगभग परिपूर्ण पहुंच गई है।

पहले दौर में जापान नीदरलैंड के साथ प्रभावशाली 2-2 के ड्रॉ के यहां पहुंचा था,जबकि ट्यूनीशिया स्वीडन के खिलाफ खराब प्रदर्शन करते हुए 5-1 से हार गया था। ट्यूनीशिया कभी भी ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ पाए हैं और इस हार के बाद इस बार भी वे ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गए।

मैच से पहले सभी की निगाहें ट्यूनीशिया के नए कोच हेर्वे रेनार्ड पर थीं। सब इस बात को जानने के इच्छुक थे कि सबरी लामौची को बर्खास्त करने के बाद चार दिनों के भीतर उन्होंने टीम में रक्षात्मक रूप से क्या सुधार किए हैं।

इस पराजय ने बताया कुछ खास नहीं। जापान ने सिर्फ चार मिनट बाद ही दाइची कामादा के गोल से बढ़त बना ली और पहले हाफ में अपना दबदबा कायम रखा। आधे घंटे के बाद स्ट्राइकर अयासे उएदा के शानदार गोल ने जापान को 2-0 की बढ़त दिला दी। वे शानदार खेल रहे थे।

जापान ने 69वें मिनट में एक और शानदार गोल के साथ स्कोर 3-0 कर दिया। इस बार जुन्या इटो ने गोल दागा। मैच के अंतिम क्षणों में उएदा ने गोल लाइन पर खड़े ट्यूनीशिया के दो डिफेंडरों के ऊपर से हेडर मारकर चौथा गोल दाग दिया। विश्व कप में किसी एशियाई टीम द्वारा बनाए गए गोलों की संख्या अब तक की सबसे अधिक चार गोल है।

जापान में पिछले वर्षों में तमाम प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए और मजबूत टीम बनाई। इस के बावजूद वो विश्व कप में कभी भी राउंड ऑफ 16 से आगे नहीं बढ़ पाया है। इस टीम से इस सूखे को खत्म करने की उम्मीद इसलिए भी बांधती है कि हाजिमे मोरियासु की इस टीम ने पिछले साल अक्टूबर में ब्राजील को हराया था और अभी मार्च में वेम्बले में इंग्लैंड को हराने वाला पहला एशियाई देश बन गया।

हालांकि इस प्रतियोगिता के शुरू होने से पहले ही उनके तीन प्रमुख खिलाड़ियों काओरू मितोमा, ताकुमी मिनामिनो और वतारू एंडो के चोटिल हो जाने से उनके विश्व कप अभियान को धक्का लगा। इसके अलावा पहले मैच में घुटने में चोट लगने के कारण इस मैच में जापान को अपने एक और स्टार खिलाड़ी ताकेफुसा कुबो के बिना खेलना पड़ा। लेकिन उनके बिना भी जापान ने शानदार प्रदर्शन किया। जापान की और से कीटो नाकामुरा ने अप्रत्याशित रूप से शानदार प्रदर्शन करते हुए नीदरलैंड के खिलाफ गोल किया और यहां कमाडा के गोल में असिस्ट किया।

इस जीत के बाद वे राउंड ऑफ 32 की तैयारी कर सकते हैं।

दो

इससे पहले ग्रुप एफ के ही एक अन्य मैच में नीदरलैंड ने जापान के विरुद्ध ड्रॉ मैच की निराशा से उबरते हुए स्वीडन को 5-1 से हराकर शानदार जीत हासिल की।  नीदरलैंड की टीम की ये कहकर आलोचना की जारही थी कि उसका रक्षण तो बहुत मजबूत है लेकिन उनका आक्रमण धारदार नहीं है। लेकिन इस मैच में पांच गोल कर बताया कि उनकी अग्रिम पंक्ति भी शानदार है। इस मैच में डच टीम में उत्साह और आक्रामकता का संगम देखने को मिला।इस टीम ने विजय दुंदुभी बजा दी है।

ब्रायन ब्रोबे के शुरुआती दो गोल और उसके बाद कोडी गाक्पो के दूसरे हाफ में दो और गोल और क्रिसेंसियो समरविले के अंतिम गोल की मदद से नीदरलैंड्स ने ये शानदार जीत हासिल की। स्वीडन की तरफ से एकमात्र गोल खेल के 59वें मिनट में स्थानापन्न खिलाड़ी एंथोनी एलंगा ने किया। पहले मैच में स्वीडन ने ट्यूनीशिया को इतने ही अंतर से हराया था और आत्मविश्वास से भरी थी। लेकिन आज उसका खेल बिखर गया और उसके खिलाड़ी मैदान पर प्रभाव छोड़ने में असफल रहे।

तीन

टोरंटो स्टेडियम में ग्रुप-ई में जर्मनी और आइवरी कोस्ट के बीच एक संघर्षपूर्ण मैच हुआ। इस मैच में जर्मनी ने आधे समय तक एक गोल से पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी करते हुए आइवरी कोस्ट को 2-1 से हरा दिया। 

दोनों टीमों ने आक्रामक शुरुआत की। जर्मनी ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और लगातार मौके बनाने की कोशिश की। लेकिन आइवरी कोस्ट की मजबूत रक्षापंक्ति से जर्मनीबेक फॉरवर्ड पार नहीं पा सके। मैच का पहला गोल 30वें मिनट  फ्रेंक कैसी ने किया और आइवरी कोस्ट को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद जर्मनी ने बराबरी के लिए अनेक प्रयास किए पर उसे सफलता नहीं मिली।

दूसरे हाफ में जर्मनी ने की जोरदार वापसी की। जर्मनी के कोच ने जूलियन नागेल्समैन ने दूसरे हाफ में एक अहम बदलाव किया। उन्होंने स्टटगार्ट के फॉरवर्ड डेनिज़ उन्दाव को मैदान पर उतारा। यही वह कदम साबित हुआ जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।। 68वें मिनट में सब्स्टीट्यूट डेनिज उन्दाव ने शानदार गोल दागकर जर्मन टीम को 1-1 की बराबरी दिला दी। इस गोल के बाद मुकाबला और रोमांचक हो गया। लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। अब मुकाबला ड्रॉ होने ही जा रहा था कि इंजरी टाइम में

फेलिक्स एनमेचा के पास पर डेनिज उन्दाव ने शानदार टर्न लेते हुए सटीक शॉट लगाया और गेंद को गोल में पहुंचा दिया। उन्दाव का यह दूसरा गोल था। जर्मनी की टीम अगले दौर के लिए क्वालीफाई कर गई।

