Thursday, 18 June 2026

फीफा विश्व कप 2026 डायरी ०६ : चैंपियनों का जादू

 

दिन चाहे कोई भी हो,पहले से लेकर अंतिम तक,फुटबॉल प्रेमियों के लिए अच्छे फुटबॉल का आकर्षण कहां कम होता है! ये तो दिन ब दिन बढ़ता जाता है। सातवें दिन भी फुटबॉल का रोमांच,उसकी अनिश्चितता,उसका आकर्षण, कहां कम था।सबसे बड़ा आकर्षण तो रोनाल्डो ही होने वाले थे। उनके पीछे भी तो एक लंबी लाइन लगी थी। ब्रूनो फर्नांडीस, हैरी केन, जूड बेलिंगहैम, लुका मोड्रिक, इवान पेरिसिक, लुइस डियाज़, जेम्स रोड्रिगेज़ और एंटोनी सेमेन्यो भी।

एक

इंग्लैंड ने अपना एकमात्र फीफा विश्वकप 1966 में जीता था।  उसके बाद वो कभी विश्व कप नहीं जीत पाई। लेकिन कमाल ये है कि हर विश्व कप में विश्व कप जीतने की फेवरिट टीमों में शुमार रही है। हैरी केन की अगुवाई वाली इंग्लैंड की टीम इस बार भी सबसे फेवरिट टीमों में से एक है। और कल अपने पहले ग्रुप मैच में इसने दिखाया कि क्यों इसे इस बार की सबसे फेवरिट टीमों में शुमार किया जा रहा है। 

इंग्लैंड के सामने रूस में 2018 में आयोजित विश्वकप की फाइनलिस्ट लुका मॉड्रिच की टीम क्रोशिया थी। इंग्लैंड ने क्रोशिया पर 4-2 से शानदार जीत हासिल की। ये दो बड़ी टीमों के बीच एक संघर्षपूर्ण और रोमांचक मैच था। इस मैच में जीत हासिल कर इंग्लैंड ने बताया कि इस बार वे अपनी जीत के प्रति कितने गंभीर है। निसंदेह थ्री लायंस की जीत के नायक कप्तान हैरी केन ही रहे। पहले दो गोल उन्होंने ही किए। हैरी केन का बायर्न म्यूनिख के साथ ये साल बहुत ही शानदार रहा था। और वो ही फॉर्म उन्होंने यहां जारी रखी।

पहले हाफ में में मैच बराबरी पर छूटा। इंग्लैंड ने दो बार बढ़त ली लेकिन क्रोशिया ने दोनों बार बराबरी कर ली। दूसरे हाफ ने इंग्लैंड की टीम ने आक्रामक रुख दिखाया। मैच शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद जूड बेलिंगहैम ने थ्री लायंस को 3-2 से आगे कर दिया। फिर मार्कस रैशफोर्ड ने 85वें मिनट में गोलकर स्कोर 4-2 कर दिया। इंग्लैंड की यह शानदार शुरुआत है। अगर आप इंग्लैंड की टीम के प्रसंशक है तो अपनी फिंगर क्रॉस रखिए और इंग्लैंड को आगे बढ़ते देखते रहिए।

दो

स्पेन की तरह पुर्तगाल की टीम भी इस बार विश्व कप जीतने की सबसे संभावना वाली टीमों में से एक है। फिर इस टीम का क्रिश्चियनों रोनाल्डो इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वे छठी बार विश्व कप में भाग ले रहे हैं मेस्सी की तरह। निसंदेह वे भी अपने करियर की समाप्ति विश्व कप जीतकर ही करना चाहते होंगे। मेस्सी के शानदार प्रदर्शन के बाद सबकी निगाहें ना केवल पुर्तगाल के बल्कि रोनाल्डो के प्रदर्शन पर भी थीं।

पुर्तगाल का ये मैच अफ्रीकी टीम डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से था। वे 52 साल बाद विश्व कप में खेल रहे थे। 1974 में उन्होंने जेरे नाम की पहचान के साथ विश्व कप में भाग लिया था और सब सहारा अफ्रीका की विश्व कप में भाग लेने वाली पहली टीम थी।

कांगो पर पुर्तगाल की आसान जीत की संभावना थी। जैसे स्पेन की केप वर्डे पर आसान जीत की संभावना की जा रही थी। पर हुआ इसके उलट। ठीक वैसे ही जैसे स्पेन के साथ हुआ। दो ऐसी टीमें जो विश्व रैंकिंग में पहली पांच पायदानों पर हों और जिनकी  फ्रांस के बाद सबसे ज्यादा विश्व कप जीतने की संभावना व्यक्त की जा रही हो,उन्होंने अपने से बहुत कमजोर और बहुत नीचे की रैंकिंग वाली टीमों के साथ ड्रॉ खेला।

अंतर केवल इतना था कि पुर्तगाल और कांगो के बीच मैच 1-1 की समाप्ति पर छूटा जबकि स्पेन और केप वर्डे का मैच गोलरहित था। एक और अंतर था। स्पेन और जीत के बीच केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा थे। जिन्होंने शानदार बचाव किए और रातोंरात स्टार खिलाड़ी बन गए। लेकिन पुर्तगाल का आक्रमण फिनिश लाइन तक आ ही नहीं पाया। कांगो के गोलकीपर को टेस्ट ही नहीं किया जा सका। वोजिन्हा की तरह क्या कांगो के गोलकीपर को कोई जान पाया। स्पेन और पुर्तगाल के आक्रमण में यही अंतर था। 

