खेल की खूबसूरती ही ये है, कोई एक दिन जो खिलाड़ी का नहीं होता वो रसातल में होता है, और कोई एक दिन जो उसका हो तो वो आसमाँ पर होता है। कोई एक दिन का खेल, कोई एक मैच आपको चाँद पर बैठा देता है। 90 मिनट का समय केवल एक मैच का समय भर नहीं होता। ये एक खिलाड़ी की पूरी जिंदगी की मेहनत होती है। उसका पूरा जीवन होता है। उसके द्वारा देखे गए सपने होते हैं और उन सपनों को साकार करने का समय होता है।
एक
इस बात को केप वर्डे के 40 साल के गोलकीपर जोसिमर जोस एवोरा डायस से बेहतर और कौन समझ सकता है। इस समय वे खुद को धरती पर कहां पा रहे होंगे। वे तो खुद को चांद की सतह पर चलता हुआ महसूस कर रहे होंगे।
केप वर्डे अटलांटिक महासागर में अफ्रीका के पश्चिमी तट से लगभग 600 किलोमीटर दूर 10 ज्वालामुखीय द्वीपों का एक खूबसूरत देश है। उस ने पहली बार विश्व कप फाइनल्स के लिए क्वालीफाई किया है। वे कल विश्व कप का अपना पहला मैच खेल रहे थे। विश्व नंबर दो और इस बार के विश्व चैंपियन बनने की सबसे अधिक संभावना वाली और सबसे शक्तिशाली टीमों में से एक स्पेन से खिलाफ। एक दिन पहले कुछ कमजोर टीमों का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा था। काराकाओ जर्मनी से 1-7 से हारी थी और स्वीडन की टीम ने ट्यूनीशिया को 5-1 से हराया था। स्पेन के लिए ये मैच केक वॉक समझा जा रहा था जिसे स्पेन को बड़े अंतर से जीत जाना था। लेकिन केप वर्डे ने शानदार खेल दिखाया। उनका रक्षण अभेद्य था जिसे स्पेन के अग्रिम पंक्ति के खिलाड़ी भेदने असफल रहे।
केप वर्डे की विश्व रैंकिंग 67वीं है। इसलिए विश्व नंबर दो टीम के कोच लुइस डे ला फुएंते अपने स्टार खिलाड़ी लमिन यामल और निकी विलियम्स को फर्स्ट इलेवन में शामिल नहीं किया। लेकिन केप वर्डे की टीम ने दूसरे हाफ में उन दोनों को उतारने के लिए मजबूर कर दिया। वे मैदान में उतरे। पर नतीजा वही रहा। वे भी केप वर्डे के रक्षण को भेद नहीं पाए। मैच अंततः गोल रहित अनिर्णीत समाप्त हो गया। ये इस विश्व कप का पहला बड़ा अप्रत्याशित परिणाम था।
दरअसल स्पेन के स्ट्राइकर्स और केप वर्डे के गोल के बीच एक खिलाड़ी था। उसका नाम था जोसिमर जोस एवोरा डायस और जिसे हम वोजिन्हा के नाम से बेहतर जानते हैं। वोजिन्हा ने स्पेन के हर आक्रमण को नाकाम कर दिया। उनके इस खेल पर प्रभाव को इस तथ्य से बेहतर समझा जा सकता है कि स्पेन के खिलाड़ियों ने 27 प्रयास गोल पर किए। उनमें से 10 शॉट टारगेट पर थे। और टारगेट वाले दस शॉट में से आठ बॉक्स के अंदर से लिए गए शॉट थे। वोजिन्हा हर बार गेंद और गोल के बीच दीवार बने खड़े रहे। वे इस मैच के हीरो थे।
मैच समाप्ति के बाद वोजिन्हा मैदान पर लेट गए। उनकी आंखों से पानी बह रहा था। मानो वे अपने उन मोतियों सरीखे आँसुओं से मैदान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे हों। मैच के बाद वे कह रहे थे "मैंने अपना पूरा जीवन इसी के लिए, इसी पल के लिए, इसी सपने के लिए मेहनत की है"। वे अभी तक पुर्तगाल के क्लब चावेज़ के लिए तीसरी डिवीजन लीग में खेल रहे हैं। लेकिन इस वर्ल्ड कप के बाद उनके लिए दुनिया वो दुनिया नहीं होगी जो इस विश्व कप से पहले थी। अब उनकी एक दूसरी दुनिया होगी। इस मैच से पहले उनके इंस्टाग्राम पर केवल पचास हजार फॉलोअर थे और अब छह मिलियन यानी साठ लाख से भी ज्यादा।