चार

कल का सबसे शानदार मुकाबला कंसास सिटी में खेला गया इक्वाडोर और काराकाओ के बीच का मैच था। इस मैच ने केप वर्डे और स्पेन के बीच हुए मैच की याद दिला दी। वो मैच बिना किसी गोल के अनिर्णीत रहा था और इस मैच मैच में केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा ने शानदार प्रदर्शन किया था। ठीक इसी तरह का प्रदर्शन कल काराकाओ ने इक्वाडोर के विरुद्ध किया। ये मैच भी इक्वाडोर के प्रबल दावेदार होने के बावजूद 0-0 से समाप्त हुआ। इसमें भी गोलकीपर एलोय रूम ने अद्भुत प्रदर्शन किया और इक्वाडोर को कोई गोल नहीं करने दिया। इस तरह काराकाओ ने विश्व कप का पहला अंक हासिल किया। रूम ने इक्वाडोर के खिलाड़ियों को गोल करने से रोकने के लिए 15 बचाव किए, जो विश्व कप के इतिहास में एक ही मैच में किए गए दूसरे सबसे अधिक बचाव हैं और अतिरिक्त समय के बिना किसी भी विश्व कप मैच में सबसे अधिक हैं।

इस प्रतियोगिता में इस बार गोलों की झमाझम बरसात हो रही है। इस सीजन में हुए 33वें  मैच में गोलों का शतक बन गया जो पिछले 68 वर्षों में सबसे तेज है। सौंवा गोल नीदरलैंड और स्वीडन के बीच हुए मैच में नीदरलैंड के कोडी गैपको ने किया जो नीदरलैंड का तीसरा गोल था। 1958 के बाद किसी भी विश्व कप में इस बार सबसे कम मैचों में 100 गोल हुए हैं। इस विश्व कप में गोल करने की शुरुआत मेक्सिको के जूलियन क्विनोनेस ने 12 जून को साउथ अफ्रीका के विरुद्ध गोल करके की थी।

फीफा विश्व कप 2026 डायरी_08

 


फीफा विश्व कप 2026 का नौवां दिन। अभी तक टीमों के पास दो विकल्प थे। एक आगे जाने का। दूसरा ठहरकर इंतजार करने का कि उनके पास कौन सा विकल्प रहेगा आगे जाने का या वापस जाने का।यहां से टीमों के लिए वापस जाने का विकल्प खुल रहा था। अब से केवल आगे बढ़ने के उल्लास का कोलाहल ही सुनाई नहीं देगा, बल्कि वापसी की उदास पदचापें भी सुनाई देगी। यहां से उम्मीदों के रंग कुछ और गुलाबी होंगे तो उम्मीदों के चिटकने के स्याह रंग भी नजर आने लगेंगे। कुछ की उम्मीदों के पंखों को ऊंची उड़ान भरने की आजादी होगी। कुछ के सपनों की परवाज खत्म होगी।

एक

ब्राजील फीफा विश्व कप की सबसे सफल टीम है जिसने सबसे ज्यादा  पांच बार विश्व कप जीता है, बल्कि एकमात्र ऐसी टीम है जिसने हर बार विश्व कप फाइनल्स में भाग लिया। एक ऐसी टीम जो हमेशा ही आकर्षण के केंद्र में होती है। जिससे उसके प्रशंसकों को बहुत ज्यादा अपेक्षाएं होती हैं। ब्राजील ने विश्व कप के अपने पहले मैच में अपने समर्थकों को निराश किया था। उन्होंने मोरक्को के साथ 1-1 से ड्रॉ खेला था। लेकिन कल फ़िलाडेल्फिया में अपने दूसरे मैच में शानदार प्रदर्शन किया और हैती की टीम को 3-0 से पराजित किया। ब्राजील की टीम अपने रंग में लौट चुकी है। उसने अपनी लय पा ली है जिसके लिए वो जानी जाती है। 

सेलेकाओ ने हैती के विरुद्ध शुरू से ही खेल पर नियंत्रण बनाए रखा और पहले हाफ में ही तीन गोल कर मैच का नतीजा तय कर दिया। ब्राजील के तेज आक्रमण और लगातार दबाव का सामना करने में हैती को काफी मशक्कत करनी पड़ी। 

इस मैच से पहले,दिन के दूसरे मैच में मोरक्को ने स्कॉटलैंड को 1-0 से हराया। मोरक्को ने शुरुआत से ही मैच पर अपना दबदबा बनाए रखा। टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और स्कॉटलैंड को संभलने का मौका नहीं दिया। मुकाबले की शुरुआत में ही स्कॉटलैंड के डिफेंस से चूक हुई। स्कॉटिश कप्तान ग्रांट हैनली सही पोजीशन में नहीं थे, जिसका पूरा फायदा मोरक्को ने उठाया। ब्राहिम डियाज के बेहतरीन पास पर इस्माइल सैबारी ने तेजी से आगे बढ़ते हुए शानदार शॉट लगाया और गेंद को गोल पोस्ट के भीतर भेज दिया। ये गोल 71वें सेकेंड में आया जो इस विश्व कप का सबसे तेज गोल था। हालांकि कुछ देर बार इसे विश्व कप का सबसे तेज गोल की जगह दूसरा सबसे तेज गोल हो जाना था।

ग्रुप सी के इन दो मुकाबलों के परिणामस्वरूप हैती के नॉकआउट चरण में पहुंचने की कोई भी संभावना नहीं रह गई। इस तरह हैती इस प्रतियोगिता से बाहर होने वाली पहली टीम बन गई है।

दो

दिन का पहला मैच सिएटल में मेजबान अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच था। इस मैच में अमेरिका ने शानदार खेल दिखाते हुए ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराकर नॉक आउट के लिए अपनी जगह पक्की कर ली है। विश्व कप के इतिहास में यह दूसरा मौका है, जब अमेरिका ने प्रतियोगिता के लगातार पहले दो मैचों में जीत हासिल की। अमेरिका ने पहले मैच में पैराग्वे को 4-1 से हराया था। 

अमेरिका ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा। इस दबाव के चलते 11वें मिनट में ही अमेरिका को इसका फायदा भी मिला। ऑस्ट्रेलिया के डिफेंडर कैमरन बर्गेस फोलारिन बालोगुन के शॉट का बचाव करते हुए अपना ही गोल कर बैठे। उसके बाद दूसरा गोल पहले हाफ के अंतिम क्षणों में आया। 

पहले हाफ में ही 0-2 से पिछड़ने के बाद दूसरे हाफ में ऑस्ट्रेलिया ने गोल करने के कई प्रयास किए, लेकिन टीम को सफलता नहीं मिल सकी। अमेरिका के डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया को वापसी करने का कोई मौका नहीं दिया। 

तीन

आज के सबसे महत्वपूर्ण मुकाबले में पैराग्वे ने बड़ा उलटफेर करते हुए तुर्की को 1-0 से हरा दिया। पैराग्वे ने अपनी इस शानदार जीत से ग्रुप की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है और टीम की नॉकआउट दौर में खेलने की उम्मीदों को कायम रखा है।

