Monday, 5 June 2017

मेमने का शिकार




                              तमाम कारणों से यूँ तो क्रिकेट में रूचि कम हो रही है। लेकिन जब भी भारत पाक मैच होता है तो दिलचस्पी बढ़  ही जाती है।कारण यही है कि भारत पाक के खिलाड़ी मैदान में जब भी आमने सामने होते हैं,फिर वो चाहे कोई भी खेल हो,दिल से खेलते हैं,जोश जूनून और जज़्बे के साथ खेलते हैं जो खेल की बुनियादी शर्त है। खेल में शारीरिक खेल कौशल ही नहीं बल्कि मानसिक क्षमता का भी संघर्ष होता है और उनके धैर्य और दबाव झेलने की क्षमता का भी। इस सब से खेल उठान पाता है और आपको खेल देखने में आनन्द आता है। भारत और पाक के पिछले मुक़ाबले इस बात के गवाह हैं। फिर ये भारत और पाक के बीच ही नहीं बल्कि किन्ही भी दो पारम्परिक प्रतिद्वंदियों के बीच मुक़ाबलों का सच है। लेकिन कल रात एजबेस्टन में खेला गया मैच निराश करने वाला था। ये शेर द्वारा मेमने का शिकार करने जैसा कुछ था।ये इन दोनों टीमों के बीच खेला गया शायद अब तक का सबसे नीरस मैच था।ये सही है कि भारत की टीम की टीम इस समय दुनिया की सबसे मज़बूत टीमों में से है और पाक की सबसे कमज़ोर टीम। लेकिन जिस तरह से पाक टीम ने हार मानी ये आश्चर्य की बात थी। वे शुरू से ही हारा हुआ मैच खेल रहे थे। उनकी शारीरिक भाषा केवल और केवल नकारात्मक संकेत प्रेषित कर रही थी। दरअसल पाकिस्तानी क्रिकेट की ये दशा पाकिस्तान की अंदुरुनी दशा पर टिप्पणी है। देश बदहाली के दौर से गुज़र रहा है। आतंकवाद और धर्मान्धता से जूझ रहा है।आधुनिकता से दूर दूर तक कोई नाता नहीं,आधुनिक सोच,शिक्षा ,आर्थिक प्रगति किसी से भी। वहां का घरेलु क्रिकेट ख़त्म है और बोर्ड बदहाल स्थिति में है।और ये हाल केवल क्रिकेट का ही नहीं बल्कि हॉकी और स्क्वाश  जैसे खेलों का भी है।यही हाल रहा तो नैसर्गिक प्रतिभा वाले क्रिकेट खिलाड़ियों के देश में क्रिकेट को ख़त्म होने में देर नहीं लगेगी। ये खेल की हार होगी और क्रिकेट की भी !

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एक अनिर्णीत संघर्ष जारी है  यकीन मानिए बैडमिंटन चीन और इंडोनेशिया के बिना भी उतना ही रोमांचक और शानदार हो सकता है जितना उनके रहते...