Sunday, 28 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी 12:




अफ्रीका के और अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों ने दुनिया में फुटबॉल खेल और फुटबॉल खेल की दुनिया बदल दी है। भौगोलिक दुश्वारियां, उपनिवेशीय शासन द्वारा छोड़ी गई बदगुमानिया,सैन्य शासकों और तानाशाहों के बदमग्जियां,उनसे छुटकारा पाने के लिए अनवरत गृहयुद्ध और इन सब के चलते घोर अव्यवस्था और भयावह निर्धनता के बीच जीने के लिए दुर्दमनीय जिजीविषा और अंतिम सांस तक हार ना मानने के धैर्य और हौसले की जरूरत होती है। और अफ्रीकी खिलाड़ी जब इन्हीं खूबियों और जीवट के साथ खेल के मैदान में उतरते हैं,तो वे दुनिया के सबसे बेहतरीन एथलीट बन जाते हैं। शायद यही कारण है कि मध्यम और लंबी दूरी के दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली व प्रसिद्ध धावक और दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली फुटबॉलर अफ्रीका से ही आते हैं।

प्रतिभाएं जो डार्क कॉन्टिनेंट रह जाती हैं,उनमें से कुछ के नाम रोशन हो बुलंदियों के आसमान में सितारे से टंक जाते है, बाकी गुमनामियों के अंधेरे में खो जाते हैं। लेकिन उनमें से भी बहुत सारे एक बेहतर जीवन और सुंदर भविष्य का सपना लिए,जीवन का जोखिम उठाए, अपनी धरती से बहुत-बहुत दूर दुनिया के खुशहाल मुल्कों में जा पहुंचते हैं। जीवन के एक नए सफर पर। इनमें से भी कुछ केवल खुशहाल जीवन तक सीमित रह आते हैं और कुछ शोहरत की बलंदी पर जा पहुंचते हैं। ऐसी ही बलंदी पर पहुंचने वाला एक अफ्रीकी सितारा है आइवरी कोस्ट का 19 साल का विंगर यान डियोमोंड़े।

अमेरिका में चल रहे 23वें फीफा कप में 15 जून को फिलाडेल्फिया में आइवरी कोस्ट और इक्वेडोर का मुकाबला था। इसमें आइवरी कोस्ट ने इक्वेडोर को 1-0 से हरा दिया। इस पूरे मैच में यान डियोमोंड़े ने अपनी शानदार ड्रिबल और गति से इक्वेडोर की रक्षापंक्ति को दबाव में रखा। उन्हें 'मैन ऑफ़ द मैच' घोषित किया गया। 19 साल के युवा का ये फीफा विश्व कप में स्वप्निल आगाज़ था। इससे पहले उन्होंने बुंदेसलीगा में आरबी लीपजिग की और से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 13 गोल और 9 असिस्ट की। इस प्रदर्शन के आधार पर उन्हें 'रूकी ऑफ द ईयर' का खिताब भी मिला। अब वे मौजूदा ट्रांसफर विंडो में एक सबसे चर्चित खिलाड़ी हैं जिन्हें लीवरपूल और सेंट जर्मन जैसे फुटबॉल क्लब साइन करना चाहते हैं।

यान डियोमोंड़े का कैरियर इस समय जितना चमकदार है,उससे कहीं अधिक कड़े संघर्ष और कठिनाइयों का उनका यहां तक पहुंचने का सफर रहा है। उनकी इन ऊंचाइयों तक पहुंचने और सफलता की कहानी दरअसल गरीबी,संसाधनों की कमी,परिवार से विछोह,कड़े परिश्रम और संघर्ष की कहानी है। ये कहानी एक बहन के एक अटूट विश्वास को बनाए रखने की कहानी भी है और उससे किए गए वायदे को निभाने की कहानी भी है। ये खुली आंखों से देखे गए सपनों को हकीकत में बदलने की कहानी है।

एक कहानी जो आइवरी कोस्ट के सबसे बड़ी आबादी वाले शहर आबिदजान के गरीब और बाहरी इलाके सिकोजी में सन 2006 से शुरू होती है। जहाँ यान का जन्म होता है और बचपन शहर की भीषण गर्मी और धूल भरी तेज़ हवाओं के बीच कच्ची पक्की सड़कों पर नंगे पैर फुटबॉल की सरगम गाते बीतता है। फुटबॉल एक ऐसा खेल जो गरीब से गरीब की मन की भाषा पढ़ लेता है। एक ऐसा खेल जिसकी लय की भाषा हर कोई सीख लेता है।

एक तरफ यान डियोमोंड़े का फुटबॉल प्रेम और उसकी बहन रोक्सेन का उसकी प्रतिभा में अटूट विश्वास है। तो दूसरी तरफ एक छोटे से घर में 25 सदस्यों के साथ रहवास है। गरीबी है। संसाधनों को अभाव है। पर फुटबॉल का प्रेम ऐसा है कि रात को सबके सो जाने के बाद धीमी आवाज में टीवी पर फुटबॉल देखते हुए फुटबॉल के हुनर को जानने की,सीखने की कोशिश करते बड़ा होता है।