मुकाबले की शुरुआत होते ही पैराग्वे ने आक्रामक तेवर दिखाए। मैच के दूसरे मिनट में मैथियास गलार्जा ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर गेंद को गोल में पहुंचा दिया। महज 65 सेकंड में आया यह गोल टूर्नामेंट के सबसे तेज गोल था। इससे पहले आज ही खेले गए मैच में मोरक्को के सैबारी के 71सेकेंड में किए गए गोल को पीछे छोड़ दिया। तुर्की के गोलकीपर उगुरकान काकिर गेंद की दिशा भांपने में नाकाम रहे और उनकी टीम शुरुआती झटके से उबर नहीं सकी।

हालांकि शुरुआती गोल खाने के बाद तुर्की ने खेल पर पकड़ बनाने की कोशिश की।  टीम ने गेंद पर नियंत्रण रखा और लगातार हमले किए। 33वें मिनट में मेर्ट मुल्डुर का हेडर गोलपोस्ट से टकराकर बाहर आ गया, जिससे तुर्की बराबरी का सुनहरा अवसर गंवा बैठा। दूसरे हाफ में अर्दा गुलेर और केनान यिल्डिज ने भी कई बार पैराग्वे के डिफेंस को चुनौती दी, लेकिन गोलकीपर ऑरलैंडो गिल और रक्षापंक्ति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए हर प्रयास को विफल कर दिया। तुर्की पूरे मैच में गोल के लिए संघर्ष करती रही। पैराग्वे के अनुभवी खिलाड़ी मिगुएल अल्मिरोन को रेड कार्ड के कारण बाहर जाना पड़ा और इसके बाद पैराग्वे को पूरा दूसरा हाफ 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। इसके बावजूद तुर्की इसका फायदा नहीं उठा सकी। 

चार

इस विश्व कप का अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर आज हुआ। तुर्की की टीम आज अपना दूसरा मैच पैराग्वे से हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गई। इस टीम को अंडरडॉग माना जा रहा था और ये माना जा रहा था कि ये टीम इस बार अंतिम आठ तक तो पहुंचेगी ही। हैती के बाद विश्वकप से बाहर होने वाली तुर्की दूसरी टीम है। तुर्की की टीम में बहुत ही प्रतिभाशाली और स्टार खिलाड़ी थे। स्पेनिश क्लब रियल मैड्रिड के लिए खेलने वाले युवा मिडफील्डर अर्दा गुलेर के सबसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में से एक हैं। इंटर मिलान के अनुभवी कप्तान हकन चालहानोग्लु शानदार मिडफील्डर थे और अपनी फ्री-किक और प्लेमेकिंग के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। बेसिकटास और बेनफिका में अपना जलवा बिखेरने वाले मिडफील्डर  ओर्कुन कोककु  टीम के मुख्य रणनीतिकारों में से थे। और ब्राइटन और फेनरबाहस के बेहतरीन डिफेंडर फेरडी कादियोग्ल भी इस टीम में शामिल थे।

पांच

गुलाबी रंग को सामान्यतः लड़कियों के साथ जोड़ा जाता है। लेकिन इस विश्व कप में ये रंग अपना जलवा बिखेर रहा है। अब इसे अघोषित रूप से इसे विश्व कप का आधिकारिक रंग माना जा रहा है। जूते बनाने वाले सभी प्रमुख कंपनियों नाइकी, एडिडास, प्यूमा सभी ने इस विश्व कप में अपने नए कलेक्शन लॉच किए हैं और सभी ने खिलाड़ियों को गुलाबी रंग के जूते उपलब्ध कराए हैं। यही कारण है कि इस समय ज्यादातर टीमों के खिलाड़ी चमकीले गुलाबी रंग के जूतों में नजर आ रहे हैं। और फुटबॉल मैदान गुलाबी रंग में रंगे नज़र आ रहे हैं।  इन टीमों में इंग्लैंड, जापान, अर्जेंटीना,पुर्तगाल,फ्रांस और मेजबान यूएस की टीम भी शामिल हैं। हालांकि मेस्सी सफेद रंग के जूतों में ही नजर आ रहे हैं। 

दरअसल बरसों के शोध और मार्केटिंग अनुभव के बाद लगभग सभी जूते बनाने वाली कंपनियां इस निष्कर्ष पर पहुँची हैं कि फुटबॉल मैदान पर ब्राइट पिंक अन्य किसी भी रंग के मुकाबले अधिक प्रभावी होते हैं। क्योंकि घास के हरे रंग के कंट्रास्ट में पिंक कलर टीवी,मोबाइल पर हर जगह अधिक चमकता और ध्यान खींचता है।

बस अब देखना है कि ये पिंक सूट किसे करता है। कौन जीत की पिंकी आभा लिए आगे बढ़ता है और किसके चेहरे हार की टीस से मलिन हो अपनी गुलाबी आभा खो बैठेंगे।

Friday, 19 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 07 : दूसरे दौर की शुरुआत

 


फीफा विश्व कप 2026 का आठवां दिन। लीग स्टेज का दूसरा चरण शुरू हो गया है। जैसे जैसे समय आगे बढ़ रहा है संघर्ष अधिक सघन,अधिक तीव्र और अधिक कठिन होते जा रहा है। हनीमून पीरियड अब टीमों के लिए भी और खिलाड़ियों के  लिए खत्म हो गया है। अब परिणाम अधिक निर्णायक होते जा रहे हैं। करो या मरो वाली स्थिति में खेल पहुंच रहा है, जिसमें अब एक छोटी सी गलती भी आगे बढ़ने के रास्ते बंद कर सकती है। उम्मीद की लौ बुझ सकती है। जीत के सपने बिखर सकते हैं।

एक

कतर में आयोजित पिछले विश्व कप की तुलना में मेजबान अधिक सफल हो रहे हैं। पिछली बार मेजबान कतर लीग स्टेज में ही तीनों मैच हारकर बाहर हो गया था। लेकिन यहां तीनों होस्ट अगले चरण जाने की कोशिश में हैं। अगले चरण में यानी राउंड ऑफ 32 में पहुंचने वाली सह मेजबान मेक्सिको पहली टीम बन गई है। कनाडा भी अपने ग्रुप में शीर्ष पर है। यूएस ने अपना पहला मैच जीतकर उम्मीदें बढ़ा दी है।

कल के दिन के आखिरी मैच में मेक्सिको ने ग्वाडालाजारा में एक तनावपूर्ण और संघर्ष भरे मुकाबले में दक्षिण कोरिया को एक 1-0 से हराकर लगातार दूसरी जीत हासिल की। इस ग्रुप कल का एक दूसरा मैच दक्षिण अफ्रीका और चेक गणराज्य के बीच 1-1 से अनिर्णीत रहा। इस कारण से मेक्सिको का इस ग्रुप में शीर्ष पर रहना निश्चित हो गया है।

