Thursday, 19 June 2014

फुटबॉल विश्व कप 2014_4

                     

                    स्पेन के लिए ये विश्व कप किसी दुःस्वप्न से कम न था। अब 2010 की विश्व विजेता टीम से बेहतर कौन समझ सकता है कि शीर्ष पर पहुँचने के बनिस्बत वहाँ बने रहना अधिक दुष्कर होता है। और ये भी कि जब चोटी से कोई गिरता है तो किस हद तक गर्त में गिरेगा इसका अनुमान लगाना मुश्किल ही नहीं असंभव होता है। जब स्पेन की टीम ने ब्राज़ील की धरती पर कदम रखा तो उसकी गिनती इस बार के संभावित विजेताओं में की जा रही थी। उस समय किसी को नहीं पता था कि विश्व चैम्पियन इस कदर बेआबरू होकर विश्व  कप से विदा होंगे। लेकिन होनी को कौन टाल सका है।  होनी होकर रहती है और हुई भी। जब स्पेन ने 23 खिलाड़ियों की घोषणा की तो वे एक कीर्तिमान बना रहे थे-विश्व चैम्पियन टीम के सर्वाधिक यानि 16 खिलाडियों को रिटेन करने का। उस समय उनको नहीं पता था की वे कुछ ऐसे अनचाहे कीर्तिमान के भागीदार होंगे जिसे कभी किसी ने नहीं चाहा है और ना कभी चाहेगा। अपने पहले मैच में  नीदरलैंड की टीम से 1-5 से हारे तो ये किसी वर्तमान चैम्पियन की अब तक की सबसे बड़ी हार थी। नीदरलैंड ने स्पेन को 2010 में उनके सपने को तोड़ने की सज़ा दे दी थी। लेकिन उस समय भी  किसी ने उनकी टीम को खारिज़ नहीं किया था। लोगों में खासकर उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि स्पेन पलटवार करेगा।अगला मैच चिली से था। पलड़ा स्पेन का ही भारी था। चिली स्पेन के विरुद्ध खेले गए पिछले 10 मैचों में जीत नहीं सका  था। उसे 8 में हार मिली और 2 ड्रा खेले थे। जबकि स्पेन अक्टूबर 2006 के बाद से बैक टू बैक अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं हारे थे। और सबसे बड़ी बात ये कि इससे पूर्व विश्व कप में खेले गए दोनों मैचों में स्पेन ने चिली को हराया था।1950 में 2-0 से और 2010 में 2-1  से।
                लेकिन जहाँ अपने पहले मैच में नीदरलैंड से बुरी तरह हार कर स्पेन का  आत्मविश्वास टूटा था वहीं चिली की टीम अपने पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया को 3-1 से हराकर उत्साह से लबरेज़ थी। ये सही है उम्मीद पर दुनिया टिकी है । पर उम्मीद तो उम्मीद होती है। हमेशा खरी उतरे जरूरी नहीं।उस पर तुषारापात भी होता है। इस बार स्पेन के साथ ऐसा ही हुआ। चिली ने 2-1 से हरा दिया। पहले हाफ में कहीं से नहीं लगा कि एक विश्व चैम्पियन टीम खेल रही है। 20वें मिनट में एदुआर्दो वरगास और 43वें मिनट में चार्ल्स अरंगुएज़ ने गोल कर स्पेन की हार की पटकथा लिख दी। स्पेन हार के साथ पहले ही दौर में इस विश्व कप से बाहर हो गई बल्कि ऐसी टीम बन गई जो वर्तमान चैम्पियन होते हुए पहले दो मैच हार गई।
                                                                                   कहते हैं इतिहास अपने को दोहराता है। एकदम सही ही कहते हैं।पहली बार 1962 का चैम्पियन ब्राज़ील 1966 में पहले ही दौर में बाहर हो गया था। 1998 में फ्रांस चैम्पियन बना पर 2002 में चैम्पियन पहले ही दौर  बाहर हो गया। इतिहास ने अपने को दोहराया 2010 में। 2006 में इटली चैम्पियन बना पर 2010 में चैम्पियन पहले ही दौर में बाहर हो गया। सिलसिला यहीं नहीं रूका। इतिहास ने 2014 में अपने को पुनः दोहराया। 2010 में स्पेन चैम्पियन बना। 2014 में चैम्पियन पहले ही दौर में बाहर हो गया। इतिहास एक और तरीके से अपने को दोहरा रहा था। 1950 में विश्व कप ब्राज़ील में हुआ। एक मैच चिली और स्पेन के बीच खेला गया रियो डी जेनिरो में। स्टेडियम था मराकाना। तारीख थी  29 जून 1950 । नतीजा 2-0 स्पेन के पक्ष में। 64 साल बाद विश्व कप एक बार फिर ब्राज़ील में हो रहा है। मैदान में वो ही दो टीमें आमने सामने थीं-स्पेन और चिली। मैदान भी वो ही रियो डी जेनिरो का स्टेडियम मराकाना। स्कोर लाइन भी वो ही 2-0।बस एक फ़र्क था इस बार विजेता चिली था। एक और तरीके का दोहराव था। तीन दिन पूर्व नीदरलैंड ने चार साल पहले की हार का बदला लिया था और अब चिली इतिहास बना रहा था। ईश्वर स्पेन समर्थकों को हार सहने की शक्ति दे !!!!!

                                   

एक अनिर्णीत संघर्ष जारी है

एक अनिर्णीत संघर्ष जारी है  यकीन मानिए बैडमिंटन चीन और इंडोनेशिया के बिना भी उतना ही रोमांचक और शानदार हो सकता है जितना उनके रहते...