Sunday, 12 July 2026

नई चैंपियन नोस्कोवा और चेक वर्चस्व

 



निवार की रात 2026 के विंबलडन ग्रैंड स्लैम में महिला एकल का फाइनल कैरोलिना मुचोवा और लिंडा नोस्कोवा के बीच खेला गया। ये दोनों बालाएं चेक गणराज्य की थीं और दोनों को अपने पहले ग्रैंड स्लैम की तलाश थी। 

 न दोनों के बीच साम्यता यहीं आकर रुक जाती है। उसके बाद ये मुकाबला दो अलग उम्र,खेल शैली,अनुभव और टेंपरामेंट के मध्य था। अगर मुचोवा 29 साल की परिपक्व खिलाड़ी हैं, तो नोस्कोवा 21 साल की युवा। पहली कलात्मक टेनिस की आइकन हैं, तो दूसरी शक्ति का पर्याय। पहली पर्याप्त अनुभव के साथ मैदान में उतरी थीं,तो दूसरी के पास जोश उसकी ताकत। एक धैर्य से जड़ी,तो दूसरी पैशन से तारी। एक अपना दूसरा ग्रैंड स्लैम फाइनल खेल रही थी, तो दूसरी कभी क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ी। एक अपने पूरे करियर में लगातार चोटों से जूझती रही है,तो दूसरी इनसे बेपरवाह,बिंदास।

ज जब टेनिस का खेल भी पावर का पर्याय हो गया हो तो ऐसे में सर्व और वाली, शानदार ड्रॉप्स और साथ ही ट्वीनर में माहिर होना बहुत ही दुर्लभ होता जा रहा है। खेल विशेषज्ञ मुचोवा को इन विशेषताओं से युक्त टेनिस की खिलाड़ी से ज्यादा 'कलाकार' मानते हैं जिनका खेल विविधाओं और तकनीकी से परिपूर्ण है। उन्हें खेलते देखना किसी ट्रीट से कम नहीं। तो दूसरी और नोस्कोवा पावर और आक्रामक खेल की प्रतिनिधि खिलाड़ी। शक्तिशाली तेज गति की सर्विस जिनके खेल का मुख्य हथियार है और बेसलाइन से शक्तिशाली शॉट्स जिनके खेल का मुख्य अवयव।

स बार का विंबलडन का फाइनल एक ही देश की इन दो खिलाड़ियों के बीच एक रोमांचक मुकाबला था। ये तीन सीटों का हाई वोल्टेज ड्रामा था। इस पूरे मैच को तीन भागों में बांट कर देखा जा सकता है। इनमें से पहला और आखिरी भाग नोस्कोवा के हक में और बीच वाला भाग मुचोवा के हिस्से रहा। 


ससे पूर्व ग्रैंड स्लैम में ये दोनों खिलाड़ी केवल एक बार आमने सामने थीं 2025 के यूएस ओपन में। इस संघर्षपूर्ण मुकाबले में मुचोवा ने जीत हासिल की थी। लेकिन कल विंबलडन की हरी घास के मैदान पर पहली किसी भी हार और प्रतिद्वंदी के अनुभव से बेपरवाह नोस्कोवा ने शक्तिशाली सर्विस और जबरदस्त फोरहैंड के बल पर केवल 31 मिनट में पहला सेट जीत लिया 6-2 से। और दूसरे सेट में भी 5-2 की बढ़त बना ली। नोस्कोवा अब चैंपियन बनने ही वाली थीं। वे चैंपियनशिप के लिए सर्व कर रही थीं कि अचानक नर्वस हो उठी। उधर मुचोवा जैसे सोते से जागी हों। मुचोवा के अपने अगले सर्विस गेम में पांच ड्यूस हुए। इस दौरान उन्होंने अपनी सर्विस को ब्रेक होने से ही नहीं बचाया, बल्कि तीन चैंपियनशिप प्वाइंट भी बचाए। इसके बाद नोस्कोवा के अगले सर्विस गेम में आठ ड्यूस हुए। नोस्कोवा द्वारा सात ब्रेक प्वाइंट बचाने के बाद अंततः मुचोवा ने नोस्कोवा की सर्विस ब्रेक की। और लगातार पांच गेम जीतकर सेट 7-5 जीत लिया। इस दौरान उन्होंने अपने शानदार ड्रॉप शॉट्स का इस्तेमाल किया और नोस्कोवा को लगातार गलती के लिये मजबूर किया। अब रोमांच अपने चरम पर था। लगा मुचोवा अपनी लय पा चुकी हैं और जीत की और अग्रसर हैं। इससे पहले सेमीफाइनल में मुचोवा ऐसा कर चुकी थीं,जब उन्होंने कोको गफ के विरुद्ध मैच प्वाइंट बचाकर अंततः मैच जीत लिया था। 

