Tuesday, 17 April 2018

राष्ट्रमंडलीय खेल 2018

                          
   
         
                                    राष्ट्रमंडलीय खेल 2018
                                    --------------------------

गोल्ड कोस्ट ऑस्ट्रेलिया में समाप्त 21वें राष्ट्रमंडलीय खेलों में भारत ने 26 स्वर्ण सहित 66 पदक जीते। इन पदकों में से 12 गोल्ड सहित २७ पदक लड़कियों ने जीते। अगर मिश्रित स्पर्धाओं के पदक भी इसमें मिला दिए जाए तो ये संख्या 30 के पार पहुँच जाती है।मनु भाकर,पूनम, मीरा चानू,संजीता,साइना,मनिका,मेहुली,सिंधु,हिना,श्रेयशी,विनेश,मेरी कॉम तक तमाम लड़कियों ने शानदार प्रदर्शन किया और भारत को गौरवान्वित किया। दरअसल लड़कियों द्वारा जीते गए हर पदक के पीछे उनके जोश ज़ुनून, जज़्बे,संघर्ष,कठोर परिश्रम,उनके द्वारा देखे गए सपनों और उन सपनों के साकार करने की अलहदा अलहदा कहानी हैं। 16 वर्षीया मनु भाकर से लेकर 35 वर्षीया मेरी कॉम तक ने ये बताया कि उम्र उनके लिए सिर्फ एक नम्बर भर हैं। मनु जैसी किशोरियों ने बताया कि इस दुपट्टा ओढ़ना सीखने के बजाय दुनिया जीतने की कोशिश मायने रखती हैं तो 35 वर्षीया मेरी कॉम ने बताया जिस उम्र में वे अपनी इच्छाओं को,अपने सपनों को,अपनी काबिलियत को अपने परिवार के लिए खूंटी पर टांग देती हैं उस समय भी दुनिया जीती जा सकती है। बस अपने पर भरोसा करने की ज़रुरत भर है। उन्होंने दिखाया कि अगर हम आधी दुनिया हैं और आधी दुनिया चाहिए तो उस दायित्व को निभाने की काबिलियत भी उनमें हैं। उनके हौसलों और जज़्बे को सलाम। 
----------------------------------------
और हाँ अगर आपकी सुनने सुनाने में भी दिलचस्पी है तो ट्यून कीजिये आकाशवाणी इलाहाबाद 292.4 मीटर /1026 किलोहर्ट्ज़ पर कल रात्रि 10 बजे खेल दर्पण जो कि कामनवेल्थ खेलों पर ही केंद्रित है। इस कार्यक्रम के मेहमान हैं पूर्व अंतर्राष्ट्रीय होके खिलाड़ी श्रीमती पुष्पा श्रीवास्तव,टेबल टेनिस कोच ज़नाब इबादुर रहमान और खेल समीक्षक और लेखक श्री राजकुमार चोपड़ा। 



Sunday, 15 April 2018

चुपके से


                                    चुपके से
                                    ----------



"फरवरी की सर्दियों की धूप में
मुंदी मुंदी अँखियों से देखना
हाथ की आड़ से
निमि निमि ठण्ड और आग में
हौले हौले मारवा के राग में
मीर की बात हो
दिन भी ना डूबे
रात ना आये
शाम कभी ना ढले
शाम ढले तो सुबह ना आये
रात ही रात चले"
-------------------------
उफ्फ ! क्या ही कमाल है ! आखिर ये होता कैसे है ! कि दिल में लावा सी पिघली हसरतें ज़िंदगी के सफों पर दर्ज़ होती जाती हैं ! रोशनाई की जगह प्यार बूँद बूँद कलम से रिसता है और शब्द शब्द ज़िंदगी बुनती चलती जाती है... और जब ये  रिसाव साज़िन्दों की उँगलियों के इशारों पर चलते साज़ों पर नदी सा बहता हुआ किसी बालसुलभ बुनावट वाली सधी ठहरी गंभीर आवाज़ की उष्मा से भाप बन कर उड़ता है और फिर बूँद बूँद मन पर बरसता हैं तो ज़िंदगी का सागर अनगिनत कही अनकही कहानियाँ से भरता जाता है !

-------------------------

गुलज़ार के शब्द शब्द भँवरे रहमान के राग राग उपवन में साधना के गले से झरते फूल फूल सुरों पर गुंजन करते हैं 'चुपके से, रात की चादर तले' !
-----------------------
बॉलीवुड सांग _4