Sunday, 18 June 2017

इंडोनिशया सुपर सीरीज

इंडोनिशया सुपर सीरीज
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                         खेल भले ही युद्ध ना होता हो पर मुक़ाबला तो होता ही है जिसमें एक पक्ष और दूसरा प्रतिपक्ष होता है और आप एक प्रतिभागी,दर्शक या समर्थक के रूप में स्वाभाविक पक्षकार होते हैं। अगर आप तटस्थ हैं तो निश्चित ही या तो आपमें खेल भावना का अभाव है या किसी अतिवाद से प्रभावित हैं। किसी भी टीम का समर्थन उतना ही सहज नैसर्गिक और न्यायसंगत है जितना कोई भी और कार्य हो सकता है।आज के दोनों मुक़ाबलों में जिनमें भारत पकिस्तान के मुक़ाबिल है भारत की जीत को लेकर अति उत्साहित हूँ और जीत की कामना करता हूँ। फिलहाल इस समय जो एक मुकाबला चल रहा है और दूसरा शाम सवा छह बजे शुरू होगा इनके नतीजे आने में अभी देर है। इस बीच एक तीसरे मुक़ाबले में भारत के लिए अच्छी खबर है और ये बैडमिंटन से है। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आज फाइनल में श्रीकांत किदाम्बी ने जापान के काज़ुमासा सकाई को आसानी से 21-11 और 21-19 से हरा कर इंडोनेशिया सुपर सीरीज ओपन जीत लिया।
                         ये श्रीकांत का दूसरा सुपर सीरीज प्रीमियर ख़िताब है।वे इंडोनिशया सुपर सीरीज के पुरुष एकल फाइनल में पहुँचाने वाले और खिताब जीतने वाले पहले भारतीय शटलर हैं।पहले  महिलाओं में सिंधु और साइना की चुनौती दूसरे ही दौर में समाप्त हो गई। लेकिन पुरुष वर्ग में भारतीय खिलाडियों ने शानदार खेल दिखाया। एच एस प्रणय ने सेमि फाइनल तक का सफर तय किया और इस  उन्होंने 2016 ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता चेन लॉन्ग और रजत पदक विजेता ली चोंग वेई को हराया लेकिन सेमि फाइनल में जापान के के सकाई से पार ना पा सके /दूसरी और श्रीकांत शानदार फॉर्म में थे। उन्होंने सेमीफइनल में विश्व नम्बर एक दक्षिण कोरिया के सोन वान हो को संघर्षपूर्ण मुक़ाबले में 21-15,14-21 और 24-22 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। आज विश्व नम्बर 47 पर किदाम्बी की जीत लगभग तय थी और उन्हें जीतने में कोई परेशानी नहीं हुई। किदाम्बी पी गोपीचंद के बाद भारत की बड़ी उम्मीद हैं। वे इन दिनों शानदार खेल रहे हैं। वे बहुत आक्रामक खिलाड़ी हैं और अपने ज़ोरदार स्मैशेस के लिए जाने जाते हैं। साथ ही उनके रेफ्लेक्सेस बहुत ही तेज़ हैं। आज फाइनल मैच का खेल उन ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच पाया। अक्सर ऐसा होता कि सामने कमज़ोर खिलाड़ी के होने से एक स्वाभाविक ढिलाई आ जाती है। किदाम्बी के साथ ऐसा ही हुआ। उन्होंने धीमी शुरुआत की। स्मैशेस की जगह प्लेसिंग और नेट पर अच्छा खेल दिखाया और पहला सेट 21-11 से जीत लिया। अगर वे बेजा गलतियां(ना करते तो सकाई दहाई अंकों में भी नहीं पहुँच जाते। दूसरे गेम में श्रीकांत थोड़ा कैज़ुअल हुए और सकाई ने 11-6 की बढ़त ले ली। उसके बाद किदाम्बी संभले और स्कोर पहले 17-17 और उसके बाद 19-19 बराबर किया और फिर 21-19 से गेम जीत ख़िताब जीत लिया।
 
                                          आज तीन मुकाबले में पहली जीत की बधाई। 

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