Saturday, 28 January 2017

विलियम्स बहनें



                   
                    आज जब मेलबोर्न पार्क के रोड लेवर एरीना में विलियम्स बहनें फाइनल मैच खेलने उतरी तो वे दरअसल फाइनल मैच  नहीं खेल रही थीं क्योंकि वे अपने अपने फाइनल पहले ही दो संघर्षपूर्ण सेमीफाइनल मैचों में खेल चुकी थीं। आज तो वे दोनों बहनें नीले रंग की प्लेक्सीकुशन सतह पर टेनिस बॉल और रैकेट से काले अमेरिकियों के अपने दुःख दर्द और संघर्षों से उद्भूत जैज संगीत की एक नई धुन रच रही थीं जिसमें उनके अपने संघर्ष थे कोर्ट के अंदर के भी और बाहर के भी। जब भी कोई बहन कोर्ट में अकेली खेल रही होती तो वो केवल अपने प्रतिद्वंदी से ही संघर्ष नहीं कर रही होतीं थीं बल्कि बाहर बैठे हज़ारों दर्शकों से भी जूझ रही होती थीं। लेकिन आज नफासत,प्रेम,करुणा और उदासी भरे बिथोवीन और मोज़ार्ट  के संगीत के चाहने वाले दर्शकों के पास मानवीय संघर्षो जिजीविषा से उद्भूत जैज संगीत को सुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।इलीट खेल की मॉडल सरीखी खूबसूरत कमनीय महिला खिलाडियों के बरस्क वे अपने बलिष्ठ शरीर,काले रंग और संघर्षपूर्ण खेल के कारण आउटसाइडर सी प्रतीत होतीं। दरअसल मार्टिना नवरातिलोवा ने नफासत भरे खेल में जिस पावर प्ले का समावेश किया था विलियम्स बहनें उस परम्परा की सबसे बड़ी खिलाड़ी हैं। उन दोनों ने अपने शक्तिशाली खेल से दिखाया कि शक्ति पुरुष खिलाडियों का ही पर्याय नहीं है बल्कि वे भी पावर का ही दूसरा नाम हैं।अपनी दमदार सर्विस शक्तिशाली शॉट्स और गति के बल पर दोनों बहनों ने एक दशक से अधिक समय तक महिला टेनिस में अपना एकछत्र राज कायम रखा।36 साल की उम्र में वीनस ने थकान और जोड़ों के दर्द वाली ऑटो इम्यून बीमारी से जूझते हुए और 35साल की उम्र में सेरेना ने जिस तरह से खेल दिखाया है वो उनकी अदम्य इच्छा शक्ति और संघर्ष करने की क्षमता को दिखाती है। कम से कम सेरेना अभी भी कई मील के पत्थर पार करेंगीं। फिलहाल सेरेना को ओपन एरा में सबसे ज़्यादा 23 एकल ग्रैंड स्लैम खिताब और दोनों बहनों को 30वां एकल ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने की ढेर सारी बधाई तो बनती ही है। 

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एक अनिर्णीत संघर्ष जारी है  यकीन मानिए बैडमिंटन चीन और इंडोनेशिया के बिना भी उतना ही रोमांचक और शानदार हो सकता है जितना उनके रहते...