Friday, 6 August 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी_14




06 अगस्त 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी

स्पर्द्धाओं का 14वां दिन


ज़िन्दगी घटनाओं का कोलाज है। भावनाओं का इंद्रधनुष  है। ज़िन्दगी हर दिन अलग तरह से घटित होती है और हर दिन उसमें भावनाओं का अलग  रंग भरता है। औकेर ये भी कि ज़िन्दगी एक ही दिन में अलग अलग तरह से घटित होती है और एक ही दिन में भावनाओं के अलग अलग रंग उसमें भरते हैं। और क्योंकि खेलों में जिंदगी घटित होती है तो खेल भी हर रोज  इमोशंस के इंद्रधनुष से सजते हैं। तो आज भी टोक्यो में भारत के लिए ज़्यादा उदासी का दिन और  थोड़ी सी खुशी का दिन। कुश्ती और हॉकी ने उदासी का रंग भरा तो गोल्फ ने उम्मीद का। और एथलेटिक्स बेरंग रहा आज भी।

आज भारत ने अपने अभियान की शुरुआत हॉकी के कांस्य पदक मुकाबले से की। मुकाबला था रियो ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता टीम ग्रेट ब्रिटेन से। लेकिन कोई कोई दिन आपका नहीं होता। वो आज का दिन था शायद। लड़कियों ने खूब लड़ा पर हार गईं। ऐसी हार आपमें निराशा पैदा नहीं बल्कि भविष्य के लिए उम्मीद जगाती है। वे मैच हारी पर दिल जीता। पहले क्वार्टर में कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। लेकिन दूसरे क्वार्टर एलिना रायेर और साराह रॉबर्ट्स ने गोल कर ब्रिटेन को 2-0 से आगे कर दिया। अब भारत की बारी थी और भारत ने ताबड़तोड़ तीन गोलकर दूसरा क्वार्टर अपने पक्ष में 3-2 के स्कोर पर समाप्त किया। इंग्लैंड ने तीसरे क्वार्टर में गोलकर स्कोर 3-3  बराबर किया। चौथे क्वार्टर में एक और गोल कर इंग्लैंड ने मैच जीत लिया और कांस्य पदक भी। भारत कांस्य पदक से चूक गया। बाद में खेले गए फाइनल मैच में नीदरलैंड ने अर्जेंटीना को हराकर स्वर्ण पदक जीता । इस मैच के चारों गोल पेनाल्टी कॉर्नर से किए गए।

आज कुश्ती में भी भारत का दिन अच्छा नहीं रहा। सीमा बिस्ला आज महिलाओं की 50 किलोग्राम फ्रीस्टाइल स्पर्धा में भाग ले रही थीं। वे पहले ही चक्र में ट्यूनीशिया की सारा हमदी से 01-03 से हार गईं। भारत की कुश्ती की सबसे बड़ी उम्मीद और स्टार रेसलर बजरंग पुनिया भी आज मैट्स पर थे ।वे पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल स्पर्धा में प्रतिभाग कर रहे थे। उन्होंने अच्छी शरुआत की और पहले राउंड में कज़ाकिस्तान के ए. अकमातालीव को लगभग बराबरी के मुकाबले में हराया। स्कोर 3-3 रहा। पर अंतिम अंक अर्जित करने के कारण  पुनिया जीत गए। उसके बाद क्वार्टर फाइनल में ईरान के मुर्तजा गियासी को चित कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया पर यहां अज़रबैजान के हाजी अलियेव से 5-12 उनको से हार गए। अब कल वे कांस्य पदक के लिए रूस के जी रासिदोव से होगा।

एथलेटिक्स में आज भारत की प्रियंका गोस्वामी और भावना जाट ट्रैक पर थीं। वे महिलाओं की 20 किलोमीटर पैदल चाल में भाग ले रही थीं। वे  01 घंटा,32 मिनट व 36 सेकंड का समय निकाल कर 17वें स्थान पर रहीं। प्रियंका ने फरवरी में रांची में हुए राष्ट्रीय रेस वाक में  01 घंटा 28 मिनट 45 सेकंड का नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाते हुए टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया था। अगर इस प्रदर्शन को दोहरा देतीं तो स्वर्ण उनके नाम होता। दूसरी भारतीय प्रतिभागी भावना जाट 01 घंटे 37 मिनट और 38 सेकंड का समय लेकर 32वें स्थान पर रहीं। इस स्पर्धा  का स्वर्ण इटली की ए. पालमिसानो ने 01 घंटा,29 मिनट और 12 सेकंड का समय लेकर जीता। रजत पदक कोलंबिया की एस. एरिनास ने और कांस्य पदक चीन की होंग लियू ने जीता। पुरुषों की 50 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व गुरप्रीत सिंह कर रहे थे। लेकिन गरम और उमस भरे मौसम में क्रेम्प्स के कारण  वे ये स्पर्धा पूरी नहीं कर सके और 35 किलोमीटर के बाद स्पर्धा से बाहर हो गए। पोलैंड के डी. तोमाला ने जीती। उन्होंने 03 घंटे, 50 मिनट और 08 सेकंड का समय लिया। जर्मनी के जे.हिल्बर्ट ने रजत पदक और कनाडा के ई.डनफी ने जीता। 

