ये लम्हे यूँ ही गुज़र जाएं
तो अच्छा
न तुम कुछ कहो
ना मैं कुछ कहूँ
बस धड़कने धड़कनों को सुनें
ये लम्हे यूँ ही सदियों में बदल जाएं
तो अच्छा ।
हर उड़ान की एक मंजिल होती है। कि एक चमकीला दिन शाम में घुल जाता है। कि पूनम का चांद सूरज की आगवानी में स्वाहा होता जाता है। कि रात के जगमग स...
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