Wednesday 29 December 2021

द टर्बनेटर

 



क्या ही संयोग है जब 2021 का अंतिम सप्ताह वर्षांत की घोषणा कर रहा है,उसी समय एक बेहतरीन और शानदार क्रिकेटर अपने खेल कॅरियर के समापन की औपचारिक घोषणा भी करता है। जी हां,ये हरभजन सिंह हैं जो भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ऑफ स्पिनरों में से एक हैं। उनकी ये उदघोषणा भले ही नए साल के आगमन की खुशियों के अहसास को कमतर ना बनाए, पर साल की विदाई के भारी वातावरण को हल्के उदासी के रंग से ज़रूर भर देती है। ये उदासी इसलिए भी कि उनके स्तर का एक खिलाड़ी एक बेहतर विदाई का हकदार होता है। और ये एक कड़वा सच है हम अपनी खेल विरासत को ना तो पहचानने के काबिल हैं और उसे संभालने के ही।

गर आप भारतीय क्रिकेट इतिहास को पलटकर देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि तमाम महान और शानदार खिलाड़ियों के बीच दो सरदार भारतीय क्रिकेट को और उसकी स्पिन विधा को अपनी मेधा से नई ऊंचाइयों तक पंहुचा देते हैं। ये दो सरदार हैं बिशन सिंह बेदी और हरभजन सिंह। ये दोनों ना केवल अलग समय का प्रतिनिधित्व करते हैं बल्कि स्पिन की अलग विधा का और अलग शैली व तकनीक का प्रतिनिधित्व करते हैं। पर दोनों काम एक ही करते हैं। ये दोनों  ही ना केवल क्रिकेट खेल को बल्कि गेंदबाजी की स्पिन विधा को समृद्ध करते हैं बल्कि भारत के लिए तमाम असाधारण सफलताओं का बायस भी बनते हैं।

गर बिशन सिंह बेदी प्रसन्ना और चंद्रशेखर के साथ 1983 से पहले की 'एलीट' क्रिकेट की शानदार स्पिनर्स त्रयी बनाते हैं तो हरभजन सिंह अनिल कुंबले और आर. अश्विन के साथ 1983 के बाद की 'मास' क्रिकेट की शानदार स्पिनर्स त्रयी बनाते हैं। बेदी लेग स्पिनर थे तो हरभजन ऑफ स्पिनर। बेदी एक सॉफ्ट बॉलर तो हरभजन कड़क। बेदी धीमी गेंद की ऊंचाई से भरमाते थे तो हरभजन सिंह लो ट्रैजेक्टरी गेंद की गति से। बेदी अपनी धीमी गति से गेंद में घुमाव लाते और स्पिन से बल्लेबाजों को हैरान करते तो हरभजन गति से पिच से गेंद के लिए उछाल लाते और बल्लेबाजों को परेशान करते। दोनों एक ही हथियार गेंद का  अलग तरह से प्रयोग ज़रूर करते पर दोनों बड़े से बड़े बल्लेबाजों का शिकार करते और विपक्षी खेमे को भयभीत किए रहते। जिस समय हरभजन क्रिकेट के गुर सीख रहे थे उस समय सकलैन मुश्ताक का 'दूसरा' कहर ढा रही होती है और बल्लेबाज़ों के मन में भय। आगे चलकर हरभजन ने उस विरासत को संभाला और अपनी तरह की 'दूसरा' ईजाद की जो बल्लेबाजों के लिए कहर बन गई। वे भारत के दो महान ऑफ स्पिनर्स में प्रसन्ना के बजाय वेंकटराघवन के ज़्यादा करीब दीखते हैं और उनकी परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

41 वर्षीय हरभजन का जन्म 1980 को जालंधर में हुआ। एक शहर जिसने अजीत पाल सिंह, परगट सिंह व सुरजीत सिंह  जैसे विश्व प्रसिद्ध हॉकी  खिलाड़ी दिए। शायद उस शहर ने भी समय के बदलाव को पहचान लिया था और अब वो देश को हॉकी के बजाय क्रिकेट खिलाड़ी दे रहा था जिसे अजीत या परगट की तरह ही प्रसिध्दि प्राप्त करनी थी। हालांकि ये केवल एक बदलाव के तौर पर था। जिस बर्लटन पार्क ने क्रिकेट को भज्जी जैसा खिलाड़ी दिया वो आज भी हॉकी के लिए ही जाना जाता है। टोक्यो ओलंपिक में हॉकी का कांस्य पदक जीतने वाली टीम के कप्तान मनप्रीत सहित 08 खिलाड़ी इसी पार्क स्थित सुरजीत सिंह अकादमी से हैं।

रभजन ने एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्म लिया था। वे पांच बहनों के इकलौते भाई थे। आप समझ सकते हैं कि एक ऐसे परिवार के लड़के पर उम्मीदों और ज़िम्मेदारियों का बोझ किस कदर होता है। लेकिन व्यवसायी पिता ने उन्हें इससे मुक्त किया और क्रिकेट पर ध्यान देने को कहा। आरंभिक ट्रेनिंग बल्लेबाज़ के रूप में हुई। पर नियति को कुछ और मंज़ूर था। कोच चरणजीत  सिंह भुल्लर की असामयिक मृत्यु हुई। वे देविंदर अरोरा की शागिर्दी में आए और एक बल्लेबाज़ गेंदबाज के रूप में रूपांतरित हो गया।


 1997-98 में रणजी ट्रॉफी का एक मैच खेलने मुम्बई की टीम को पंजाब होस्ट कर रहा था। उस मैच में युवा हरभजन ने शानदार गेंदबाजी की। कहा जाता है कि उनका खेल देखकर मुम्बई के कोच बलविंदर सिंह ने युवा हरभजन को मुम्बई में सेटल होने का ऑफर दिया। हरभजन ने मुम्बई जाने से मना कर दिया। आप सोच सकते हैं उस समय मुंबई टीम का कोच एक नवागत खिलाड़ी को ऑफर कर रहा है तो उसकी काबिलियत कैसी और कितनी रही होगी। ये 'पूत के पांव पालने के दीख जाने' वाली कहावत का चरितार्थ होना था।

स बीच हरभजन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और 25 मार्च 1998 को बंगलोर टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला टेस्ट मैच और उसी साल 17 अप्रैल को न्यूज़ीलैंड के विरुद्ध एकदिवसीय मैच खेला। लेकिन उनका आरंभिक खेल कैरियर बहुत सफल नहीं रहा। वे अपने गेंदबाजी एक्शन के कारण विवाद में रहे। उनका बॉलिंग एक्शन दो बार रिपोर्ट किया गया। उनके ऊपर चकर का ठप्पा लगा। सन 2000 में पिता की मृत्यु हो गई। अब वे अमेरिका में बसने की सोचने लगे क्योंकि लगभग 18 महीने वे राष्ट्रीय टीम में नहीं चुने गए। 

लेकिन नियति रास्ते खुद बनाती है। हरभजन पहले अपने एक्शन में सुधार करने के लिए इंग्लैंड फ्रेड टिटमस के पास गए। फिर 2000-01 सीजन में ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत के दौरे पर आई। अनिल कुंबले कंधे के ऑपरेशन के कारण टीम से बाहर थे। सौरव गांगुली ने हरभजन में विश्वास दिखाया और उन्होंने इस मौके को कस कर पकड़ लिया। ऐतिहासिक कोलकाता टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने टेस्ट मैच में भारत के लिए पहली हैटट्रिक की, बल्कि 13 विकेट लेकर भारत को जीत भी दिलाई। हालांकि ये मैच लक्ष्मण की 283 रनों की ऐतिहासिक पारी के लिए ज़्यादा जाना जाता है। अगले मैच में उन्होंने 15 विकेट लिए। इस तरह 03 टेस्ट मैचों की इस सीरीज में 32 विकेट लेकर रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।  

न्होंने अनिल कुंबले के साथ जोड़ीदार के रूप में खूब नाम कमाया और इस जोड़ी ने मिलकर भारत को अनेक यादगार जीत दिलाई। ऐसे समय में जब स्पिन गेंदबाजी अपनी चमक खोती दिखाई पड़ रही हो उन्होंने उसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। जब सचिन कहते हैं कि 'उन्होंने पूरी एक पीढ़ी को स्पिन से प्यार करना सिखाया' तो आप समझ सकते हैं कि वे किस स्तर के गेंदबाज रहे होंगे।

न्होंने कुल 103 टेस्ट मैच खेले और 32.46 की औसत से 417 विकेट लिए। वे भारत के लिए टेस्ट मैच में अनिल कुंबले ,कपिल देव और आर. अश्विन के बाद चौथे सर्वाधिक विकेट लेने वाले बॉलर हैं। उन्होंने टेस्ट मैच में 18.23 की औसत से 2224 रन बनाए। उन्होंने टेस्ट में 02 शाट और 09 अर्द्ध शतक भी जमाए। उन्होंने 236 एक दिवसीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया जिसमें 33.35 की औसत से 269 विकेट लिए। वे भारत के लिए 28 टी-20 मैच भी खेले जिसमे उन्होंने 25.32 की औसत से 25 विकेट लिए।

वे बहुत आक्रामक और जुझारू खिलाड़ी थे। हर विकेट के बाद जोरदार जश्न मनाते और विपक्षी पर दबाव बनाने का प्रयास करते। मैदान में वे हमेशा अति सक्रिय रहते और उत्साह से लबरेज भी। वे खिलंदड़ स्वभाव वाले थे। वे एक ऐसे खिलाड़ी थे जो मैदान में अपनाया सब कुछ झोंक देते। शायद यही कारण था कि अति उत्साह में कई बार सीमाओं का अतिक्रमण कर जाते और विवादों में फंस जाते। बॉलिंग एक्शन के अलावा राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी से निकाला जाना, साइमंड्स एंड्रूज पर नस्लीय टिप्पणी,श्रीशंथ को चांटा और और न्यूज़ीलैंड में गंदे जूते कैरी करने जैसे विवाद उनके साथ जुड़े। लेकिन इन विवादों से कभी हतोत्साहित नहीं हुए बल्कि मजबूत बनकर उभरे। सामान्यतः अपने एक्शन में बदलाव और सुधार के बाद बॉलिंग की काबिलियत कम हो जाती है। पर टिटमस के निर्देशन में एक्शन में सुधार के बाद वे एक और बेहतर गेंदबाज के रूप में आए। 2000-01 सीरीज में 32 विकेट लेकर इसे सिद्ध भी किया। वे 'चकर' से शानदार गेंदबाज के रूप में स्थापित हुए और जालंधर शहर की गलियों का एक दुबला पतला लड़का 'भज्जी' से क्रिकेट की दुनिया में 'द टर्बनेटर'के रूप में स्थापित हो गया।

वे अपने सन्यास वाले वक्तव्य में कहते हैं 'सभी अच्छी चीजें समाप्त हो जाती हैं।' कुछ साल पहले इलाहाबाद में  मीरा सम्मान प्राप्त करने के बाद अपने वक्तव्य में ज्ञानरंजन ने कहा था 'मृत्यु के बाद भी शहर खूबसूरत हो सकते हैं।' यकीन मानिए हरभजन का खेल जीवन भले ही समाप्त हो गया हो लेकिन उनका खेल जीवन हमेशा शिद्दत से याद किया जाता रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए वो प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उनकी उपलब्धियां खेल प्रेमियों को चमत्कृत करती रहेंगी। ज्ञानरंजन के शब्दों में कहें तो मैदान का जीवन समाप्त होने के बाद भी खूबसूरत बना रहता हैं।

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खेल मैदान से अलविदा भज्जी पाजी।

Sunday 5 December 2021

अकारज_12




 ये एक गहरी सर्द सुबह थी।

वो अब भी सोई हुई थी।

मैंने हौले से उसे छुआ और कहा

'चाय'


उनींदी सी अधखुली आंखों से उसने मेरी देखा।

फिर बोली 'तुम्हारी चाय पर सारी नींद वारी'


मैंने प्रश्नवाचक नज़रों से देखा। वो ऐसा कहती रही थी। गर्मियों भर गुनगुना नींबू पानी पीते हुए भी कुछ ऐसा ही कहती थी।

उसकी आँखों सुकून की मुलायमियत से भर उठी थी। वो कह रही थी 'तुम्हारी हर चीज पर ज़िंदगी कुर्बान जो मुझे मेरे होने का अहसास कराती है'

