क्रिस्तियानो रोनाल्दो को आप पसंद करें या ना करें, ये व्यक्तिगत चॉइस हो सकती है। आप उनसे प्यार करें या घृणा,ये भी व्यक्तिगत पसंद हो सकती है। लेकिन ये तथ्य अटल सत्य है कि वो फुटबॉल खेल के महानतम खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने फुटबॉल को फुटबॉल बनाया। इस बात से भी उनकी महानता पर कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्होंने कोई विश्व कप जीता या नहीं।
नेमार ने विश्व कप नहीं जीता। अल्फ्रेडो डी स्टेफानो ने नहीं जीता,फेरेंक पुस्कास ने नहीं जीता,जोहान क्रूएफ ने नहीं जीता, मिशेल प्लातिनी ने नहीं जीता,रॉबर्टो बैजियो ने नहीं जीता। लेकिन क्या उनके महान होने में किसी तरह का कोई संदेह किसी को भी है।
ये बात इसलिए कि मौजूदा विश्व कप में स्पेन से हार के बाद उनकी एक सम्मानजनक विदाई बनती थी, जो उनके साथियों ने ही नहीं की। पूरी टीम उन्हें छोड़कर सीधे टनल में जा पहुंची,उनके साथियों से अधिक संवेदनशीलता तो स्पेन के खिलाड़ियों ने दिखाई। खुद लामिन यामाल उन्हें सांत्वना और सम्मान दे रहे थे। ये एक महानतम खिलाड़ी के साथ बेहद असंवेदनशील व्यवहार था। ये खेल भावना कतई नहीं हो सकती।
चाहे जो हो मेरे तईं तो मेस्सी दिल है तो रोनाल्दो दिमाग। दिल लियोनेस मेस्सी से प्यार करता है,पर दिमाग रोनाल्दो का सम्मान। मेस्सी कोई कलात्मक अभिव्यक्ति है, तो रोनाल्दो वैज्ञानिक सूत्र। मेस्सी किसी कृति का भाव पक्ष है तो रोनाल्दो उसका शिल्प।
मेस्सी जिस खेल का महान खिलाड़ी है ना तुम उसके चैंपियन हो। और चैंपियन ही रहोगे।
अदेउस दे रोनाल्दो दा कोपा मुंदो।

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