दूसरी तरफ लगातार पांच गेम हारकर सेट गंवाने के बाद नोस्कोवा दोनों तर्जनी उंगलियों को कानों में डाले कुछ उदास,कुछ निराश, अपनी कुर्सी पर जा बैठीं। वे दर्शकों के उस शोर को अनसुना करने की कोशिश कर रही थीं, जो मुचोवा के शानदार खेल,उनके पांच मैच प्वाइंट बचाने और मैच में वापसी के बाद उठा था। लेकिन 21 वर्षीय नोस्कोवा को उस समय उस शोर को नहीं बल्कि कि अपनी निराशा और हताशा को अनसुना करने और उसे दूर करने की जरूरत थी। और उन्होंने ऐसा किया।

 नोस्कोवा के लगातार पांच गेम हारने व  पांच मैच प्वाइंट गंवाकर 6-2, 5-2 की आसान बढ़त खत्म करने के बाद उनके पहले ग्रैंड स्लैम जीतने की उम्मीदें लगभग खत्म हो चली थीं। वहाँ उपस्थित पंद्रह हजार दर्शकों को लगने लगा था कि अब मुचोवा ही जीतेंगी। लेकिन नोस्कोवा जानती थीं कि अगर जीतना है तो अपनी निराशा और घबराहट और नर्वसनेस से उबरना होगा। उन्होंने एक बाथरूम ब्रेक लिया। वहां उन्होंने अपने को शांत किया और सारी ऊर्जा समेटकर कोर्ट पर वापसी की। अब वे बिल्कुल वैसी ही दीख रही थीं जैसे मैच के आरम्भ में । उन्होंने अपने खेल की लय जल्द ही प्राप्त कर ली। तीसरे सेट के दूसरे ही गेम में मुचोवा की सर्विस ब्रेक की और 3-0 की बढ़त ले ली। और फिर 6-3 से सेट जीतकर विंबलडन की हरी घास पर सफलता की नई इबारत लिख रही थीं। इस जीत में उनको जरूर ही तीसरे दौर में 17वीं वरीयता प्राप्त सोराना सिर्स्टिया के खिलाफ जीत ने संबल प्रदान किया होगा जिसमें वे तीसरे व निर्णायक सेट में 4-5, 40-Ad से पिछड़ने के बावजूद  टाई-ब्रेक में 11-9 से जीत गईं थीं।

जीत का ये क्षण उनके लिए बहुत विशेष था। बहुत ही भावुक। दो साल पहले विंबलडन के शुरू होने से एक दिन पहले ही उनकी माँ का कैंसर से देहांत हो गया था। प्रेजेंटेशन सेरेमनी में वे कह रही थीं "एक और व्यक्ति हैं जिन्हें मैं धन्यवाद देना चाहती हूं,और वो हैं मेरी मां। आपके बिना मैं निश्चित रूप से यहां नहीं खड़ी होती, इसलिए धन्यवाद।" वे ये कहती हैं, और आसमान की ओर एक चुंबन भेजती हैं। 

क अद्भुत दृश्य बनता है जिसमें जितना सुख है उतना ही दुख भी। उनकी आँखें पानी से नम हैं। शायद एक आंख जीत की मिठास लिए,दूसरी दुख का नमक लिए। या फिर दोनों में ही कुछ कुछ मीठा और कुछ कुछ खारा सा। 

र उनकी इस जीत को उनकी हमवतन और दोस्त कैरोलिना मुचोवा एंडोर्स करते हुए कह रही थीं "आप बहुत युवा हैं, यह आपका पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल है, जिस तरह से आपने इसे संभाला और जिस तरह से आपने खेला वह वाकई अविश्वसनीय है। इसके अलावा आप एक बेहद दयालु हैं, इसलिए आपको और आपकी टीम को बहुत-बहुत बधाई। आप इसकी हकदार हैं।" 

 लिंडा नोस्कोवा रोजवाटर डिश जीतकर एक खिताब भर नहीं जीत रही थीं,बल्कि वे अपने देश की पुरखिनों द्वारा विंबलडन टेनिस के इतिहास में स्थापित जीत की परम्परा को आगे बढ़ा रही थीं जिसे टेनिस की महानतम खिलाड़ियों में शुमार मार्टिना नवरातिलोवा ने शुरू किया था और पेत्रा क्वितोवा, मार्केटा वोंद्रोसोवा,बारबोरा क्रेज्सिकोवा जैसी खिलाड़ियों ने आगे बढ़ाया था। ये पिछले चार सालों में तीसरा विंबलडन महिला एकल का खिताब था जिसे चेक गणराज्य की खिलाड़ी ने जीता है। और ये सफलता कोई संयोग नहीं है बल्कि देश की उच्च गुणवत्ता वाली  प्रशिक्षण सिस्टम का परिणाम है, जिसमें कैटरीना सिनियाकोवा, मैरी बोज़कोवा और कोवाकोवा बहनों जैसी उभरती प्रतिभाएं शामिल हैं।

टेनिस जगत को अपनी नई स्टार लिंडा नोस्कोवा के उदय की और लिंडा नोस्कोवा को इस जीत की बधाई।


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