पुरुषों की 4×400मीटर दौड़ में  अमोज जैकब,अरोकिया राजीव,निर्मल टॉम और मुहम्मद अनस की भारतीय टीम पहले राउंड की हीट 02 में 3मिनट और 0.25 सेकंड का समय लेकर चौथे स्थान पर रहे और फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सके। यहां उन्होंने 03मिनट और 00.91 सेकंड को तोड़कर  ना केवल नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया बल्कि एशियन रिकॉर्ड भी बनाया।


कासुमिगासेकी कंट्री क्लब में चल रही गोल्फ स्पर्धा में तीसरे राउंड में भी अदिति अशोक का शानदार प्रदर्शन जारी है। वे पदक की दौड़ में बनी हुई हैं। दूसरे राउंड के बाद 12 अंडर 201 स्कोर के साथ अब वे अकेले दूसरे स्थान पर हैं। पहले स्थान पर विश्व नंबर एक अमेरिका की नैली कोरडा हैं जिन्हें तीन स्ट्रोक्स की बढ़त हासिल है। जबकि दीक्षा डागर 51वें स्थान पर चल रही हैं।

कुछ और खबरें टोक्यो ओलंपिक से।

  • सबसे पहले टोक्यो के ओलंपिक स्टेडियम में चल रही एथलेटिक्स की। पुरुषों की 4×100 मीटर रिले दौड़ में इटली ने 37.50 सेकंड का समय निकाल कर गोल्ड मैडल जीता। इटली ने इस स्पर्धा का गोल्ड मैडल पहली बार जीता। ब्रिटेन ने रजत और कनाडा ने कांस्य पदक जीता। महिलाओं का इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जैमेका ने 41.02सेकंड के समय मे जीता। रजत अमेरिका ने और कांस्य ब्रिटेन ने जीता।
  • महिलाओं की जेवलिन थ्रो का स्वर्ण पदक चीन की  लियू शियिंग ने स्वर्ण पदक जीता।रजत पोलैंड की मारिया आंद्रेज़िक ने और कांस्य ऑस्ट्रेलिया की ली बारबर ने जीता।
  • महिलाओं की 1500 मीटर दौड़ केन्या की फेथ किपेगोन 3मिनट और 53.11सेकंड का समय निकाल कर जीती। ये नया ओलंपिक रिकॉर्ड है। ब्रिटेन की लौरा म्यूर ने रजत और नीदरलैंड की शिफॉन हसन ने कांस्य पदक जीता। जबकि महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में बहामास की मिलर उइबो ने स्वर्ण पदक जीता जबकि डोमिनिकन रिपब्लिक की मेरिलेडी पोलिनो ने रजत और अमेरिका की एलिसन फेलिक्स ने कांस्य पदक जीता।
  • पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ युगांडा के जोशुआ चेप्टेगे ने 12 मिनट और 58.15 सेकंड  के समय के साथ जीत ली। इस स्पर्धा का रजत कनाडा के मुहम्मद अहमद ने और कांस्य पदक अमेरिका के पॉल कैलिमो ने जीता।
  • बीच वॉलीबॉल में महिलाओं का स्वर्ण पदक अमेरिका की जोडी एप्रिल रॉस और एलिक्स क्लिनमान ने ऑस्ट्रेलिया की जोड़ी डेल सोलर और क्लांसी को 21-13 21-15से हराकर जीत लिया।
  • टेबल टेनिस की पुरुषों की टीम स्पर्धा का फाइनल चीन और जर्मनी के बीच हुआ। चीन ने जर्मनी को 3-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।जापान ने दक्षिण कोरिया को 3-1 से हराकर कांस्य पदक जीता। 
  • महिलाओं की फुटबॉल स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा ने स्वीडन को हराकर जीता। रेगुलर समय में 1-1 गोल से बराबर रहने के बाद फैसला शूटआउट से हुआ। जिसमें कनाडा 3-2 से जीत गया। कांस्य पदक अमेरिका ने जीता।
  • इजू वेलोड्रम में चल रही साइक्लिंग की पुरुष व्यक्तिगत स्प्रिंट स्पर्धा का स्वर्ण पदक नीदरलैंड के हैरी लवरेसेन ने जीता। रान्त पदक जेफरी हूग्लैंड ने  अऊर्ज कांस्य ब्रिटेन के जैक कार्लिन ने जीता।
  • महिलाओं की मेडिसन स्पर्धा ब्रिटेन की लौरा केनी और केटी अर्चिबाल्ड ने स्वर्ण पदक जीता जबकि डेनमार्क की जोड़ी ने रजत और रूस ने कांस्य पदक जीता।
  • रूस के ज़ुर्बेक सिदकोव ने पुरुष फ्रीस्टाइल वेल्टरवेट स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया है। बेलारूस के एम.क़दजी महमेदु ने रजत और अमेरिका काइल डेक और उज्बेकिस्तान के बी.अब्दुरख्मोनोव ने कांस्य पदक जीते।
  • ब्रिटेन की केट फ्रेंच ने महिलाओं की आधुनिक पेंटाथलॉन स्पर्धा जीत ली है। इसका रजत पदक लिथुआनिया की लौरा ने और कांस्य हंगरी की एस कोवक्स ने जीता। इस स्पर्धा में फेंसिंग, शूटिंग,घुड़सवारी,दौड़ और तैराकी शामिल होते हैं।
  • आज महिला बास्केटबॉल के सेमीफाइनल मुकाबले सम्पन्न हुए। अमेरिका ने सर्बिआ का 79-59 अंकों से और जापान ने फ्रांस को 87-71अंकों से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 36 स्वर्ण पदकों सहित 79 पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 31 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 98 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 24 स्वर्ण पदक सहित कुल 51 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत 02 रजत और 03 कांस्य सहित कुल 05 पदकों के साथ पदक तालिका में अब 66वें स्थान पर पहुंच गया है।

