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Tuesday, 15 July 2025

इगा और अमांडा

 


यूं तो खेल की समाप्ति के बाद जीत की खुशी और हार के गम को मैदान का आधा आधा हिस्सा शेयर कर लेना चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है। जीत के रंग इस कदर प्रबल और चमकीले होते हैं कि हार के रंग स्वतः निस्तेज और क्षीण हो जाते हैं कि उनकी उपस्थिति या तो महसूस नहीं होती या फिर उसका हल्का सा आभास भर होता है। लेकिन कोई एक ऐसा 'खेल' होता है जब हार का दुख इतना कातर और असहाय हो जाता है कि आप उसे जीत की खुशी जितना ही लक्षित करते हैं। यहां जीत और हार की अनुभूतियां समान रूप से मैदान शेयर कर रही होती हैं।

बीते शनिवार की शाम साल 2025 के विंबलडन महिला एकल का फाइनल एक ऐसा ही दृश्य बना रहा था जिसमें जीत की खुशी से अधिक हार का दुःख लक्षित किया जा रहा था। 

ये फाइनल पोलैंड की इगा स्वियातेक और अमेरिका की अमांडा एनीसिमोवा के बीच खेला गया। इगा अपने पहले विंबलडन और कुल मिलाकर छठे ग्रैंड स्लैम खिताब और अमांडा अपने पहले ग्रैंड स्लैम खिताब के लिए सेंटर कोर्ट पर आमने सामने थीं। एक बड़े और कड़े मुकाबले की उम्मीद धरे लोग मैदान में ही नहीं थे बल्कि अपने टीवी स्क्रीन पर भी आंखे गड़ाए थे। 

इस मुकाबले के कड़े होने की उम्मीद रखने के कुछ वाजिब कारण भी थे। दोनों ने शानदार तरीके फाइनल तक का सफ़र तय किया था। इगा बहुत ही आसानी से सेमीफाइनल में बेनसिच को  6-0,6-2 से हराकर फाइनल में आई थीं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में केवल एक सेट गंवाया था,दूसरे दौर में अमेरिका की मैकनेली के खिलाफ। हालांकि वे क्ले कोर्ट की विशेषज्ञ खिलाड़ी मानी जाती हैं और उनके पांच में से चार ग्रैंड स्लैम खिताब  फ्रेंच ओपन ही हैं। वे शक्तिशाली और तेज शॉट्स के लिए भले ही ना जानी जाती हों, लेकिन टॉप स्पिन की माहिर खिलाड़ी हैं और उनके खेल की ताकत भी।

दूसरी और अमांडा अपने पावरफुल हिटिंग के लिए ही जानी जाती हैं। विशेष तौर पर डबल बैकहैंड स्ट्रोक्स के लिए। सेमीफाइनल में उन्होंने विश्व नम्बर एक एरीना सबालेंका को  6-4,4-6,6-4 से हराया था। सबालेंका अभी फ्रेंच ओपन जीतकर यहां आई थीं और पावर हिटिंग के लिए जानी जाती हैं। उनके ग्राउंड स्ट्रोक्स इतने शक्तिशाली होते हैं कि वे पुरुष खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करती दिखाई देती हैं। सबालेंका पर इस जीत ने अमांडा से उम्मीदें बढ़ा दी थीं और फाइनल की संभावित विजेता समझी जाने लगी थीं।

अब एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक फाइनल की उम्मीद हो चली थी। लेकिन हुआ एंटी क्लाइमेक्स।  इगा अमांडा को केवल 57 मिनट में  6-0,6-0 से हराकर 114 साल पहले के एक इतिहास को दोहरा रही थीं जब इसी मैदान पर 1911 में डोरोथी लैंबर्ट चैंबर ने डोरा बूथबी को इसी स्कोरलाइन  से हराया था। ऐसा ही कुछ ओपन ईरा में 1988 में फ्रेंच ओपन में हुआ जब स्टेफी ग्राफ ने नताशा ज़्वेरेवा को एक भी गेम नहीं जीतने दिया था। 

