फीफा विश्व कप 2026 का ग्यारहवां दिन। कल भी संघर्षपूर्ण मुकाबले। शानदार जीत भी और चकित कर देने वाले परिणाम भी। इन मुकाबलों के चलते कुछ आगे बढ़ने के रास्ते तय हुए। कुछ की वापसी सुनिश्चित हुई। तो कुछ के भविष्य अधर में लटक गए। मैदान में खिलाड़ियों के संघर्ष और स्टेडियम में दर्शकों की मैदान में चल रही गतिविधियों से संगति के रंग बिखरते रहे। हर्ष-विषाद,आस-निराश, होनी-अनहोनी के बीच झूलते खिलाड़ी और उनके समर्थक दिन का हासिल। और इन सब के केंद्र में था फुटबॉल का खेल और उसके विश्व कप का ग्यारहवां दिन।
एक
स्पेन ने पिछले मैच की निराशा को झटका और उम्मीद का दामन थाम खेल की लय को पकड़ा। और फिर लय को टूटने ना दिया। पिछले मैच में स्पेन की टीम पहली बार विश्व कप में क्वालीफाई करने वाली एक छोटे से देश की टीम से पार नहीं पा सकी थी। उसे केप वर्डे के साथ मैच 0-0 पर अनिर्णीत समाप्त करना पड़ा था। लेकिन आज सऊदी अरब को 4-0 से हराकर बताया क्यों उसे इस बार के संभावित विजेताओं में बताया जा रहा है।
मैच की शुरुआत में ही लामिन यामाल ने डैनी ओल्मो के शानदार पास पर 10वें मिनट में गोल दागकर स्पेन को बढ़त दिला दी। इस गोल के साथ ही वह स्पेन के विश्व कप इतिहास में सबसे कम उम्र के गोल करने वाले खिलाड़ियों में से एक बन गए। सऊदी अरब के पास स्पेन के आक्रमण का कोई जवाब नहीं था। स्पेन के मिकेल ओयार्ज़ाबल ने 30 वें मिनट में कॉर्नर पर एक और गोल कर बढ़त दुगुनी कर दी। तीन मिनट बाद ही स्पेन ने एक शानदार मूव बनाया और ओयार्ज़ाबल ने एक और गोल कर स्पेन को 3-0 की बढ़त दिला दी।
सऊदी अरब की वापसी की सारी उम्मीदें दोबारा खेल शुरू होने के चार मिनट बाद ही उस समय खत्म हो गईं जब डिफेंडर हसन अल्तम्बक्ती ने गेंद अपने ही गोल में डाल दी और स्कोर स्पेन के पक्ष में 4-0 हो गया। स्पेन की आज की सऊदी अरब पर जीत पहले मैच में केप वर्डे के खिलाफ ड्रॉ के बाद हुई आलोचना का करारा जवाब है। इस जीत के साथ स्पेन चार अंकों के साथ ग्रुप में शीर्ष पर पहुंच गया।
उधर केवल डेढ़ लाख आबादी वाले देश केप वर्डे ने अपने पहले विश्व कप में कल भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उसने दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे के साथ 2-2 से ड्रॉ खेलकर एक और महत्वपूर्ण अंक अर्जित किया। उरुग्वे से ड्रॉ खेलकर केप वर्डे ने बताया कि स्पेन के साथ गोलरहित ड्रॉ खेलना महज इत्तफाक या तुक्का नहीं था। केप वर्डे पूरी टीम भरे पूरे आत्मविश्वास से खेल रही थी।
आज के उनके खेल की विशेषता ये थी कि आज उन्होंने स्पेन के खिलाफ रक्षात्मक खेल के बजाए आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि उनके पास एक बेहतरीन रक्षा पंक्ति ही नहीं,बल्कि एक बेहतर आक्रमण भी है और उन्हें हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। विशेष रूप से उन्होंने काउंटर अटैक से कई शानदार मूव बनाए।
पहले बढ़त केप वर्डे ने ही ली, केविन पिना के गोल से। लेकिन मैक्सी अरौजो और अगस्टिन कैनोबियो ने उरुग्वे के लिए दो गोल कर उरुग्वे को आगे कर दिया। दूसरे हॉफ में हेलियो वारेला ने दूसरा गोलकर केप वर्डे को बराबरी पर ला दिया। वे अंत तक रक्षात्मक नहीं हुए। वे लगातार आक्रमण करते रहे और अंतिम क्षणों तक जीत के लिए खेलते रहे। अंततः मैच बराबरी पर छूटा। केप वर्डे के लिए ये एक और यादगार मैच बन गया
दो
दिन का अप्रत्याशित परिणाम केवल मियामी स्टेडियम में ग्रुप एच के उरुग्वे और केप वर्डे के मध्य खेले गए मैच के परिणाम से ही नहीं आया, बल्कि बी सी प्लेस स्टेडियम वैंकूवर से भी आया। यहां खेले गए ग्रुप जी के एक मैच में मिस्र ने न्यूजीलैंड को 3-1 से हराकर फीफा विश्व कप में अपनी पहली जीत हासिल की।