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और चलते चलते आज बात टोक्यो ओलंपिक में भाग ले रहे ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की। टोक्यो ओलंपिक में घोषित रूप से कम से कम दो खिलाड़ी ऐसे भाग ले रहे हैं जो ट्रांसजेंडर हैं। इनमें से एक हैं न्यूजीलैंड की लॉरेल हब्बार्ड जो कल महिलाओं की87 किलोग्राम से अधिक भर वर्ग की वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में भाग लेंगी। यहां उल्लेखनीय है कि वे जन्मना पुरुष थीं और 23 वर्ष की अवस्था वे पुरुषों की स्पर्धा में ही भाग लेती थीं। उसके बाद उन्होंने खेलों से अवकाश लिया। उन्होंने दोबारा खेलों में वापसी महिला एथलीट के रूप में की और 2017 में पहली बार कामनवेल्थ  खेलों में पदक जीता। दूसरी ट्रांसजेंडर खिलाड़ी कनाडा की फुटबॉल टीम की खिलाड़ी क्विन हैं। वे जन्मना महिला हैं। वे ओलंपिक में भाग लेने वाली पहली आधिकारिक ट्रांसजेंडर खिलाड़ी हैं। इस बार कनाडा ने महिलाओं की फुटबॉल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता है। वे घोषित रूप से ट्रांसजेंडर के रूप में पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2020 में पहली बार उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था वे ट्रांसजेंडर हैं। वे मिडफील्डर हैं और कनाडा को स्वर्ण पदक दिलाने  में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

निसन्देह ओलंपिक आंदोलन के इतिहास में आधिकारिक रूप से ट्रांसजेंडर्स की स्वीकृति एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये समानता और बंधुत्व की भावना ही ओलंपिक आंदोलन कीओलंपिक खेलों की भावना की जीत है।

हॉकी की वापसी



 ".....मेरे लिए उसका प्रेम शाश्वत था। हमारा ये प्रेम लंदन में फला फूला, हेलसिंकी में हमने शादी की और मेलबोर्न में  हनीमून मनाया। 11 साल के लंबे अरसे के बाद जब एक बार फिर वो मेरे पास आई तो पहले जैसी ही ताज़गी से भरी और आकर्षक थी। इस बार वो मुझे कुआलालंपुर लेकर आई और हम एक बार फिर आसमां पर थे। लेकिन वो एक बार फिर गायब हो गई। इस आश्वासन के साथ कि वो वापस लौटेगी। मैं उसका इंतजार कर रहा हूँ- ओ मेरी परी सरीखी हॉकी.....।" 

                  हॉकी के महान खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर ये अपनी आत्मकथा में लिख रहे थे। हम जानते हैं कि हॉकी के इस प्रेम में वे अकेले नहीं थे। आज भी पूरी एक पीढ़ी है जो उनकी तरह ही हॉकी के अनन्य प्रेम में है। उनकी तरह भले ही उस पीढ़ी के लोगों ने हॉकी ना खेली हो परंतु उसे देखते हुए,उसका अनुसरण करते हुए और उसे जीते हुए ये पीढ़ी बड़ी हुई है और बलबीर सिंह सीनियर की तरह इंतज़ार में थी कि 'परी सरीखी हॉकी' कभी तो लौटेगी। और एक बार फिर हॉकी

               वाया टोक्यो वापस लौट आयी जैसे 1975 में कुआलालंपुर के रास्ते बलबीर की ज़िंदगी में लौटी थी और अपने चाहने वाले करोडों के दिलों में लौटी थी। उसका इस तरह आना मानो आपके बचपन के किसी खूबसूरत क्रश का जीवन की तीसरी बेला में अचानक सामने आ जाना है जिसे देख आप खुशी से किंकर्तव्यविमूढ़ हुए जा रहे हैं।