दरअसल अमांडा का ये पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल था। वे उसके दबाव को हैंडल नहीं कर पा रही थीं और इगा की शानदार टॉप स्पिन को भी। कोढ़ में खाज ये कि वे अपनी पहली सर्विस भी नहीं सम्भाल पा रहीं थीं और अपने पावरफुल स्ट्रोक्स भी। जैसे जैसे खेल आगे बढ़ रहा था,वे एक गेम जीत लेने के भर के लिए व्याकुल होने लगी। जितनी ज्यादा उतनी व्याकुलता बढ़ती जाती,उतनी ही ज्यादा वे बेज़ा गलतियां करती जाती और हार की तरफ बढ़ती जाती,उतनी ही ज्यादा बेबस और असहाय नजर आती। ट्रॉफी प्रेजेंटेशन के दौरान उनकी आंख से बहता पानी ही नहीं,बल्कि खेल के दौरान उनकी भीगी आँखें सारी कहानी बयां करने के लिए काफी हैं।

विंबलडन के इस मैदान पर केवल दो रंगों का विशेषाधिकार है। उस शनिवार भी। सफेद और हरे रंग का। बाकी किसी रंग का इसमें प्रवेश निषेध है। मानो ये दो रंग मैच दर मैच जीतने और हारने वाले खिलाड़ियों के प्रतिनिधि रंग हों। हरा रंग जीत की खुशी से समृद्ध होते खिलाड़ी का और सफेद हारे खिलाड़ी की उदासी का। हार जीत के खेल में बाकी रंग की गुंजाइश ही कहां बचती है। 

विंबलडन के इस मैदान पर पराजय की पीड़ा से उपजी उदासी चाहे जितनी गहरी रहती आई हो,उसमें संघर्ष की एक सम्मानजनक चमक हमेशा रहती आई है। लेकिन इस फाइनल में संघर्ष के अभाव में हार के दुख से उपजी उदासी इतनी गहरी थी कि सफेद रंग इस कदर मटमैला हुआ जाता था जितना इससे पहले कभी ना हुआ था।

समय बलवान होता है। नहीं तो क्या कारण है कि केवल 48 घंटों में एक खिलाड़ी अर्श से फर्श पर आ खड़ा होता है। गुरुवार की रात को जो खिलाड़ी नंबर को हराकर उत्कर्ष के चरम पर थी वो  दो दिन बाद पतन के अपकर्ष पर पहुंच जाती है। वहीं एक दूसरी खिलाड़ी महीने भर पहले संभावित विजेता होते हुए भी उस प्रतियोगिता से चौथे चक्र में ही बाहर हो जाती हैं जिसे उसने चार- चार बार जीता था। लेकिन ठीक एक महीने बाद ही वो एक ऐसे टूर्नामेंट को जीतकर शीर्ष पर पहुंच जाती है जिसे उसके लिए फेवरेट समझा ही नहीं जाता।

लेकिन समय ऐसा ही होता है। मनमौजी। पल में माशा,पल में तोला।

फिलहाल तो इगा को पहला विंबलडन और छठा ग्रैंड स्लैम खिताब मुबारक।

Wednesday, 12 June 2024

इगा स्वियातेक




 ये 2024 का फ्रेंच ओपन का महिला सिंगल का फ़ाइनल मैच था और फ़िलिप कार्टियर अरीना में फैले रंग ही मानो मैच की कहानी बयां कर रहे हों. इगा स्वियातेक गहरे लाल और नीले रंग की ड्रेस में थीं जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी जैस्मिन पाओलिनी हल्के लेमन येलो स्कर्ट और लेमन व्हाइट शर्ट में खेल रही थीं.

आज स्वियातेक के खेल में सागर-सी गहराई थी और उनके शॉट्स आग उगल रह थे. इसके विपरीत पाओलिनी का खेल फीका और नीरस. अपने शानदार आक्रामक खेल से स्वियातेक ने इस प्रतियोगिता की जॉइंट किलर पाओलिनी को निस्तेज कर दिया और आसानी से 6-2, 6-1 से हराकर लगातार तीसरा फ्रेंच ओपन जीत लिया.

