Friday, 12 May 2017

बुद्ध हो जाना


बुद्ध हो जाना 


अक्सर

कुछ ख्वाब 
जो तुम्हारे भीतर
जगते हैं हक़ीक़त की तरह 

फिर वे


होठों से

आग आग दहकते हैं
पलाश की तरह
बसंत बसंत खिलते हैं
अमलतास की तरह
प्यार प्यार महकते हैं
गुलाब की तरह
शब्द शब्द झरते हैं
हरसिंगार की तरह

फिर कोई 


ओक ओक पीता है 

अमृत की तरह 
स्वर स्वर सुनता है 
संगीत की तरह
आग आग जलता है 
परवाने की तरह  

फिर कोई 


तप तप निर्वाण पाता है 

बुद्ध की तरह। 
----------------------------------------------
तो जीवन की पराकाष्ठा  बुद्ध हो जाना है ?

No comments:

Post a Comment

ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेल 2026

एक : फीके फीके से खेल इस बार के ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ खेल बहुत फीके फीके से हैं। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया द्वारा मेजबानी...