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Saturday, 5 October 2024

लघु पत्रिका अक्षत




ज के समय में अगर कोई व्यक्ति लघु पत्रिका निकालने की हिम्मत रखता है तो निसंदेह इसे उस व्यक्ति की वैचारिक प्रतिबद्धता और उसकी जिद ही समझा जाना चाहिए। कौशल पांडे सर प्रसार भारती से निदेशक राजभाषा पद से सेवानिवृत हैं और जाने माने बाल साहित्यकार हैं। उनकी अनेक बाल कविताएं,कहानियां और निबंध विभिन्न बोर्डों के पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं। 

 न्होंने बरसों पहले एक लघु पत्रिका के प्रकाशन का सपना देखा था। उसे साकार भी किया। उन्होंने एक पत्रिका निकाली 'अक्षत'। लेकिन तीन अंकों के बाद अपरिहार्य कारणों से उसका प्रकाशन स्थगित करना पड़ा। उनका सपना स्थगित भले ही हो गया हो, लेकिन वो कभी भी मरा नहीं था। जैसे ही उस सपने को परिस्थितियों की उर्वर जमीन हासिल हुई, वो सपना सजीव हो हकीकत में तब्दील हो गया। लगभग चालीस साल बाद अक्षत पत्रिका का चौथा अंक प्रकाशित हुआ। 

ये एक बेहतरीन अंक बन पड़ा है। इसका मुखपृष्ठ ही बहुत आकर्षक है। अंक पत्रकारिता और संचार माध्यमों पर केंद्रित है। ये गागर में सागर जैसा है। 56 पृष्ठों में बहुत ही पठनीय सामग्री है। इसके लिए पांडे सर साधुवाद के पात्र हैं कि अपने स्वयं के संसाधनों से पत्रिका निकालने का संकल्प लिया और उसे पूर्ण किया। 

समें कृष्ण बिहारी,डा. भगवान प्रसाद उपाध्याय, कैलाश बाजपेयी,अनूप शुक्ल,डा. सुनील देवधर,डा. रमेशचन्द्र शुक्ल,अरुण प्रिय,डा. राकेश शुक्ल, हीरालाल नागर,डा. रंजना दीक्षित, अर्पणा पाण्डेय,चक्रधर शुक्ल,डा. हेमन्त कुमार, भोलानाथ,डा. राजेश कुमार पाठक,सुनील राही, मनमोहन सरल के महत्वपूर्ण आलेख है। साथ ही जयराम जय,निवेदिता झा और जयराम सिंह गौर की कविताएं भी शामिल हैं। इस अंक का मूल्य 50 रुपए है।

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