हैय्या हैय्या फुटबॉल_ विश्व कप 2022 डायरी_01



व्यक्ति के हाथ भी कितने जादुई होते हैं! उनसे कितनी जादुई करामातें की जा सकती हैं,ये हम सब जानते हैं। आखिर यूँ ही उक्तियाँ थोड़े ही बनी हैं कि 'व्यक्ति के हाथ में उसकी किस्मत होती है' या फिर 'अपना हाथ जगन्नाथ'। लेकिन यकीन मानिए दोस्तों पैर भी कम जादुई नहीं होते हैं। उनसे भी जादुई संसार रचा जाता है।

जब पैर लय से थिरकते हैं तो नृत्य जैसी खूबसूरत मनमोहक कला का जन्म होता है। जब उन पैरों की लय को गति और घुंघरुओं का साथ मिलता है तो व्यक्ति केलुचरण महापात्र,पं बिरजू महाराज,मृणालिनी साराभाई,गोपी कृष्ण, लच्छू महाराज,सोनल मानसिंह या फिर माइकल जैक्सन, मिखाइल बेरिश्निकोव, मैडोना, शकीरा और मार्था ग्राहम जैसे अद्भुत कलाकारों के रूप में दुनिया में जाने जाते हैं।

जब इन पैरों को लय के साथ गति और शक्ति मिलती है तो दुनिया को अविस्मरणीय दौड़े मिलती हैं और मिलते हैं महान धावक। ये इन पैरों की करामात थी कि फेडीपिडिस मैराथन के युद्ध के मैदान से एथेंस तक एक ऐतिहासिक दौड़ दौड़ता है। इन्हीं पैरों की अदभुत करामात से पावो नूरमी,जेसी ओवेन्स,सेबेस्टियन को,बेन जॉनसन, उसैन बोल्ट,कार्ल लेविस, ग्रिफ्फिथ जॉयनर,मो फराह,हैली गैब्रेसिलासी, मिल्खा सिंह और पी टी उषा बनते हैं,जिनके पैरों की गति,लय और शक्ति मिलकर आपको विस्मय से भर देती हैं।


ठीक ऐसे ही, जब पैरों की गति और लय को एक अदद 60 सेंटीमीटर परिधि वाली और लगभग 300 ग्राम वजन वाली गेंद मिलती है तो फुटबॉल जैसा अनोखा खेल बनता है जिसे हमारी दुनिया के हर कोने में चाहने वाले लोग होते हैं। जो दुनिया की अधिकांश जनता का सबसे प्रिय खेल बन जाता है। जब 100 गज लंबे और 65 गज चौड़े मैदान में जब एक जोड़ी पैर इस गेंद के संपर्क में आते हैं तो पैर गति और लय से कलात्मकता का एक ऐसा जादुई संसार रचते हैं कि देखने वाले आनंद के सागर में डूब डूब जाते हैं। ये पैर फुटबॉल के उन जादूगरों के होते हैं जिन्हें हम और आप पेले,माराडोना,मेस्सी,रोनाल्डो,नेमार,बेंजीमा,

पाउलो रोसी,जोहान क्रुफ,जिनेदिन ज़िदाने,फ्रांज़ बेकनबाउर,अल्फ्रेडो डी स्टिफानो या ऐसे ही ना जाने कितने नामों से जानते हैं। 

यूं तो ये करामाती पैरों के जादूगर साल दर साल अपने जादू से दर्शकों को एक रोमानी दुनिया में ले जाते रहते हैं। पर हर 4 साल में एक बार दुनिया के किसी एक कोने में इन जादूगरों का एक मेला लगता है, जहां इनमें एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ लगी रहती है। और इस होड़ में वे अपने चाहने वालों को चमत्कृत करते रहते हैं। वहां इन के पैरों की प्रतिभा की सीमा आकाश की अनंत ऊंचाई होती है। पैरों के इन जादूगरों के इस चार साला मेले को हम और आप फीफा विश्व कप के नाम से जानते हैं।


इस बार ये मेला  खाड़ी के देश क़तर में कल यानि 20 नवंबर से शुरू होने जा रहा है जो 18 दिसंबर तक चलेगा। लगभग एक महीने चलने वाली इस प्रतियोगिता में पांचों महाद्वीप की 32 सर्वश्रेष्ठ टीमें अपने अद्भुत खेल कौशल,रणनीति चातुर्य और तकनीकी श्रेष्ठता का सर्वोत्तम निदर्शन करेंगी और और फुटबॉल की दुनिया का सिरमौर बनने की कोशिश में अपना सबकुछ झोंक देने को तत्पर रहेंगी।

इस बार विश्व कप के लिए 5 कॉन्फेडरेशन से कुल 32 देशों ने अहर्ता प्राप्त की है। एशियन फुटबॉल एसोसिएशन से छह टीम,कॉन्फेडरेशन ऑफ अफ्रीकन फुटबॉल से पांच टीम,कॉन्फेडरेशन ऑफ नार्थ सेंट्रल अमेरिका एंड कैरेबियन एसोसिएशन फुटबॉल और साउथ अमेरिकन फुटबॉल असोसिएशन से चार-चार टीम और यूनियन ऑफ यूरोपियन फुटबॉल असोसिएशन से तेरह टीम शामिल हैं।