आज पहले पाओलिनी मैदान में आईं और उनके पीछे स्वियातेक. वे दोनों ही मुस्कुराते हुए मैदान में दाख़िल हो रही थीं. ये उनके बीच की पहली समानता थी. उनके बीच एक समानता और थी. वे दोनों ही पोलिश भाषा बोलती हैं. इसके अलावा उन दोनों के बीच कुछ भी समान नहीं था.

स्वियातेक कोई भी ग्रैंड स्लैम नहीं हारी थीं और पाओलिनी कोई फ़ाइनल खेली ही नहीं थीं. स्वियातेक चार ग्रैंड स्लैम जीत चुकी थीं और पाओलिनी इस साल से पहले केवल चार ग्रैंड स्लैम मैच ही जीती पाई थीं. कद काठी में भी ख़ासा अंतर था. पाओलिनी पांच फीट चार इंच की दरम्याने कद की हैं तो स्वियातेक पांच फीट नौ इंच लंबी. पाओलिनी 28 साल की हैं तो स्वियातेक अभी कुल 23 साल की. पाओलिनी ‘लेट ब्लूमर’ हैं जिन्होंने काफी देर से शोहरत पाई जबकि स्वियातेक 19 साल की उम्र में अपना पहला ग्रैंड स्लैम जीत चुकी थीं.

मैच की शुरुआत पाओलिनी ने बेहतरीन की. उन्होंने क्वार्टर फ़ाइनल में चौथी सीड रिबाकिना को हराया था और सेमीफ़ाइनल में युवा अन्द्रीवा को. वे उत्साह से लबरेज़ थीं. उन्होंने अपना पहला सर्विस गेम जीतकर स्कोर 1-1 बराबर किया और फिर अगले ही गेम में स्वियातेक की सर्विस ब्रेक की और 2-1 की बढ़त ले ली. लगा पाओलिनी अपनी उस लय में हैं जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया था. लेकिन इस ब्रेक ने मानो सोई शेरनी को जगा दिया हो. स्वियातेक ने अगला गेम शून्य से जीतकर स्कोर 2-2 बराबर किया और उसके बाद उन्होंने पाओलिनी को कोई मौका नहीं दिया. दो और सर्विस ब्रेक कीं और पहला सेट 6-2 से जीत लिया. वे इतने पर ही नहीं रुकीं. अगले सेट में लगातार दो सर्विस ब्रेक कर स्कोर 5-0 किया. तब कहीं पाओलिनी एक गेम जीत सकीं. दूसरा सेट स्वियातेक ने 6-1 से जीतकर लगातार तीसरा और कुल चौथा फ्रेंच ओपन ख़िताब जीत लिया.

इगा को केवल गति से ही हराया जा सकता था. पाओलिनी के पास शानदार तीव्र गति और टॉपस्पिन वाले फोरहैंड शॉट्स थे. जिसकी वजह से वे फ़ाइनल तक पहुंची थीं. लेकिन आज वे उस तरह के शॉट्स नहीं खेल सकीं. इसके विपरीत स्वियातेक के पास शानदार टॉपस्पिन शॉट्स हैं वे चाहे फोरहैंड हों और चाहे बैकहैंड. पाओलिनी से कहीं बेहतर. ठीक वैसे ही जैसे नडाल के पास हैं. ये बेहतरीन टॉपस्पिन राफ़ा को भी क्ले कोर्ट पर अजेय बनाती है और स्वियातेक को भी.