दक्षिण कोरिया के गोलकीपर किम सेउंग ग्यू की एक गलती टीम की हार का कारण बन गई। दूसरे हॉफ के 50वें मिनट में गोलकीपर किम के हाथ से फिसली गेंद पर लुईस रोमो ने गोलकर मैक्सिको को बढ़त दिला दी। ये मैच का एकमात्र गोल था। एक गोल से पिछड़ने के बाद दक्षिण कोरिया ने वापसी की जोरदार कोशिश की। मैच के अंतिम कुछ समय में गोलकीपर राउल रेंगल ने दो शानदार बचाव किए और अपनी गोलशीट क्लीन रखी।

दो

प्रतियोगिता के दूसरे सह मेजबान कनाडा ने भी अपनी आगे बढ़ने की उम्मीद बनाए रखी है। उसने आज कतर को 6-0 से हरा दिया। ये मैच कतर के लिए उनकी शर्मनाक हार,उनके रफ टफ खेल के कारण दो रेड कार्ड के बाद केवल नौ खिलाड़ियों से खेलना, और उनके खिलाड़ी मोहम्मद मनाई द्वारा आत्मघाती गोल के लिए याद किया जाएगा तो कनाडा के लिए जोनाथन डेविड की हैट्रिक और उनके प्रमुख मिडफील्डर इस्माइल कोने को असिम मदीबो की टक्कर के बाद बाएं पैर के निचले हिस्से में लगी गंभीर चोट के लिए याद किया जायेगा।

मेस्सी के बाद कनाडा के डेविस हैट्रिक लगाने वाले इस प्रतियोगिता के दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। डेविस अपने  शांत और संयमित स्वभाव के कारण 'द आइसमैन' के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने हैट्रिक बनाने का सौ साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है। इससे पहले CONCACAF के अंतर्गत आने वाली टीमों में अमेरिका के टीम के बर्ट पटेनाउड ने 1930 में उरुग्वे में आयोजित विश्व कप में ये कारनामा किया था।

तीन

स्विट्जरलैंड की टीम ने बोस्निया व हर्जेगोविना के विरुद्ध मैच में अपनी लय प्राप्त कर ली है। उसने ये मैच 4-1 से जीता। ये मैच इस बात के लिए जाना जाएगा कि इस मैच के पांचों गोल खेल के 74वें मिनट के बाद आए।

मैच के अधिकांश समय तक स्विस टीम बोस्निया के आक्रमण को भेदने के लिए संघर्ष करती रही और गोलकीपर निकोला वासिलज ने उन्हें बार-बार निराश किया। अंततः 74वें मिनट में निर्णायक क्षण आया जब रुबेन वर्गास के क्रॉस से स्थानापन्न खिलाड़ी जोहान मंज़ांबी ने गोल दाग दिया। मंज़ाम्बी के मैदान में आने से मैच का रुख बदल गया। उन्होंने दो गोल किए।

चार



और अंत में बात एक फुटबॉल दर्शक की। यूँ तो दुनिया भर से फुटबॉल देखने और अपनी टीम का समर्थन करें अमेरिका पहुंच रहे हैं। लेकिन जर्मनी के दक्षिण पूर्वी क्षेत्र कार्ल्सरुहे के जैकब अल्बर्टी की बात ही अलग है। ये हवाई यात्रा के माध्यम से नहीं बल्कि साइकिल से ह्यूस्टन पहुंचे हैं, 14 जून को जर्मनी और केप वर्डे मैच देखने के लिए। इस यात्रा में उन्हें दो साल का समय लगा, 25000 किमी की दूरी तय की, चार महाद्वीप और 27 देशों को पार किया। 

26 साल के जैकब ने अगस्त 2024 में एक लक्ष्य के साथ अपनी यात्रा शुरू की। लक्ष्य था दुनिया भर की यात्रा करते हुए फीफा विश्व कप 2026 के समय तक यूएस पहुंचना। ये एक ऐसा लक्ष्य था जो अंततः फुटबॉल प्रेम की असाधारण कहानी बन गई। वे कहते हैं "मेरे लिए फुटबॉल का मतलब है कभी हार न मानना, लगातार संघर्ष करते रहना और एकजुट रहना। विश्व कप की तरह हर देश एक साथ आते हैं, मिलकर जश्न मनाता है, और यही फुटबॉल की खूबसूरती है।”

फुटबॉल के प्रति ये लगाव,ये जुनून,ये प्यार ही फुटबॉल की खूबसूरती है, जो फुटबॉल को केवल एक खेल भर नहीं रहने देता, बल्कि लोगों के जीवन का एक अविभाज्य हिस्सा बना देता है।

और चलते चलते ये की वोजिन्हा के फॉलोअर 13 मिलियन हो गए हैं।उधर टिम पेन के कोलंबिया में जाने की खबर कन्फर्म हो गई है।



Thursday, 18 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 06 : दिग्गजों का मिला जुला दिन

 

दिन चाहे कोई भी हो,पहले से लेकर अंतिम तक,फुटबॉल प्रेमियों के लिए अच्छे फुटबॉल का आकर्षण कहां कम होता है! ये तो दिन ब दिन बढ़ता जाता है। सातवें दिन भी फुटबॉल का रोमांच,उसकी अनिश्चितता,उसका आकर्षण, कहां कम था।सबसे बड़ा आकर्षण तो रोनाल्डो ही होने वाले थे। उनके पीछे भी तो एक लंबी लाइन लगी थी। ब्रूनो फर्नांडीस, हैरी केन, जूड बेलिंगहैम, लुका मोड्रिक, इवान पेरिसिक, लुइस डियाज़, जेम्स रोड्रिगेज़ और एंटोनी सेमेन्यो भी।


एक

इंग्लैंड ने अपना एकमात्र फीफा विश्वकप 1966 में जीता था।  उसके बाद वो कभी विश्व कप नहीं जीत पाई। लेकिन कमाल ये है कि हर विश्व कप में विश्व कप जीतने की फेवरिट टीमों में शुमार रही है। हैरी केन की अगुवाई वाली इंग्लैंड की टीम इस बार भी सबसे फेवरिट टीमों में से एक है। और कल अपने पहले ग्रुप मैच में इसने दिखाया कि क्यों इसे इस बार की सबसे फेवरिट टीमों में शुमार किया जा रहा है। 

इंग्लैंड के सामने रूस में 2018 में आयोजित विश्वकप की फाइनलिस्ट लुका मॉड्रिच की टीम क्रोशिया थी। इंग्लैंड ने क्रोशिया पर 4-2 से शानदार जीत हासिल की। ये दो बड़ी टीमों के बीच एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक मैच था। इस मैच में जीत हासिल कर इंग्लैंड ने बताया कि इस बार वे अपनी जीत के प्रति कितने गंभीर है। निसंदेह थ्री लायंस की जीत के नायक कप्तान हैरी केन ही रहे। पहले दो गोल उन्होंने ही किए। हैरी केन का बायर्न म्यूनिख के साथ ये साल बहुत ही शानदार रहा था। और वो ही फॉर्म उन्होंने यहां जारी रखी।