आक्रमण की शुरुआत पुर्तगाल ने की और छठवें मिनट में ही पेड्रो नेटो के शानदार क्रॉस पर जोआओ नेवेस ने गोल दागकर बढ़त दिला दी। इसके बाद कांगो की टीम रक्षात्मक हो गई और खेल में पकड़ पुर्तगाल ने बना ली। लेकिन उसने खेल धीमा कर दिया। पुर्तगाल की इस सुस्ती का फायदा कांगो ने उठाया और हाफ टाइम से पहले आर्थर मासुअकू के सुंदर पास पर योआने विस्सा ने हेडर से गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया।

दूसरे हाफ में कांगो ने पहले हॉफ से बेहतर खेल दिखाया जबकि पुर्तगाल का आक्रमण बिखर गया। वे ना तो वे कोई सही मूव बना पाये और ना ही गोल। मैच बराबरी पर छूटा और पुर्तगाल ने एक महत्वपूर्ण अंक खोया।

जहां तक रोनाल्डो की बात है,वे बिल्कुल भी अपने रंग में नहीं दिखाई पड़े। वे गेम पर किसी भी तरह का प्रभाव छोड़ने में असफल रहे। वे 90 मिनट के खेल में गोल पर केवल तीन अटेम्प ले पाए और वे तीनों ही टारगेट पर नहीं रहे। 

दरअसल ये दो दिन में दो यूरोपीय बड़ी और शक्तिशाली फुटबॉल टीमों को सफल अफ्रीकी चुनौती थी।

तीन

घाना और पनामा के बीच का मुकाबला दो बड़े अंतर वाली टीमों के बीच का मुकाबला था। ये 34 वीं रैंक का 73 वीं रैंक से मुकाबला था। वैसे भी घाना की टीम ने पिछले छह मुकाबलों में से एक भी नहीं जीता था। उनके कोच कार्लोस क्विरोज तीन महीने पहले ही जुड़े थे। उनकी एकमात्र उम्मीद मैनचेस्टर सिटी के स्टार विंगर एंटोनी सेमेन्या थे।

पहले हॉफ में पनामा की टीम ने शानदार खेल दिखाया और गोली की बार-बार परीक्षा ली। घाना के गोली लॉरेंस जिगी लगातार व्यस्त रहे और उन्होंने कई शानदार बचाव किए। बेहतरीन खेल के बावजूद पनामा की टीम गोल करने में असफल रही। ये घाना की खुशकिस्मती ही थी। दूसरे हॉफ में घाना की टीम ने भी जोर लगाया लेकिन स्टार खिलाड़ी सेमेन्या नहीं चल पाए। जब ऐसा लग रहा था कि मैच गोलरहित अनिर्णीत रहेगा,तो इंजरी टाइम में ब्रैंडन थॉमस-असांटे ने डिफेंडर को चकमा देकर कालेब यिरेनकी को पास दिया जिन्होंने आसानी से गोल कर दिया। 

ये घाना के लिए एक यादगार जीत बन गई।

चार

उज्बेकिस्तान की टीम ने विश्व कप के लिए पहली बार क्वालीफाई किया है। कल उनके विश्व कप के पहले मुकाबले में उनका सामना एक बेहतरीन टीम कोलंबिया से होना था। निश्चित ही एशियाई टीम के लिए ये मुकाबला कठिन साबित होने वाला था। और हुआ भी। उनके लिए संतोष की बात है कि उन्होंने लगभग चालीस मिनटों तक  कोलंबिया के अटैक का हिम्मत से मुकाबला किया और अपना गोल सुरक्षित रखा। पर बायर्न म्यूनिख के लुइस डियाज़ ने रक्षात्मक पंक्ति को भेदने में सफलता पाई और उनके शानदार पास पर डैनियल मुनोज़ ने गोल कर टीम को बढ़त दिला दी। 

दूसरे हॉफ में 60वें मिनट में उज़्बेकिस्तान के  अब्बोसबेक फैज़ुल्लायेव ने गोल करके स्कोर 1-1 कर दिया। पर यह बराबरी सिर्फ पांच मिनट तक ही कायम रही। 65वें मिनट में लुइस डियाज़ ने गोल कर कोलंबिया को फिर से बढ़त दिला दी। के. कैमपाज ने इंजरी टाइम में गोल कर स्कोर 3-1 कर दिया।

उजबेकिस्तान की टीम भले ही हार गई हो, लेकिन उसने कोलंबिया की टीम को कड़ी टक्कर दी।  उज्बेकिस्तान ने दूसरे हाफ में कई मौके गोल करने के बनाए,लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। अन्यथा कोलंबिया की टीम मुश्किल में पड़ सकती थी।

लुइस डियाज़ को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया, क्योंकि उनके गोल और असिस्ट ने उनकी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एफसी बायर्न म्यूनिख के यह एक शानदार दिन था। पहले हैरी केन और फिर लुईस डियाज ने शानदार खेल दिखाया।

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