अब उसने मेरा हाथ अपनी ओर खींचा और अपने सर के नीचे रख कर आंखें बंद कर ली।

उसके चेहरे पर असीम निश्चिंतता पसर  गई थी। चेहरा सुकून की रोशनी से दमक उठा था।


समय था कि मानो ठहर गया।


खिड़की से झांकता सूरज था

कि शर्म से लाल हो चला।


पक्षी थे 

कि प्यार से गुनगुनाने लगे।


शबनम की बूंदें थी

कि प्यार की ऊष्मा से पिघलने लगीं।


चाय का प्याला था 

कि उसके होंठों के स्पर्श के लिए बेचैन हो चला।


और दो दिल थे 

कि अरमान उनमें मचलने लगे।

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Monday 9 August 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी_5

 



28 जुलाई 2021

टोक्यो ओलंपिक 

प्रतिस्पर्धाओं का पांचवां दिन।


ओलंपिक खेल आयोजन खेलों का सबसे बड़ा मंच है जिसमें प्रतिभाग करने और पदक जीतने के लिए खिलाड़ी दिन रात हाड़तोड़ परिश्रम करते हैं। उनके परिश्रम के पीछे एक ही मोटिवेशन होता है ओलंपिक में एक पदक जीतने का सपना। इतने सारे प्रतिभागियों में कुछ के सपने पूरे होते हैं बाकी के टूट जाते हैं। एक बहुत छोटी सी चूक भी पदक जीतने के सपने को तोड़ देती है। ऐसे में खेल प्रबंधन में अव्यवस्था,खेल अधिकारियों की मनमानी,प्रशिक्षकों तथा खिलाड़ियों के बीच मनमुटाव व मतभेद और इन सब से ऊपर उनके अहम,उनकी ईगो,खिलाड़ियों और उनके प्रदर्शन पर कैसा असर डाल सकते हैं,इसे सहज ही समझा जा सकता है। फिलहाल भारत का 127 खिलाड़ियों का दल टोक्यो में प्रतिभाग कर रहा है और प्रतिस्पर्धा के पांचवे दिन तक उनकी मुट्ठी में मात्र एक रजत पदक हैं।

कल दिन की एक खराब शुरुआत हुई। महिला हॉकी टीम अपने पूल का तीसरा मैच वर्तमान चैंपियन ग्रेट ब्रिटेन के विरुद्ध खेल रही थी। ये मैच भारतीय लड़कियां 1-4 से हार गई। भारतीय महिला टीम की ये लगातार तीसरी हार थी और अब अपने पूल में वे पांचवे स्थान पर हैं। अब नॉक आउट में पहुंचना आगे के उनके दो मैच के साथ साथ बाकी टीमों के मैचों पर भी निर्भर करेगा। क्योंकि दोनों पूल से प्रथम चार स्थान पर आने वाली टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंचेगी।

कल से तीरंदाजी की व्यक्तिगत स्पर्धाएं शुरू हुई। तरुणदीप राय ने अपने अभियान की शुरुआत जीत के साथ की। उन्होंने पहले राउंड में यूक्रेन के हनबिल ओल्सकी को 6-4 से हराया। पर अगले ही मैच में वे हार गए। प्री क्वार्टर फाइनल मैच में तरुणदीप इसराइल के इटे शैनी से शूट ऑफ में 5-6 से हार गए और पदक की दौड़ से बाहर हो गए। सबसे बड़ी उम्मीद भारतीय तीरंदाज

प्रवीण जाधव ने जगाई। उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा के पहले दौर में विश्व नंबर 02 रूस के गलसन बाज़ारझपोव को सीधे सेटों में 6-0 से हरा कर दूसरे चक्र में प्रवेश किया। लेकिन ये खुशी अधिक देर नहीं टिक सकी। दूसरे चक्र में उनका मुकाबला विश्व के नंबर एक तीरंदाज अमेरिका के ब्रैडी एलीसन से था। और प्रवीण जाधव ये मुकाबला सीधे सेटों में 0-6 से हार गए। पदक की एक और उम्मीद दरक गयी। तीरंदाजी में तीसरी भारतीय प्रतिभागी दीपिका कुमारी थीं। उनका पहला मुकाबला भूटान की करमा से था। यहाँ उल्लेखनीय है कि तीरंदाजी भूटान की संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अंग है और ये भी कि करमा भूटान के लिए किसी भी खेल में क्वालीफाई करने वाली पहली खिलाड़ी हैं। अनुभवी और विश्व नंबर एक दीपिका ने करमा को आसानी से सीधे सेटों में 6-0 से हरा दिया। दूसरे राउंड में अमेरिका की जेनिफर एम फेर्नांडीज के साथ उनका कड़ा मुकाबला हुआ जिसमें दीपिका ने 6-4 से जीत हासिल की। वे अब प्री क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई हैं और उनसे पदक की उम्मीद बरकरार है।

पदक की एक उम्मीद बैडमिंटन में भी है जिसे सिंधु मजबूती से आगे बढ़ा रही हैं। महिला एकल स्पर्धा में अपने पूल का दूसरा मैच भी सिंधु ने आसानी से जीत लिया। उन्होंने हांगकांग की चियुंग नगन यी को 21-9,21-16 से हराया। अब वे क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई हैं। लेकिन पुरुष वर्ग में आज भारत की चुनौती समाप्त हो गई। पुरुष एकल स्पर्धा में ग्रुप डी के दूसरे मैच में साई प्रणीत नीदरलैंड के एम कॉजोव से 14-21,14-21 से हार गए। ये उनकी लगातार दूसरी हार थी और अब वे प्रतियोगिता से बाहर हो गए हैं।

रोइंग की लाइटवेट डबल स्कल स्पर्धा में अर्जुन लाल और अरविंद सिंह फाइनल में पहुंचने में असफल रहे। वे सेमीफाइनल में छठे स्थान पर रहे और प्रतियोगिता से बाहर हो गए। सेलिंग की युगल स्किफ 49अर स्पर्धा में वरुण ठक्कर और के सी गणपति की जोड़ी कल पहली रेस में 18वें स्थान पर रहे थे। आज वे दूसरी रेस में 18वें स्थान पर,तीसरी रेस में 17वें स्थान पर और चौथी रेस में 19वें स्थान पर रहे।

बड़ी खबर बॉक्सिंग से भी आई। बॉक्सिंग में मिडिलवेट वर्ग में वर्तमान एशियाई चैंपियन और विश्व नंबर आठ पूजा रानी ने  अल्जीरिया की 20 वर्षीय इचराक चैब को आसानी से 5-0 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया। जहां पुरुष वर्ग में तीनों मुक्केबाज अपने पहले दौर के मैच हार गए। वहीं महिला वर्ग में मेरी कॉम,लवलीना और पूजा तीनों ने अपने अपने मुकाबले जीत कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है।

अमेरिका की कैटी लेडेकी ने 1500 मीटर फ्रीस्टाइल में पहला स्वर्ण पदक जीता। 

तैराकी की 4×200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा टॉम डीन और डंकन स्काट की अगुवाई वाली ब्रिटेन की टीम ने 6 मिनट 58.58 सेकंड में जीत लिया। वे .03 सेकंड से विश्व रिकॉर्ड बनाने से चूक गए। रूस ने रजत और ऑस्ट्रेलिया ने कांस्य पदक जीता।

 टेनिस में शीर्ष खिलाड़ियों के हारने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। कल तीसरी वरीयता प्राप्त यूनान के स्टेफिनोस सितसिपास को फ्रांस के यूगो हमबेर्ट ने 6-2,6-7,6-2 से हराकर बाहर कर दिया। लेकिन गोल्डन ग्रैंड स्लैम के लिए नोवाक जोकोविच का अभियान जारी है। वे क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुके हैं और यहां उनका मुकाबला जापान के केइ निशिकोरी से होगा।

 रग्बी सेवन में फिजी ने अपना दबदबा बनाये रखा है और न्यूजीलैंड को 24-17 से हराकर अपना पिछला खिताब बरकरार रखा। इस स्पर्धा का कांस्य पदक अर्जेंटीना ने ब्रिटेन को 17-12 से हराकर जीता। 

तैराकी की 100 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में आरंभिक हीट में ऑस्ट्रेलिया की एमा मेकॉन ने 52.12 सेकंड का नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।

चीन के शी झीयोंग ने भारोत्तोलन की 73 किलोग्राम स्पर्धा में अपने ही विश्व रिकॉर्ड को बेहतर किया। उन्होंने (स्नैच में 166 और क्लीन एंड जर्क में 198 किलो)  364 किलोग्राम भर उठाया।


और अब बात पदक तालिका की। पदक तालिका में जापान 12 स्वर्ण पदकों सहित 21 पदक जीत कर पहले स्थान पर,चीन 11 स्वर्ण  कुल 25 पदक लेकर दूसरे पर और अमेरिका 10 स्वर्ण पदक सहित कुल 30 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत एक रजत के साथ पदक तालिका में 42वें स्थान पर पहुंच गया है।

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और हां,एक सलाम जर्मनी की महिला जिम्नास्टिक टीम को जिसने जिम्नास्टिक की पारंपरिक बिकनी ड्रेस कोड को मानने आए इनकार कर दिया है और फुल बॉडी ड्रेस पहन कर प्रतियोगिता में भाग ले रही हैं। उनका मानना है महिला खिलाड़ियों को उस ड्रेस को पहने का अधिकार होना चाहिए और वो ड्रेस पहननी चाहिए जिसमें महिला खिलाड़ी सबसे ज़्यादा कम्फ़र्टेबल महसूस करें। दरअसल जब तमाम खेलों में बाज़ार के दबाव में महिलाओं के लिए सेंसुअस ड्रेस कोड निर्धारित किये जा रहे हैं जर्मन महिला जिम्नास्ट टीम का ये कदम बहुत ही महत्वपूर्ण है।

अंत में, एक सलाम भारतीय बालाओं-पूजा रानी,पुरसला सिंधु और  दीपिका कुमारी को जिनके मजबूत कंधों पर आज भारत की पदक की दावेदारी परवान चढ़ी।



Sunday 8 August 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी_16




08 अगस्त 2021

टोक्यो ओलंपिक 

अंतिम दिन

टोक्यो ओलंपिक डायरी


उगते सूरज के देश में ढलती गहराती शाम को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाक ने जैसे ही पेरिस के मेयर एनी हिडाल्गो को ओलंपिक ध्वज सौंपा और 32वें ओलंपिक खेलों के समापन की घोषणा की, विश्व के सबसे बड़े खेल रंगमंच का परदा गिर गया, ठीक तीन साल बाद 2024 में पेरिस में फिर से उठाने को। टोक्यो ओलंपिक खेलों का औपचारिक समापन हुआ।

जापान की राजधानी टोक्यो के इस रंगमंच पर 16 दिन तक विश्व के सर्वश्रेष्ठ खेल कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर पूरी दुनिया को चमत्कृत किया और उनका मन मोह लिया। अपने अद्भुत कला कौशल से उन्होंने अविस्मरणीय दृश्य और क्षणों की निर्मिति की और भावनाओं के इंद्रधनुषी रंगों की छटा बिखेरी। अपने सपनों को पाने की चाहत में जी जान लगा दी और वर्षों के परिश्रम से अर्जित अपने कौशल को भी। कुछ के सपने पूरे होकर उनके गलों में तमगों के रूप में लहराने लगे तो बाकी खिलाड़ियों के सपने अगले 4 सालों के लिए उनके सीनों में दफन हो गए। उगते सूरज के इस देश मे कितनों की किस्मत का सूरज उदित हुआ, कितनों का सूरज चमका और कितनों का डूब गया। इन 16 दिनों में आंखें सबकी भीगी। कुछ की मीठे पानी से,कुछ की खारे पानी से। आंखें सबकी बही। कुछ की आंखों से खुशियां टपकी तो कुछ की आंखों से दुख बहे। जीत की मुस्कुराहट से कुछ चेहरे दमके तो  हार की उदासी से कुछ चेहरे कुम्हलाए। यहां प्रतिद्वंद्विताएं हुई, संघर्ष हुए,मुकाबले हुए। अगर कुछ ना हुई तो दुश्मनी ना हुई।  यहां सबने एक दूसरे को खुशी में भी गले लगाया और दुख में भी। आखिर दुनिया तो सबकी साझी है और सबने माना'वर्ल्ड वी शेयर'।