पहले हाफ में में मैच बराबरी पर छूटा। इंग्लैंड ने दो बार बढ़त ली लेकिन क्रोशिया ने दोनों बार बराबरी कर ली। दूसरे हाफ ने इंग्लैंड की टीम ने आक्रामक रुख दिखाया। मैच शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद जूड बेलिंगहैम ने थ्री लायंस को 3-2 से आगे कर दिया। फिर मार्कस रैशफोर्ड ने 85वें मिनट में गोलकर स्कोर 4-2 कर दिया। इंग्लैंड की यह शानदार शुरुआत है। अगर आप इंग्लैंड की टीम के प्रसंशक है तो अपनी फिंगर क्रॉस रखिए और इंग्लैंड को आगे बढ़ते देखते रहिए।


दो

स्पेन की तरह पुर्तगाल की टीम भी इस बार विश्व कप जीतने की सबसे संभावना वाली टीमों में से एक है। फिर इस टीम का क्रिश्चियनों रोनाल्डो इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वे छठी बार विश्व कप में भाग ले रहे हैं मेस्सी की तरह। निसंदेह वे भी अपने करियर की समाप्ति विश्व कप जीतकर ही करना चाहते होंगे। मेस्सी के शानदार प्रदर्शन के बाद सबकी निगाहें ना केवल पुर्तगाल के बल्कि रोनाल्डो के प्रदर्शन पर भी थीं।

पुर्तगाल का ये मैच अफ्रीकी टीम डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से था। वे 52 साल बाद विश्व कप में खेल रहे थे। 1974 में उन्होंने जेरे नाम की पहचान के साथ विश्व कप में भाग लिया था और सब सहारा अफ्रीका की विश्व कप में भाग लेने वाली पहली टीम थी।

कांगो पर पुर्तगाल की आसान जीत की संभावना थी। जैसे स्पेन की केप वर्डे पर आसान जीत की संभावना की जा रही थी। पर हुआ इसके उलट। ठीक वैसे ही जैसे स्पेन के साथ हुआ। दो ऐसी टीमें जो विश्व रैंकिंग में पहली पांच पायदानों पर हों और जिनकी  फ्रांस के बाद सबसे ज्यादा विश्व कप जीतने की संभावना व्यक्त की जा रही हो,उन्होंने अपने से बहुत कमजोर और बहुत नीचे की रैंकिंग वाली टीमों के साथ ड्रॉ खेला।

अंतर केवल इतना था कि पुर्तगाल और कांगो के बीच मैच 1-1 की समाप्ति पर छूटा जबकि स्पेन और केप वर्डे का मैच गोलरहित था। एक और अंतर था। स्पेन और जीत के बीच केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा थे। जिन्होंने शानदार बचाव किए और रातोंरात स्टार खिलाड़ी बन गए। लेकिन पुर्तगाल का आक्रमण फिनिश लाइन तक आ ही नहीं पाया। कांगो के गोलकीपर को टेस्ट ही नहीं किया जा सका। वोजिन्हा की तरह क्या कांगो के गोलकीपर को कोई जान पाया। स्पेन और पुर्तगाल के आक्रमण में यही अंतर था। 

आक्रमण की शुरुआत पुर्तगाल ने की और छठवें मिनट में ही पेड्रो नेटो के शानदार क्रॉस पर जोआओ नेवेस ने गोल दागकर बढ़त दिला दी। इसके बाद कांगो की टीम रक्षात्मक हो गई और खेल में पकड़ पुर्तगाल ने बना ली। लेकिन उसने खेल धीमा कर दिया। पुर्तगाल की इस सुस्ती का फायदा कांगो ने उठाया और हाफ टाइम से पहले आर्थर मासुअकू के सुंदर पास पर योआने विस्सा ने हेडर से गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया।

दूसरे हाफ में कांगो ने पहले हॉफ से बेहतर खेल दिखाया जबकि पुर्तगाल का आक्रमण बिखर गया। वे ना तो वे कोई सही मूव बना पाये और ना ही गोल। मैच बराबरी पर छूटा और पुर्तगाल ने एक महत्वपूर्ण अंक खोया।

जहां तक रोनाल्डो की बात है,वे बिल्कुल भी अपने रंग में नहीं दिखाई पड़े। वे गेम पर किसी भी तरह का प्रभाव छोड़ने में असफल रहे। वे 90 मिनट के खेल में गोल पर केवल तीन अटेम्प ले पाए और वे तीनों ही टारगेट पर नहीं रहे। 

दरअसल ये दो दिन में दो यूरोपीय बड़ी और शक्तिशाली फुटबॉल टीमों को सफल अफ्रीकी चुनौती थी।


तीन

घाना और पनामा के बीच का मुकाबला दो बड़े अंतर वाली टीमों के बीच का मुकाबला था। ये 34 वीं रैंक का 73 वीं रैंक से मुकाबला था। वैसे भी घाना की टीम ने पिछले छह मुकाबलों में से एक भी नहीं जीता था। उनके कोच कार्लोस क्विरोज तीन महीने पहले ही जुड़े थे। उनकी एकमात्र उम्मीद मैनचेस्टर सिटी के स्टार विंगर एंटोनी सेमेन्या थे।

पहले हॉफ में पनामा की टीम ने शानदार खेल दिखाया और गोली की बार-बार परीक्षा ली। घाना के गोली लॉरेंस जिगी लगातार व्यस्त रहे और उन्होंने कई शानदार बचाव किए। बेहतरीन खेल के बावजूद पनामा की टीम गोल करने में असफल रही। ये घाना की खुशकिस्मती ही थी। दूसरे हॉफ में घाना की टीम ने भी जोर लगाया लेकिन स्टार खिलाड़ी सेमेन्या नहीं चल पाए। जब ऐसा लग रहा था कि मैच गोलरहित अनिर्णीत रहेगा,तो इंजरी टाइम में ब्रैंडन थॉमस-असांटे ने डिफेंडर को चकमा देकर कालेब यिरेनकी को पास दिया जिन्होंने आसानी से गोल कर दिया। 

ये घाना के लिए एक यादगार जीत बन गई।

चार

उज्बेकिस्तान की टीम ने विश्व कप के लिए पहली बार क्वालीफाई किया है। कल उनके विश्व कप के पहले मुकाबले में उनका सामना एक बेहतरीन टीम कोलंबिया से होना था। निश्चित ही एशियाई टीम के लिए ये मुकाबला कठिन साबित होने वाला था। और हुआ भी। उनके लिए संतोष की बात है कि उन्होंने लगभग चालीस मिनटों तक  कोलंबिया के अटैक का हिम्मत से मुकाबला किया और अपना गोल सुरक्षित रखा। पर बायर्न म्यूनिख के लुइस डियाज़ ने रक्षात्मक पंक्ति को भेदने में सफलता पाई और उनके शानदार पास पर डैनियल मुनोज़ ने गोल कर टीम को बढ़त दिला दी। 