मैच के पहले हॉफ में न्यूजीलैंड की टीम ने खेल पर प्रभावी नियंत्रण रखा। गेंद पर यथासंभव नियंत्रण रखा और लंबे शॉट लगाए। ओशिनिया टीम के फिन सुरमन ने 15वें मिनट में बैक अहमद फतूह को चकमा देकर एक जोरदार हेडर से गेंद नेट में डाल दी। ये बढ़त न्यूजीलैंड ने पूरे हाफ में कायम रखी। लेकिन मिस्र ने दूसरे हाफ में शानदार वापसी की। 58वें मिनट में मोहम्मद हनी के दाहिनी ओर से आए क्रॉस पर मुस्तफा जिको ने हेडर से गोल करके स्कोर बराबर कर दिया। इसके नौ मिनट बाद आखिरकार सालेह ने दर्शकों की लंबी प्रतीक्षा का अंत किया और उन्हें उत्साह से भर दिया,जब दाहिनी ओर से आगे बढ़ते हुए जिको के साथ वन-टू पास खेलते हुए गेंद को दूर के कोने में डाल दिया। सालेह ने 81वें मिनट में पुनः गोल करने की कोशिश की, लेकिन उनका ये शॉट गोल के ऊपर से निकल गया। इस शॉट के परिणामस्वरूप मिस्र को कॉर्नर मिला। सालेह ने सब्स्टीट्यूट ट्रेज़ेगुएट को पास दिया और उन्होंने डाइव लगाकर हेडर से गोल कर दिया।
मिस्र की टीम अब न्यूजीलैंड को 3-1 से हराकर चार अंकों के साथ ग्रुप शीर्ष पर पहुंच गई है।
ग्रुप जी का दूसरे मैच बेल्जियम और ईरान के बीच गोल रहित ड्रॉ रहा। बेल्जियम ने मैच पर काफी हद तक नियंत्रण बनाए रखा, लेकिन ईरानी गोलकीपर अलीरेज़ा बेइरानवंद ने शानदार प्रदर्शन किया। 66वें मिनट में नाथन न्गोय को रेड कार्ड मिलने के बाद बेल्जियम की मुश्किलें और बढ़ गईं। लेकिन ईरान इस बढ़त का फायदा नहीं उठा सका।
अब बेल्जियम और ईरान दोनों के दो-दो अंक हैं, जबकि न्यूजीलैंड के पास एक अंक है। जबकि मिस्र चार अंकों के साथ शीर्ष पर है। ये ग्रुप पूरी तरह खुला है। ग्रुप स्टेज के मैचों का एक दौर शेष रहते हुए, न तो ग्रुप जी और न ही ग्रुप एच में टीमों के भाग्य का फैसला हुआ है कि कौन आगे बढ़ेगा और कौन वापस जायेगा। ऐसे में सभी आठ टीमों का अभी भी काफी कुछ दांव पर लगा है।
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केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा के लिए विश्व कप यादगार हो गया है। स्पेन के खिलाफ गोलरहित अनिर्णीत खेलने के बाद उरुग्वे के साथ भी 2-2 से अनिर्णीत खेला। इन दोनों ही मैचों में वोजिन्हा का प्रदर्शन लाजवाब रहा है। अपने शानदार प्रदर्शन के बाद वे फुटबॉल प्रेमियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो रहे हैं। विश्व कप से पहले इंस्टा पर उनके 50 हजार से भी कम फॉलोअर थे, जो अब बढ़कर 15.2 मिलियन हो गए हैं। आल टाइम सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले गोलकीपरों की फेहरिस्त में वे अब पांचवें स्थान पर आ गए हैं।
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मेस्सी ने अपने पहले ही मैच में हैट्रिक लगाई और वे क्लोसे के साथ विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। लेकिन इस मैच में उनके द्वारा किया गया एक टैकल विवाद का कारण बन गया है। अल्जीरिया के विरुद्ध खेले गए मैच के 31वें मिनट में मेसी ने अल्जीरिया के कप्तान आईसा मैंडी की पिंडली और एच्लीस टेंडन पर स्टड्स-अप टैकल किया था, जिससे वह ज़मीन पर गिर गए। पोलिश रेफरी शिमोन मार्सिनियाक ने इसे केवल एक सामान्य फाउल दिया और मेसी को पीला या लाल कार्ड नहीं दिखाया। वीएआर ने भी इसे अनदेखा किया। अब इस घटना की अल्जीरियाई फुटबॉल महासंघ ने फीफा से औपचारिक रूप से शिकायत कर दी है कि यह टैकल स्पष्ट रूप से रेड कार्ड के योग्य था।
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और अंत में चलते चलते बात आइवरी कोस्ट के स्टार खिलाड़ी यान डियोमांडे की। 19 वर्षीय डियोमांडे अपने के लिए विश्व कप में शानदार खेल दिखा रहे हैं। जब किसी खिलाड़ी को खेलते हुए देखा जाता है तो उसके खेल को, उसकी योग्यता को,उसकी प्रतिभा को उसकी मैदान में गलतियों और कमियों को लक्षित किया जाता है। यहां तक पहुंचने के उसके संघर्ष,उसकी मेहनत,उसके जीवन की कठिनाइयां,कष्ट, दुश्वारियां और उसकी भावनाएं अलक्षित रह जाती हैं। डियोमांडे अपनी गरीबी और अभावों से संघर्ष कर कड़ी मेहनत के बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं। लेकिन इस संघर्ष में उनका कुछ ऐसा छूटा कि वे संगदिल बन गए। उनकी अपनी सबसे बड़ी प्रेरणास्रोत 15 वर्षीया छोटी बहन की मृत्यु उनकी अनुपस्थिति में हो गई। फिर 17 जून को 'द प्लेयर्स ट्रिब्यून' में अपनी बहन रोक्सेन के लिए मार्मिक और बेहद ईमानदार पत्र लिखा। उन्होंने उसमें लिखा "फुटबॉल के मैदान पर मैं जो कुछ भी करता हूं, वह आपके लिए है," । ये पत्र मन में करुणा की धारा बहा देता है। ये पत्र जरूर पढ़ा जाना चाहिए। एक ऐसा पत्र जैसा कोई दूसरा नहीं लिखा गया।

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