Thursday, 12 July 2018

फुटबॉल विश्व कप 2018_8

             


ओह ये तो क़यामत की रात थी 
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  निसंदेह कल की रात दुनिया भर के खेल प्रेमियों के लिए रोमांच से भरी रात थी। यूरोप महाद्वीप के दो विपरीत छोरों पर दो सबसे लोकप्रिय खेलों की प्रतियोगिताओं के रोमांच में लोग डूबते उतराते रहे।अपेक्षाकृत कम विकसित पूर्वी छोर पर कभी सर्वहारा वर्ग के झंडाबरदार रहे रूस की राजधानी मास्को में आमजन के सबसे पसंदीदा खेल फुटबॉल की विश्व प्रतियोगिता का दूसरा सेमी फाइनल खेला जा रहा था तो दुनिया के सबसे विकसित पश्चिमी छोर पर स्थित मध्यम और उच्च वर्ग समर्थित पूंजीवादी लोकतांत्रिक देश इंग्लैंड की राजधानी लन्दन के आल इंग्लैंड क्लब में एलीट खेल टेनिस के क़्वार्टर फाइनल मैच खेले जा रहे थे। मानो ये दैवयोग हो कि दोनों खेल अपनी अपनी दुनिया में खेले जा रहे हों।हाँ द्वन्द और संघर्ष के नए पैमाने दोनों जगह स्थापित किये जा रहे थे,इतिहास दोनों ही जगह बनाये जा रहे थे। 
                 मास्को के लुझिन्स्की स्टेडियम में फुटबॉल कप के फाइनल्स  का दूसरा सेमीफ़ाइनल मैच खेला जा रहा था। एक तरफ फुटबॉल के गौरवशाली इतिहास और परम्परा की वाहक लेकिन एक युवा खिलाड़ियों वाली इंग्लैंड की टीम थी तो दूसरी ओर लगभग एक चौथाई सदी पहले अस्तित्व में आये नवोदित राष्ट्र की नई  लेकिन अनुभवी खिलाड़ियों वाली क्रोशिया की टीम थी।इंग्लैंड की टीम की विश्व रैंकिंग 12 थी तो क्रोशिया की रैंकिंग 20 थी। हाँ ये ज़रूर था कि दोनों ही टीमों का नेतृत्व दो शानदार खिलाड़ी कर रहे थे।इंग्लैंड का हैरी केन और क्रोशिया का लूका मोड्रिक।जहां क्रोशिया डार्क हॉर्स टीम थी जिसको शुरू में ज़्यादा तवज्जो नहीं दी जा रही थी,वहीं इंग्लैंड की टीम को संभावित विजेताओं में गिना जा रहा था।खुद इंग्लैंड वासी तो इतने आश्वस्त थे कि 1996 में इंग्लैंड में यूरो कप के आयोजन के अवसर पर रचा गया 'थ्री लायन' इंग्लैंड का थीम सांग बन गया और उसकी लाइन 'इट्स कमिंग होम' उसकी टैग लाइन। लेकिन कल मैदान में जब क्रोशिया की टीम उतरी तो उसने ना केवल इंग्लैंड की पार्टी खराब कर दी बल्कि इस टैग लाइन में "नहीं" शब्द जोड़ कर पूरे गीत को ही बेसुरा कर दिया। 
            क्रोशिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया ये मैच उतना ही संघर्षपूर्ण,रोमांचक और शानदार था जितना कि किसी विश्व  प्रतियोगिता के सेमीफाइनल मैच को होना चाहिए था। पहले हाफ को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रख कर इंग्लैंड ने बताया कि क्यों उसे इस मैच में फेवरिट माना जा रहा है। ऊपर से 5वें मिनट में जब ट्रिपर ने फ्री किक पर शानदार गोल किया तो लगाने लगा कि वोही जीतेगा। उसके मिडफील्ड ने खेल को पूरी तरह नियंत्रित किया। लेकिन आधा समय बीतते बीतते जैसे जैसे इंग्लैंड का मिडफील्ड ढीला पड़ने लगा क्रोशिया की टीम रंग में आने लगी और लगा मैच अभी ख़त्म नहीं हुआ है। क्रोशिया ने पहले भी पीछे से आकर मैच जीता था। दूसरे हाफ में क्रोशिया अपने शबाब पर थी। 68वे मिनट में पेरिशिच ने गोल कर क्रोशिया की वापसी करा दी। अब इंग्लैंड नींद से जागा। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। मैच अतिरिक्त समय में गया। 109वें मिनट में मारियो मंडज़ूकिच ने गोल कर इंग्लैंड के भाग्य का फैसला सुना दिया। जिस तरह से बेल्जियम के लुकाकु द्वारा अहम् गोल करने के मौके गवांए जाने का खामियाजा भुगतना पड़ा वैसे ही इंग्लैंड को हैरी केन द्वारा आसान मौके गवांने की कीमत टीम की हार से चुकानी पडी। 
फिलहाल 15 जुलाई को जब क्रोशिया और फ्रांस के मध्य फाइनल खेला जाएगा तो दोनों ही टीमों के दिमाग में 8 जुलाई 1998  के विश्व कप का क्वार्टर फाइनल मैच ज़रूर रहेगा जिसमें फ्रांस ने क्रोशिया को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। फ्रांस उसे दोहराना चाहेगी तो क्रोशिया उसका बदला लेना। मेरा वोट विश्व को नया चैम्पियन मिले। 