                  जो लोग प्रेम में हैं या रहे हैं वे जान सकते हैं कि प्रतीक्षा प्रेम की वो सबसे खूबसूरत शय है जो मन को जितना गुदगुदाती है,उतना बेचैन भी करती है। एक प्रतीक्षारत प्रेमी जान सकता है कि प्रतीक्षा से उपजी बेचैनियां इसलिए खूबसूरत होती हैं कि आप अपने वांछित यथार्थ को तसव्वुर में जीते हैं और जीते जाते हैं। तसव्वुर की चीजें अक्सर यथार्थ से बेहतर,कोमल और खूबसूरत होती हैं।

               हॉकी के प्रेम में डूबी ये पूरी पीढ़ी पिछले 41 सालों से उसकी प्रतीक्षा में थी और उसकी बेचैनियों को तसव्वुर में जी रही थी। ये एक लंबी प्रतीक्षा थी। इतनी लंबी कि बचपन और किशोरवय की उस संधिबेला की कनपटी अब चांदी सी सफेद होने लगी है या हो चुकी है।

              ये 41 साल लंबी नहीं बल्कि उससे कहीं ज़्यादा 45 साल लंबी प्रतीक्षा थी। दरअसल हम उसकी गणना 1980 से मास्को ओलंपिक करते हैं। लेकिन वो तो 1976 में मॉन्ट्रियल ओलंपिक से गायब हो चुकी थी। 1980 की स्वर्णिम आभा दरअसल आभासी थी। वो सोने की नहीं पीतल की चमक थी। पश्चिमी देशों के बहिष्कार के कारण हॉकी की बड़ी शक्तियां वहां थी ही नहीं। 6 दोयम टीमों में भी बमुश्किल आप जीत पाए थे। 


               आप इसकी क्रोनोलॉजी को समझिए। 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में हम तीसरे नंबर थे। 1975 कुआलालंपुर में विश्व कप जीतते हैं। लेकिन अगले साल ही 1976 में मॉन्ट्रियल में लुढ़क कर 7वें स्थान पर आ जाते हैं। हॉकी हमसे लगातार दूर होती जाती है। और 2008 में बीजिंग ओलंपिक के आते आते वो हमारी आंखों से पूरी तरह ओझल हो जाती है,विस्मृत हो जाती है। हम बीजिंग के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाते। एक चक्र पूरा होता है। 1928 में एम्स्टर्डम में गोल्ड से 2008 बीजिंग में अनुपस्थिति तक। यहां से चक्र उल्टा घूमता है। 2012 लंदन में 12वां, 2016 रियो में 8वां और 2021 टोक्यो में तीसरा स्थान।

              ये आपके आत्ममंथन का बायस है कि जिसे आप दिलो जान से चाहते हैं, टूटकर प्यार करते हैं और राष्ट्रीय खेल का दर्जा देकर अपने माथे बिठाते हैं तब भी वो आपसे दूर होती जाती है और आप असहाय से उसे दूर जाते हुए बेबस देखते जाते हैं।

                   दरअसल ये आपकी गलती थी। आप समय के बहाव को रोकना चाहते थे और हॉकी थी कि समय के साथ बहना चाहती थी,समय के साथ कदमताल करना चाहती थी। वो आधुनिक होना चाहती थी और आप थे कि उसे वहीं रोक देना चाहते थे। वो  पश्चिमोन्मुखी हो जाती है। पश्चिम के तौर तरीके उसे लुभाने लगते हैं। वहां की तेजी और ताकत लुभाती है और साथ ही कृत्रिमता भी। कृत्रिम एस्ट्रो टर्फ पर गति और ताकत बहुत फबते हैं और हॉकी है कि उस चकाचौंध  पर फिदा हो हो जाती है। अब वो घास और मिट्टी के मैदान को देखकर नाक-भौं सिकोड़ने लगती है। अब उसे आपकी कलात्मकता नही रुचती,वो तकनीक से प्रभावित होती है। आप उस परिवर्तन को पहले तो देख नहीं पाते और जब देख भी लेते हो तो स्वीकार नहीं करते। आप आगे के बजाए पीछे की और देखते हो। आप उसे प्यार तो करते हो पर उसे चेरी की तरह रखना चाहते हो। आप खुद के तौर तरीके नहीं बदलना चाहते और उसे बदलने से रोक देना चाहते हो।  इतना हो तो भी सब्र कर ले। आप बीसवीं सदी में 18वीं सदी की तरह काम करते हो। बजाय इसके कि आप उसकी चाहतों को समझो आप उस पर जागीर की तरह आधिपत्य जमाना चाहते हो। आपस में लड़ते हो और उसकी पूरी तरह उपेक्षा कर देते हो। 

                ज़ब तक आप ये समझो कि वो आपसे दूर जा चुकी है तो आप अपने को बदलना शुरू करते हो। लेकिन बदलाव को लेकर अभी आप उपापोह की स्थिति में हो। आपको अभी भी पुराने तौर तरीकों पर विश्वास है। इस उपापोह और आपकी सीमाओं के कारण परिवर्तन वांछित तरीके से और वांछित तेजी से नहीं कर पाते। इस बीच वो आपसे इतनी दूर जा चुकी होती है कि आंखों से ओझल हो जाती है।