खेल के इस रंगमंच पर अपने कौशल के  प्रदर्शन के लिए भारत के  126 कलाकारों ने अहर्ता प्राप्त की थी। ये अब तक की सबसे बड़ी संख्या थी जिन्हें 18 खेलों की 68 स्पर्धाओं में भाग लेना था। इनमें से कुछ का प्रदर्शन कमाल का रहा। कुछ का फीका।कुछ ने जमा दिया कुछ फिसल गए। कुछ ने देशवासियों को खुशी से खिला दिया कुछ ने निराशा में झुला दिया। कुछ हीरो और बड़े हीरो बन गए। कुछ हीरो ज़ीरो बन कर रह गए। और कुछ ज़ीरो हीरो बन गए।

टोक्यो ओलंपिक में भारत

भारत ने अपने अभियान की शानदार शुरूआत की। मीराबाई चानू ने पहले दिन ही वेटलिफ्टिंग में भारत को रजत पदक दिलाया। ये अब तक की ओलंपिक खेलों की सबसे बेहतरीन शुरुआत थी। लेकिन अगले कई दिनों तक भारत पदक के लिए तरसता रहा। फिर लोवलीना ने मुक्केबाजी में और सिंधु ने बैडमिंटन में दो और कांस्य दिलाए। इस बीच हॉकी में लड़कियों और लड़कों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। लड़कों ने एक और कांसे का पदक दिलाया। अब पहलवान दृश्य पर आए और रवि कुमार दाहिया ने भारत को दूसरा रजत दिलाया। लेकिन भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ आखरी दिन के लिए रखा। पहले गोल्फ में अदिति अशोक केवल एक शॉट से कांस्य चूक गयीं। उसके बाद बजरंग पुनिया ने सेमीफाइनल की हार से उबरते हुए शानदार बाउट लड़ी और भारत को चौथा कांस्य और कुल छठा पदक दिलाया। यहां भारत ने लंदन के प्रदर्शन की बराबरी कर ली और अंत में एक नया इतिहास और इन खेलों का उपसंहार लिखा 23 साल के युवा एथलीट नीरज चोपड़ा ने। उनके हाथों जेवलिन ने स्वर्णिम उड़ान भरी। भारत का टोक्यो का सातवां पदक सोने का हुआ। एथलेटिक्स का पहला पदक और सोने का 2008 के ओलंपिक में अभिनव बिंद्रा के बाद दूसरा। ये चानू द्वारा टोक्यो में भारतीय अभियान के रुपहले आरंभ का सुनहरा समापन था।


भारत के दल में सबसे ज़्यादा शूटर थे। कुल मिलाकर 15. इनमें से अधिकतर टॉप रैंकिंग वाले थे। इनसे सबसे ज़्यादा पदकों की उम्मीद थी। पर सबसे निराशाजनक प्रदर्शन निशानेबाजों का ही रहा। सौरभ चौधरी को छोड़कर कोई फाइनल राउंड तक नहीं पहुंचा। मनु भाकर की पिस्टल का स्पर्धा के बीच में खराब हो जाना एक घटना थी। खराब प्रदर्शन के बाद प्रतिभागियों और प्राशिक्षकों के मतभेद चर्चा का कारण बने और भारतीय रायफल असोसिएशन के अध्यक्ष ने खेलव के बाद आमूलचूल परिवर्तन की बात कही। अक्सर जिनसे सबसे ज़्यादा उम्मीद होती है,सबसे ज़्यादा निराश भी वही करते हैं।

तीरंदाजी में भी निराशा हाथ लगी। विश्व नंबर एक दीपिका सहित तीरंदाजों से उम्मीद की जा रही थी। कोई क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ सका।

पहली वरीयता प्राप्त अमित पंघाल सहित सभी पुरुष मुक्केबाजों ने खराब प्रदर्शन किया। लेकिन महिला मुक्केबाज चमकीं। मेरीकॉम, पूजा कुमारी और लोवलीना ने अच्छा प्रदर्शन किया और एक कांस्य दिलाया।

एथलीटों में कमलप्रीत ने डिस्कस थ्रो और नीरज को छोड़कर कोई फाइनल के लिए क्वालीफाई नही कर सका। जेवलिन में अन्नु,डिस्कस में कमलप्रीत और पैदल चाल में प्रियंका अगर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पातीं तो पदक जीत लेती और एम पी जाबिर फाइनल में पहुंचते। पर ऐसा नहीं हो सका। नीरज चोपड़ा ने जेवलिन में इतिहास रचा। हॉकी में लड़के और लड़कियों दोनों ने कोई प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया और अदिति अशोक ने दिल जीता। लड़कियां पहली बार हॉकी के सेमीफाइनल में पहुंची तो लड़कों ने 41 साल पदक दिलाया। 200वीं रैंकिंग ने टॉप रैंकिंग वाली खिलाड़ियों को जबरदस्त चुनौती दी और भविष्य की बड़ी संभावना बनकर उभरी।

इस प्रदर्शन ने बताया कि टेलेंट की कमी नहीं है। कमी हमारी तैयारियों की और खिलाड़ियों को दी जा रही मूलभूत समस्याओं की है। सुविधाओं का प्रचार प्रसार करना और उनका हकीकत में होना और खिलाड़ियों तक पहुंचना दो अलग बातें हैं। अभी खेल प्रशासन संवेदनहीन है और गंभीरता का अभाव है। निशानेबाजी में वहां जो कुछ हुआ ये इस बात की ताईद करता है। नीरज के जर्मन कोच भारतीय अधिकारियों के ऊपर आरोप लगाते हैं कि नीरज को उनकी उदासीनता के बाद एक निजी स्पोर्ट्स कंपनी के सहयोग से यूरोप प्रशिक्षण के लिए भेजा जा सका। अगर आप खेलों में महा शक्ति बनना चाहते हैं तो अभी बहुत काम किया जाना  बाकी है।

बात आज के मुकाबलों के परिणामों की

महिला वॉलीबाल में अमेरिका ने पिछली चैंपियन ब्राज़ील को सीधे सेटों में 3-0 से हरा कर ओलंपिक के पहला गोल्ड जीत लिया। इस स्पर्धा को ओलंपिक में 1964 में शामिल किया गया था। इससे पहले 2008 और 2012 में अमेरिका फाइनल में ब्राज़ील से ही हारी थी। जबकि रियो के सेमीफाइनल सर्बिया से हार गई थी। कांस्य पदक सर्बिया ने दक्षिण कोरिया को 3-0 से हराकर जीता।

वॉलीबाल के साथ ही अमेरिका ने महिला बास्केटबॉल का स्वर्ण पदक भी मेजबान जापान को 90-75अंकों से हराकर जीत लिया है। अमेरिका ने लगातार सातवीं बार इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता है। अमेरिका की 40 वर्षीया बर्ड और 39 वर्षीया तौरासी लगातार पांच स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली दो खिलाड़ी बन गई हैं।

महिलाओं का हैंडबॉल का स्वर्ण पदक फ्रांस ने रूस को 30-25 गोल से हराकर जीता। ये इस स्पर्धा का फ्रांस के पहला स्वर्ण पदक है।

आज पुरुषों की मैराथन दौड़ लगातार दूसरी बार केन्या के ई किपचोगे ने जीतकर अपना नाम महान एथलीटों में दर्ज करा लिया। उन्होंने 2 घंटे 8 मिनट और 38 सेकंड का समय लिया। रजत पदक नीदरलैंड के ए.नागिये ने अऊर्ज कांस्य बेल्जियम के बी.आब्दी ने जीता।

इस बार लयबद्ध जिम्नास्टिक में रूस का दबदबा खत्म हुआ। व्यक्तिगत आल राउंड स्पर्धा में इस्राइल ने स्वर्ण जीता तो आज सम्पन्न हुए आल राउंड टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक बुल्गारिया ने जीता। रजत रूस और कांस्य इटली ने जीता।


टोक्यो ओलंपिक में बहुत कुछ विशिष्ट घटा जाएगा जिसके लिए इसे याद रखा जाएगा।

  • क्रिस्टीना सिमेनोस्काया ने अपने साथी खिलाड़ियों के साथ अपने देश वापस जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि अगर वे अपने द्वह जाएंगी तो उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा। इस घटना ने शीत युद्ध के समय की याद दिलाई। वे पोलैंड से शरण मांगी है।
  • उधर अमेरिका की स्टार जिम्नास्ट सिमोन बाइल्स ने टीम स्पर्धा के बीच में ही नाम वापस लेकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया और खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य को चर्चा का विषय बना दिया और 'ट्विस्टीज' शब्द चर्चा में आया। ये एक ऐसी मानसिक अवस्था है जिसमें जिम्नास्ट अपनी लैंडिंग को कंट्रोल नहीं कर पाते।
  •  पहली बार औपचारिक रूप से ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को आधिकारिक मान्यता मिली और कनाडा महिला फुटबॉल टीम की सदस्य क्विन पहली आधिकारिक रूप से भाग लेने वाली और पदक जीतने वाली खिलाड़ी बनीं।
  • इस बार बहुत ज़्यादा रिकॉर्ड टूटे। इटली की कंपनी ने जो ट्रैक बनाया था। उससे  खिलाड़ियों के प्रदर्शन में दो प्रतिशत तक बढ़ने का दावा किया गया था। ये भी संयोग था कि इटली ने ट्रैक पर शानदार प्रदर्शन किया और  5 गोल्ड जीते जिसमें पुरुषों की 4×100 मीटर रिले रेस भी शामिल है।
  • एमा मेकॉन ने इस बार स्विमिंग में सात पदक जीते और कुल 11 पदक जीतकर ऑस्ट्रेलिया की सर्वश्रेष्ठ एथलीट बन गईं। परन्तु तैराकी में अमेरिका का दबदबा बना रहा। अमेरिका की टीम  1996 के बाद पहली बार माइकेल फेल्प्स के पूल में थी पर सेलेब ड्रेसेल ने  उनकी कमी नहीं खलने दी। उन्होंने कुल 5 जवर्ण पदक जीते। अमेरिका ने तैराकी में कुल 30 पदक जीत कर अपना वर्चस्व कायम रखा।
  • ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें कड़ी टक्कर दे 9 स्वर्ण सहित 21 पदक जीतकर अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।
  • इस बार रूस प्रतिबंध के कारण भाग नहीं ले सकता था। लेकिन उसके खिलाड़ियों ने रूस ओलंपिक कमेटी के नाम से भाग लिया।
  • और सबसे बड़ी बात ये पहला ओलंपिक था जिसे एक साल के लिए स्थगित किया गया कोविड महामारी के कारण।इससे पहले के ओलंपिक स्थगित नहीं किए गए बल्कि रद्द किए गए थे। और ये भी कि ये ओलंपिक के इतिहास में पहली बार हो रहा था बिना दर्शकों के आयोजित किए गए। हांलांकि ज़्यादातर जापानी इसके आयोजन के पक्ष में नहीं थे।लेकिन इसमें उन्होंने बहुत रुचि ली। भले ही स्टेडियमों के दरवाजे  दर्शकों के लिए बंद हों लेकिन आउटडोर मुकाबलों को देखने टोक्यो में इमरजेंसी घोषित होने के बावजूद बड़ी संख्या में देखने आए।

पदक तालिका 

 अंतिम दिन अमेरिका फिर चीन को पीछे छोड़कर शीर्ष पर पहुँच गया। अमेरिका 39 स्वर्ण,41 रजत और 33 कांस्य पदक सहित  कुल 113 पदक जीत कर पहले स्थान पर,चीन 38 स्वर्ण  पदक,32 रजत और  और 18 कांस्य सहित कुल 88 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 27 स्वर्ण पदक, 14 रजत और 17 कांस्य पदक सहित कुल 58 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर रहा। भारत 01 स्वर्ण 02 रजत और 04 कांस्य सहित कुल 07 पदकों के साथ पदक तालिका में अब 48वें स्थान पर रहा।

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इस तरह 16 दिनों की जद्दोजहद के बाद 32वें ओलंपिक खेल पूर्ण हुए। पूर्णता शब्द सकारात्मक होते हुए भी इस मायने में नकारात्मक ध्वनि उत्पन्न करता है कि ये आपको खालीपन के अहसास भर देता है। जो पूर्ण होता है उससे बिछोह करता है। अब दुनिया के कोने कोने से आए 10 हज़ार से भी ज़्यादा खिलाड़ी 'सिटीअस, अल्टीअस,फोर्टिअस' के महायज्ञ में अपने अपने हिस्से की यज्ञाहुति करके एक दूसरे से विदा हो रहे थे। उनकी आंखों विदा होने की उदासी थी लेकिन सुनहरे भविष्य के सपनों चमक भी थी। मानो वे कह रहे हो ये विदाई बिछड़ने के लिए नहीं है बल्कि फिर से मिलने के लिए है। कि वे कह रहे थे इस बीच 'और अधिक तेज और अधिक ऊंचा और अधिक शक्तिशाली बनने के लिए अभ्यास करना है, तुम भी करना। वे कह रहे थे कि फिर मिलेंगे इस बार सपनों के शहर पेरिस में अपने नए सपनों के साथ,सपनों को पूरा करने के लिए। विदा दोस्तों।




