ना जाने
ये कब
और कैसे हो गया
मुठ्ठी में करते करते आसमां
आसमां सा जीवन
मुठ्ठी सा अदना हो गया
करते करते मुठ्ठी में जहाँ
ये जीवन
खाली मुठ्ठी सा
रीत गया।
हर उड़ान की एक मंजिल होती है। कि एक चमकीला दिन शाम में घुल जाता है। कि पूनम का चांद सूरज की आगवानी में स्वाहा होता जाता है। कि रात के जगमग स...
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