                तब जाकर आपकी नींद टूटती है। आपकी खुमारी उतरती है। अब आप आमूलचूल परिवर्तन के लिए तैयार होते हो। आप उसे अपनी और खींचने के लिए गति ,पावर और तकनीक अपनाते हो। कोचिंग के तौर तरीके बदलते हो। बाज़ार की ज़रूरत के हिसाब से खुद को ढलते हो। और लीग सिस्टम लाते हो। अपने यहां भी पश्चिमी खिलाड़ियों के एक्सपोज़र देने का वादा करते हो। और उसमें धन का आकर्षण पैदा करते हो। अंततः आपके प्रयास सफल होते है और तब कहीं जाकर आप उसे वापस ला पाने में समर्थ होते हो।

              आप हॉकी की क्रिकेट से तुलना कीजिए। आप हॉकी का 1975 में विश्व कप जीतते हो। पर उसमें हो रहे परिवर्तनों की आहट नहीं सुन पाते और इसीलिए उसमें तीव्र उतार आता है। 1983 में क्रिकेट का विश्व कप जीतते है। वे उसमें आ रहे परिवर्तनों को बहुत शीघ्रता से और सहजता से अपनाते हैं और उठान पर होते हैं। आखिर इन दो खेलों की विपरीत प्रवृत्तियों का कारण क्या होता है। दरअसल तमाम कारणों के अलावा सबसे बड़ा कारण एक व्यक्ति होता है। इसका नाम होता है जगमोहन डालमिया। वे एक उद्योगपति थे। वे बीसीसीआई अध्यक्ष बनते हैं और उसके प्रबंधन में कॉरपोरेट कल्चर का प्रवेश कराते हैं और बहुत ही पेशेवर ढंग से वित्तीय प्रबंधन करते हैं। देखते ही देखते बोर्ड सबसे अमीर बोर्ड बन जाता है और ताकतवर भी। अब क्रिकेट में पैसा आता है और उसी अनुपात में क्रिकेट प्रगति करता है।

दरअसल हॉकी को भी एक डालमिया की ज़रूरत है।

             हॉकी संघ पिछले कुछ सालों से अधिक सक्रिय हुआ और हॉकी को बढ़ाने हर संभव प्रयास कर रहा है। निसन्देह इसमें अंतर्राष्ट्रीय हॉकी संघ भी बहुत सहयोग कर रहा है। पिछले कुछ सालों से एक और व्यक्ति है जिसने इसमें दखल दिया है। ये उड़ीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हैं। इस मामले में उनका दृष्टिकोण साफ है। डालमिया ने कॉर्पोरेट कल्चर क्रिकेट में लाई। पटनायक भी पैसे की अहमियत समझते हैं लेकिन उनका आधारभूत ढांचे और सुविधाओं के विकास पर ज़ोर है। ये दरअसल एक राजनेता और एक उद्योगपति होने का अंतर है। 2018 में जब सहारा ने अपनी क्राइसिस के चलते हॉकी इंडिया की स्पॉन्सरशिप से हाथ खींचा तो उड़ीशा सरकार ने हॉकी इंडिया से  5 सालों का 150 करोड़ रुपये का करार किया और पुरुष महिला और  जूनियर टीम की स्पॉन्सरशिप दी। इसके अलावा भी उड़ीसा सरकार ना केवल हॉकी को बल्कि खेलों के समुचित विकास के काम कर रही है। उसने 2018 में टाटा ग्रुप के साथ भुवनेश्वर में हॉकी हाई परफॉर्मेन्स सेंटर स्थापित किया ताकि विश्व स्तरीय खिलाड़ी बनाए जा सकें। और जमशेदपुर में देश का सबसे हॉकी स्टेडियम भी बना रही है। ऐसे समय में जब कोरोना महामारी से उपजे वित्तीय संकट के चलते केंद्र सरकार सहित अनेक राज्य सरकारों ने खेलों का बजट कम किया है,वहीं उड़ीशा सरकार ने इस साल खेलों का बजट 250 करोड़  का रखा जिसे अगले साल 350 करोड़ करने का वादा किया है। पिछले दिनों भारत में जितनी भी बड़ी हॉकी प्रतियोगिताएं हुई उन सब की मेजबानी उड़ीशा ने ही की। इनमें2014 की चैंपियन्स ट्रॉफी, 2017 में हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल और विश्व कप 2018 हैं और 2023 विश्व कप भी यहीं आयोजित किया जाएगा।


                ये देखना रोचक होगा कि नवीन पटनायक हॉकी के डालमिया बन पाते हैं या नहीं। पर ये निश्चित है कि टोक्यो में भारत में शानदार हॉकी खेली बावजूद इसके कि वे ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम से हारे। और भारतीय हॉकी की पुनर्वापसी के लिए आज के मैच से बेहतर मैच नहीं हो सकता था। 1-3 से पिछड़ने के बावजूद भारत ने शानदार वापसी की और 5-4 से मैच जीता। इस मैच में वो सब कुछ था जो आधुनिक हॉकी में होने की अपेक्षा की जाती है या की जा सकती है। तभी अशोक कुमार कहते हैं कि ये एक सम्पूर्ण मैच था  जिसे हॉकी कोच आगे रेफेरेंस के तौर पर अपने पास पास रखेंगे।

