प्रतियोगिता का छठा दिन। चैंपियन टीमों का दिन।उनके शानदार आगाज का दिन। स्टार खिलाड़ियों का दिन। उनके बेहतरीन प्रदर्शन का दिन। गोलों की बरसात का दिन। टीमों का विश्व कप में लंबे अंतराल के बाद वापसी के जश्न का दिन। रिकॉर्ड बनने और और टूटने का दिन। एर्लिंग हालैंड,किलियन म्बाप्पे और मेस्सी के शानदार खेल का दिन । और,और मेस्सी के जादू का दिन।
एक
सबसे पहले मेस्सी का जादू। उन्होंने बताया कि क्यों उन्हें सार्वकालिक महानतम खिलाड़ी कहा जाता है। दिन का तीसरा मैच पिछली चैंपियन अर्जेंटीना का अल्जीरिया से था। इससे पहले अर्जेंटीना विश्व कप बचाने के प्रयास में दो बार अपने पहले ही मैच में हार चुकी थी। लेकिन इस बार टीम में मेस्सी थे और उनके खेल का जादू था। अर्जेंटीना ने 3-0 से अपना ये मैच जीता। ये तीनों गोल मेस्सी के पैर से आए। ये मेस्सी की विश्व कप की पहली और अर्जेंटीना की तरफ से 11वीं हैट्रिक थी।
आज मेस्सी की गति और मूवमेंट कमाल का था। वे अगले सप्ताह 39 साल के हो रहे है। उनकी टीम अब नई रणनीति से खेल रही है। जिसमें उन्हें साथी खिलाड़ियों और कोच का भरपूर सहयोग मिल रहा है।मियामी फुटबॉल क्लब में भी और अर्जेंटीना की टीम में भी। वे उनकी ऊर्जा बचाने के लिए अधिक मेहनत कर रहे हैं। अब मेस्सी मिडफील्ड से नहीं खेल रहे हैं बल्कि विपक्षी हाफ में और विपक्षी बॉक्स के बाहर से खेल रहे हैं। आज उनका पहला गोल बॉक्स से बाहर से आया। बाएं पैर का शॉट दो खिलाड़ियों के बीच से कर्व बनाते हुए गोल के दाहिने कोने में जाल में धंस गया जिसका गोलकीपर के पास कोई जवाब नहीं था। क्या ही दर्शनीय शॉट था ये। दूसरा गोल बहुत आसान था जो उन्होंने गोलकीपर के डिफ्लेशन से मिली गेंद को आसानी से गोल डाल दिया। लेकिन उनका क्या स्वाग था। कितने इत्मीनान से गेंद गोल में सरकाई। ये ये मेस्सी की सहजता और इत्मीनान था कि गोल इतना आसान दिख रहा था। मैच के 76वें मिनट में मेस्सी का तीसरा गोल आया। ये एक शानदार जमीनी शॉट था। इस हैट्रिक के बाद वे अब मिरोसलाव क्लोसे के विश्व कप में सर्वाधिक 16 गोल की बराबरी पर हैं। खेल खत्म होने के बाद उनके कोच लियोनेल स्कालोनी कह रहे थे "लियो के बारे में मेरे पास शब्द नहीं हैं। मैं क्या कहूँ? वह अविश्वसनीय है। फुटबॉल जगत में हर कोई उसे देखना चाहता है और इसका आनंद लेता है।”
मेस्सी के खेल को देखकर अनायास ही मोहिंदर अमरनाथ की याद आती है। हालांकि वे मेस्सी के कद के खिलाड़ी नहीं थे। लेकिन उनकी बेटिंग में कमाल का एलिगेंस था,नफासत थी। उसकी बारबरी कोई क्रिकेट खिलाड़ी नहीं कर सकता। उनके पास कोई भी गेंद खेलने के लिए इतना अधिक समय होता था कि आप गेंद को बल्ले से टकराने का इंतजार करते होते थे। वो ही नफासत उनकी गेंदबाजी में थी। बिल्कुल ऐसा ही एलिगेंस, वैसी ही नफासत मेस्सी के खेल में दिखाई देती है। उनकी गति में एक लय है। एलिगेंस है। उनके पास गेंद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय होता है,फिर चाहे उन्हें पास करना हो या गोल पर अटेम्प्ट करना हो। यही उनके खेल को दर्शनीय बनता है। एकदम एफर्टलेस। आज के तीनों गोल ऐसे ही थे।
दरअसल कुछ लोगों को उम्र सूट करती है। ढलती उम्र उन्हें अधिक आकर्षक,अधिक ऊर्जावान और अधिक प्रतिभाशाली बनाती है। फिर वे फिर रोजर फेडरर हो,नोवाक जोकोविच हो, लेब्रान जेम्स हो, केविन डूरंट हों या फिर स्टीफन करी हों। और अब मेस्सी भी। 39 साल में क्या ही शानदार खेल रहे हैं। ये उनका छठा विश्व कप है।
दो