Saturday 7 August 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी_15




 07 अगस्त 2021

टोक्यो ओलंपिक

प्रतिस्पर्धाओं का 15वां दिन


यथार्थ में कभी कभी ऐसा घटित होता है जो कल्पनाओं से भी अधिक रोमानी और खूबसूरत होता है।आज टोक्यो के ओलंपिक स्टेडियम में ऐसा ही कुछ घट रहा था। एक 23 साल के युवा के हाथों एक जेवलिन उड़ान नहीं भर रहा था बल्कि एक इतिहास उड़ान भर रहा था। और जब उस जेवलिन ने अपनी उड़ान पूरी कर धरती को छुआ तो ये 87.58 मीटर की दूरी भर तय नहीं कर रहा था नहीं बल्कि 1896 से 2021 तक के लंबे इंतजार के सफर का अंत कर रहा था। ये मिल्खा सिंह और पी टी उषा से लेकर हर उस भारतीय एथलीट की अधूरी ख़्वाहिश का पूरा होना था जिसने ओलंपिक में पदक जीतने का सपना देखा था और कोशिश की थी। और 87.58 मीटर की ये उड़ान केवल एक स्वर्ण पदक की उड़ान भर नहीं थी बल्कि आने वाले हर युवा भारतीय एथलीट के सपनों की उड़ान थी।  और भारत को एथलेटिक्स में पहला पदक मिलना था। ये टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू द्वारा भारतीय अभियान के  रुपहले आग़ाज़ का सुनहरा अंत था। ये उगते सूरज के देश में एक स्टार का उदय था। दरअसल ये नीरज चोपड़ा का टोक्यो ओलंपिक में जेवलिन थ्रो स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतने था।



आज खेल समाप्ति वाले दिन से पहले का दिन था। लेकिन भारत के खिलाड़ियों के लिए ये अंतिम दिन। आज उनकी चुनौती खत्म होने जा रही थी।आज कुल मिलाकर तीन स्पर्धाओं में तीन पदक दांव पर थे और चार भारतीय खिलाड़ी मैदान में थे। गोल्फ में अदिति अशोक और दीक्षा डागर,कुश्ती में बजरंग और नीरज चोपड़ा जेवलिन थ्रो में।

भारत की इस टोक्यो ओलंपिक की अंतिम चुनौती जेवलिन थ्रो स्पर्धा में थी जिसमें भारत की और से नीरज चोपड़ा भाग ले रहे थे। उन्होंने क्वालीफाइंग राउंड में सबसे बड़ी थ्रो से उम्मीदें जगा दी थीं। पदक सबको पक्का लग रहा था पर उसके रंग पर संशय था। तमाम खिलाड़ियों ने अच्छे आग़ाज़ का खराब समापन किया था, इसलिए भी आशकाएं थीं। पर नीरज ने निराश नही किया। उन्होंने पहली थ्रो 87.03 मीटर फेंकी तो पदक सबको पक्का लगाने लगा था। अगली थ्रो 87.58 मीटर की रही। और ये दोनों थ्रो स्वर्ण जीताने के लिए और इतिहाज़ निर्मिति के लिए पर्याप्त सिद्ध हुई।  86.67 मीटर की थ्रो के साथ चेक रिपब्लिक के जकुब वालेच ने रजत और 85.44 मीटर थ्रो के साथ चेक रिपब्लिक के ही वेसली विटेज़स्लाव ने कांस्य पदक जीता। ये एथेलेटिक्स में भारी का पहला ओलंपिक पदक था और व्यक्तिगत स्पर्धा में 2008 में अभिनव बिंद्रा के शूटिंग में गोल्ड के बाद दूसरा।

 इस से पूर्व भारत गोल्फ में एक पदक से चूक गया। गोल्फ में तीसरे राउंड के बाद दीक्षा 51वें स्थान पर थीं और वे पदक की दौड़ में नहीं थीं। लेकिन विश्व रैंकिंग में 200वीं रैंकिंग वाली अदिति अशोक ने अभी शानदार खेल दिखाया था और वे तीसरे राउंड के बाद 12 अंडर 201 स्कोर के साथ विश्व नंबर एक के बाद दूसरे स्थान पर थीं और उनका एक पदक लगभग निश्चित सा लग रहा था। लेकिन आज का दिन अदिति का नहीं था और पोडियम उनके भाग्य में नहीं लिखा था। वे एक स्ट्रोक्स से तीसरा स्थान और कांस्य पदक चूक गई। बिल्कुल किनारे पर हर जाना और पदक चूक जाना निसन्देह निराशा से भर देता है लेकिन 200 वीं विश्व रैंकिंग वाली अदिति तारीफ करनी होगी कि विश्व की टॉप रैंकिंग वाली खिलाड़ियों से मुकाबला करते हुए तीन दिन तक शानदार खेल दिखाया और चौथे स्थान पर रहीं। ये ओलंपिक में किसी भी भारतीय का अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन है। इस स्पर्धा में भारत की दूसरी प्रतिभागी दीक्षा नागर 50वें स्थान पर रहीं। स्वर्ण पदक जीता अमेरिका की नेल्ली कोरडा ने। वे आरंभ से ही नंबर एक पर थीं और उसे उन्होंने बनाए रखा। रजत पदक विश्व नंबर 28 जापान की इनामी मोनी ने जीता और कांस्य पदक विश्व नंबर 11 न्यूजीलैंड की लिडिया को ने जीता। रजत और कांस्य पदक का फैसला प्ले ऑफ से हुआ। 

आज पदक की तीसरी उम्मीद कुश्ती में बजरंग पूनिया थे। वे कल सेमीफाइनल में हार गए थे। आज कांस्य पदक के लिए उनका मुकाबला कज़ाकिस्तान के डी निवाज़बेकोव से था। इस मुकाबले में बजरंग ने निराश नहीं किया। आज वे चैंपियन की तरह लड़े और निवाज़बेकोव को आसानी से 8-0 से हरा दिया।

इस प्रकार भारत को इस ओलंपिक का 07 पदक मिले। ये 2012 के लंदन ओलंपिक के 06 पदक के  सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन एक पदक ज़्यादा था।

टोक्यो ओलंपिक से ही कुछ और खबरें।

महिलाओं की मैराथन दौड़ केन्या की पेरेज जेपचिरचिर ने जीती। उन्होंने ये दौड़ 02 घंटे,27 मिनट और 20 सेकंड में पूरी की।रजत पदक उनकी ही देशवासी ब्रिजिड कोसजी ने जीता और कांस्य पदक अमेरिका की मौली सिडल ने जीता।

महिलाओं की ऊंची कूद में 2.04मीटर ऊंची छलांग लगाकर रूस की लसितकेने ने स्वर्ण पदक जीता। ऑस्ट्रेलिया की डी मकडेरमोट ने रजत और  यूक्रेन की महुचिख़ ने कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की बेसबॉल का स्वर्ण मेजबान जापान ने अमेरिका को 2-0 से हराकर जीता। जबकि कांस्य डोमिनिकन रिपब्लिक ने दक्षिण कोरिया को 10-06 से हराकर जीता।

लयबद्ध जिम्नास्टिक की आल राउंड व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण पदक इस्राइल की लिनॉय ऐस्राम ने जीता। इस्राइल का ये पहला ओलंपिक पदक था। 1996 के बाद ये पहला अवसर था जब रूस के अलावा किसी अन्य देश के जिमनास्ट ने इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। तीन बार की विश्व चैंपियन रूस की दीना अवेरिना ने रजत पदक और बेलारूस की एलिना हरनासको ने कांस्य पदक जीता।

इजू वेलोड्रम में चल रही साइक्लिंग की पुरुष मेडिसन स्पर्धा डेनमार्क के नॉर्मन हेनसन और माइकेल मोरकोव ने जीती। इसका रजत पदक ब्रिटेन ने और कांस्य पदक फ़्रांस ने जीता।

महिलाओं की वाटर पोलो स्पर्धा का स्वर्ण पदक अमेरिका ने लगातार तीसरी बार जीता। फाइनल में उसने स्पेन को हराया। हंगरी ने रूस को हराकार कांस्य पदक जीता। पुरुषों की बास्केटबॉल के फाइनल में स्पेन को 87-82 अंकों से हराकर अमेरिका ने स्वर्ण पदक जीता। ये अमेरिका का पुरुष बास्केटबॉल का 16वां ओलंपिक पदक है। इसका कांस्य पदक ऑस्ट्रेलिया ने स्लोवेनिया को 107-93 से हराकर जीता।

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 38 स्वर्ण पदकों सहित 87 पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 36 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 108 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 27 स्वर्ण पदक सहित कुल 56 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत 01 स्वर्ण 02 रजत और 04 कांस्य सहित कुल 07 पदकों के साथ पदक तालिका में अब 47वें स्थान पर पहुंच गया है।

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और चलते चलते बात ट्यूनीशिया के तैराक 18 वर्षीय अहमद हफ्नोई की। वे इस ओलंपिक में 400 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भाग ले रहे थे। उन्होंने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया।लेकिन वे क्वालीफाई करने वालों में सबसे धीमे थे। उन्हें किसी ने नोटिस नहीं किया और ना कोई तवज्जो। फाइनल में किसी को उनसे कोई उम्मीद नहीं थी।लेकिन कुछ देर बाद ही फाइनल में उन्होंने सभी प्रतिभागियों को पीछे छोड़कर जवर्ण पदक जीत लिया था और जिसे कुछ समय पहले उपेक्षित किया गया अब वही सबके आकर्षण का केंद्र बिंदु बन चुके थे। आपको कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए। समय कभी भी बदल सकता है।


Friday 6 August 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी_14




06 अगस्त 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी

स्पर्द्धाओं का 14वां दिन


ज़िन्दगी घटनाओं का कोलाज है। भावनाओं का इंद्रधनुष  है। ज़िन्दगी हर दिन अलग तरह से घटित होती है और हर दिन उसमें भावनाओं का अलग  रंग भरता है। औकेर ये भी कि ज़िन्दगी एक ही दिन में अलग अलग तरह से घटित होती है और एक ही दिन में भावनाओं के अलग अलग रंग उसमें भरते हैं। और क्योंकि खेलों में जिंदगी घटित होती है तो खेल भी हर रोज  इमोशंस के इंद्रधनुष से सजते हैं। तो आज भी टोक्यो में भारत के लिए ज़्यादा उदासी का दिन और  थोड़ी सी खुशी का दिन। कुश्ती और हॉकी ने उदासी का रंग भरा तो गोल्फ ने उम्मीद का। और एथलेटिक्स बेरंग रहा आज भी।

आज भारत ने अपने अभियान की शुरुआत हॉकी के कांस्य पदक मुकाबले से की। मुकाबला था रियो ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता टीम ग्रेट ब्रिटेन से। लेकिन कोई कोई दिन आपका नहीं होता। वो आज का दिन था शायद। लड़कियों ने खूब लड़ा पर हार गईं। ऐसी हार आपमें निराशा पैदा नहीं बल्कि भविष्य के लिए उम्मीद जगाती है। वे मैच हारी पर दिल जीता। पहले क्वार्टर में कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। लेकिन दूसरे क्वार्टर एलिना रायेर और साराह रॉबर्ट्स ने गोल कर ब्रिटेन को 2-0 से आगे कर दिया। अब भारत की बारी थी और भारत ने ताबड़तोड़ तीन गोलकर दूसरा क्वार्टर अपने पक्ष में 3-2 के स्कोर पर समाप्त किया। इंग्लैंड ने तीसरे क्वार्टर में गोलकर स्कोर 3-3  बराबर किया। चौथे क्वार्टर में एक और गोल कर इंग्लैंड ने मैच जीत लिया और कांस्य पदक भी। भारत कांस्य पदक से चूक गया। बाद में खेले गए फाइनल मैच में नीदरलैंड ने अर्जेंटीना को हराकर स्वर्ण पदक जीता । इस मैच के चारों गोल पेनाल्टी कॉर्नर से किए गए।

