Monday, 22 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी_09

 


फीफा विश्व कप 2026 का दसवां दिन। 

फुटबॉल का सबसे बड़ा महाकुंभ अब रोमांचक दौर में प्रवेश कर रहा है। खिलाड़ी मैदान में पसीना बहा रहे है। खिताबी जंग के लिए खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहा रहे हैं और प्रतियोगिता अधिक रोचक और संघर्षपूर्ण होती जा रही है। जहां फॉरवर्ड गोलों के बहाने कीर्ति का परचम लहरा रहे हैं वहीं गोलची खम ठोककर कर उनको चुनौती दे रहे हैं। जैसे-जैसे नॉकआउट का सफर करीब आ रहा है वैसे वैसे आगे बढ़ाने के लिए रोमांच और संघर्ष चरम पर पहुंच रहा है। 

एक

फीफा विश्व कप के दसवें दिन मैक्सिको के मॉन्टेरी स्टेडियम में ग्रुप एफ का जापान और ट्यूनीशिया के बीच खेला गया दिन का आखिरी मैच कई मायने में महत्वपूर्ण था।  सबसे महत्वपूर्ण तो इसलिए कि ये विश्व कप प्रतियोगिता के इतिहास का 1000वां मैच। इस मैच को जापान की टीम ने ट्यूनीशिया को 4-0 से हराकर एक महत्वपूर्ण मुकाबल जीत लिया और अगले नॉक आउट दौर में लगभग परिपूर्ण पहुंच गई है।

पहले दौर में जापान नीदरलैंड के साथ प्रभावशाली 2-2 के ड्रॉ के यहां पहुंचा था,जबकि ट्यूनीशिया स्वीडन के खिलाफ खराब प्रदर्शन करते हुए 5-1 से हार गया था। ट्यूनीशिया कभी भी ग्रुप स्टेज से आगे नहीं बढ़ पाए हैं और इस हार के बाद इस बार भी वे ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गए।

मैच से पहले सभी की निगाहें ट्यूनीशिया के नए कोच हेर्वे रेनार्ड पर थीं। सब इस बात को जानने के इच्छुक थे कि सबरी लामौची को बर्खास्त करने के बाद चार दिनों के भीतर उन्होंने टीम में रक्षात्मक रूप से क्या सुधार किए हैं।

इस पराजय ने बताया कुछ खास नहीं। जापान ने सिर्फ चार मिनट बाद ही दाइची कामादा के गोल से बढ़त बना ली और पहले हाफ में अपना दबदबा कायम रखा। आधे घंटे के बाद स्ट्राइकर अयासे उएदा के शानदार गोल ने जापान को 2-0 की बढ़त दिला दी। वे शानदार खेल रहे थे।

जापान ने 69वें मिनट में एक और शानदार गोल के साथ स्कोर 3-0 कर दिया। इस बार जुन्या इटो ने गोल दागा। मैच के अंतिम क्षणों में उएदा ने गोल लाइन पर खड़े ट्यूनीशिया के दो डिफेंडरों के ऊपर से हेडर मारकर चौथा गोल दाग दिया। विश्व कप में किसी एशियाई टीम द्वारा बनाए गए गोलों की संख्या अब तक की सबसे अधिक चार गोल है।

जापान में पिछले वर्षों में तमाम प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए और मजबूत टीम बनाई। इस के बावजूद वो विश्व कप में कभी भी राउंड ऑफ 16 से आगे नहीं बढ़ पाया है। इस टीम से इस सूखे को खत्म करने की उम्मीद इसलिए भी बांधती है कि हाजिमे मोरियासु की इस टीम ने पिछले साल अक्टूबर में ब्राजील को हराया था और अभी मार्च में वेम्बले में इंग्लैंड को हराने वाला पहला एशियाई देश बन गया।

हालांकि इस प्रतियोगिता के शुरू होने से पहले ही उनके तीन प्रमुख खिलाड़ियों काओरू मितोमा, ताकुमी मिनामिनो और वतारू एंडो के चोटिल हो जाने से उनके विश्व कप अभियान को धक्का लगा। इसके अलावा पहले मैच में घुटने में चोट लगने के कारण इस मैच में जापान को अपने एक और स्टार खिलाड़ी ताकेफुसा कुबो के बिना खेलना पड़ा। लेकिन उनके बिना भी जापान ने शानदार प्रदर्शन किया। जापान की और से कीटो नाकामुरा ने अप्रत्याशित रूप से शानदार प्रदर्शन करते हुए नीदरलैंड के खिलाफ गोल किया और यहां कमाडा के गोल में असिस्ट किया।

इस जीत के बाद वे राउंड ऑफ 32 की तैयारी कर सकते हैं।

दो

इससे पहले ग्रुप एफ के ही एक अन्य मैच में नीदरलैंड ने जापान के विरुद्ध ड्रॉ मैच की निराशा से उबरते हुए स्वीडन को 5-1 से हराकर शानदार जीत हासिल की।  नीदरलैंड की टीम की ये कहकर आलोचना की जारही थी कि उसका रक्षण तो बहुत मजबूत है लेकिन उनका आक्रमण धारदार नहीं है। लेकिन इस मैच में पांच गोल कर बताया कि उनकी अग्रिम पंक्ति भी शानदार है। इस मैच में डच टीम में उत्साह और आक्रामकता का संगम देखने को मिला।इस टीम ने विजय दुंदुभी बजा दी है।