फ्रांस की टीम हमेशा से अपने कंपोजीशन के लिए चर्चित रही है। टीम में इस समय 21 खिलाड़ी अफ्रीकी मूल के हैं। फ्रांस की टीम जिस ऊंचाई पर है,उसे मुख्यत इन अश्वेत खिलाड़ियों ने ही बनाया है। फ्रांस की 1998 में विश्व कप की जीत में ज़िनेदिन ज़िदान, पैट्रिक विएरा और मार्सेल देसैली जैसे कई अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों का महत्वपूर्ण योगदान था। 2018 की जीत में भी किलियन म्बाप्पे,पॉल पोग्बा,एन्गोलो काँटे,ब्लेस मटुइडी,उस्मान डेम्बेले,सैमुअल उमटिटी जैसे खिलाड़ियों का योगदान था।
लेकिन टीम के इसी कंपोजिशन को लेकर धुर दक्षिणपंथी टीम की आलोचना करते रहे हैं। 1998 की जीत के बारे में दक्षिणपंथी राजनेता जीन-मैरी ले पेन ने कहा था कि विजयी टीम सही मायने में "फ्रांसीसी" नहीं थी। कतर के 2022 विश्व कप के फाइनल में अर्जेंटीना के हाथों फ्रांस की हार में पेनल्टी चूकने के बाद अश्वेत खिलाड़ी ऑरेलियन चोउमेनी और किंग्सले कोमन को ना केवल नस्लीय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा बल्कि उनकी फ्रांसीसी पहचान पर भी सवाल उठे।
इस बार भी चर्चा में फ्रांसीसी टीम का कंपोजिशन और उनके स्टार खिलाड़ी किलियन म्बाप्पे का प्रदर्शन ही था। फ्रांस 2022 में अर्जेंटीना से हार गया लेकिन किलियन म्बाप्पे ने अपने शानदार खेल से फ्रांस को लगभग जिता ही दिया था। कल किलियन म्बाप्पे ने वहीं से शुरू किया, जहां 2022 में छोड़ा था। उन्होंने सेनेगल पर फ्रांस की जीत में दो गोल दागे। विश्व कप में उनके दागे गए कुल गोल 14 हो गए और उन्होंने मेस्सी को कुछ समय के लिए पीछे छोड़ दिया। ये किलियन म्बाप्पे और फ्रांस की शानदार शुरुआत थी।
तीन
नॉर्वे 1998 के बाद पहली बार विश्व कप में भाग ले रहा था और उसने बहुत ही शानदार तरीके के विश्व कप में वापसी का जश्न मनाया, इराक को 4-1 से हरा कर। नॉर्वे की टीम की दो कारणों से चर्चा थी। एक, गोल मशीन मैनचेस्टर सिटी के स्ट्राइकर अर्लिंग हॉलैंड के कारण। ये उनका पहला विश्व कप था। और उन्होंने अपनी जबरदस्त फॉर्म को यहां भी जारी रखा। उन्होंने दो शानदार गोल कर विश्व कप में अपने करियर के आग़ाज़ का जश्न मनाया। दो, वाइकिंग थीम के लिए। वाइकिंग नॉर्वे का एक मध्यकालीन योद्धा है। सुप्रसिद्ध छायाकार डेविड यारो ने मैच से पहले पूरी टीम को वाइकिंग वेश भूषा में शूट किया जिसमें पूरी टीम वाइकिंग योद्धाओं की तरह पारंपरिक ढाल, तलवारों और कवच में है। टीम प्रबंधन की तरफ से कहा गया कि इस थीम का उद्देश्य टीम में एकता, लचीलेपन और नॉर्वे की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाना है। लेकिन इसकी आलोचना भी खूब हो रही है इस आधार पर कि ये पुरुषवादी और उग्र सोच है। लेकिन ये थीम खूब लोकप्रिय हो रहा है।
चार
ऑस्ट्रिया की टीम ने भी 28 साल बाद विश्व कप में वापसी का जश्न अपनी प्रतिद्वंदी टीम जॉर्डन को 3-1 हरा कर मनाया।
ये दिन एशिया की दो टीमों की हार का दिन भी था। आज इराक और जॉर्डन दोनों ने अपने मैच हारे। इससे पहले किसी भी एशियाई टीम ने इस विश्व कप में कोई मैच नहीं हारा था।
पांच
केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा स्पेन के खिलाफ अपने शानदार खेल के कारण सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहे हैं। फिलहाल इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर की संख्या 10 मिलियन यानी एक करोड़ पहुंच गई है। लेकिन सोशल मीडिया ट्रेंड होने वाले वे अकेले नहीं हैं।
अर्जेंटीना के इंफ्लूएंसर एल्सकार्सो ने उपहास करते हुए अपने फॉलोअर्स से कहा इस विश्व कप में न्यूजीलैंड के राइट बैक टिम पेन के बहुत कम फॉलोअर्स है। उन्हें फॉलो करें। देखते ही देखते उनके फॉलोअर्स की संख्या पांच हज़ार से बढ़कर 58 लाख हो गई। इसका अधिक फायदा उनके कैरियर को हुआ। वे चर्चित हो गए। उनकी कीर्ति कई क्लबों तक पहुंची। चर्चा है वे जल्द ही पैराग्वे के क्लब ओलंपिया से जुड़ने वाले हैं।


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