दूसरे हॉफ में 60वें मिनट में उज़्बेकिस्तान के  अब्बोसबेक फैज़ुल्लायेव ने गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया। पर यह बराबरी सिर्फ पांच मिनट तक ही कायम रही। 65वें मिनट में लुइस डियाज़ ने गोल कर कोलंबिया को फिर से बढ़त दिला दी। के. कैमपाज ने इंजरी टाइम में गोल कर स्कोर 3-1 कर दिया।

उजबेकिस्तान की टीम भले ही हार गई हो, लेकिन उसने कोलंबिया की टीम को कड़ी टक्कर दी।  उज्बेकिस्तान ने दूसरे हाफ में कई मौके गोल करने के बनाए,लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। अन्यथा कोलंबिया की टीम मुश्किल में पड़ सकती थी।

लुइस डियाज़ को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया, क्योंकि उनके गोल और असिस्ट ने उनकी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एफसी बायर्न म्यूनिख के यह एक शानदार दिन था। पहले हैरी केन और फिर लुईस डियाज ने शानदार खेल दिखाया।

Wednesday, 17 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 05 : चैंपियनों का जादू

 

प्रतियोगिता का छठा दिन। चैंपियन टीमों का दिन।उनके शानदार आगाज का दिन। स्टार खिलाड़ियों का दिन। उनके बेहतरीन प्रदर्शन का दिन। गोलों की बरसात का दिन। टीमों का विश्व कप में लंबे अंतराल के बाद वापसी के जश्न का दिन। रिकॉर्ड बनने और और टूटने का दिन। एर्लिंग हालैंड,किलियन म्बाप्पे  और मेस्सी के शानदार खेल का दिन । और,और मेस्सी के जादू का दिन।

एक 


सबसे पहले मेस्सी का जादू। उन्होंने बताया कि क्यों उन्हें सार्वकालिक महानतम खिलाड़ी कहा जाता है। दिन का तीसरा मैच पिछली चैंपियन अर्जेंटीना का अल्जीरिया से था। इससे पहले अर्जेंटीना विश्व कप बचाने के प्रयास में दो बार अपने पहले ही मैच में हार चुकी थी। लेकिन इस बार टीम में मेस्सी थे और उनके खेल का जादू था। अर्जेंटीना ने 3-0 से अपना ये मैच जीता। ये तीनों गोल मेस्सी के पैर से आए। ये मेस्सी  की विश्व कप की पहली और अर्जेंटीना की तरफ से 11वीं हैट्रिक थी।

आज मेस्सी की गति और मूवमेंट कमाल का था। वे अगले सप्ताह 39 साल के हो रहे है। उनकी टीम अब नई रणनीति से खेल रही है। जिसमें उन्हें साथी खिलाड़ियों और कोच का भरपूर सहयोग मिल रहा है।मियामी फुटबॉल क्लब में भी और अर्जेंटीना की टीम में भी। वे उनकी ऊर्जा बचाने के लिए अधिक मेहनत कर रहे हैं। अब मेस्सी मिडफील्ड से नहीं खेल रहे हैं बल्कि विपक्षी हाफ में और विपक्षी बॉक्स के बाहर से खेल रहे हैं। आज उनका पहला गोल बॉक्स से बाहर से आया। बाएं पैर का शॉट दो खिलाड़ियों के बीच से कर्व बनाते हुए गोल के दाहिने कोने में जाल में धंस गया जिसका गोलकीपर के पास कोई जवाब नहीं था। क्या ही दर्शनीय शॉट था ये। दूसरा गोल बहुत आसान था जो उन्होंने गोलकीपर के डिफ्लेशन से मिली गेंद को आसानी से गोल डाल दिया। लेकिन उनका क्या स्वाग था। कितने इत्मीनान से  गेंद गोल में सरकाई। ये ये मेस्सी की सहजता और इत्मीनान था कि गोल इतना आसान दिख रहा था। मैच के 76वें मिनट में मेस्सी का तीसरा गोल आया। ये एक शानदार जमीनी शॉट था। इस हैट्रिक के बाद वे अब मिरोसलाव क्लोसे के विश्व कप में सर्वाधिक 16 गोल की बराबरी पर हैं। खेल खत्म होने के बाद उनके कोच लियोनेल स्कालोनी  कह रहे थे "लियो के बारे में मेरे पास शब्द नहीं हैं। मैं क्या कहूँ? वह अविश्वसनीय है। फुटबॉल जगत में हर कोई उसे देखना चाहता है और इसका आनंद लेता है।”

मेस्सी के खेल को देखकर अनायास ही मोहिंदर अमरनाथ की याद आती है। हालांकि वे मेस्सी के कद के खिलाड़ी नहीं थे। लेकिन उनकी बेटिंग में कमाल का एलिगेंस था,नफासत थी। उसकी बारबरी कोई क्रिकेट खिलाड़ी नहीं कर सकता। उनके पास कोई भी गेंद खेलने के लिए इतना अधिक समय होता था कि आप गेंद को बल्ले से टकराने का इंतजार करते होते थे। वो ही नफासत उनकी गेंदबाजी में थी। बिल्कुल ऐसा ही एलिगेंस, वैसी ही नफासत मेस्सी के खेल में दिखाई देती है। उनकी गति में एक लय है। एलिगेंस है। उनके पास गेंद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय होता है,फिर चाहे उन्हें पास करना हो या गोल पर अटेम्प्ट करना हो। यही उनके खेल को दर्शनीय बनता है। एकदम एफर्टलेस। आज के तीनों गोल ऐसे ही थे।

 दरअसल कुछ लोगों को उम्र सूट करती है। ढलती उम्र उन्हें अधिक आकर्षक,अधिक ऊर्जावान और अधिक प्रतिभाशाली बनाती है। फिर वे फिर रोजर फेडरर हो,नोवाक जोकोविच हो, लेब्रान जेम्स हो, केविन डूरंट हों या फिर स्टीफन करी हों। और अब मेस्सी भी। 39 साल में क्या ही शानदार खेल रहे हैं। ये उनका छठा विश्व कप है। 

दो 

फ्रांस की टीम हमेशा से अपने कंपोजीशन के लिए चर्चित रही है। टीम में इस समय 21 खिलाड़ी अफ्रीकी मूल के हैं। फ्रांस की टीम जिस ऊंचाई पर है,उसे मुख्यत इन अश्वेत खिलाड़ियों ने ही बनाया है। फ्रांस की 1998 में विश्व कप की जीत में ज़िनेदिन ज़िदान, पैट्रिक विएरा और मार्सेल देसैली जैसे कई अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों का महत्वपूर्ण योगदान था। 2018 की जीत में भी किलियन म्बाप्पे,पॉल पोग्बा,एन्गोलो काँटे,ब्लेस मटुइडी,उस्मान डेम्बेले,सैमुअल उमटिटी जैसे खिलाड़ियों का योगदान था।