स्वियातेक की चैंपियनशिप पॉइंट के लिए सर्विस को जैसे ही पाओलिनी ने बाहर मारा स्वियातेक घुटनों के बल बैठ गईं. उनके नीचे लाल रंग की मिट्टी आग से प्रतीत होती थी जो उनकी गति और चपलता से कुछ अधिक गहरी लाल हो चली थी. मानो क्वीन ऑफ़ क्ले के तेज से दहक रही हो. प्रेजेंटेशन वक्तव्य में उनकी प्रतिद्वंद्वी पाओलिनी स्वियातेक के लिए कह रहीं थीं ‘यहां तुम इस खेल की कठिनतम चुनौती हो’. निःसंदेह सेरेना के बाद की वे सबसे बड़ी खिलाड़ी हैं.

Tuesday, 13 September 2022

नई टेनिस क्वीन:इगा स्वियातेक




न्यूयॉर्क के फ्लशिंग मीडोज के आर्थर ऐश एरीना में यूएस ओपन के दौरान खेल के नेपथ्य में एफ्रो अमेरिकनों के दुःख दर्द के वाहक जैज़ संगीत को बहते हुए महसूस किया जा सकता है। समय-समय पर एफ्रो अमेरिकन खिलाड़ी अपने खेल से इस संगीत की कोई तान छेड़ उसके स्वर को ऊंचा कर देते हैं और संगीत की ये ऊंची तान है कि अपने आकर्षण के मोहपाश में बांध बांध लेती है।
इस साल पुरुष वर्ग में फ्रांसिस टिआफो इस संगीत की तान मद्धम सुर में सेमीफाइनल तक छेड़ते रहे। लेकिन महिला वर्ग में सेरेना विलियम्स की तीसरे दौर में हार से ये संगीत उसके आंसुओं में घुलकर विलीन हो गया और उसकी जगह पॉप संगीत ने ले ली। और इसको छेड़ने वाली थी पोलैंड की 21 वर्षीया इगा स्वियातेक।
वे ब्रिटिश पॉप स्टार सील की दीवानी हैं। सील का एक बहुत प्रसिद्ध गीत है क्रेजी। इस गीत की पंक्ति है 'हम कभी सर्वाइव नहीं कर सकते जब तक कि हम थोड़े क्रेजी ना हो जाएं....लोगों से भरे इस संसार में थोड़े से लोग होते हैं जो उड़ना चाहते हैं क्या ये क्रेजी नहीं है।' और खिलाड़ियों की इस भीड़ में इगा उन थोड़े से खिलाड़ियों में हैं जो सफलता के आसमान में उड़ना चाहती हैं। वे थोड़ी नहीं बहुत क्रेजी होती हैं और हर चुनौती से पार पा सर्वाइव करती हैं और विजेता बनती हैं।
इस बार का महिला वर्ग का फाइनल पोलैंड की इगा स्वियातेक और अल्जीरिया की ओंस जेबुर के बीच खेला गया। दोनों पहली बार यूएस ओपन के फाइनल में खेल रहीं थीं और जो भी जीतता एक इतिहास लिखता। जीत इगा के हिस्से आई। उन्होंने ओंस को सीधे सेटों में 6-2,7-6(7-5) हराकर अपना तीसरा और साल का दूसरा ग्रैंड स्लैम जीता। वे ये खिताब जीतने वाली पहली पोलिश महिला खिलाड़ी हैं। जेबुर हारकर ये खिताब जीतने वाली पहली अफ्रीकन महिला खिलाड़ी बनने से चूक गईं।
नंबर वन रैंकिंग के साथ इगा इस खिताब को जीतने के लिए सबसे फेवरिट खिलाड़ी मानी जा रही थीं और उन्होंने कर दिखाया। यहां आने से पहले वे फ्रेंच खिताब जीत चुकी थीं। और शानदार खेल रही थीं। विम्बलडन में तीसरे दौर में अलिज़े कोर्नेट से हारने से पहले लगातार 37 मैच जीतकर सेरेना विलियम्स के रिकॉर्ड को ब्रेक कर चुकी थीं। इतना ही नहीं इस साल यहां आने से पूर्व 6 खिताब अपने नाम कर चुकी थीं जिसमें चार डब्ल्यूटीए 1000 खिताब शामिल थे।