आज कुश्ती में भी भारत का दिन अच्छा नहीं रहा। सीमा बिस्ला आज महिलाओं की 50 किलोग्राम फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भाग ले रही थीं। वे पहले ही चक्र में ट्यूनीशिया की सारा हमदी से 01-03 से हार गईं। भारत की कुश्ती की सबसे बड़ी उम्मीद और स्टार रेसलर बजरंग पुनिया भी आज मैट्स पर थे ।वे पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल स्पर्धा में प्रतिभाग कर रहे थे। उन्होंने अच्छी शरुआत की और पहले राउंड में कज़ाकिस्तान के ए. अकमातालीव को लगभग बराबरी के मुकाबले में हराया। स्कोर 3-3 रहा। पर अंतिम अंक अर्जित करने के कारण  पुनिया जीत गए। उसके बाद क्वार्टर फाइनल में ईरान के मुर्तजा गियासी को चित कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया पर यहां अज़रबैजान के हाजी अलियेव से 5-12 उनको से हार गए। अब कल वे कांस्य पदक के लिए रूस के जी रासिदोव से होगा।

एथलेटिक्स में आज भारत की प्रियंका गोस्वामी और भावना जाट ट्रैक पर थीं। वे महिलाओं की 20 किलोमीटर पैदल चाल में भाग ले रही थीं। वे  01 घंटा,32 मिनट व 36 सेकंड का समय निकाल कर 17वें स्थान पर रहीं। प्रियंका ने फरवरी में रांची में हुए राष्ट्रीय रेस वाक में  01 घंटा 28 मिनट 45 सेकंड का नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाते हुए टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया था। अगर इस प्रदर्शन को दोहरा देतीं तो स्वर्ण उनके नाम होता। दूसरी भारतीय प्रतिभागी भावना जाट 01 घंटे 37 मिनट और 38 सेकंड का समय लेकर 32वें स्थान पर रहीं। इस स्पर्धा  का स्वर्ण इटली की ए. पालमिसानो ने 01 घंटा,29 मिनट और 12 सेकंड का समय लेकर जीता। रजत पदक कोलंबिया की एस. एरिनास ने और कांस्य पदक चीन की होंग लियू ने जीता। पुरुषों की 50 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व गुरप्रीत सिंह कर रहे थे। लेकिन गरम और उमस भरे मौसम में क्रेम्प्स के कारण  वे ये स्पर्धा पूरी नहीं कर सके और 35 किलोमीटर के बाद स्पर्धा से बाहर हो गए। पोलैंड के डी. तोमाला ने जीती। उन्होंने 03 घंटे, 50 मिनट और 08 सेकंड का समय लिया। जर्मनी के जे.हिल्बर्ट ने रजत पदक और कनाडा के ई.डनफी ने जीता। 

पुरुषों की 4×400मीटर दौड़ में  अमोज जैकब,अरोकिया राजीव,निर्मल टॉम और मुहम्मद अनस की भारतीय टीम पहले राउंड की हीट 02 में 3मिनट और 0.25 सेकंड का समय लेकर चौथे स्थान पर रहे और फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सके। यहां उन्होंने 03मिनट और 00.91 सेकंड को तोड़कर  ना केवल नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया बल्कि एशियन रिकॉर्ड भी बनाया।


कासुमिगासेकी कंट्री क्लब में चल रही गोल्फ स्पर्धा में तीसरे राउंड में भी अदिति अशोक का शानदार प्रदर्शन जारी है। वे पदक की दौड़ में बनी हुई हैं। दूसरे राउंड के बाद 12 अंडर 201 स्कोर के साथ अब वे अकेले दूसरे स्थान पर हैं। पहले स्थान पर विश्व नंबर एक अमेरिका की नैली कोरडा हैं जिन्हें तीन स्ट्रोक्स की बढ़त हासिल है। जबकि दीक्षा डागर 51वें स्थान पर चल रही हैं।

कुछ और खबरें टोक्यो ओलंपिक से।

  • सबसे पहले टोक्यो के ओलंपिक स्टेडियम में चल रही एथलेटिक्स की। पुरुषों की 4×100 मीटर रिले दौड़ में इटली ने 37.50 सेकंड का समय निकाल कर गोल्ड मैडल जीता। इटली ने इस स्पर्धा का गोल्ड मैडल पहली बार जीता। ब्रिटेन ने रजत और कनाडा ने कांस्य पदक जीता। महिलाओं का इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जैमेका ने 41.02सेकंड के समय मे जीता। रजत अमेरिका ने और कांस्य ब्रिटेन ने जीता।
  • महिलाओं की जेवलिन थ्रो का स्वर्ण पदक चीन की  लियू शियिंग ने स्वर्ण पदक जीता।रजत पोलैंड की मारिया आंद्रेज़िक ने और कांस्य ऑस्ट्रेलिया की ली बारबर ने जीता।
  • महिलाओं की 1500 मीटर दौड़ केन्या की फेथ किपेगोन 3मिनट और 53.11सेकंड का समय निकाल कर जीती। ये नया ओलंपिक रिकॉर्ड है। ब्रिटेन की लौरा म्यूर ने रजत और नीदरलैंड की शिफॉन हसन ने कांस्य पदक जीता। जबकि महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में बहामास की मिलर उइबो ने स्वर्ण पदक जीता जबकि डोमिनिकन रिपब्लिक की मेरिलेडी पोलिनो ने रजत और अमेरिका की एलिसन फेलिक्स ने कांस्य पदक जीता।
  • पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ युगांडा के जोशुआ चेप्टेगे ने 12 मिनट और 58.15 सेकंड  के समय के साथ जीत ली। इस स्पर्धा का रजत कनाडा के मुहम्मद अहमद ने और कांस्य पदक अमेरिका के पॉल कैलिमो ने जीता।
  • बीच वॉलीबॉल में महिलाओं का स्वर्ण पदक अमेरिका की जोडी एप्रिल रॉस और एलिक्स क्लिनमान ने ऑस्ट्रेलिया की जोड़ी डेल सोलर और क्लांसी को 21-13 21-15से हराकर जीत लिया।
  • टेबल टेनिस की पुरुषों की टीम स्पर्धा का फाइनल चीन और जर्मनी के बीच हुआ। चीन ने जर्मनी को 3-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।जापान ने दक्षिण कोरिया को 3-1 से हराकर कांस्य पदक जीता। 
  • महिलाओं की फुटबॉल स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा ने स्वीडन को हराकर जीता। रेगुलर समय में 1-1 गोल से बराबर रहने के बाद फैसला शूटआउट से हुआ। जिसमें कनाडा 3-2 से जीत गया। कांस्य पदक अमेरिका ने जीता।
  • इजू वेलोड्रम में चल रही साइक्लिंग की पुरुष व्यक्तिगत स्प्रिंट स्पर्धा का स्वर्ण पदक नीदरलैंड के हैरी लवरेसेन ने जीता। रान्त पदक जेफरी हूग्लैंड ने  अऊर्ज कांस्य ब्रिटेन के जैक कार्लिन ने जीता।
  • महिलाओं की मेडिसन स्पर्धा ब्रिटेन की लौरा केनी और केटी अर्चिबाल्ड ने स्वर्ण पदक जीता जबकि डेनमार्क की जोड़ी ने रजत और रूस ने कांस्य पदक जीता।
  • रूस के ज़ुर्बेक सिदकोव ने पुरुष फ्रीस्टाइल वेल्टरवेट स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया है। बेलारूस के एम.क़दजी महमेदु ने रजत और अमेरिका काइल डेक और उज्बेकिस्तान के बी.अब्दुरख्मोनोव ने कांस्य पदक जीते।
  • ब्रिटेन की केट फ्रेंच ने महिलाओं की आधुनिक पेंटाथलॉन स्पर्धा जीत ली है। इसका रजत पदक लिथुआनिया की लौरा ने और कांस्य हंगरी की एस कोवक्स ने जीता। इस स्पर्धा में फेंसिंग, शूटिंग,घुड़सवारी,दौड़ और तैराकी शामिल होते हैं।
  • आज महिला बास्केटबॉल के सेमीफाइनल मुकाबले सम्पन्न हुए। अमेरिका ने सर्बिआ का 79-59 अंकों से और जापान ने फ्रांस को 87-71अंकों से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 36 स्वर्ण पदकों सहित 79 पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 31 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 98 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 24 स्वर्ण पदक सहित कुल 51 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत 02 रजत और 03 कांस्य सहित कुल 05 पदकों के साथ पदक तालिका में अब 66वें स्थान पर पहुंच गया है।

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और चलते चलते आज बात टोक्यो ओलंपिक में भाग ले रहे ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की। टोक्यो ओलंपिक में घोषित रूप से कम से कम दो खिलाड़ी ऐसे भाग ले रहे हैं जो ट्रांसजेंडर हैं। इनमें से एक हैं न्यूजीलैंड की लॉरेल हब्बार्ड जो कल महिलाओं की87 किलोग्राम से अधिक भर वर्ग की वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में भाग लेंगी। यहां उल्लेखनीय है कि वे जन्मना पुरुष थीं और 23 वर्ष की अवस्था वे पुरुषों की स्पर्धा में ही भाग लेती थीं। उसके बाद उन्होंने खेलों से अवकाश लिया। उन्होंने दोबारा खेलों में वापसी महिला एथलीट के रूप में की और 2017 में पहली बार कामनवेल्थ  खेलों में पदक जीता। दूसरी ट्रांसजेंडर खिलाड़ी कनाडा की फुटबॉल टीम की खिलाड़ी क्विन हैं। वे जन्मना महिला हैं। वे ओलंपिक में भाग लेने वाली पहली आधिकारिक ट्रांसजेंडर खिलाड़ी हैं। इस बार कनाडा ने महिलाओं की फुटबॉल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता है। वे घोषित रूप से ट्रांसजेंडर के रूप में पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2020 में पहली बार उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था वे ट्रांसजेंडर हैं। वे मिडफील्डर हैं और कनाडा को स्वर्ण पदक दिलाने  में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

निसन्देह ओलंपिक आंदोलन के इतिहास में आधिकारिक रूप से ट्रांसजेंडर्स की स्वीकृति एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये समानता और बंधुत्व की भावना ही ओलंपिक आंदोलन कीओलंपिक खेलों की भावना की जीत है।

हॉकी की वापसी



 ".....मेरे लिए उसका प्रेम शाश्वत था। हमारा ये प्रेम लंदन में फला फूला, हेलसिंकी में हमने शादी की और मेलबोर्न में  हनीमून मनाया। 11 साल के लंबे अरसे के बाद जब एक बार फिर वो मेरे पास आई तो पहले जैसी ही ताज़गी से भरी और आकर्षक थी। इस बार वो मुझे कुआलालंपुर लेकर आई और हम एक बार फिर आसमां पर थे। लेकिन वो एक बार फिर गायब हो गई। इस आश्वासन के साथ कि वो वापस लौटेगी। मैं उसका इंतजार कर रहा हूँ- ओ मेरी परी सरीखी हॉकी.....।" 

                  हॉकी के महान खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर ये अपनी आत्मकथा में लिख रहे थे। हम जानते हैं कि हॉकी के इस प्रेम में वे अकेले नहीं थे। आज भी पूरी एक पीढ़ी है जो उनकी तरह ही हॉकी के अनन्य प्रेम में है। उनकी तरह भले ही उस पीढ़ी के लोगों ने हॉकी ना खेली हो परंतु उसे देखते हुए,उसका अनुसरण करते हुए और उसे जीते हुए ये पीढ़ी बड़ी हुई है और बलबीर सिंह सीनियर की तरह इंतज़ार में थी कि 'परी सरीखी हॉकी' कभी तो लौटेगी। और एक बार फिर हॉकी

               वाया टोक्यो वापस लौट आयी जैसे 1975 में कुआलालंपुर के रास्ते बलबीर की ज़िंदगी में लौटी थी और अपने चाहने वाले करोडों के दिलों में लौटी थी। उसका इस तरह आना मानो आपके बचपन के किसी खूबसूरत क्रश का जीवन की तीसरी बेला में अचानक सामने आ जाना है जिसे देख आप खुशी से किंकर्तव्यविमूढ़ हुए जा रहे हैं।

                  जो लोग प्रेम में हैं या रहे हैं वे जान सकते हैं कि प्रतीक्षा प्रेम की वो सबसे खूबसूरत शय है जो मन को जितना गुदगुदाती है,उतना बेचैन भी करती है। एक प्रतीक्षारत प्रेमी जान सकता है कि प्रतीक्षा से उपजी बेचैनियां इसलिए खूबसूरत होती हैं कि आप अपने वांछित यथार्थ को तसव्वुर में जीते हैं और जीते जाते हैं। तसव्वुर की चीजें अक्सर यथार्थ से बेहतर,कोमल और खूबसूरत होती हैं।