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फिलहाल तो भारत की वापसी और कांस्य पदक जीतने की बधाई। और ये देखना भी रोचक होगी कि हॉकी की ये वापसी कितनी टिकाऊ होती है।


टोक्यो ओलंपिक डायरी_13

 



05 अगस्त 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी

स्पर्द्धाओं का 13वां दिन


      बहुत बार ऐसा होता है कि एक छोटी सी इच्छा पूरी ना होने से और लंबे समय तक उसका इंतजार बने रहने से वो हमारी सबसे बड़ी चाहना बन जाती है। वो इतना बड़ा आकार ग्रहण कर लेती हैं कि उसके सामने बड़ी से बड़ी इच्छाएं बौनी हो जाती हैं। यहां तक कि दूसरी बड़ी उपलब्धियां भी उस  चाहना को खत्म या रिप्लेस नहीं कर पातीं।  हॉकी की हमारी एक गौरवशाली विरासत थी जिसे हम संभाल नहीं सके। उसे संभालने के प्रयास में मिली  एक जीत बाकी सारी जीतों को किस तरह आच्छादित कर लेती है, ये हॉकी में आज की जीत बताती है।

आज भारत ने टोक्यो में अपने अभियान की अब तक की सबसे शानदार शुरुआत की। आज पुरूष हॉकी का कांस्य पदक के लिए भारत का जर्मनी की टीम से मुकाबला था। एक बहुत ही रोमांचक और संघर्षपूर्ण मैच में भारत ने जर्मनी को 5-4 से हरा दिया और कांस्य पदक जीत लिया। जिस खेल में आपने 08 स्वर्ण पदक जीते हों उसमें अगर देखा जाए तो कांसे का पदक जीत लेना बड़ी बात नहीं होती। लेकिन किसी जीत का महत्व इस बात से निर्धारित नहीं होता कि तमगे का रंग क्या है बल्कि इस बात से होता है वे तमगे किस समय और परिस्थितियों में जीते गए हैं। ये 41 साल लंबे इंतजार का अंत था। ये पुराने गौरव के एक अंश को पुनः प्रतिष्ठापित कर देना था। ये ध्यानचंद की विरासत को स्थापित करने का प्रयास था और राष्ट्रीय खेल के खोए गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास था। आज का मैच खेल की ऊंचाइयों को छू रहा था। इसमें वो सबकुछ था जो आज की हॉकी में लोग देखना चाहते हैं। अशोक कुमार कहते हैं कि ये एक ऐसा मैच था कि अब से सारे कोच इस मैच की वीडियो रेफरेंस के लिए अपने पास रखेंगे।


         पहला गोल जर्मनी ने किया। खेल शुरू होते ही जर्मनी ने भारत पर 1-0 से बढ़त ले ली। दूसरे क्वॉर्टर के शुरुआत में ही भारत के सिमरनजीत ने गोल दागकर स्कोर बराबर कर लिया। इसके बाद जर्मनी ने भी दूसरा गोल दाग दिया और 2-1 से आगे हो गया। यही नहीं दूसरे क्वॉर्टर के खत्म होने से 6 मिनट पहले जर्मनी ने स्कोर 3-1 कर दिया। भारत इससे हतोत्साहित नहीं हुआ। और दूसरा क्वार्टर खत्म होते होते हार्दिक सिंह और हरमनप्रीत सिंह ने गोल कर भारत को 3-3 की बराबरी दिला दी। तीसरे क्वॉर्टर के तीसरे मिनट में रुपिंदर पाल सिंह ने पेनाल्टी स्ट्रोक पर गोल दागकर भारत को 4-3 से बढ़त दिला दी और फिर सिमरनजीत ने भारत की बढ़त को 5-3 कर दिया। उसके बाद जर्मनी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। यहां तक कि आखरी चार मिनट में तो गोलकीपर की जगह एक और खिलाड़ी को उतार कर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की। अंततः भारत ने मुकाबला 5-4 से जीतकर इस ओलंपिक का चौथा पदक अपनी झोली में डाला। एक बार फिर श्रीजेश ने शानदार  रक्षण किया और जीत में अहम योगदान दिया। उम्मीद की जानी चाहिए ये जीत भारतीय हॉकी में नए युग की शुरुआत साबित हो।

             इस स्पर्धा के फाइनल में बेल्जियम और ऑस्ट्रेलिया के बीच भी रोमांचक मैच खेला गया। रेगुलर टाइम  में  1-1 मुकाबला बराबरी पर रहने के कारण पेनाल्टी शूट आउट में बेल्जियम ने ऑस्ट्रेलिया को 3-2 से परास्त कर स्वर्ण पदक जीत जीता।

