हवा बदल गई है
अब हवाएँ ज़हरीली हो गई हैं
धुआं हवाओं को धमकाता है
फ़िज़ाओं में ज़हर मत घोलों
हवाएँ स्तब्ध हैं
निस्पंद हैं
जिससे एक निर्वात पैदा हो गया है
और उसमें सब ऊपर नीचे हो रहे हैं
बिना पेंदी के।
हर उड़ान की एक मंजिल होती है। कि एक चमकीला दिन शाम में घुल जाता है। कि पूनम का चांद सूरज की आगवानी में स्वाहा होता जाता है। कि रात के जगमग स...
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