लेकिन टीम के इसी कंपोजिशन को लेकर धुर दक्षिणपंथी टीम की आलोचना करते रहे हैं। 1998 की जीत के बारे में दक्षिणपंथी राजनेता जीन-मैरी ले पेन ने कहा था कि विजयी टीम सही मायने में "फ्रांसीसी" नहीं थी। कतर के 2022 विश्व कप के फाइनल में अर्जेंटीना के हाथों फ्रांस की हार में पेनल्टी चूकने के बाद अश्वेत खिलाड़ी ऑरेलियन चोउमेनी और किंग्सले कोमन को ना केवल नस्लीय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा बल्कि उनकी फ्रांसीसी पहचान पर भी सवाल उठे।

इस बार भी चर्चा में फ्रांसीसी टीम का कंपोजिशन और उनके स्टार खिलाड़ी किलियन म्बाप्पे का प्रदर्शन ही था। फ्रांस 2022 में अर्जेंटीना से हार गया लेकिन किलियन म्बाप्पे ने अपने शानदार खेल से फ्रांस को लगभग जिता ही दिया था। कल किलियन म्बाप्पे ने वहीं से शुरू किया, जहां 2022 में छोड़ा था। उन्होंने सेनेगल पर फ्रांस की जीत में  दो गोल दागे। विश्व कप में उनके दागे गए कुल गोल 14 हो गए और उन्होंने मेस्सी को कुछ समय के लिए पीछे छोड़ दिया। ये किलियन म्बाप्पे और फ्रांस की शानदार शुरुआत थी।

तीन


नॉर्वे 1998 के बाद पहली बार विश्व कप में भाग ले रहा था और उसने बहुत ही शानदार तरीके के विश्व कप में वापसी का जश्न मनाया, इराक को 4-1 से हरा कर। नॉर्वे की टीम की दो कारणों से चर्चा थी। एक, गोल मशीन मैनचेस्टर सिटी के स्ट्राइकर अर्लिंग हॉलैंड के कारण। ये उनका पहला विश्व कप था। और उन्होंने अपनी जबरदस्त फॉर्म को यहां भी जारी रखा। उन्होंने दो शानदार गोल कर विश्व कप में अपने करियर के आग़ाज़ का जश्न मनाया। दो, वाइकिंग थीम के लिए। वाइकिंग नॉर्वे का एक मध्यकालीन योद्धा है। सुप्रसिद्ध छायाकार डेविड यारो ने मैच से पहले पूरी टीम को वाइकिंग वेश भूषा में शूट किया जिसमें पूरी टीम वाइकिंग योद्धाओं की तरह पारंपरिक ढाल, तलवारों और कवच में है। टीम प्रबंधन की तरफ से  कहा गया कि इस थीम का उद्देश्य टीम में एकता, लचीलेपन और नॉर्वे की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाना है। लेकिन इसकी आलोचना भी खूब हो रही है इस आधार पर कि ये पुरुषवादी और उग्र सोच है। लेकिन ये थीम खूब लोकप्रिय हो रहा है।

चार

ऑस्ट्रिया की टीम ने भी 28 साल बाद विश्व कप में वापसी का जश्न अपनी प्रतिद्वंदी टीम जॉर्डन को 3-1 हरा कर मनाया। 

ये दिन एशिया की दो टीमों की हार का दिन भी था। आज इराक और जॉर्डन दोनों ने अपने मैच हारे। इससे पहले किसी भी एशियाई टीम ने इस विश्व कप में कोई मैच नहीं हारा था।

पांच

केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा स्पेन के खिलाफ अपने शानदार खेल के कारण सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहे हैं। फिलहाल इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर की संख्या 10 मिलियन यानी एक करोड़ पहुंच गई है। लेकिन सोशल मीडिया ट्रेंड होने वाले वे अकेले नहीं हैं।

अर्जेंटीना के इंफ्लूएंसर एल्सकार्सो ने उपहास करते हुए अपने फॉलोअर्स से कहा इस विश्व कप में न्यूजीलैंड के राइट बैक टिम पेन के बहुत कम फॉलोअर्स है। उन्हें फॉलो करें। देखते ही देखते उनके फॉलोअर्स की संख्या पांच हज़ार से बढ़कर 58 लाख हो गई। इसका अधिक फायदा उनके कैरियर को हुआ। वे चर्चित हो गए। उनकी कीर्ति कई क्लबों तक पहुंची। चर्चा है वे जल्द ही पैराग्वे के क्लब ओलंपिया से जुड़ने वाले हैं।



Tuesday, 16 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 04: ज़मीं पर पाँव पड़ते नहीं मेरे

 

       खेल की खूबसूरती ही ये है, कोई एक दिन जो खिलाड़ी का नहीं होता वो रसातल में होता है, और कोई एक दिन जो उसका हो तो वो आसमाँ पर होता है। कोई एक दिन का खेल, कोई एक मैच आपको चाँद पर बैठा देता है। 90 मिनट का समय केवल एक मैच का समय भर नहीं होता। ये एक खिलाड़ी की पूरी जिंदगी की मेहनत होती है। उसका पूरा जीवन होता  है। उसके द्वारा देखे गए सपने होते हैं और उन सपनों को साकार करने का समय होता है।

एक

     इस बात को केप वर्डे के 40 साल के गोलकीपर जोसिमर जोस एवोरा  डायस से बेहतर और कौन समझ सकता है। इस समय वे खुद को धरती पर कहां पा रहे होंगे। वे तो खुद को चांद की सतह पर चलता हुआ महसूस कर रहे होंगे। 

        केप वर्डे अटलांटिक महासागर में अफ्रीका के पश्चिमी तट से लगभग 600 किलोमीटर दूर 10 ज्वालामुखीय द्वीपों का एक खूबसूरत देश है। उस ने पहली बार विश्व कप फाइनल्स के लिए क्वालीफाई किया है। वे कल विश्व कप का अपना पहला मैच खेल रहे थे। विश्व नंबर दो और इस बार के विश्व चैंपियन बनने की सबसे अधिक संभावना वाली और सबसे शक्तिशाली टीमों में से एक स्पेन से खिलाफ। एक दिन पहले कुछ कमजोर टीमों का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा था। काराकाओ जर्मनी से 1-7 से हारी थी और स्वीडन की टीम ने ट्यूनीशिया को 5-1 से हराया था। स्पेन के लिए ये मैच केक वॉक समझा जा रहा था जिसे स्पेन को बड़े अंतर से जीत जाना था। लेकिन केप वर्डे ने शानदार खेल दिखाया। उनका रक्षण अभेद्य था जिसे स्पेन के अग्रिम पंक्ति के  खिलाड़ी भेदने असफल रहे। 