दो
जितनी शानदार दिन की शुरुआत हुई केप वर्डे और स्पेन के मैच से उतना शानदार दिन का समापन हुआ ईरान और न्यूजीलैंड के मैच से । ये एक रोमांचक और संघर्षपूर्ण मैच था। और न्यूजीलैंड के हाल फिलहाल के फुटबॉल इतिहास के यादगार पल। उन्होंने अपनी से ऊंची रैंकिंग ईरान को 2-2 की बराबरी पर रोक दिया।
न्यूजीलैंड ने एलिना जस्ट के गोलों से दो बार बढ़त ली और ईरान ने दोनों बार बराबरी की।
ईरान ये मैच अमेरिका ईरान युद्ध के समापन की घोषणा के कुछ ही समय बाद खेल रहा था। उड़ान की टीम को अमेरिका ने अपने देश में रुकने की अनुमति नहीं दी है। उन्होंने मेक्सिको में अपना बेस कैंप बनाया हुआ है। जबकि उन्हें अपने तीनों लीग मैच अमेरिका में खेलने है। वे करीब 30 घंटे पहले ही लॉस एंजिलिस में पहुंचे थे। एक शत्रु देश में और होस्टाइल वातावरण में मैच खेलने का क्या ही भयावह अनुभव रहा होगा। लेकिन मैच के बाद मन ऑफ द मैच खिलाड़ी रहे ईरान के रामिन रेज़ाँ ने एक सवाल का क्या ही शानदार जवाब दिया - 'ईरान में जो मुश्किलें हैं, वो हमारी मुश्किलें हैं, उससे आपका लेना-देना नहीं है।'
तीन
दिन के बाकी दो मैच भी अनिर्णीत रहे। बेल्जियम और मिस्र का मैच 1-1 की बराबरी पर छूटा। जबकि सऊदी अरब और उरुग्वे का मैच भी 1-1 पर ड्रॉ रहा। फीफा विश्व कप ऐसा 58 साल बाद हो रहा था कि एक दिन में खेले गए सभी चारों मैच अनिर्णीत रहे हों। इससे पहले सन 1958 में स्वीडन में हुए विश्व कप में हुआ था। तब 15 जून को खेले गए चार मैच अनिर्णीत रहे थे। उस समय भी एक मैच जो स्वीडन और वेल्स के बीच खेला गया था वो 0-0 की बराबरी पर रहा था। इंग्लैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट जर्मनी बनाम नॉर्दर्न आयरलैंड 2-2 की बराबरी पर तथा पराग्वे बनाम यूगोस्लाविया मैच 3-3 की बराबरी पर छूटा था।
चार
और अंत में बात एशियाई टीमों टीमों की। इस विश्व कप में एशियाई टीमों ने बेहद शानदार और ऐतिहासिक शुरुआत की है और अभी तक कोई भी टीम कोई मैच नहीं हारी है। इस बार एशियाई फुटबॉल महासंघ (AFC) से रिकॉर्ड नौ टीमें भाग ले रही हैं।अब तक के मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार खेल दिखाते हुए तुर्की को 2-0 से हराया। जापान ने नीदरलैंड्स जैसी मजबूत यूरोपीय टीम के खिलाफ कड़ा मुकाबला करते हुए 2-2 से ड्रॉ खेला। कतर ने स्विट्जरलैंड के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेलकर अपना पहला विश्व कप अंक हासिल किया। सऊदी अरब ने उरुग्वे जैसी दिग्गज टीम को 1-1 से बराबरी पर रोक दिया। ईरान ने भी न्यूजीलैंड के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मैच 2-2 से ड्रॉ कराया।
एक बड़ा सवाल सभी फुटबॉल प्रेमियों के मस्तिष्क में जरूर आता होगा कि फीफा ट्रॉफी यूरोप और दक्षिण अमेरिका से बाहर कब और कहां जाएगी।