जिस समय यूरोप के पूर्वी हिस्से में क्रोशिया और इंग्लैंड के बीच श्रेष्ठता की जंग चल रही थी ठीक उसी समय पश्चिमी हिस्से में लोग टेनिस लीजेंड फेडरर और अपने काबिलियत से कहीं कमतर जाने जाने वाले केविन एंडरसन के बीच एक और ऐतिहासिक द्वन्द के साक्षी बन रहे थे। फेडरर यहां 8 खिताब जीत चुके थे और नवां जीतने के प्रयास में यहां जीत दर्ज़ कर सेमीफाइनल में पहुंचा चाहते थे। लेकिन एंडरसन  कुछ और ही तय करके आये थे। जिस तरह से फुटबॉल के दोनों सेमीफाइनल्स इस बात के गवाह बने कि बस एक चूक आपकी पूरी मेहनत पर भारी पड़ती है ठीक वैसे ही ये क्वार्टर फाइनल मैच भी। फेडरर ने दो सेट 6-2,7-6 से जीतकर तीसरे में मैच पॉइंट पर सर्व कर रहे थे। इस अंक में वे चूक गए और सवा चार घंटे के संघर्ष के बाद मैच 6-2,7-6,5-7,4-6 और 11-13 से हार गए। जिस समय विश्व नम्बर दो इस ऐतिहासिक संघर्ष में हार रहे थी ठीक उससे समय विश्व नम्बर एक राफेल नडाल लगभग वैसे ही एपिक संघर्ष में देल पोत्रो को लगभग उतने ही समय में  7-5,6-7,4-6,6-4 और 6-4 से हरा कर अपने 18वे ग्रैंड स्लैम की और बढ़ रहे थे। हालांकि फेडरर की हार ने राफा-फेड के संभावित ऐतिहासिक भिड़ंत को ख़त्म कर दिया लेकिन फाइनल से पहले एक फाइनल ज़रूर देखने को मिलेगा जब दो दिग्गज राफा और जोकोविच कल सेमीफाइनल में खेलेंगे। 
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2002 में 7 बार के विजेता पीट सम्प्रास स्विट्ज़रलैंड के जॉर्ज बैटल से हार गए थे और उसके बाद वे कभी आल इंग्लैंड क्लब वापस नहीं लौटे। ये देखना रोचक होगा कि क्या इतिहास अपने को दोहराएगा या फेडरर एक बार फिर लौटकर आएंगे।   अस्तु !
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विश्व कप फुटबॉल 2018_8