               हॉकी के प्रेम में डूबी ये पूरी पीढ़ी पिछले 41 सालों से उसकी प्रतीक्षा में थी और उसकी बेचैनियों को तसव्वुर में जी रही थी। ये एक लंबी प्रतीक्षा थी। इतनी लंबी कि बचपन और किशोरवय की उस संधिबेला की कनपटी अब चांदी सी सफेद होने लगी है या हो चुकी है।

              ये 41 साल लंबी नहीं बल्कि उससे कहीं ज़्यादा 45 साल लंबी प्रतीक्षा थी। दरअसल हम उसकी गणना 1980 से मास्को ओलंपिक करते हैं। लेकिन वो तो 1976 में मॉन्ट्रियल ओलंपिक से गायब हो चुकी थी। 1980 की स्वर्णिम आभा दरअसल आभासी थी। वो सोने की नहीं पीतल की चमक थी। पश्चिमी देशों के बहिष्कार के कारण हॉकी की बड़ी शक्तियां वहां थी ही नहीं। 6 दोयम टीमों में भी बमुश्किल आप जीत पाए थे। 


               आप इसकी क्रोनोलॉजी को समझिए। 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में हम तीसरे नंबर थे। 1975 कुआलालंपुर में विश्व कप जीतते हैं। लेकिन अगले साल ही 1976 में मॉन्ट्रियल में लुढ़क कर 7वें स्थान पर आ जाते हैं। हॉकी हमसे लगातार दूर होती जाती है। और 2008 में बीजिंग ओलंपिक के आते आते वो हमारी आंखों से पूरी तरह ओझल हो जाती है,विस्मृत हो जाती है। हम बीजिंग के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाते। एक चक्र पूरा होता है। 1928 में एम्स्टर्डम में गोल्ड से 2008 बीजिंग में अनुपस्थिति तक। यहां से चक्र उल्टा घूमता है। 2012 लंदन में 12वां, 2016 रियो में 8वां और 2021 टोक्यो में तीसरा स्थान।

              ये आपके आत्ममंथन का बायस है कि जिसे आप दिलो जान से चाहते हैं, टूटकर प्यार करते हैं और राष्ट्रीय खेल का दर्जा देकर अपने माथे बिठाते हैं तब भी वो आपसे दूर होती जाती है और आप असहाय से उसे दूर जाते हुए बेबस देखते जाते हैं।

                   दरअसल ये आपकी गलती थी। आप समय के बहाव को रोकना चाहते थे और हॉकी थी कि समय के साथ बहना चाहती थी,समय के साथ कदमताल करना चाहती थी। वो आधुनिक होना चाहती थी और आप थे कि उसे वहीं रोक देना चाहते थे। वो  पश्चिमोन्मुखी हो जाती है। पश्चिम के तौर तरीके उसे लुभाने लगते हैं। वहां की तेजी और ताकत लुभाती है और साथ ही कृत्रिमता भी। कृत्रिम एस्ट्रो टर्फ पर गति और ताकत बहुत फबते हैं और हॉकी है कि उस चकाचौंध  पर फिदा हो हो जाती है। अब वो घास और मिट्टी के मैदान को देखकर नाक-भौं सिकोड़ने लगती है। अब उसे आपकी कलात्मकता नही रुचती,वो तकनीक से प्रभावित होती है। आप उस परिवर्तन को पहले तो देख नहीं पाते और जब देख भी लेते हो तो स्वीकार नहीं करते। आप आगे के बजाए पीछे की और देखते हो। आप उसे प्यार तो करते हो पर उसे चेरी की तरह रखना चाहते हो। आप खुद के तौर तरीके नहीं बदलना चाहते और उसे बदलने से रोक देना चाहते हो।  इतना हो तो भी सब्र कर ले। आप बीसवीं सदी में 18वीं सदी की तरह काम करते हो। बजाय इसके कि आप उसकी चाहतों को समझो आप उस पर जागीर की तरह आधिपत्य जमाना चाहते हो। आपस में लड़ते हो और उसकी पूरी तरह उपेक्षा कर देते हो। 

                ज़ब तक आप ये समझो कि वो आपसे दूर जा चुकी है तो आप अपने को बदलना शुरू करते हो। लेकिन बदलाव को लेकर अभी आप उपापोह की स्थिति में हो। आपको अभी भी पुराने तौर तरीकों पर विश्वास है। इस उपापोह और आपकी सीमाओं के कारण परिवर्तन वांछित तरीके से और वांछित तेजी से नहीं कर पाते। इस बीच वो आपसे इतनी दूर जा चुकी होती है कि आंखों से ओझल हो जाती है।

                तब जाकर आपकी नींद टूटती है। आपकी खुमारी उतरती है। अब आप आमूलचूल परिवर्तन के लिए तैयार होते हो। आप उसे अपनी और खींचने के लिए गति ,पावर और तकनीक अपनाते हो। कोचिंग के तौर तरीके बदलते हो। बाज़ार की ज़रूरत के हिसाब से खुद को ढलते हो। और लीग सिस्टम लाते हो। अपने यहां भी पश्चिमी खिलाड़ियों के एक्सपोज़र देने का वादा करते हो। और उसमें धन का आकर्षण पैदा करते हो। अंततः आपके प्रयास सफल होते है और तब कहीं जाकर आप उसे वापस ला पाने में समर्थ होते हो।

              आप हॉकी की क्रिकेट से तुलना कीजिए। आप हॉकी का 1975 में विश्व कप जीतते हो। पर उसमें हो रहे परिवर्तनों की आहट नहीं सुन पाते और इसीलिए उसमें तीव्र उतार आता है। 1983 में क्रिकेट का विश्व कप जीतते है। वे उसमें आ रहे परिवर्तनों को बहुत शीघ्रता से और सहजता से अपनाते हैं और उठान पर होते हैं। आखिर इन दो खेलों की विपरीत प्रवृत्तियों का कारण क्या होता है। दरअसल तमाम कारणों के अलावा सबसे बड़ा कारण एक व्यक्ति होता है। इसका नाम होता है जगमोहन डालमिया। वे एक उद्योगपति थे। वे बीसीसीआई अध्यक्ष बनते हैं और उसके प्रबंधन में कॉरपोरेट कल्चर का प्रवेश कराते हैं और बहुत ही पेशेवर ढंग से वित्तीय प्रबंधन करते हैं। देखते ही देखते बोर्ड सबसे अमीर बोर्ड बन जाता है और ताकतवर भी। अब क्रिकेट में पैसा आता है और उसी अनुपात में क्रिकेट प्रगति करता है।

दरअसल हॉकी को भी एक डालमिया की ज़रूरत है।

             हॉकी संघ पिछले कुछ सालों से अधिक सक्रिय हुआ और हॉकी को बढ़ाने हर संभव प्रयास कर रहा है। निसन्देह इसमें अंतर्राष्ट्रीय हॉकी संघ भी बहुत सहयोग कर रहा है। पिछले कुछ सालों से एक और व्यक्ति है जिसने इसमें दखल दिया है। ये उड़ीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हैं। इस मामले में उनका दृष्टिकोण साफ है। डालमिया ने कॉर्पोरेट कल्चर क्रिकेट में लाई। पटनायक भी पैसे की अहमियत समझते हैं लेकिन उनका आधारभूत ढांचे और सुविधाओं के विकास पर ज़ोर है। ये दरअसल एक राजनेता और एक उद्योगपति होने का अंतर है। 2018 में जब सहारा ने अपनी क्राइसिस के चलते हॉकी इंडिया की स्पॉन्सरशिप से हाथ खींचा तो उड़ीशा सरकार ने हॉकी इंडिया से  5 सालों का 150 करोड़ रुपये का करार किया और पुरुष महिला और  जूनियर टीम की स्पॉन्सरशिप दी। इसके अलावा भी उड़ीसा सरकार ना केवल हॉकी को बल्कि खेलों के समुचित विकास के काम कर रही है। उसने 2018 में टाटा ग्रुप के साथ भुवनेश्वर में हॉकी हाई परफॉर्मेन्स सेंटर स्थापित किया ताकि विश्व स्तरीय खिलाड़ी बनाए जा सकें। और जमशेदपुर में देश का सबसे हॉकी स्टेडियम भी बना रही है। ऐसे समय में जब कोरोना महामारी से उपजे वित्तीय संकट के चलते केंद्र सरकार सहित अनेक राज्य सरकारों ने खेलों का बजट कम किया है,वहीं उड़ीशा सरकार ने इस साल खेलों का बजट 250 करोड़  का रखा जिसे अगले साल 350 करोड़ करने का वादा किया है। पिछले दिनों भारत में जितनी भी बड़ी हॉकी प्रतियोगिताएं हुई उन सब की मेजबानी उड़ीशा ने ही की। इनमें2014 की चैंपियन्स ट्रॉफी, 2017 में हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल और विश्व कप 2018 हैं और 2023 विश्व कप भी यहीं आयोजित किया जाएगा।


                ये देखना रोचक होगा कि नवीन पटनायक हॉकी के डालमिया बन पाते हैं या नहीं। पर ये निश्चित है कि टोक्यो में भारत में शानदार हॉकी खेली बावजूद इसके कि वे ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम से हारे। और भारतीय हॉकी की पुनर्वापसी के लिए आज के मैच से बेहतर मैच नहीं हो सकता था। 1-3 से पिछड़ने के बावजूद भारत ने शानदार वापसी की और 5-4 से मैच जीता। इस मैच में वो सब कुछ था जो आधुनिक हॉकी में होने की अपेक्षा की जाती है या की जा सकती है। तभी अशोक कुमार कहते हैं कि ये एक सम्पूर्ण मैच था  जिसे हॉकी कोच आगे रेफेरेंस के तौर पर अपने पास पास रखेंगे।

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फिलहाल तो भारत की वापसी और कांस्य पदक जीतने की बधाई। और ये देखना भी रोचक होगी कि हॉकी की ये वापसी कितनी टिकाऊ होती है।


टोक्यो ओलंपिक डायरी_13

 



05 अगस्त 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी

स्पर्द्धाओं का 13वां दिन


      बहुत बार ऐसा होता है कि एक छोटी सी इच्छा पूरी ना होने से और लंबे समय तक उसका इंतजार बने रहने से वो हमारी सबसे बड़ी चाहना बन जाती है। वो इतना बड़ा आकार ग्रहण कर लेती हैं कि उसके सामने बड़ी से बड़ी इच्छाएं बौनी हो जाती हैं। यहां तक कि दूसरी बड़ी उपलब्धियां भी उस  चाहना को खत्म या रिप्लेस नहीं कर पातीं।  हॉकी की हमारी एक गौरवशाली विरासत थी जिसे हम संभाल नहीं सके। उसे संभालने के प्रयास में मिली  एक जीत बाकी सारी जीतों को किस तरह आच्छादित कर लेती है, ये हॉकी में आज की जीत बताती है।

आज भारत ने टोक्यो में अपने अभियान की अब तक की सबसे शानदार शुरुआत की। आज पुरूष हॉकी का कांस्य पदक के लिए भारत का जर्मनी की टीम से मुकाबला था। एक बहुत ही रोमांचक और संघर्षपूर्ण मैच में भारत ने जर्मनी को 5-4 से हरा दिया और कांस्य पदक जीत लिया। जिस खेल में आपने 08 स्वर्ण पदक जीते हों उसमें अगर देखा जाए तो कांसे का पदक जीत लेना बड़ी बात नहीं होती। लेकिन किसी जीत का महत्व इस बात से निर्धारित नहीं होता कि तमगे का रंग क्या है बल्कि इस बात से होता है वे तमगे किस समय और परिस्थितियों में जीते गए हैं। ये 41 साल लंबे इंतजार का अंत था। ये पुराने गौरव के एक अंश को पुनः प्रतिष्ठापित कर देना था। ये ध्यानचंद की विरासत को स्थापित करने का प्रयास था और राष्ट्रीय खेल के खोए गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास था। आज का मैच खेल की ऊंचाइयों को छू रहा था। इसमें वो सबकुछ था जो आज की हॉकी में लोग देखना चाहते हैं। अशोक कुमार कहते हैं कि ये एक ऐसा मैच था कि अब से सारे कोच इस मैच की वीडियो रेफरेंस के लिए अपने पास रखेंगे।