ब्रायन ब्रोबे के शुरुआती दो गोल और उसके बाद कोडी गाक्पो के दूसरे हाफ में दो और गोल और क्रिसेंसियो समरविले के अंतिम गोल की मदद से नीदरलैंड्स ने ये शानदार जीत हासिल की। स्वीडन की तरफ से एकमात्र गोल खेल के 59वें मिनट में स्थानापन्न खिलाड़ी एंथोनी एलंगा ने किया। पहले मैच में स्वीडन ने ट्यूनीशिया को इतने ही अंतर से हराया था और आत्मविश्वास से भरी थी। लेकिन आज उसका खेल बिखर गया और उसके खिलाड़ी मैदान पर प्रभाव छोड़ने में असफल रहे।

तीन

टोरंटो स्टेडियम में ग्रुप-ई में जर्मनी और आइवरी कोस्ट के बीच एक संघर्षपूर्ण मैच हुआ। इस मैच में जर्मनी ने आधे समय तक एक गोल से पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी करते हुए आइवरी कोस्ट को 2-1 से हरा दिया। 

दोनों टीमों ने आक्रामक शुरुआत की। जर्मनी ने गेंद पर अधिक नियंत्रण रखा और लगातार मौके बनाने की कोशिश की। लेकिन आइवरी कोस्ट की मजबूत रक्षापंक्ति से जर्मनीबेक फॉरवर्ड पार नहीं पा सके। मैच का पहला गोल 30वें मिनट  फ्रेंक कैसी ने किया और आइवरी कोस्ट को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद जर्मनी ने बराबरी के लिए अनेक प्रयास किए पर उसे सफलता नहीं मिली।

दूसरे हाफ में जर्मनी ने की जोरदार वापसी की। जर्मनी के कोच ने जूलियन नागेल्समैन ने दूसरे हाफ में एक अहम बदलाव किया। उन्होंने स्टटगार्ट के फॉरवर्ड डेनिज़ उन्दाव को मैदान पर उतारा। यही वह कदम साबित हुआ जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।। 68वें मिनट में सब्स्टीट्यूट डेनिज उन्दाव ने शानदार गोल दागकर जर्मन टीम को 1-1 की बराबरी दिला दी। इस गोल के बाद मुकाबला और रोमांचक हो गया। लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। अब मुकाबला ड्रॉ होने ही जा रहा था कि इंजरी टाइम में

फेलिक्स एनमेचा के पास पर डेनिज उन्दाव ने शानदार टर्न लेते हुए सटीक शॉट लगाया और गेंद को गोल में पहुंचा दिया। उन्दाव का यह दूसरा गोल था। जर्मनी की टीम अगले दौर के लिए क्वालीफाई कर गई।

चार

कल का सबसे शानदार मुकाबला कंसास सिटी में खेला गया इक्वाडोर और काराकाओ के बीच का मैच था। इस मैच ने केप वर्डे और स्पेन के बीच हुए मैच की याद दिला दी। वो मैच बिना किसी गोल के अनिर्णीत रहा था और इस मैच मैच में केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा ने शानदार प्रदर्शन किया था। ठीक इसी तरह का प्रदर्शन कल काराकाओ ने इक्वाडोर के विरुद्ध किया। ये मैच भी इक्वाडोर के प्रबल दावेदार होने के बावजूद 0-0 से समाप्त हुआ। इसमें भी गोलकीपर एलोय रूम ने अद्भुत प्रदर्शन किया और इक्वाडोर को कोई गोल नहीं करने दिया। इस तरह काराकाओ ने विश्व कप का पहला अंक हासिल किया। रूम ने इक्वाडोर के खिलाड़ियों को गोल करने से रोकने के लिए 15 बचाव किए, जो विश्व कप के इतिहास में एक ही मैच में किए गए दूसरे सबसे अधिक बचाव हैं और अतिरिक्त समय के बिना किसी भी विश्व कप मैच में सबसे अधिक हैं।

इस प्रतियोगिता में इस बार गोलों की झमाझम बरसात हो रही है। इस सीजन में हुए 33वें  मैच में गोलों का शतक बन गया जो पिछले 68 वर्षों में सबसे तेज है। सौंवा गोल नीदरलैंड और स्वीडन के बीच हुए मैच में नीदरलैंड के कोडी गैपको ने किया जो नीदरलैंड का तीसरा गोल था। 1958 के बाद किसी भी विश्व कप में इस बार सबसे कम मैचों में 100 गोल हुए हैं। इस विश्व कप में गोल करने की शुरुआत मेक्सिको के जूलियन क्विनोनेस ने 12 जून को साउथ अफ्रीका के विरुद्ध गोल करके की थी।

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