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Friday, 18 September 2026

जैवलिन थ्रो और दक्षिण पूर्वी एशियाई देश

 


हंगरी के बुडापेस्ट में आयोजित विश्व एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप के दौरान पुरुषों की जैवलिन थ्रो में जीतकर टर्की एयरलाइंस से घर वापसी करते समय श्रीलंका के एथलीट रूमेश थरंगा पथिरागे के जैवलिन टूट जाने की ख़बर खूब चर्चा में है।

इससे याद आया कि दक्षिण पूर्वी एशियाई देश एथलेटिक्स में कहां स्टैंड करते हैं। कुछ साल पहले तक ये देश विश्व एथलेटिक्स परिदृश्य पर कहीं नहीं थे। यदा कदा अपनी उपस्थिति दर्ज़ करा पाते थे। लेकिन एक इवेंट और तीन एथलीटों ने सारा परिदृश्य बदल दिया। ये इवेंट हैं - जैवलिन थ्रो। और एथलीट हैं - नीरज चोपड़ा,अरशद नदीम और रूमेश थरंगा पथिरागे।

सबसे पहले नीरज चोपड़ा आए। वे 2016 में 86.48 मी नए रिकॉर्ड के साथ अंडर ट्वेंटी विश्व चैंपियन बने। 2020 के टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड और 2024 के पेरिस ओलंपिक में सिल्वर जीता। 2023 बुडापेस्ट में विश्व चैंपियन बने और  2022 ज्यूरिख में डायमंड लीग का स्वर्ण जीता। 90 मीटर उनका जिंक्स था जिसे अंततः 2025 में दोहा डायमंड लीग में पार किया और 90.23 मी की अपनी बेस्ट थ्रो की।

उसके बाद अरशद नदीम आए पाकिस्तान से। उन्होंने 2023 की विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर जीता। पेरिस में रिकॉर्ड 92.97 मी के साथ ओलंपिक चैंपियन बने। उनकी ये उपलब्धि इस मायने में उल्लेखनीय है कि उन्हें नीरज चोपड़ा की तरह ना तो उच्च स्तरीय प्रशिक्षण हासिल था और ना ही उपकरण। यहां तक कि वे पेरिस ओलंपिक में क्राउड फंडिंग के जरिए पहुंच सके।

और फिर आए रूमेश थरंगा पथिरागे श्रीलंका से। वे क्रिकेट छोड़कर एथलेटिक्स में आए। वे पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब उभरे जब अगस्त 2025 में भुवनेश्वर में आयोजित 2025 इंडियन ओपन में 86.50 मीटर के थ्रो के साथ नया श्रीलंकाई राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। फिर इस साल ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड जीता। बुडापेस्ट में विश्व अल्टीमेट चैंपियनशिप जीती और ब्रुसेल्स में आयोजित डायमंड लीग जीती। उनका सर्वश्रेष्ठ 92.62 मी है और वे तीनों में सबसे ज़्यादा कंसिस्टेंट हैं। उन्होंने इस साल ही तीन नब्बे प्लस थ्रो की हैं। वे तीनों में सबसे प्रतिभाशाली है।

फिलहाल तो नीरज,नदीम और नए चैंपियन रूमेश विश्व जैवलिन परिदृश्य पर राज कर रहे हैं। 

बस सवाल इतना कि कब तक।



Thursday, 21 September 2023

खेल भावना


 

यूं देखा जाए तो रविवार की रात विश्व एथलेटिक्स प्रतियोगिता की जैवलिन थ्रो स्पर्धा का फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच फाइनल भी था। ये भारत के नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के अरशद नदीम के बीच स्पर्धा थी। इस स्पर्धा में नीरज ने स्वर्ण और नदीम ने रजत जीता। यहां यह बात ध्यान देने वाली है कि नदीम बेहद प्रतिभावान हैं और उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 90+ मीटर है जो नीरज के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ से अधिक है।

लेकिन क्या ही कमाल है कि बेलग्रेड के नेशनल एथलेटिक्स सेंटर पर  क्रिकेट और हॉकी की स्पर्धाओं के उन्मादी माहौल के बरक्स सहयोग,अपनेपन और प्यार के खूबसूरत दृश्य थे। फाइनल थ्रो के बाद वे दोनों प्यार से गले मिले और एक दूसरे के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया। उसके बाद जब फोटो सेशन में नदीम बिना राष्ट्रीय झंडे के अलग खड़े थे,तब नीरज उन्हें अपने साथ लेकर आए और फोटो सेशन पूरा किया। इससे पहले टोक्यो ओलंपिक में नीरज के जैवलिन से नदीम अभ्यास कर रहे थे।

क्या ये कारण है कि सामूहिकता और भीड़ ही उन्माद पैदा करती है जबकि एक अकेला व्यक्ति अधिक विवेकशील होता है। इसीलिए टीम खेल और उनके समर्थक उन्माद फैलाते हैं,जबकि व्यक्तिगत प्रतियोगिताओं में उस तरह का उन्माद नहीं होता। या फिर एथलेटिक्स जैसे खेलों में जहां विश्व स्तर पर भारत और पाक का कम या बहुत कम प्रतिनिधित्व होता है, वहां वो अकेलेपन का भाव आपस में एक जुड़ाव पैदा करता है। या फिर हर व्यक्ति का एक अलग मानसिक गठन होता है जो उसके परिवेश और परिवार से आता है।

नीरज इस जीत के बाद भारत के महानतम एथलीट कहे जा सकते हैं। और इसलिए उनमें  एक 'एटीट्यूड'पैदा हो सकता है। लेकिन ऐसा है नहीं। वे बेहद विनम्र,ज़मीन से जुड़े फोकस्ड खिलाड़ी हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे गोट (आल टाइम ग्रेटेस्ट एथलीट) हैं तो उन्होंने बेहद विनम्रता से कहा 'मुझे नहीं लगता कि मैं महानतम खिलाड़ी हूं। हमेशा कुछ ना कुछ कसर रह जाती है। अभी और ज्यादा इम्प्रूवमेंट करने हैं और काफ़ी कुछ करना है। फिलहाल उसी पर फ़ोकस करूंगा।'

आईपीएल के सट्टेबाजी के चार पैसे आने पर जहां नए से नया क्रिकेटर भी सीना खोले,गले में मोटी मोटी चैन, अंगुलियों में अंगूठी,हाथों में कड़े और पूरे शरीर पर टैटू खुदवाए दंभी 'छक्का छैला' बना फिरता है,वहीं नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ी अपनी एक सफलता के बाद अपने अगले लक्ष्य की और नज़र गड़ाए होते हैं। 

दरअसल महान व्यक्तित्व ऐसे ही विनम्र, सरल और प्यार से भरे होते हैं। नीरज भी ऐसे ही हैं। वे चैंपियन हैं, खिलाड़ी भी और व्यक्ति भी।

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नीरज को मोहब्बत पहुंचे।



नागोया एशियाड:उल्लेखनीय प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कोई भी एक जीत,कोई भी एक पदक जीत लेना मायने रखता है। ये उस टीम या उस एथलीट की योग्यता,प्रतिभा और उसके कठिन पर...