दरअसल वो एक द्वैत को जीते हुए बड़ा हो रहा होता है। एक तरफ कठोर यथार्थ है। दूसरी तरफ रोमानी स्वप्न। लेकिन उसका दृढ़ संकल्प और उसमें उसकी बहन का विश्वास ऐसा है कि रूक्ष यथार्थ भी उसके सपनों को जला नहीं पाता। वो सीआर सेवन का दीवाना है। अपनी जर्सी पर नंबर सात अंकित कर लेता है,पर उसकी स्टाइल है कि दोस्त उसे रॉबर्टो कार्लोस कह कर पुकारते है। पर इससे फर्क क्या ही पड़ना था। दोनों भाई बहन फ्रांस जाने,सीआर सेवन जैसा सबसे बड़ा फुटबॉलर बनने, एक कार, एक बड़ा सा घर और एक लग्जरी जीवन जीने के सपने संजोते रहते हैं जिसमें बहन को कोई चिंता नहीं करनी थी।

उधर वे सपने देखते हुए बड़े हो रहे होते हैं और इधर उनके पिता परिवार का साथ छोड़ देते हैं। वे परिवार को छोड़कर फ्रांस चले जाते हैं। यान डियोमोंड़े का लक्ष्य और दुष्कर हो आता है। लेकिन वो हार नहीं मानता। अब वो घर परिवार से दूर घाना सीमा के समीप एक फुटबॉल अकादमी में प्रवेश लेता है। उस समय उसकी उम्र नौ वर्ष होती है। इस उम्र में परिवार से दूर जाना  आपसे बड़े त्याग की अपेक्षा रखता है। वो ऐसा करने सफल होता है। जीवन की दुश्वारियां वहां भी कम ना थी। वे और उनके साथी अक्सर पेट भरने के लिए खेतों से आलू चुराया करते थे। जिसे वे आज बैंक लूट की संज्ञा देते हैं।

इन्हीं दुश्वारियों में वे फुटबॉल के गुर सीखते बड़े हो रहे थे। और फिर 15 साल की उम्र में उनकी असाधारण प्रतिभा उन्हें यूएस के फ्लोरिडा स्थित डीएमई फुटबॉल अकादमी ले आती है। घर से हजारों किमी दूर जाना और रहना एक किशोर के लिए बहुत कठिन था। यहां बिल्कुल अलग दुनिया थी। उन्हें अंग्रेजी बिल्कुल नहीं आती थी। सांस्कृतिक अलगाव था। लेकिन कोई भी कठिनाई इतनी बड़ी नहीं होने वाली थी जो उन्हें उनके संकल्प से डिगा सके। वे राह में आने वाली हर कठिनाई से और ज्यादा निखरते चले गए। यहां वे एक खिलाड़ी के रूप में ही परिपक्व हो रहे थे,बल्कि एक व्यक्ति के रूप भी अनुभवी हो रहे थे।

अब उन्होंने यूरोप के क्लबों में अपना भविष्य तलाश करने की कोशिश की। उन्होंने बोर्नमाउथ,चेल्सी,रेंजर्स, ओलंपियाकोस और क्रिस्टल पैलेस जैसे क्लबों में ट्रायल दिया और समय बिताया। लेकिन अभी भी कठिनाइयाँ खत्म होने का नाम नहीं ले रही थीं। सब जगह उनकी प्रतिभा की प्रसंशा तो खूब होती लेकिन कोई अनुबंध उन्हें ना मिल पाता। इधर उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई और अंततः उन्हें वापस अपने देश लौटना पड़ा। बिना सफलता के घर लौटना उनके लिए बड़े दुख का वायस था। उनका विश्वास डगमगा रहा था। लेकिन उनकी बहन का उनकी प्रतिभा में अटूट विश्वास था।

और तब जनवरी 2025 में उन्हें स्पेनिश क्लब लेगनेस से उनका करार हुआ। लेकिन उनका करार पूरा होने से पहले ही उनकी बहन का निधन हो गया। ये उनके लिए सबसे बड़ा दुख था। उन्होंने वो बहन खो दी थी जिसने उनकी प्रतिभा को उस समय पहचान लिया था और उस पर आंख मूंदकर विश्वास किया था जब दुनिया भर के कोच,मैनेजर और उनके प्रसंशक उनका नाम तक नहीं जानते थे। लेकिन उन्होंने अपने सबसे बड़े दुख को प्रेरणा में बदल दिया। उसके बाद से उनका हर गोल अपनी बहन के लिए था।

उस बसंत जब उन्होंने एस्पियोनल के खिलाफ अपने पेशेवर करियर का पहला गोल किया तो उनकी आंखों से पानी बरस पड़ा। ये उनकी बहन की याद थी। उन्होंने कहा कि "मेरा सपना था कि मैं उसे खुश और गौरवान्वित करूँ।"

उनकी बहन का जाना उनके लिए उनके एक हिस्से का  अलग हो जाना था। अब उनके लिए खेल के मायने बदल गए हैं। भौतिक सुख उनके लिए अब महत्वहीन हो गए हैं जिसके सपने उन्होंने कभी बहन के साथ देखे थे। अब उनका हर मूव,हर पास,हर गोल बहन की स्मृति बचाए रखने का, उनमें बहन के विश्वास को बनाए रखने का जरिया भर रह गया है।

यान डियोमोंड़े का आबिदजान की डामर वाली कठोर,उष्णता और धूल भरी गलियों से फिलाडेल्फिया के एयरकंडीशंड स्टेडियम और मखमली हरी घास के मैदान तक का सफर एक तिलस्मी कथा सी प्रतीत होती है। वे अब एक फुटबॉल जगत का चमकता सितारा हैं जिसका भविष्य उज्जवल है। 

उनकी सफलता की कहानी युवा फुटबॉलर के लिए प्रेरणास्रोत का काम करती रहेगी। ऐसी अद्भुत अनगिनत कहानियां मिलकर फुटबॉल खेल का महाकाव्य रचती हैं और उसे अधिक सगीतात्मक,खूबसूरत और स्वीकार्य बनाती है।


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