दूसरी और 28 वर्षीया विश्व नंबर 05 ओंस जेबूर की चुनौती भी कम नहीं थी। वे विम्बलडन के फाइनल में पहुंचने वाली पहली अरब महिला बनने का गौरव हासिल कर चुकी थीं। वे फाइनल में एक संघर्षपूर्ण मैच में कजाकिस्तान की एलिना रीबाकिना से 6-3,2-6,2-6 से हार गईं थीं। लेकिन यहां वे इगा के विरुद्ध वे 2-2 मैचों की बराबरी पर थीं। और अपने पावर प्ले से किसी भी खिलाड़ी को हराने का माद्दा रखती हैं।
लेकिन इगा ने ओंस के विरुद्ध मई में रोम ओपन में खेले गए अंतिम मैच में ओंस को आसानी से 6-2,6-2 से हराया था। जब आज का फाइनल शुरू हुआ तो इगा ने अपनी सधी सर्विस और डीप स्ट्रोक्स के जरिए ओंस की सर्विस ब्रेक की और 3-0 की बढ़त ले ली। लेकिन ओंस ने वापसी की और दमदार ग्राउंड स्ट्रोक्स के बूते इगा की सर्विस ब्रेक की और स्कोर 3-2 कर लिया। पर इगा ने आगे कोई मौका नहीं दिया और पहला सेट 6-2 से जीत लिया। और दूसरे सेट में 3-0 की बढ़त बना ली तो लगा कि रोम को दोहराया जा रहा है। लेकिन ओंस ने हार नहीं मानी। उन्होंने दो सर्विस ब्रेक कर स्कोर 4-4 और फिर 6-6 कर सेट को टाइब्रेकर में ले गईं। अन्ततः टाईब्रेक 5-7 से हारकर सेट और खिताब हार गईं।
जीत की बाद इगा कह रही थीं 'आज मुझे पता चला मेरे लिए आसमां ही सीमा है' तो निसंदेह उनके मन में अपने प्रिय गायक सील के गाने 'क्रेजी'की पंक्ति 'लोगों से भरे इस संसार में थोड़े से लोग होते हैं जो उड़ना चाहते हैं'घूम रही होगी।
दरअसल सेरेना विलियम्स के पराभव के बाद एक महिला टेनिस में एक ऐसी रिक्ति सी आ गयी थी जिसमें एक शक्तिशाली खिलाड़ी के अभाव में सभी खिलाड़ियों के लिए मैदान खुला था और हर ग्रैंड स्लैम में एक नई खिलाड़ी विजेता बन रही थी। इसको इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि इस समय खेल रही खिलाड़ियों में सेरेना(23), नाओमी ओसाका(04)और एंजेलिक करबर(03) के बाद इगा चौथी ऐसी खिलाड़ी हैं जिन्होंने 03 या उससे अधिक ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं।
दरअसल वे सेरेना द्वारा खाली स्थान को भर रही हैं और उनकी सही उत्तराधिकारिणी हैं। वे पॉवर खेल में ही नहीं मानसिक दृढ़ता में भी सेरेना की तरह मजबूत हैं। ये उन्होंने आज फाइनल में दिखाया भी। आज दर्शकों के जबरदस्त शोर और ओंस को समर्थन के बावजूद शानदार खेल दिखाया। खेल के बाद सुप्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी क्रिस एवर्ट कह रही थीं 'आज इगा ने इस प्रतियोगिता का सबसे शानदार मैच खेला। वे नंबर वन खिलाड़ी की तरह ही खेल रही थीं।'
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निःसंदेह आज वे आज जीत की खुशी में थोड़ी थोड़ी क्रेजी हुई जा रही होंगी और सील को गुनगुना रही होंगी-
"...लोगों से भरे आकाश में कुछ ही लोग हैं जो उड़ना चाहते हैं, क्या ये क्रेजी नहीं है,
लोगों से भरे स्वर्ग में कुछ ही लोग हैं जो उड़ना चाहते हैं,क्या ये क्रेजी नहीं है,
लोगों से भरी दुनिया में कुछ ही लोग हैं जो उड़ना चाहते हैं,
क्या ये क्रेजी नहीं है,क्या ये क्रेजी नहीं है,क्या ये क्रेजी नहीं है,
लेकिन कभी सर्वाइव नहीं कर सकते जब तक कि हम थोड़े क्रेजी ना हो जाएं..."
इगा को ये जीत मुबारक।

