Sunday, 6 August 2017

एथलेटिक्स का शुक्र तारा


एथलेटिक्स का शुक्र तारा
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ये खेल जगत का और विशेष रूप से ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं का बहुत ही अहम् अवसर था।कल यानी 5 अगस्त 2017 का दिन। समय रात्रि पौने दस बजे। स्थान इंग्लैंड की राजधानी का लन्दन स्टेडियम का ट्रैक था। आयोजन विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप। ये बहुत ही भावुक क्षण थे।ट्रैक की 8 लेन में 8 धावक जिनमें से लेन न.4 पर अपनी चिर परिचित हरी पीली पोशाक में जमैका का उसैन बोल्ट था। हमारे समय का ये महानतम एथलीट अपनी अंतिम दौड़ के लिए ट्रैक पर था। स्टेडियम में मौज़ूद 56 हज़ार दर्शकों इस मौके को स्वर्णिम विदाई में परिवर्तित होते देखना चाहते थे। गेट सेट गो और धाँय की आवाज़ हुई ... एक दो तीन चार पांच छह सात आठ नौ और ये दस। दसवें सेकेण्ड के होते होते स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया।ज़बरदस्त उभरता शोर धाम सा गया था। एक कॉमिक चाहना ट्रैजिक वास्तविकता में जो तब्दील हो रही थी। पिछले एक दशक से जीत का पर्याय विश्व का सबसे तेज धावक जो जून 2013 रोम डायमंड लीग  के बाद से  45 दौड़ों में अजेय धावक अंतिम बाज़ी में पिछड़ कर तीसरे स्थान पर था। शायद स्टेडियम की फ़िज़ा में ये ग्रीक प्रभाव ही रहा होगा कि उसैन बोल्ट की ये कहानी भी ग्रीक ट्रेजडियों की तरह एक ट्रेजेडी में बदल रही थी ।निसंदेह विलेन अमेरिकी धावक जस्टिन गैटलिन था जो दो बार डोप टेस्ट में फेल  हो जाने के बाद दो बार प्रतिबंधित हो चुका था। और अब यहाँ उसने ये 100 मीटर रेस जीतकर विदाई पार्टी में विघ्न डाल दिया। उसने बोल्ट को सेकंड के सौवें हिस्से और उसी के देशवासी कोलमैन ने सेकंड के तीन सौवें हिस्से से पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर धकेल दिया था। लेकिन पिक्चर अभी बाकी थी थी।विलेन का हीरो में रूपांतरित होना बाकी था। रेस ख़त्म होने के बाद विपरीत दिशा से आते बोल्ट के सामने ट्रैक पर ही गैटलिन घुटनों के बल ज़मीन पर बैठ गया और फिर बोल्ट के सम्मान में झुक कर उस महान खिलाड़ी को ट्रैक से विदाई दी। ये एक अद्भुत दृश्य था। वे दोनों मित्र कतई नहीं थे। बोल्ट ने गैटलिन को उठाया।अब दोनों गले मिल रहे थे। मित्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सन्देश दे रहे थे 'दोस्ती से बढ़कर कुछ नहीं'। 
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उसैन बोल्ट भले ही अपनी अंतिम रेस हर गया हो। लेकिन इससे उसकी महानता में इससे कोई कमी नहीं आनी है।दरअसल इस हार के बाद वो अमेरिकी बास्केटबाल खिलाड़ी माइकेल जॉर्डन और मुक्केबाज़ मुहम्मद अली  जैसे लीजेंड की श्रेणी में आ खड़ा  हुआ। 8 ओलम्पिक और 11 विश्व चैम्पियनशिप जीत उसके नाम हैं। वो पहली बार 2008 के ओलम्पिक से सुर्ख़ियों में आया और उसके बाद एक दशक तक लगभग अजेय बना रहा और गति का पर्याय भी। वो विश्व का सबसे तेज धावक था। 100 मीटर रेस में 9.58 सेकंड और 200 मीटर में 19.19 सेकेण्ड का रिकॉर्ड उसी के नाम है। वो हमारे समय का निर्विवाद रूप से सर्वश्रेष्ठ एथलीट है। हालांकि हमारे समय में डेली थॉम्पसन,सेबेस्टियन को,अबेबे बिकिला,हेले गेब्रेसिलासी,माइकेल जॉनसन और कार्ल लेविस जैसे महान एथलीट हुए है पर शायद बोल्ट की उपलब्धियों तक नहीं पहुँचते सिवाय रूस के पोल वॉल्टर सेर्गेई बुबका को छोड़कर। 
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अब ट्रैक पर बोल्ट को दौड़ते हुए तो नहीं ही देख पाएंगे बल्कि बल्कि दोनों हाथों से आसमान की ओर इशारा करते  उनके ट्रेडमार्क विशिष्ट एक्शन को भी नहीं देख पाएंगे। वे हर दौड़ के बाद तीर कमान चलाने वाले अंदाज में आसमान की ओर अँगुली से इशारा करते मानों वे दुनिया को बता रहे हो इन तारों को देखो और उनमे सबसे चमकते शुक्र तारे को देखो। दरअसल मैं इस धरती का नहीं आसमाँ का तारा हूँ। और कहो तो एथलेटिक्स आसमाँ के असंख्य तारों के बीच सबसे ज़्यादा चमकने वाला शुक्र तारा हूँ। तो एथलेटिक्स जगत के इस शुक्र तारे को ट्रैक से अलविदा।   




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