तेरी सांसें
सर्द रातों में
शोला बन
देह में कुछ पिघलाती रहीं
तेरी छुअन
तपती दोपहर में भी
बर्फ़ की मानिंद
मन में कुछ जमाती रही
ज़िंदगी बस यूँ ही
पिघलते और जमते
रफ्ता रफ्ता गुज़रती गई।
कुछ लोगों पर उम्र इस खूबसूरती से गिरती है उनका व्यक्तित्व और अधिक उभरकर आता है। उनके लिए उम्र एक गिनती भर रह जाती है। कल रात दुनिया के दो अ...
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