उरुग्वे के सुप्रसिद्ध लेखक पत्रकार एडुआर्डो गैलियानो फुटबॉल खेल के अनन्य प्रेम में थे। उन्होंने फुटबॉल पर एक अद्भुत किताब लिखी है 'फुटबॉल इन सन एंड शैडो'। ये शायद फुटबॉल पर लिखी सबसे शानदार किताब है। फुटबॉल का महाकाव्य। इसमें फुटबॉल का जुनून,उसका रोमांच,उसका उत्साह और जोश ही नहीं दिखाई देता,बल्कि उसकी कलात्मकता और रागात्मकता की गूंज भी सुनाई देती है। उसमें उन्होंने एक जगह लिखा 'फुटबॉल एक धर्म है, जिसके अपने देवी-देवता और रीति-रिवाज हैं।'
भारत में खेल प्रेमियों के लिए भले ही क्रिकेट धर्म हो,लेकिन ये सच है कि पूरे संसार के खेल प्रेमियों का धर्म फुटबॉल ही है। जाहिरा तौर पर फुटबॉल धर्म है तो उसके असंख्य चाहने वाले अनुयायी भी होंगे जिन्होंने अपनी अपनी पसंद के खिलाड़ियों को देवत्व का आरोपण किया होगा और उनके देश को किसी देवथान की तरह पूजा होगा।
जब एक धर्म हुआ,उसके कोटि कोटि देवता हुए,असंख्य अनुयायी हुए, देवथान हुए, तो कितने ही सारे धर्मोत्सव भी होते ही होंगे न। तो इसका सबसे बड़ा उत्सव हुआ फीफा विश्व कप। फुटबॉल का महाकुंभ। हर चार साल में लगने वाला। इस बार ये कुंभ उत्तरी अमेरिका में।
यूनाइटेड स्टेट्स,कनाडा और मेक्सिको में संयुक्त रूप से आयोजित होने वाला ये विश्व कप सबसे बड़ा आयोजन। फीफा कप का 23वां संस्करण। विश्व भर की कुल 48 टीमें। अब तक की सर्वाधिक।
इन 48 देशों के खिलाड़ी 16 स्थानों के 16 मैदानों पर अपने एक जोड़ी पैर, एक अदद सिर और एक बॉल 'ट्रायोंडा' के साथ अथक परिश्रम से अर्जित स्किल और जादू सरीखे हुनर के प्रदर्शन को बेताब हुए जाते हैं।
हरे भरे मैदान हैरतअंगेज कारनामों के प्रदर्शन का साक्षी बनने के लिए पैरों के जादुगरों के इंतजार से बेज़ार हुए जाते हैं। मैदानों की आउटलाइंस इन कारनामों की सीमा तय करने में व्यस्त हुई जाती हैं। गोलपोस्ट सीना ठोंक कर अपने मेहमानों को अपने हुनर से उन्हें भेदने की चुनौती देते हुए खड़े दीख पड़ते हैं। और स्टेडियमों के स्टैंड हैं कि अपने मेहमानों के स्वागत में पलकें बिछाए आतुर हुए जाते हैं।
एक इंतजार है जो अब खत्म हुआ चाहता है। एक व्हिसल है कि बजा चाहती है और एक पर्दा है महोत्सव का, जो उठा चाहता है।
यहाँ पीठ पर लदी अतीत की सुनहरी स्मृतियां होंगी। मस्तिष्क को मथता वर्तमान का खुरदुरा यथार्थ होगा। और दिल में पैठे भविष्य के रोमानी स्वप्न होंगे।
यहां प्रशिक्षकों की रणनीतियों की बाजीगरी होगी। विज्ञान की निश्चितता होगी। तकनीक की कारगुजारियां होंगी। और इन सब के योग से निखरी खिलाड़ियों की अद्भुत कला की रस वर्षा से सराबोर होते दर्शक होंगे।
अपनी विशिष्ट पहचान लिए विभिन्न रंगों की जर्सियां होंगी। खिलाड़ियों की पहचान बताते पीठ और सीने पर अंक होंगे। और राष्ट्रों की पहचान जताते लहराते रंग बिरंगे परचम होंगे।
यहां जोश होगा। उत्साह होगा। जुनून होगा। रोमांच होगा। खेल मुकाबलों की निश्चितता होगी और परिणामों की अनिश्चितता होगी। जीत की खुशी होगी। पराजय की उदासी भी। आंसू खुशी के भी बहेंगे और दुख के भी।
यहां पराभव की ओर जाते और फीफा वर्ल्ड कप में अंतिम बार भाग लेते उम्रदराज खिलाड़ी होंगे।
अर्जेंटीना के लियोनस मैसी होंगे।
पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो होंगे।
क्रोएशिया के लुका मोड्रिच होंगे
स्कॉटलैंड के गोलकीपर क्रेग गॉर्डन होंगे।
मेक्सिको के गुइलेर्मो ओचोआ होंगे।
बोस्निया और हर्जेगोविना के ईडिन जिको होंगे
और यहां अपनी प्रतिभा की झलक दिखाते भविष्य के उभरते सितारे युवा खिलाड़ी भी होंगे।