इन 32 टीमों से केवल 24 वे टीम हैं जो 2018 के विश्व कप में खेली थीं। इस बार मेज़बान क़तर की एकमात्र टीम जो विश्व कप फाइनल में पहली बार खेल रही है। वो मेजबान होने के नाते इसमें खेल रही है। अन्यथा ये पहला विश्व कप है जिसमें क्वालीफाई करने वाली टीमों में एक भी डेब्यू नहीं कर रही है। हॉलैंड,घाना,इक्वेडोर,कैमेरून और अमेरिका की पिछले विश्व कप में अनुपस्थिति के बाद फिर से वापसी कर रही हैं। कनाडा की टीम 36 साल बाद वापसी कर रही है तो वेल्स की टीम 64 साल बाद।

इस बार भी सबके ज़्यादा कमी चार बार की विश्व चैंपियन और वर्तमान यूरोपियन चैंपियन इटली की होगी। वो लगातार दूसरी बार विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने में विफल रही है।

32 टीमों को कुल आठ ग्रुप में बांटा गया है। ये लीग काम नॉक आउट आधार पर खेला जाएगा।प्रत्येक ग्रुप से दो टीमें नॉक आउट चरण के लिए क्वालीफाई करेंगी। यूं तो इस बार किसी भी ग्रुप को 'ग्रुप ऑफ डेथ'नहीं कहा जा रहा है लेकिन बावजोइड इसके ग्रुप ई को सबसे कठिन ग्रुप माना जा रहा है। इसमें में पुर्तगाल,जर्मनी,कोस्टारिका और जापान।

इस बार विश्व रैंकिंग में नंबर एक टीम और पांच बार की चैंपियन ब्राजील सबसे फ़ेवरिट टीम मानी जा रही है। पिछली चैंपियन फ्रांस,अर्जेंटीना,पुर्तगाल  बेल्जियम भी इस बार के फ़ेवरिट हैं। इसके अलावा जर्मनी और क्रोशिया की टीम को भी कम नहीं आंका जा रहा है।

1930 में उरुग्वे से शुरू हुए फीफा विश्व कप का ये 22वां संस्करण है। क़तर को 2010 में मेजबानी सौंपी गई तब से ही उसकी मेजबानी लगातार विवादों के घेरे में रही है। ये कहा गया कि क़तर ने मेजबानी के लिए फीफा ऑफिशल्स को घूस दी थी और क़तर मेजबानी योग्य नहीं था। सामान्यतः विश्व कप जून जुलाई में होते हैं,जबकि उस समय क़तर में भीषण गर्मी पड़ती है। इसी वजह से इसका समय बदल कर नवंबर दिसंबर कर दिया गया। लेकिन ये समय अनेक बड़ी लीग का समय होता है। इसलिए के लीग को स्थगित करना पड़ा और पूरा फुटबॉल सीजन गड़बड़ा गया।

समलैंगिकों पर और शराब पर प्रतिबंध की भी पश्चिमी देशों की मीडिया में खूब आलोचना हुई। लेकिन सबसे बड़ी आलोचना स्टेडियमों और विश्व कप के अन्य निर्माण में लगे आप्रवासी मजदूरों के शोषण के लिए की जा रही है। कथित तौर पर इन निर्माण कार्यों के दौरान छह हजार से ज़्यादा मजदूरों की मौत हुई।

फिलहाल विश्व कप कुल आठ स्टेडियम में खेले जाएंगे। सबसे बड़ा स्टेडियम लुसैल स्टेडियम है जिसकी क्षमता 80 हज़ार दर्शकों की है। दूसरा बड़ा स्टेडियम अल खोर में स्थित अल बहत स्टेडियम है जिसकी क्षमता 60 हज़ार दर्शकों की है। इसके अलावा दोहा का स्टेडियम 974 और अल थमामा स्टेडियम,खलीफा इंटरनेशनल स्टेडियम,एजुकेशन सिटी स्टेडियम,अल जैनब स्टेडियम और अहमद बिन अली स्टेडियम हैं। उद्घाटन समारोह और उसके बाद प्रतियोगिता का पहला मैच मेजबान क़तर और इक्वेडोर के बीच अल बहत स्टेडियम में होगा और फाइनल मैच लुसैल स्टेडियम में। 

इस बार प्रतियोगिता का शुभंकर है लाईब(la'eeb) इस अरबी शब्द का अर्थ है 'सुपर कुशल खिलाड़ी'। ऑफिसियल बॉल है 'अल रिहला'जिसका अर्थ है 'यात्रा'। इस बार चार फीफा ने चार आधिकारिक गीत 'हैया हैया', 'हरबो', 'लाइट द स्काई' और 'तुको ताखा'जारी किए हैं।

ये विश्व कप प्रतियोगिता इस लिए भी महत्वपूर्ण है कि फुटबॉल इतिहास के दो सबसे बड़े खिलाड़ी - मैस्सी और रोनाल्डो का ये पांचवा और अंतिम विश्व कप है।

जो भी हो इस विश्व कप में विश्व के सबसे शानदार खिलाड़ियों की दक्षता और प्रतिभा का मुकाबला या फिर फुटबॉल की महारथी टीमों के बीच संघर्ष भर देखने को नहीं मिलेगा बल्कि विश्व के सबसे बड़े फुटबॉल मैनेजरों की रणनीतियों और व्यूह रचना कौशल के संघर्ष की आजमाइश भी होगी। विभिन्न खेल शैलियों की टकराहट और मुकाबले का निदर्शन भी होगा और खेल के पीछे अलग अलग महाद्वीपों की सामाजार्थिक और सांस्कृतिक मूल्यों बीच श्रेष्ठता का द्वंद भी।

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ये आनंद और रोमांच में डूब जाने का समय है। भले ही आप कतर में ना हों,बस कल से टीवी का स्विच ऑन कर लीजिए और टीवी का रिमोट हाथ में धारण।



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