                   कल जहां कुश्ती में भारतीय पहलवानों ने खुश होने के मौके दिए वहां आज सुबह एक खराब शुरुआत की। पहले अंशु मलिक रेपीचेज में रूस की वेलेरिया कोबालोव से 1-5 से हार गईं और इस स्पर्धा में अंशु की निराशाजनक चुनौती खत्म हुई। कुश्ती में भारत को विनेश फोगाट से बड़ी उम्मीदें थीं। 53 किलोग्राम वर्ग में उन्हें  पहली वरीयता मिली थी। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत भी अच्छी की और पहले राउंड में स्वीडन की सोफिया मैटसन को आसानी से  7-1 अंकों से हराया था। लेकिन अपना क्वार्टर फाइनल मुकाबला रूस की वेनेसा कालाजिनस्काया से 3-9 से हार गईं। और इस तरह उनका इस ओलंपिक का अभियान खत्म हुआ। कुश्ती में आज का सबसे बड़ा आकर्षण ये था क्या रवि कुमार दहिया गोल्ड जीत पाएंगे या नहीं। पर आज वे भी असफल रहे। 57 किलोग्राम बर्फ की इस स्पर्धा के फाइनल में रूस के विश्व चैंपियन जेड. युगेव से कड़ा मुकाबला किया पर 4-7अंकों से हार गए  और रजत पदक जीता। कुश्ती में ओलंपिक में पदक जीतने वाले वे 5वें भारतीय पहलवान हैं। आज कुश्ती में अंतिम चुनौती 86 किलोग्राम में दीपक पुनिया की थी जो कांस्य पदक के लिए सान मोरिनो के माइल्स एमिली से खेल रहे थे । ये एक बहुत ही करीबी और कड़ा मुकाबला था। अंतिम एक मिनट पहले तक दीपक 2-1 अंकों से आगे थे। समाप्ति के 5 सेकंड पूर्व एमिली ने दो अंक जीतकर दीपक को 4-2 अंकों से परास्त कर दीपक को कांस्य पदक से वंचित कर दिया। एमिली को अंतिम दो अंक दिए जाने को भारत ने चैलेंज भी किया पर उसको स्वीकार नहीं किया गया। इस स्पर्द्धा का स्वर्ण पदक अमेरिका के डेविड टेलर के ईरान के हसन यज़दानीचरती को हराकर जीता।


            कासुमिगासेकी कंट्री क्लब में चल रही गोल्फ स्पर्धा में दूसरे राउंड में भी अदिति अशोक का शानदार प्रदर्शन जारी है और वे पदक की दौड़ में बनी हुई हैं। दूसरे राउंड के बाद 09 अंडर 133 स्कोर के साथ डेनमार्क की कोरेट्ज़ मड़सेन और एमिली क्रिस्टीन के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर बनी हुई हैं। पहले स्थान पर विश्व नंबर एक अमेरिका की नैली कोरडा हैं जिन्हें चार स्ट्रोक्स की बढ़त हासिल है।


टोक्यो ओलंपिक से ही कुछ और खबरें।

शुरुआत टोक्यो के ओलंपिक स्टेडियम में चल रही एथलेटिक्स स्पर्द्धाओं से। पुरुषों की ट्रिपल जम्प स्पर्धा पुर्तगाल के पी. पिकार्डो ने 17.98 मीटर लंबी छलांग लगाकर जीत ली है। चीन के वाई.एम.झू ने 17.57 मीटर की छलांग के साथ रजत और बुर्किना फासो के एच. जंगो ने 17.47 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता। 

पुरुषों की शॉटपुट स्पर्धा का स्वर्ण पदक अमेरिका ने नए ओलंपिक रिकॉर्ड के साथ जीत। उन्होंने 23.30 मीटर की थ्रो की। 22.65 मीटर थ्रो के साथ अमेरिका के ही जे. कोवेक्स ने रजत और 22.47 मीटर की थ्रो के साथ न्यूज़ीलैंड के टी. वाल्श कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा  इटली के एम.स्टानो ने जीती। उन्होंने 01 घंटा 21 मिनट और 05 सेकंड का समय लिया। जापान के के.इकेदा दूसरे स्थान पर और जापान के ही टी. यामानिशि तीसरे स्थान पर रहे। इस स्पर्धा में भारत के तीन खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे थे। संदीप कुमार ने  01 घंटे 25 मिनट और 07 सेकंड में दूरी पूरी की और 23वें स्थान पर रहे। राहुल 47वें स्थान पर और के.टी.इरफान 51वें स्थान पर रहे।

पुरुषों की 110 मीटर बाधा दौड़  में जमैका के एच पार्चमेंट ने 13.04 सेकंड में स्वर्ण पदक जीता। अमेरिका के जी. होलोवे ने 13.09 सेकंड के समय के साथ दूसरे और जमैका के आर.लेवी 13.10 सेकंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

अमेरिका की केटी नेगोटे महिलाओं की पोलवॉल्ट स्पर्धा 4.90 मीटर ऊंची छलांग लगाकर जीती। रूस की ए.सिदोरोवा ने 4.85 मीटर के साथ सिल्वर और ब्रिटेन होली ब्रॉडशॉ ने कांस्य पदक जीता।