          केप वर्डे  की विश्व रैंकिंग 67वीं है। इसलिए विश्व नंबर दो टीम के कोच लुइस डे ला फुएंते अपने स्टार खिलाड़ी लमिन यामल और निकी  विलियम्स को फर्स्ट इलेवन में शामिल नहीं किया। लेकिन केप वर्डे की टीम ने दूसरे हाफ में उन दोनों को उतारने के लिए मजबूर कर दिया। वे मैदान में उतरे। पर नतीजा वही रहा। वे भी केप वर्डे के रक्षण को भेद नहीं पाए। मैच अंततः गोल रहित अनिर्णीत समाप्त हो गया। ये इस विश्व कप का पहला बड़ा अप्रत्याशित परिणाम था। 


           दरअसल स्पेन के स्ट्राइकर्स और केप वर्डे के गोल के बीच एक खिलाड़ी था। उसका नाम था जोसिमर जोस एवोरा  डायस और जिसे हम वोजिन्हा के नाम से बेहतर जानते हैं। वोजिन्हा ने स्पेन के हर आक्रमण को नाकाम कर दिया। उनके इस खेल पर प्रभाव को इस तथ्य से बेहतर समझा जा सकता है कि स्पेन के खिलाड़ियों ने 27 प्रयास गोल पर किए। उनमें से 10 शॉट टारगेट पर थे। और टारगेट वाले दस शॉट में से आठ बॉक्स के अंदर से लिए गए शॉट थे। वोजिन्हा हर बार गेंद और गोल के बीच दीवार बने खड़े रहे। वे इस मैच के हीरो थे।

          मैच समाप्ति के बाद वोजिन्हा मैदान पर लेट गए। उनकी आंखों से पानी बह रहा था। मानो वे अपने उन मोतियों सरीखे आँसुओं से मैदान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे हों। मैच के बाद वे कह रहे थे "मैंने अपना पूरा जीवन इसी के लिए, इसी पल के लिए, इसी सपने के लिए मेहनत की है"। वे अभी तक पुर्तगाल के क्लब चावेज़ के लिए तीसरी डिवीजन लीग में खेल रहे हैं। लेकिन इस वर्ल्ड कप के बाद उनके लिए दुनिया वो दुनिया नहीं होगी जो इस विश्व कप से पहले थी। अब उनकी एक दूसरी दुनिया होगी। इस मैच से पहले उनके इंस्टाग्राम पर केवल  पचास हजार फॉलोअर थे और अब छह मिलियन  यानी साठ लाख से भी ज्यादा।

दो

       जितनी शानदार दिन की शुरुआत हुई केप वर्डे और स्पेन के मैच से उतना  शानदार दिन का समापन हुआ ईरान और न्यूजीलैंड के मैच से । ये एक रोमांचक और संघर्षपूर्ण मैच था। और न्यूजीलैंड के हाल फिलहाल के फुटबॉल इतिहास के यादगार पल। उन्होंने अपनी से ऊंची रैंकिंग ईरान को 2-2 की बराबरी पर रोक दिया। 

           न्यूजीलैंड ने एलिना जस्ट के गोलों से दो बार बढ़त ली और ईरान ने दोनों बार बराबरी की। 

          ईरान ये मैच अमेरिका ईरान युद्ध के समापन की घोषणा के कुछ ही समय बाद खेल रहा था। उड़ान की टीम को अमेरिका ने अपने देश में रुकने की अनुमति नहीं दी है। उन्होंने मेक्सिको में अपना बेस कैंप बनाया हुआ है। जबकि उन्हें अपने तीनों लीग मैच अमेरिका में खेलने है। वे करीब 30 घंटे पहले ही लॉस एंजिलिस में पहुंचे थे। एक शत्रु देश में और होस्टाइल वातावरण में मैच खेलने का क्या ही भयावह अनुभव रहा होगा। लेकिन मैच के बाद मन ऑफ द मैच खिलाड़ी रहे ईरान के रामिन रेज़ाँ ने एक सवाल का क्या ही शानदार जवाब दिया - 'ईरान में जो मुश्किलें हैं, वो हमारी मुश्किलें हैं, उससे आपका लेना-देना नहीं है।'

तीन

       दिन के बाकी दो मैच भी अनिर्णीत रहे। बेल्जियम और मिस्र का मैच 1-1 की बराबरी पर छूटा। जबकि सऊदी अरब और उरुग्वे का मैच भी 1-1 पर ड्रॉ रहा। फीफा विश्व कप ऐसा 58 साल बाद हो रहा था कि एक दिन में खेले गए सभी चारों मैच अनिर्णीत रहे हों। इससे पहले सन 1958 में स्वीडन में हुए विश्व कप में हुआ था। तब 15 जून को खेले गए चार मैच अनिर्णीत रहे थे। उस समय भी एक मैच जो स्वीडन और वेल्स के बीच खेला गया था वो 0-0 की बराबरी पर रहा था। इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट जर्मनी बनाम नॉर्दर्न आयरलैंड 2-2 की बराबरी पर तथा पराग्वे बनाम यूगोस्लाविया मैच 3-3 की बराबरी पर छूटा था।

चार 

       और अंत में बात एशियाई टीमों टीमों की। इस विश्व कप में एशियाई टीमों ने बेहद शानदार और ऐतिहासिक शुरुआत की है और अभी तक कोई भी टीम कोई मैच नहीं हारी है। इस बार एशियाई फुटबॉल महासंघ (AFC) से रिकॉर्ड नौ टीमें भाग ले रही हैं।अब तक के मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार खेल दिखाते हुए तुर्की को 2-0 से हराया। जापान ने नीदरलैंड्स जैसी मजबूत यूरोपीय टीम के खिलाफ कड़ा मुकाबला करते हुए 2-2 से ड्रॉ खेला। कतर ने स्विट्जरलैंड के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेलकर अपना पहला विश्व कप अंक हासिल किया। सऊदी अरब ने उरुग्वे जैसी दिग्गज टीम को 1-1 से बराबरी पर रोक दिया। ईरान ने भी न्यूजीलैंड के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मैच 2-2 से ड्रॉ कराया।

एक बड़ा सवाल सभी फुटबॉल प्रेमियों के मस्तिष्क में जरूर आता होगा कि फीफा ट्रॉफी यूरोप और दक्षिण अमेरिका से बाहर कब और कहां जाएगी।



फीफा विश्व कप 2026 डायरी_10

  फीफा विश्व कप 2026 का ग्यारहवां दिन। कल भी संघर्षपूर्ण मुकाबले। शानदार जीत भी और चकित कर देने वाले परिणाम भी। इन मुकाबलों के चलते कुछ आगे ...