         पहला गोल जर्मनी ने किया। खेल शुरू होते ही जर्मनी ने भारत पर 1-0 से बढ़त ले ली। दूसरे क्वॉर्टर के शुरुआत में ही भारत के सिमरनजीत ने गोल दागकर स्कोर बराबर कर लिया। इसके बाद जर्मनी ने भी दूसरा गोल दाग दिया और 2-1 से आगे हो गया। यही नहीं दूसरे क्वॉर्टर के खत्म होने से 6 मिनट पहले जर्मनी ने स्कोर 3-1 कर दिया। भारत इससे हतोत्साहित नहीं हुआ। और दूसरा क्वार्टर खत्म होते होते हार्दिक सिंह और हरमनप्रीत सिंह ने गोल कर भारत को 3-3 की बराबरी दिला दी। तीसरे क्वॉर्टर के तीसरे मिनट में रुपिंदर पाल सिंह ने पेनाल्टी स्ट्रोक पर गोल दागकर भारत को 4-3 से बढ़त दिला दी और फिर सिमरनजीत ने भारत की बढ़त को 5-3 कर दिया। उसके बाद जर्मनी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यहां तक कि आखरी चार मिनट में तो गोलकीपर की जगह एक और खिलाड़ी को उतार कर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की। अंततः भारत ने मुकाबला 5-4 से जीतकर इस ओलंपिक का चौथा पदक अपनी झोली में डाला। एक बार फिर श्रीजेश ने शानदार  रक्षण किया और जीत में अहम योगदान दिया। उम्मीद की जानी चाहिए ये जीत भारतीय हॉकी में नए युग की शुरुआत साबित हो।

             इस स्पर्धा के फाइनल में बेल्जियम और ऑस्ट्रेलिया के बीच भी रोमांचक मैच खेला गया। रेगुलर टाइम  में  1-1 मुकाबला बराबरी पर रहने के कारण पेनाल्टी शूट आउट में बेल्जियम ने ऑस्ट्रेलिया को 3-2 से परास्त कर स्वर्ण पदक जीत जीता।

                   कल जहां कुश्ती में भारतीय पहलवानों ने खुश होने के मौके दिए वहां आज सुबह एक खराब शुरुआत की। पहले अंशु मलिक रेपीचेज में रूस की वेलेरिया कोबालोव से 1-5 से हार गईं और इस स्पर्धा में अंशु की निराशाजनक चुनौती खत्म हुई। कुश्ती में भारत को विनेश फोगाट से बड़ी उम्मीदें थीं। 53 किलोग्राम वर्ग में उन्हें  पहली वरीयता मिली थी। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत भी अच्छी की और पहले राउंड में स्वीडन की सोफिया मैटसन को आसानी से  7-1 अंकों से हराया था। लेकिन अपना क्वार्टर फाइनल मुकाबला रूस की वेनेसा कालाजिनस्काया से 3-9 से हार गईं। और इस तरह उनका इस ओलंपिक का अभियान खत्म हुआ। कुश्ती में आज का सबसे बड़ा आकर्षण ये था क्या रवि कुमार दहिया गोल्ड जीत पाएंगे या नहीं। पर आज वे भी असफल रहे। 57 किलोग्राम बर्फ की इस स्पर्धा के फाइनल में रूस के विश्व चैंपियन जेड. युगेव से कड़ा मुकाबला किया पर 4-7अंकों से हार गए  और रजत पदक जीता। कुश्ती में ओलंपिक में पदक जीतने वाले वे 5वें भारतीय पहलवान हैं। आज कुश्ती में अंतिम चुनौती 86 किलोग्राम में दीपक पुनिया की थी जो कांस्य पदक के लिए सान मोरिनो के माइल्स एमिली से खेल रहे थे । ये एक बहुत ही करीबी और कड़ा मुकाबला था। अंतिम एक मिनट पहले तक दीपक 2-1 अंकों से आगे थे। समाप्ति के 5 सेकंड पूर्व एमिली ने दो अंक जीतकर दीपक को 4-2 अंकों से परास्त कर दीपक को कांस्य पदक से वंचित कर दिया। एमिली को अंतिम दो अंक दिए जाने को भारत ने चैलेंज भी किया पर उसको स्वीकार नहीं किया गया। इस स्पर्द्धा का स्वर्ण पदक अमेरिका के डेविड टेलर के ईरान के हसन यज़दानीचरती को हराकर जीता।


            कासुमिगासेकी कंट्री क्लब में चल रही गोल्फ स्पर्धा में दूसरे राउंड में भी अदिति अशोक का शानदार प्रदर्शन जारी है और वे पदक की दौड़ में बनी हुई हैं। दूसरे राउंड के बाद 09 अंडर 133 स्कोर के साथ डेनमार्क की कोरेट्ज़ मड़सेन और एमिली क्रिस्टीन के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर बनी हुई हैं। पहले स्थान पर विश्व नंबर एक अमेरिका की नैली कोरडा हैं जिन्हें चार स्ट्रोक्स की बढ़त हासिल है।


टोक्यो ओलंपिक से ही कुछ और खबरें।

शुरुआत टोक्यो के ओलंपिक स्टेडियम में चल रही एथलेटिक्स स्पर्द्धाओं से। पुरुषों की ट्रिपल जम्प स्पर्धा पुर्तगाल के पी. पिकार्डो ने 17.98 मीटर लंबी छलांग लगाकर जीत ली है। चीन के वाई.एम.झू ने 17.57 मीटर की छलांग के साथ रजत और बुर्किना फासो के एच. जंगो ने 17.47 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता। 

पुरुषों की शॉटपुट स्पर्धा का स्वर्ण पदक अमेरिका ने नए ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ जीत। उन्होंने 23.30 मीटर की थ्रो की। 22.65 मीटर थ्रो के साथ अमेरिका के ही जे. कोवेक्स ने रजत और 22.47 मीटर की थ्रो के साथ न्यूज़ीलैंड के टी. वाल्श कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा  इटली के एम.स्टानो ने जीती। उन्होंने 01 घंटा 21 मिनट और 05 सेकंड का समय लिया। जापान के के.इकेदा दूसरे स्थान पर और जापान के ही टी. यामानिशि तीसरे स्थान पर रहे। इस स्पर्धा में भारत के तीन खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे थे। संदीप कुमार ने  01 घंटे 25 मिनट और 07 सेकंड में दूरी पूरी की और 23वें स्थान पर रहे। राहुल 47वें स्थान पर और के.टी.इरफान 51वें स्थान पर रहे।

पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़  में जमैका के एच पार्चमेंट ने 13.04 सेकंड में स्वर्ण पदक जीता। अमेरिका के जी. होलोवे ने 13.09 सेकंड के समय के साथ दूसरे और जमैका के आर.लेवी 13.10 सेकंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

अमेरिका की केटी नेगोटे महिलाओं की पोलवॉल्ट स्पर्धा 4.90 मीटर ऊंची छलांग लगाकर जीती। रूस की ए.सिदोरोवा ने 4.85 मीटर के साथ सिल्वर और ब्रिटेन होली ब्रॉडशॉ ने कांस्य पदक जीता।

कनाडा के डेमियन वार्नर ने पुरुषों की डिकेथलॉन स्पर्द्धा का  स्वर्ण,फ्रांस के केविन मेयर ने रजत और ऑस्ट्रेलिया के ऐश मोलोनी ने कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की चार सौ मीटर स्पर्धा बहामास के स्टीवन गार्डिनर ने जीत ली है। कोलंबिया के एंथोनी जामब्रानो ने दूसरा और ग्रेनाडा के किरानी जेम्स ने तीसरा स्थान  प्राप्त किया। उधर महिलाओं की हेप्टाथलॉन स्पर्धा नफी थिएम नीदरलैंड की अनॉक वेटर ने रजत और एमे  ओस्टरवेगेल ने कांस्य पदक जीता।

आज बास्केटबॉल के पुरुषों के सेमीफाइनल मैच खेले गए। पहले मैच में अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया को 97-78 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। अब उनका मुकाबला फ्रांस से होगा जिसने दूसरे सेमीफाइनल में स्लोवेनिया को 90-89 अंकों से हराया।

2019 की विश्व कप विजेता और टोक्यो में महिला फुटबॉल स्पर्धा जीतने की सबसे प्रबल दावेदार अमेरिका की टीम ने सेमीफाइनल में कनाडा के हाथों अप्रत्याशित हार के बाद आज ऑस्ट्रेलिया को 4-3 से हराकर कांस्य पदक जीत लिया। जबकि फाइनल मैच गर्मी के कारण अब बाद में होगा।

चीन की 14 वर्षीया कुआन होंग चान ने 10 मीटर प्लेटफार्म डाइविंग में शानदार प्रदर्शन किया और  3 डाइव में परफेक्ट 10 अंक प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता। वो टोक्यो में चीन की सबसे कम उम्र की एथलीट हैं। इसका रजत पदक  भी चीन की यू ज़ी ने जीता।

चीन की टीम ने महिलाओं की टेबल टेनिस टीम स्पर्धा जापना को हराकर जीत लिया।कांस्य पदक हांगकांग ने जीता।

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 34 स्वर्ण पदकों सहित 74 पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 29 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 91 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 22 स्वर्ण पदक सहित कुल 46 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत 02 रजत और 03 कांस्य सहित कुल 05 पदकों के साथ पदक तालिका में अब 65वें स्थान पर पहुंच गया है।

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और अंत में चलते चलते बात रेफरियों और निर्णायकों की। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आज 57 किलोग्राम कैटेगरी के फाइनल में अगर सही निर्णय होता तो परिणाम कुछ और होता। आज की बाउट में एक बार रूस का पहलवान रेड जोन में गया पर वक पॉइंट रवि को नहीं दिया गया। ऐसे ही एक टैकल पर दो अंक रवि को नहीं दिए गए। अगर ये 3 अंक रवि को दिए गए तो परिणाम शायद अलग होता। ये इसी ओलंपिक का कोई अकेला ऐसा मुकाबला नहीं है जिसमें खराब निर्णय हुआ हो। मेरी कॉम की बाउट में भी एक राउंड हारने और दो राउंड जीतने के बाद भी निर्णय उनके खिलाफ गया। भारत के हॉकी मैचों में भी बहुत खराब अंपायरिंग हुई। ये कहना मुश्किल है कि भारत के खिलाफ खराब निर्णय खास मानसिकता के केकारण आते हैं या मानवीय सीमाओं के कारण होता है। अब टेक्नोलॉजी का समावेश हो गया है और ज़्यादातर खेलों में रेफेरल सिस्टम आ गया है। उसके बावजूद भी खराब अंपायरिंग हो रही है निश्चित ही चिंता की बात है। आपको याद होगा कि एक अंपायर ने सचिन के खिलाफ पूर्वाग्रह के कारण गलत निर्णय दिए हैं। सभी रैफरी और अंपायर आखिरकार मानव ही होते हैं और मानवीय क्षमता की अपनी सीमाएं हैं।अगर ये अपनी इन सीमाओं के कारण गलत और खराब निर्णय होते हैं तो इन्हें खेल का स्वाभाविक और अनिवार्य अंग मानकर इग्नोर किया जा सकता है लेकिन ऐसे निर्णय किसी पूर्वाग्रह के कारण होते हैं तो ये चिंतनीय होना चाहिए।

Wednesday 4 August 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी_12




 04 अगस्त

टोक्यो ओलंपिक

स्पर्द्धा का 12 दिन


आज का दिन भारत के लिए धूप छांव वाला दिन। एक पल धूप एक पल छांव। एक पल खुशी एक पल उदासी। एक पल उम्मीद एक पल नाउम्मीदी। एक मिले जुले एहसास का दिन। एक ऐसा दिन जिसमें जीत की मिठास थी और हार की खटास भी। हाथ में पदक आने की मुस्कुराहट भी थी और हाथ से पदक निकल जाने की उदासी भी। पदक की संभावना बनने की उम्मीद भी जगी और पदक हाथ से फिसलने की निराशा भी फैली।

आज दिन की शानदार शुरुआत हुई। जेवलिन थ्रो में भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा भाग ले रहे थे। और उन्होंने भारतवासियों को खुश होने का मौका दिया और पदक की उम्मीद भी दी। फाइनल राउंड में क्वालीफाई करने के लिए प्रतिभागी को 83.50 मीटर थ्रो या पहले प्रतिभागियों में आना था। नीरज ने अपने पहले ही प्रयास में 86.65 मीटर थ्रो के साथ फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। वे क्वालीफाइंग राउंड में प्रथम स्थान पर रहे। अब पूरी उम्मीद है भारत को एथलेटिक्स का पहला ओलंपिक पदक मिल जाए। इसका फाइनल 07 अगस्त को होगा। इस स्पर्धा में भारत के दूसरे प्रतिभागी शिवपाल सिंह थे। वे 76.40 मीटर की थ्रो के साथ ग्रुप में 12वें स्थान पर रहे और प्रतियोगिता से बाहर हो गए।

