गजोधर बाबू अब नहीं रहे


          राजू श्रीवास्तव को पसन्द करना या ना करना एक व्यक्तिगत बात हो सकती है। ये भी सच है कि उन्होंने कोई बहुत उच्च कोटि का हास्य व्यंग्य रचा या कहा नहीं। वे कई बार फूहड़ हो जाते  और कई बार अश्लीलता को छूते नज़र आते। और ये भी कि वे कलाकार थे,लेकिन उनकी अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताएं भी थीं।

इस सब के बावजूद ये भी तथ्य है कि वे देश के सर्वाधिक लोकप्रिय स्टैंड अप कॉमेडियन थे और आम जनता उन्हें बेहद चाहती और प्यार करती है। दरअसल उन्होंने स्टैंड अप कॉमेडी को देश में बेहद लोकप्रिय बनाया और एक नया मकाम दिया। लॉफ्टर चेलेंज का पहला सीजन था तो उसमें वे भी एक प्रतिभागी थे। इसमें वे भले ही सुनील और अहसान कुरैशी से पिछड़ गए हों। लेकिन इस प्रतियोगिता से बाहर आकर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लोकप्रियता में सबको पीछे छोड़ दिया।

दो,उनका अपनी बात कहने या डिलीवरी का एक खास तरीका था। भदेस सा।  इसमें वे अपनी स्थानीय कानपुरी बोली जो कन्नौजी मिश्रित अवधी थी, का तड़का लगाते। ये उनकी एक ऐसी यूएसपी थी जो उन्हें अपने सभी समकालीन स्टैंड अप कॉमेडियन से विशिष्ट बनाती थी और जनता में  लोकप्रिय भी।

तीन,सबसे महत्वपूर्ण बात ये कि वे आम जीवन की विसंगतियों और विडंबनाओं को उसके पूरे भदेसपन के साथ उजागर करते थे। उनके कहन और कंटेंट का जो भदेसपन था,दरअसल वही उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी जो उन्हें आम जनता से कनेक्ट करती थी और उनके बीच लोकप्रिय बनाती थी।

उनकी मृत्यु के बाद जिस तरह से सोशल मीडिया और बाकी प्लेटफार्म हर छोटे बड़े आदमी ने उनके बारे में लिखा,कहा-सुना और प्रतिक्रिया दी,ये बताने के लिए पर्याप्त है कि एक कलाकार के रूप में वो कितने लोकप्रिय थे और ये कहने पर मजबूर भी करता है कि 'बंदे में दम था'।

वे स्टैंड अप कॉमेडी के काका हाथरसी हैं। जो मकाम काका हाथरसी को मंचीय हास्य कवियों में हासिल है,वही स्थान स्टैंड अप कॉमेडी में राजू श्रीवास्तव उर्फ गजोधर बाबू को हासिल है। -------------------------

अलविदा गजोधर बाबू।

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