Monday, 12 October 2020

नई चैंपियन:इगा स्वियातेक

 


इन दिनों पेरिस के रोलां गैरों में ये कमाल का विरोधाभास दर्ज हो रहा है। कल 11 अक्टूबर को पुरुष वर्ग में दो सबसे उम्रदराज़ खिलाड़ी तमाम युवा खिलाड़ियों के जोश और उत्साह को अपने अनुभव के सबक सिखाते हुए और उम्र को धता बताते हुए एक नया इतिहास रचने को तैयार हैं। कल के फाइनल में 34 साल के राफेल नडाल 33 साल के नोवाक जोकोविच के मुकाबिल होंगे। तो वहीं महिला वर्ग में बढ़ती उम्र के तमाम अनुभव को धूल धूसरित करते हुए  युवा जोश और टेलेंट सफलता की नई इबारत लिख रहा था। और दो युवा फाइनल में एक दूसरे के मुकाबिल थीं।

आज महिला वर्ग के फाइनल में गैर वरीयता प्राप्त पोलैंड की 19 वर्षीया इगा स्वियातेक और चौथी वरीयता प्राप्त व इस साल की ऑस्ट्रेलियाई ओपन विजेता अमेरिका की 21 वर्षीया सोफिया केनिन आमने सामने थीं। और इस मुकाबले में टीनएजर स्वियातेक,केनिन को 6-4, 6-1 से हराकर नई चैंपियन बन गईं।

ये भी कमाल का संयोग है कि स्वियातेक,केनिन को हराकर एक इतिहास की पुनरावृति कर रही थीं। लगभग चार साल पहले 2016 में स्वियातेक 15 वर्ष की हुई ही थीं और जूनियर फ्रेंच ओपन में पहली बार भाग ले रही थीं। तब तीसरे राउंड में केनिन उनके सामने थीं और उन्होंने केनिन को 6-4 और 7-5 से हराया था। तब से लेकर अब तक सीन नदी में बहुत पानी बह चुका है। स्वियातेक 2018 का जूनियर विम्बलडन का खिताब जीत चुकी थीं तो केनिन इसी साल के आरंभ में ना केवल ऑस्ट्रेलियाई ओपन जीतकर अपना ग्रैंड स्लैम की जीत का खाता खोल चुकी थीं बल्कि वे विश्व रैंकिंग में 6ठे स्थान पर थीं और यहां पर उन्हें चौथी वरीयता प्राप्त हुई थी। अगर कुछ नहीं बदला तो सिर्फ मैच का परिणाम नहीं बदला। एक बार फिर स्वियातेक जीतीं और ये जीत कुछ और आसान व एकतरफा हो गयी।

स्वियातेक की ये जीत उन्हें यूं ही नही मिल गयी। उन्होंने पहले ही मैच से अपने दमदार खेल से सभी हतप्रभ किया और बहुत आसान व एकतरफा जीत हासिल कीं। उन्होंने फाइनल से पहले के 6 मैचों में बिना कोई सेट खोए केवल 23 गेम हारे। उन्होंने किसी एक मैच में अधिकतम 5 गेम हारे। यहां तक की फाइनल में भी कुल 5 गेम ही हारे। वे चौथे राउंड में 2018 की विजेता और इस बार की संभावित विजेता सिमोन हालेप के विरुद्ध खेल रहीं थीं। उन्होंने अपने पावरफुल खेल से हालेप को 6-1 और 6-2 से हराया तो खेल जानकारों को उनमें इस प्रतियोगिता की संभावित विजेता नज़र आने लगी थी और उन्होंने इसे साबित भी किया।

