शनिवार की दोपहर न्यूयार्क के फ्लशिंग मीडोज के आर्थर ऐश एरीना में खेला गया 2026 के यूएस ओपन का महिला एकल फाइनल अपने आप में कमाल का था। कमाल का इसलिए कि ये मैच योग्यता में एकदम समान दोनों नंबर एक लेकिन व्यक्तित्व में एकदम विपरीत स्वभाव वाली खिलाड़ियों के बीच मुकाबला था।
एक समान स्तर पर खेला गए बेहद संघर्षपूर्ण मैच। जो दो घंटे तेरह मिनट और तीन सीटों तक चला। जिसे अंततः रायबाकिना ने 6-4,5-7,6-2 से जीत लिया। और जीतकर ना केवल सबालेंका को लगातार 99 सप्ताह तक नुमाबरपर रहने के बाद उससे पदच्युत कर दिया बल्कि यूएस ओपन की चैंपियन होने के गौरव से भी वंचित कर दिया।
सबालेंका एक लंबी और मजबूत कद काठी की खिलाड़ी हैं जो अपने उग्र और आक्रामक स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। अपने स्वभाव के अनुरूप ही उनकी पोशाक गहरे लाल रंग की थी। फाइनल में जब वे कोर्ट में प्रवेश कर रहीं थीं तो उनकी जैकेट भी वैसी ही गहरे लाल रंग की थी। उनके ठीक विपरीत रायबाकिना दुबली-पतली छछहरी काया वाली सौम्य सी खिलाड़ी हैं। शांत और गंभीर स्वभाव की। बर्फ की मानिंद अपनी भावनाओं को फ्रीज़ किए हुए। जब वे फाइनल में कोर्ट में प्रवेश कर रही थीं तो उनकी सफेद जैकेट उनके स्वभाव से के अनुरूप ही थी। वे इस बार पीले रंग के टॉप में खेल रही थीं। मानो उन्हें अपने नंबर एक बन जाने और ये खिताब जीत लेने का आभास हो गया था और वे अपनी जीत के बसंत का उत्सव मनाने मैदान में उतरी हों। उनका पीला टॉप और काली स्कर्ट बीच मैदान मधुमक्खी का एक शानदार रूपक प्रस्तुत कर रही होती थीं जो अपने शानदार खेल के डंक से विपक्षी खिलाड़ी की उम्मीदों के मकरंद को चुरा लेती और उसे अपनी जीत के आनन्द के मधु में परिवर्तित कर देती।
सबालेंका पिछले 99 हफ्तों से नंबर एक की पोजीशन पर हैं। औपचारिक रूप से फाइनल खेले जाने तक वे नंबर एक हैं। लेकिन जैसे ही एलिना रायबाकिना ने यहां सेमीफाइनल में प्रवेश किया,वे अनौपचारिक रूप से नंबर एक खिलाड़ी हो गई थीं। ये क्या ही मज़ेदार स्थिति थी कि शनिवार को जिस समय दो खिलाड़ी अपना फाइनल खेल रही थीं तो उस समय औपचारिक रूप से सबालेंका नंबर एक और रायबाकिना नंबर दो थीं। जबकि अनौपचारिक रूप से स्थित इसके एकदम विपरीत थी। इतना ही नहीं वे इससे पहले दो ग्रैंड स्लैम फाइनल खेल चुकी थीं। और दोनों ने एक-एक बार एक दूसरे को हराकर ऑस्ट्रेलिया ओपन जीता था। सबालेंका ने 2023 में और रायबाकिना ने 2026 में। इस साल दोनों चार बार एक दूसरे के साथ खेली थीं और दोनों ने बराबर जीत हासिल की थीं। रायबाकिना ने ऑस्ट्रेलिया ओपन और डब्ल्यूटीए टूर्स फाइनल में जीत हासिल की तो सबालेंका ने मियामी ओपन के सेमीफाइनल और इंडियन वेल्स ओपन के फाइनल में रायबाकिना को हराया। इतना ही नहीं दोनों पावर खेल की चैंपियन खिलाड़ी हैं। और तेज सर्विस के लिए और बेसलाइन के शानदार खेल के लिए जानी जाती हैं।
ये रायबाकिना का दृढ़ संकल्प और इच्छा शक्ति ही थी कि वे यहां लगभग असंभव जीत हासिल करती हैं। वे यूएस ओपन में पैर की चोट के साथ आती थीं और एक हफ्ते तक तो टेनिस खेल तक नहीं पातीं। वे यूएस ओपन से पहले होने वाले सिनसिनाटी ओपन के क्वार्टर फाइनल में इगा स्वीयेक के खिलाफ चोट के चलते हट गई थी। लेकिन एक बार जब उन्होंने प्रतियोगिता में अपना विजयी अभियान शुरु किया तो मुड़कर नहीं देखा। वे बिना एक भी सेट गंवाए क्वार्टर फाइनल में पहुंचती हैं। और फिर क्वार्टर फाइनल में नाओमी ओसाका और सेमीफाइनल में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता झेंग के विरुद्ध एक सेट से पिछड़ने के बावजूद जीत हासिल करती हैं।
ये एक संयोग ही कहा जायेगा कि पूर्व सोवियत यूनियन के दो संघटक देशों बेला रूस और कज़ाकिस्तान से दो बालाएं हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका आती हैं और सबालेंका पेगुला को और रायबाकिना कोको गफ को सेमीफाइनल में हराकर अमेरिकी उम्मीदों को मटियामेट कर देती हैं।
रायबाकिना की ये जीत उन्हें विश्व महिला टेनिस परिदृश्य पर अब सबसे मजबूत और शानदार खिलाड़ी के रूप में ही स्थापित नहीं करती,बल्कि महिला टेनिस की नंबर एक खिलाड़ी के रूप में भी स्थापित करती है। इतना ही नहीं ये महिला टेनिस की एक और शानदार प्रतिद्वंदिता की नींव भी रखती है। सबालेंका बनाम रायबाकिना।
रायबाकिना को ये शानदार जीत मुबारक।

No comments:
Post a Comment