⚽ विश्व कप का बारहवां दिन।
यहां टीमों के बीच स्पर्धा है। यहां खिलाड़ियों के बीच स्पर्धा है। जीत है। हार है। रिकार्डों का बनना है। रिकार्डों का टूटना है। एक ऐसा दिन जिसमें जितना कड़ा संघर्ष टीमों के बीच था,उससे ज्यादा संघर्ष खिलाड़ियों के स्टेटस,उनके रिकॉर्डों के बनने बिगड़ने ,उनकी प्रतिष्ठा के ऊपर नीचे होने का था। एक बार फिर अर्जेंटीना,फ्रांस और नॉर्वे की टीम ही मैदान में नहीं थीं,बल्कि तीन सुपर स्टार मेस्सी,म्बापे और हालैंड भी मैदान में थे। सुपर टीमें थी। उनका जादू था। सुपर स्टार थे । उनका जादू था। और पूरी दुनिया में उनके समर्थक थे जो उस जादू को अपनी आंखों से देख रहे थे।
अर्जेंटीना ने ऑस्ट्रिया को 2-0 हराया। फ्रांस ने इराक़ को 3-0 से हराया। नॉर्वे ने सेनेगल को 3-2 से हराया। दिन के आखिरी मैच में अल्जीरिया ने जॉर्डन को 2-1 से हराया। अर्जेंटीना,फ्रांस और नॉर्वे की टीम नॉक आउट दौर के लिए आगे बढ़ी। नॉक आउट दौर की 6 टीम पक्की हुई।
लेकिन यहां लोगों की रुचि टीमों में कहीं अधिक अपने चहेते स्टार खिलाड़ियों के परफॉर्मेंस पर थी। टीमों के मैचों के परिणाम लोगों के अनुमान में लगभग सुनिश्चित ही थे। बशर्ते कोई बड़ा उलटफेर ना हो जाता। जिज्ञासा स्टार खिलाड़ियों के प्रदर्शन की थी। और उन्हें इस बार भी निराश नहीं होना पड़ा। यहां पिछले दौर की तरह तीनों स्टार खिलाड़ियों का जलवा कायम रहा। उन्होंने ठीक वहा से शुरू किया जहां से उन्होंने पिछले दौर को खत्म किया था।
सबसे बड़ा सवाल ये था क्या मेस्सी की गोल कर पाएंगे ।क्या वे क्लोसे से आगे निकल पाएंगे। क्या वे विश्व कप का 17 वाँ गोल कर पाएंगे। इसका जवाब मार्च के नवें मिनट में ही मिला। लोगों के दिलों की धड़कने बढ़ी। जब मेस्सी का 17 वाँ गोल निश्चित मान बैठे तो मेस्सी ने पेनाल्टी बाहर मार दी। आखिर मेस्सी भी है तो मानव ही ना। फिर उसने ये पेनाल्टी पहली बार मिस थोड़े ही ना की थी। इससे पहले भी दो बार विश्व कप में कर चुके थे। विश्व कप में वे सात में से अब तीन पेनाल्टी जाया कर चुके हैं।
लेकिन वो जादूगर ही क्या जो अपना जादू ना दिखाए।
मेस्सी ने मैच के 38वें मिनट में एक शानदार पास-एंड-गो मूव के जरिए गोल किया। यह गोल शानदार टीम वर्क और रणनीति का बेहतरीन उदाहरण था। फाकुंडो मेडिना ने बॉक्स के अंदर गेंद थियागो अल्माडा को दी लेकिन उसने वो गेंद छोड़ दी मेस्सी के लिए और मेस्सी ने गेंद गोल में पहुंचा दी। वे क्लोसे को पीछे छोड़ रहे थे और विश्व कप के लगातार छह मैचों में स्कोर करने के रिकॉर्ड की बराबरी कर रहे थे। मैच समाप्त होने से पूर्व इंजरी टिमी में एक गोल और किया। वे 18 गोल पर पहुंचे।
उसके बाद दो अलग अलग मैचों में म्बापे और हालैंड ने भी अपना जादू बरकरार रखा। दोनों ने ही अपनी टीम के लिए दो दो गोल किए। म्बापे अब 16 पर पहुंच चुके हैं। ये एक नई प्रतिद्वंदिता है। इस बार रोनाल्डो की जगह म्बापे हैं। लेकिन मेस्सी वहीं हैं।
म्बापे और हालैंड दोनों ही गोल मशीन हैं। वे क्रिस्टियानो रोनाल्डो की परम्परा के खिलाड़ी है। वे पावर और गति में जीते हैं। ये उनका अर्जन है। ये तकनीक और विज्ञान का उत्पाद है। वे अपने खेल से आपको रोमांच से भर देते है,भय उत्पन्न होने की सीमा तक। वे अपने शॉट्स में ताकत का बेमिसाल उपयोग करते हैं। उनके खेल से आप रोमांचित हो सकते हो,आनंदित नहीं हो सकते। उससे रस नहीं बरसता।
तो फिर वो आनंद कहां मिलता है। वो मेस्सी के पैरों से टपकता है। मेस्सी के खेल से बहता है। वे रोमांचित नहीं करते,उत्तेजना नहीं पैदा करते। मेस्सी ने खेल को अर्जित नहीं किया है। वो उनमें कुदरती तौर पर है। प्रतिभा जो जन्म से साथ होती है। स्वाभाविक। उनके खेल में कोमलता है। सहजता है। स्थायित्व है। वे बॉल को ऐसे बरतते हैं कि वो उनकी दोस्त है।
मेस्सी और दूसरी और म्बापे,हॉलैंड या फिर रोनाल्डो के खेल का अंतर कला और विज्ञान का अंतर है। सहजता और गति का अंतर है। कोमलता और पावर का अंतर है। ये स्वाभाविकता और कृत्रिमता का अंतर है। ये लोक और शास्त्रीयता का अंतर है। खेल के जादूगर सभी है पर उनके जादू की प्रॉपर्टीज़ अलग है।मैथड अलग हैं।
तो अभी बहुत समय है। एक और महीना बाकी है। बस इनके जादू के बरसते रंगों से मन को रंगते रहिए।