यहां मेक्सिको के गिल्बर्टो मोरा होंगे।
स्पेन के यामल होंगे।
जर्मनी के क्रिएटिव लेनार्ट कार्ल होंगे।
सेनेगल के अटैकर इब्राहिम म्बाये होंगे।
मिस्र के हमजा अब्देलकरीम होंगे।
दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए क्लच ईगल होगा। जायु जगुआर होगा। मैपल मूस होगा।
मशहूर संगीतकार डेविड गुएटा और गायक एंड्रिया बोसेली का तैयार किया गीत ' डीएनए ' की स्वरलहरिया दिलों की धड़कन बढ़ाने के लिए फ़िज़ा में तैर रही होंगी। तो कोलंबियाई सुपरस्टार शकीरा और बर्ना बॉय का ' दाई दाई ' गीत आपके उत्साहवर्धन के स्टूडियों में गूंज रहे होंगे। इन पर थिरकते खिलाड़ी भी होंगे और दर्शक भी।
यहां राष्ट्र तो उपस्थित होंगे ही बल्कि पूरे के पूरे महाद्वीप अपनी विशिष्ट शैली के साथ उपस्थित होंगे। आर्यन प्रजाति और दुनिया में सर्वश्रेष्ठ होने का बोध लिए शारीरिक बनावट में लंबे,शक्तिशाली पावर गेम का नियंता यूरोप होगा। साम्यवाद के बैनर तले बना मानस और कारीगरों वाला हुनर लिए कलात्मक खेल दिखाता दक्षिण अमेरिका होगा। कठिन और दुरूह भूगोल,निर्धनता, आर्थिक बदहाली और दुनिया के भीषण गृह युद्धों से उद्भूत कठिनतम परिस्थितियों से पाई जिजीविषा वाला, कभी हार ना मानने का अफ्रीकी संघर्ष होगा। गरम और उमस भरी जलवायु से उत्पन्न अलसाया सा, धीमा सा एशिया होगा। और अपने अकड़ और हेकड़ी से भरा स्वभाव और रफ टफ खेल लिए उत्तरी अमेरिका भी होगा।
यहां अपनी टीम के लिए विभिन्न मूल,जाति, प्रजाति,संस्कृतियों और देशों के भेदभाव भुलाता सांस्कृतिक समभाव होगा। एकता होगी। भाई चारा होगा। यहां अपनी टीमों के समर्थन में उग्र राष्ट्रवाद,झगड़े ,दंगे और बैर, वैमनस्य भी होगा।
यहां केवल खेल भर नहीं होगा। फुटबॉल भर भी नहीं होगा। बल्कि यहां राजनीति होगी। कूटनीति होगी। अर्थव्यवस्था होगी। शिद्दत के साथ बाज़ार खड़ा होगा। सॉफ्ट पावर होगी। अधिकाधिक समावेशी खेल और समाज बनाने के उद्देश्य से 32 के बजाय 48 टीमें होंगी। और ग्रीनलैंड और तमाम मुद्दों के मद्देनजर बायकॉट के प्रयास और अपीलें भी होंगी।
इस आयोजन के कारण पर्यावरण का पहुँचते नुक़सान का मुद्दा उपस्थित होगा। कड़े वीजा और आव्रजन नियमों के कारण समर्थकों के अमेरिका में प्रवेश का विरोध होगा। महंगे टिकटों की मार से प्रभावित खेल प्रेमी होंगे। अमेरिका और मेक्सिको में चरमपंथियों से सुरक्षा का सवाल मुंह बाए खड़ा होगा।
सोमालिया के शीर्ष फीफा फुटबॉल रेफरी उमर अब्दुलकादिर अर्टान को आने से रोकने वाला असंवेदनशील अमेरिकी प्रशासन सवालों के कटघरे में खड़ा होगा। और अपने तीनों लीग मैच अमेरिका में खेलने वाली ईरान की टीम को अमेरिका में ना रुकने देने वाला धृष्ट और बदगुमान राष्ट्रध्यक्ष भी होगा।
फुटबॉल का जुनून होगा। इन सब के बीच फुटबॉल की श्रेष्ठता के लिए 104 मुकाबले होंगे। और एक चैंपियन होगा।
यानी कि फुटबॉल खेल के भीतर एक पूरी की पूरी भरी पूरी दुनिया समाई होगी।
हां भारत में इस आयोजन के देखने के लिए जी टीवी
नए नए लॉन्च हुए स्पोर्ट्स चैनल होंगे। और इसे देखने के लिए 799 रुपये का एक रिचार्ज होगा।
और क्या होगा?
अपने देवता मेस्सी और देवथान अर्जेंटीना की जीत की कामना लिए
विकल्प के तौर पर पेले और गरींचा की थाती के लिए और नेमार के लिए ब्राजील की जीत की कामना लिए
और तीसरे विकल्प के तौर पर लीजेंड रोनाल्डो की विदाई के लिए पुर्तगाल की जीत की कामना लिए
हम भी मौजूद होंगे।



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