ये लम्हे यूँ ही गुज़र जाएं
तो अच्छा
न तुम कुछ कहो
ना मैं कुछ कहूँ
बस धड़कने धड़कनों को सुनें
ये लम्हे यूँ ही सदियों में बदल जाएं
तो अच्छा ।
एक कशमकश है कि अब इख़्तिताम पज़ीर हुआ चाहती है। एक द्वंद्व है जो विराम लिया चाहता है। एक प्रतिद्वंदिता है जो अनिर्णीत समाप्त हुआ चाहती है। द...
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