आज कुश्ती में भारत के तीन पहलवानों रवि कुमार दाहिया,दीपक पुनिया और अंशु मालिक के भाग्य दांव पर थे। पहलवान कसौटी पर खरे उतरे और शानदार जीत हासिल कर आगे बढ़े।  महिलाओं की 57 किलोग्राम कैटेगरी में आज अंशु मलिक का पहले राउंड में मुकाबला विश्व नंबर 03 बेलारूस की इरिना कुराचिकिना से था। वे इरिना से  2-8 अंकों हार गईं। क्योंकि इरिना फाइनल में पहुंच गई हैं,इसलिए अंशु के पास रेपिचेज के जरिए कांस्य पदक जीतने का अभी मौका है।

लेकिन बाकी दो पहलवान आगे बढ़े। 57 किलोग्राम के फ्रीस्टाइल स्पर्धा में रवि कुमार दहिया ने प्री क्वार्टर फाइनल में कोलंबिया के ऑस्कर एडुआर्डो को टेकनिकल श्रेष्ठता के आधार पर 13-2 अंकों से हराया। उसके बाद क्वार्टर फाइनल में बुल्गारिया के जॉर्जी वोलेंटिनोव  वोंगेलोव को भी टेक्निकल श्रेष्ठता के आधार पर 14-04 अंकों से हराकर सेमीफाइनल में पहुच गए। 

यहां कजाकिस्तान के नूरइस्लाम सानायेव से कड़ा मुकाबला हुआ। 2-1 की प्राम्भिक बढ़त लेने के बाद  वे 2-9 अंकों से पिछड़ गए। लेकिन उन्होंने शानदार कमबैक कर स्कोर 7-9 किया और जब एक मिनट से भी कम समय था तो नूरइस्लाम को चित कर फाइनल में रजत पदक पक्का किया। वे ओलंपिक में पदक जीतने वाले के डी जाधव,सुशील कुमार,योगेश्वर दत्त और साक्षी मलिक के बाद 5वें भारतीय पहलवान होंगे। फाइनल में उनका मुकाबला रूस के ज़ेर उगुएव से होगा।

उसके बाद 86 किलोग्राम फ्रीस्टाइल पुरुष स्पर्धा में दीपक पुनिया भाग ले रहे थे। पहले रॉयन्ड में उन्होंने  नाइजीरिया के इकेरेकेमे  अगिओमोर को टेक्निकल श्रेष्ठता के आधार पर 12-1 अंकों से हराया। फिर क्वार्टर फाइनल में चीन के जुशेन लिन को कड़े मुकाबले में 6-3 उनको से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। यहां उनका मुकाबला डेविड मोरिस टेलर से था लेकिन दीपक उनका सामना नहीं कर पाए और टेक्निकल श्रेष्ठता के आधार पर 0-10 से हार गए। अब वे कांस्य पदक के लिए खेलेंगे। और ऊनसे भी पदक की उम्मीद रहेगी।

आज भारत की लोवलीना बोरगोइन का 69 किलोग्राम वर्ग में सेमीफाइनल मुकाबला वर्तमान विश्व चैंपियन टर्की की बुसेनाज़ सुरमनेली से था। लोवलीना संघर्ष किया परन्तु विश्व चैंपियन के सामने नहीं टिक सकीं और मुकाबला 0-5 से हार गईं। वे अपना कांस्य पदक सेमीफाइनल में प्रवेश करते ही सुरक्षित कर चुकी थीं। और आज का मुकाबला पदक का रंग बदलने के लिए था। फिलहाल उन्हें कांस्य पर संतोष करना पड़ा। वे ओलंपिक में मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली तीसरी खिलाड़ी हैं। इससे पहले 2008 बीजिंग में बिजेन्दर सिंह ने और 2012 लंदन में मेरीकॉम ने कांस्य पदक जीता था।

आज महिला हॉकी के पहले सेमीफाइनल में नीदरलैंड ने इंग्लैंड को 5-1 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। दूसरा सेमीफाइनल भारत और अर्जेंटीना के बीच था। भारत ने एक बार फिर शानदार शुरुआत की। आठवें मिनट में भारत ने पहला पेनाल्टी कॉर्नर हासिल किया और पिछले मैच की तरह गुरजीत ने इस बार भी गेंद को गोल में भेजने में कोई गलती नहीं की। भारत ने 1-0 की बढ़त ले ली। दूसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना ने भारत पर दबाव बनाया और तीन पेनाल्टी कॉर्नर अर्जित किए और तीसरे पेनाल्टी कॉर्नर पर 18वें मिनट में मारिया बारिनोवा ने गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। हाफ टाइम तक स्कोर 1-1 था। तीसरे क्वार्टर में 36 वें मिनट ने एक बार फिर अर्जेंटीना ने पेनाल्टी कॉर्नर लिया और  फिर से कप्तान मारिया ने पेनाल्टी को गोल में बदलकर अर्जेंटीना को 2-1 से आगे कर दिया। और अंत तक यही स्कोर बना रहा। अब भारत का कांस्य पदक के लिए ब्रिटेन से खेलेगी।

गोल्फ में अदिति अशोक ने अच्छी शुरुआत की। वे पहले राउंड के बाद 4 अंडर 67 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर थीं। लेकिन दीक्षा डगर अच्छी शुरुआत नहीं कर सकीं। वे 5 ओवर 76 स्कोर के साथ 56वें स्थान पर हैं।

अब बात टोक्यो के ओलंपिक स्टेडियम में चल रही एथलेटिक्स की। पुरुषों की तरह महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ भी बहुत ही रोमांचक रही। इसे अमेरिका की 21 वर्षीया सिडनी मैकलौघलीन ने 51.46 सेकंड का  समय निकालकर नए विश्व रिकॉर्ड के साथ जीता। उन्होंने जून में बनाए अपने 51.90 सेकंड रिकॉर्ड में सुधार किया। रजत रियो की विजेता और 2019 कि विश्व चैंपियन अमेरिका की दलीलाह मुहम्मद ने जीता जिन्होंने 51.58 सेकंड का अपना  सर्वश्रेष्ठ समय निकाला। उन्होंने भी वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा। कांस्य पदक 52.02 सेकंड के समय के साथ नीदरलैंड फेमके बोल ने जीता। उन्होंने नया यूरोपियन रिकॉर्ड बनाया।

पोलैंड के डब्ल्यू नोविकी ने पुरुषों की हैमर थ्रो स्पर्धा जीती। नॉर्वे के ई.हेंरिकसन ने सिल्वर और पोलैंड के पावेल फजदेक ने ब्रॉन्ज मैडल जीता।

केन्या के इमेनुएल कोरीर ने पुरुषों की 800 मीटर दौड का स्वर्ण,केन्या के ही फर्गुसन रोटिच ने चांदी का और पोलैंड के पैट्रिक डोबेक ने  कांसे का तमगा जीता।

महिलाओं की 3000 मीटर स्टेपलचेज स्पर्धा उगांडा की पेरुथ चेमुताई ने जीत ली। उन्होंने 09 मिनट और 01.45 सेकंड का समय लिया। अमेरिका की  कोर्टनी फ्रेरिच ने रजत पदक और केन्या की  हेविन  कियेंग ने कांस्य पदक जीता। केन्या की विश्व रिकॉर्ड धारी बैट्रिस चेप्कोएच सातवें स्थान पर रहीं

कनाडा के आंद्रे डी ग्रासे ने  पुरुषों की 200 मीटर दौड़  जीती। इसका रजत अमेरिका के केनी बेडनारेक ने और अमेरिका के ही नोह लीलेस ने कांस्य पदक जीता।

आज बास्केटबॉल में महिलाओं के क्वार्टर फाइनल मुकाबले सम्पन्न हुए। इनमें सर्बिया ने चीन को 77-70 अंकों से,अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया को 79-55 से,जापान ने बेल्जियम को 86-85 से और 

फ्रांस ने स्पेन को 67-64अंकों से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

इनोशीमा याच हारबर में चल रही पुरुषों की 470 सेलिंग क्लास स्पर्धा में ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू बेल्च और विल रयान ने स्वर्ण पदक जीता। स्वीडन के एंटोन देल्बर्ग और फ्रेडरिक बेर्गस्ट्रोम ने रजत और स्पेनिश जोड़ी जोरड़ी और निकोलस रोड्रिगेज़  गार्सिया ने कांस्य पदक जीते।

10 किलोमीटर की तैराकी मैराथन स्पर्धा ब्राज़ील की एना मार्सेला कुन्हा ने एक घंटा 59 मिनट और 30.8सेकंड का समय निकालकर जीत ली।वर्तमान चैंपियन नीदरलैंड की शेरोन वां रोवेंडल ने रजत और  ऑस्ट्रेलिया की करीना ली ने कांस्य पदक जीता।

वेटलिफ्टिंग की 109 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग स्पर्धा में जॉर्जिया के लाशा तालाकुल 488 किलोग्राम वजन उठाकर अपना ही विश्व रिकॉर्ड तीन किलोग्राम से बेहतर किया। ईरान के अली दाउदी ने रजत और सीरिया के मान आसा ने कांस्य पदक जीता।

यूक्रेन के झान बेलेनुइक ने पुरुषों की ग्रीको रोमन मिडिलवेट  स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। हंगरी के विक्टर लोरिक्ज़ ने चांदी का और सर्बिया के जुराबी ने कांसे का तमगा हासिल किया।

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 32 स्वर्ण पदकों सहित 70 पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 25 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 79 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 21 स्वर्ण पदक सहित कुल 40 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत एक रजत और दो कांस्य सहित कुल तीन पदकों के साथ पदक तालिका में अब 65वें स्थान पर पहुंच गया है। 

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और चलते चलते बात खेल भावना की। ये पुरुषों की ऊंची कूद प्रतियोगिता की बात है। क़तर के मुताज़ ईसा बरशिम,इटली के जी तांबेरी और बेलारूस के नेदासकू तीनों ने 2.37 मीटर ऊंची कूद लगाई। क्योंकि नेदासकू ने ये ऊंचाई दूसरे प्रयास में क्लियर की,जबकि बरशिम और तांबेरी पहले ही प्रयास में इसे पार करने सफल हो गए थे। तो तीसरे स्थान का फैसला हो गया था जो नेदासकू के हिस्से में आया। अब तांबेरी और बरशिम ने 2.39 मीटर ऊंचाई लांघने का प्रयास किया। इसमें दोनों असफल रहे। अब नियमानुसार स्वर्ण और रजत के लिए 'जम्प ऑफ' से होना था। लेकिन इस समय तक तांबेरी चोटिल हो चुके थे और जम्प ऑफ करने की स्थिति में नहीं थे। यानी उन्हें रजत पदक पर संतोष करना पड़ता। जब बरशिम को ये पता चला तो वे अधिकारियों के पास गए और उन्होंने कहा यदि जम्प ऑफ के लिए दोनों मना कर दें तो क्या दोनों को स्वर्ण पदक दिए जा सकते हैं। अधिकारियों ने हां कर दी। एथलेटिक्स के इतिहास में पहली बार हुआ कि एक ही स्पर्धा में दो स्वर्ण पदक दिए गए और कोई रजत नहीं। ऐसा होते ही तांबेरी दौड़ कर बरशिम की की गोद में चढ़ कर उनसे लिपट गए। ये एक अद्भुत दृश्य की निर्मिति हो रही थी। एक बार फिर साबित हुआ कि खेल सिर्फ हार जीत नहीं होते, प्रतिस्पर्धाएं नहीं होते। ये एक दूसरे के प्रति आदर और सम्मान भी होते है। ये ईमानदार भी होते है। ये आपसी भाई चारा और बंधुत्व की भावना भी होते हैं। और ये कड़ी प्रतिस्पर्द्धा नहीं स्वथ्य प्रतिस्पर्धा होते हैं। यही सच्ची खेल भावना है। यही ओलंपिक खेलों की भावना है।

अलकराज

            ये रविवार की गहराती शाम है। पेरिस में फिलिप कार्टियर अरी ना में फ्रेंच ओपन प्रतियोगिता के पुरुष एकल के फाइनल मैच में 4 घंटे और ...