केनिन ने जब सेमीफाइनल में क्वितोवा को 6-4 और 7-5 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया तो एक संघर्षपूर्ण फाइनल की उम्मीद की जा थी। लेकिन स्वियातेक ने अपने शानदार खेल और कुछ हद तक केनिन की थाई की चोट ने इसे एकतरफा बना दिया। स्वियातेक ने मैच के दूसरे ही गेम में केनिन कई पहली ही सर्विस ब्रेक कर 3-0 की बढ़त बना ली। लेकिन केनिन ने वापसी कर स्वियातेक की सर्विस ब्रेक की और स्कोर 4-4 की बराबरी पर ले आई। लेकिन उसके बाद एक सर्विस और गवां बैठी और सेट भी 6-4 से। ये एक संघर्षपूर्ण सेट था जो 53 मिनट तक चला। लेकिन दूसरा सेट एन्टी क्लाइमैक्स साबित हुआ। जब 2-1 से केनिन पीछे थी तो उन्हें थाई की चोट की वजह से मेडिकल टाइमआउट लेना पड़ा और जब मेडिकल सहायता लेकर वापस लौटी तो अपनी लय खो चुकी थीं। अब स्वियातेक की जीत महज एक औपचारिकता रह गयी थी। स्वियातेक ने दो सर्विस ब्रेक के साथ अगले चार गेम जीतकर सेट और चैंपियनशिप जीत ली। उन्होंने  अंतिम 3 में से दो गेम शून्य से जीते और अंतिम तीन गेम में केनिन केवल दो अंक ही जीत सकीं। ये सेट केवल 27 मिनट में खत्म हो गया जिसमें लगभग 8 मिनट मेडिकल टाइम आउट के थे।


इस पूरी प्रतियोगिता के दौरान और विशेष रूप से चौथे राउंड में हालेप के खिलाफ जिस तरह का शानदार खेल उन्होंने दिखाया उसमें सेरेना विलियम्स के खेल की झलक  देखने को मिली। शानदार सर्विस,शक्तिशाली फोरहैंड डाउन द लाइन और क्रोसकोर्ट वॉली,खूबसूरत नेट ड्रॉप्स,एफर्टलेस कोर्ट कवरेज में सेरेना के से लगते हैं। उनके खेल की एक कमाल बात ये है कि वे अपने स्ट्रोक्स और विशेष रूप से नेट पर बहुत ही लेट खेलती हैं और इससे उन्हें अपने प्रतिद्वंदी को रॉंग फुट पर पकड़ने में और डॉज देने में आसानी होती है। उन्होंने हालेप को और फाइनल में केनिन को बार बार रॉन्ग फुट पर पकड़ा। कमाल की बात ये है कि शारीरिक रूप से वे आज के पावरफुल खेल की आइकॉन मज़बूत शरीर वाली खिलाड़ियों के उलट बहुत कमनीय और नाजुक सी लगती हैं। उनके खेल में अगर सेरेना की झलक दिखती है तो वे अपने चेहरे की मासूमियत से मार्टिना हिंगिस की याद दिलाती हैं। वे इलीट खेल की इलीट प्रतिनिधि सी लगती हैं और वे प्रॉफेशनल खेल से ज़्यादा एमेच्योर खेल की प्रतिनिधि खिलाड़ी प्रतीत होती हैं। वे नवरातिलोवा के पावरफुल खेल से पहले के क्रिस एवर्ट और स्टेफी ग्राफ के समय की याद दिलाती है।

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दरअसल वे आज के पावरफुल खेल की प्रचंड झुलसती धूप में ताजी हवा का झोंका सी है।

इगा स्वियातेक को पहली ग्रैंड स्लैम जीत मुबारक।

नागोया एशियाड:उल्लेखनीय प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कोई भी एक जीत,कोई भी एक पदक जीत लेना मायने रखता है। ये उस टीम या उस एथलीट की योग्यता,प्रतिभा और उसके कठिन पर...