कनाडा के डेमियन वार्नर ने पुरुषों की डिकेथलॉन स्पर्द्धा का  स्वर्ण,फ्रांस के केविन मेयर ने रजत और ऑस्ट्रेलिया के ऐश मोलोनी ने कांस्य पदक जीता।

पुरुषों की चार सौ मीटर स्पर्धा बहामास के स्टीवन गार्डिनर ने जीत ली है। कोलंबिया के एंथोनी जामब्रानो ने दूसरा और ग्रेनाडा के किरानी जेम्स ने तीसरा स्थान  प्राप्त किया। उधर महिलाओं की हेप्टाथलॉन स्पर्धा नफी थिएम नीदरलैंड की अनॉक वेटर ने रजत और एमे  ओस्टरवेगेल ने कांस्य पदक जीता।

आज बास्केटबॉल के पुरुषों के सेमीफाइनल मैच खेले गए। पहले मैच में अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया को 97-78 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। अब उनका मुकाबला फ्रांस से होगा जिसने दूसरे सेमीफाइनल में स्लोवेनिया को 90-89 अंकों से हराया।

2019 की विश्व कप विजेता और टोक्यो में महिला फुटबॉल स्पर्धा जीतने की सबसे प्रबल दावेदार अमेरिका की टीम ने सेमीफाइनल में कनाडा के हाथों अप्रत्याशित हार के बाद आज ऑस्ट्रेलिया को 4-3 से हराकर कांस्य पदक जीत लिया। जबकि फाइनल मैच गर्मी के कारण अब बाद में होगा।

चीन की 14 वर्षीया कुआन होंग चान ने 10 मीटर प्लेटफार्म डाइविंग में शानदार प्रदर्शन किया और  3 डाइव में परफेक्ट 10 अंक प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता। वो टोक्यो में चीन की सबसे कम उम्र की एथलीट हैं। इसका रजत पदक  भी चीन की यू ज़ी ने जीता।

चीन की टीम ने महिलाओं की टेबल टेनिस टीम स्पर्धा जापना को हराकर जीत लिया।कांस्य पदक हांगकांग ने जीता।

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 34 स्वर्ण पदकों सहित 74 पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 29 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 91 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 22 स्वर्ण पदक सहित कुल 46 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत 02 रजत और 03 कांस्य सहित कुल 05 पदकों के साथ पदक तालिका में अब 65वें स्थान पर पहुंच गया है।

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और अंत में चलते चलते बात रेफरियों और निर्णायकों की। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आज 57 किलोग्राम कैटेगरी के फाइनल में अगर सही निर्णय होता तो परिणाम कुछ और होता। आज की बाउट में एक बार रूस का पहलवान रेड जोन में गया पर वक पॉइंट रवि को नहीं दिया गया। ऐसे ही एक टैकल पर दो अंक रवि को नहीं दिए गए। अगर ये 3 अंक रवि को दिए गए तो परिणाम शायद अलग होता। ये इसी ओलंपिक का कोई अकेला ऐसा मुकाबला नहीं है जिसमें खराब निर्णय हुआ हो। मेरी कॉम की बाउट में भी एक राउंड हारने और दो राउंड जीतने के बाद भी निर्णय उनके खिलाफ गया। भारत के हॉकी मैचों में भी बहुत खराब अंपायरिंग हुई। ये कहना मुश्किल है कि भारत के खिलाफ खराब निर्णय खास मानसिकता के केकारण आते हैं या मानवीय सीमाओं के कारण होता है। अब टेक्नोलॉजी का समावेश हो गया है और ज़्यादातर खेलों में रेफेरल सिस्टम आ गया है। उसके बावजूद भी खराब अंपायरिंग हो रही है निश्चित ही चिंता की बात है। आपको याद होगा कि एक अंपायर ने सचिन के खिलाफ पूर्वाग्रह के कारण गलत निर्णय दिए हैं। सभी रैफरी और अंपायर आखिरकार मानव ही होते हैं और मानवीय क्षमता की अपनी सीमाएं हैं।अगर ये अपनी इन सीमाओं के कारण गलत और खराब निर्णय होते हैं तो इन्हें खेल का स्वाभाविक और अनिवार्य अंग मानकर इग्नोर किया जा सकता है लेकिन ऐसे निर्णय किसी पूर्वाग्रह के कारण होते हैं तो ये चिंतनीय होना चाहिए।

Wednesday, 4 August 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी_12




 04 अगस्त

टोक्यो ओलंपिक

स्पर्द्धा का 12 दिन


आज का दिन भारत के लिए धूप छांव वाला दिन। एक पल धूप एक पल छांव। एक पल खुशी एक पल उदासी। एक पल उम्मीद एक पल नाउम्मीदी। एक मिले जुले एहसास का दिन। एक ऐसा दिन जिसमें जीत की मिठास थी और हार की खटास भी। हाथ में पदक आने की मुस्कुराहट भी थी और हाथ से पदक निकल जाने की उदासी भी। पदक की संभावना बनने की उम्मीद भी जगी और पदक हाथ से फिसलने की निराशा भी फैली।

आज दिन की शानदार शुरुआत हुई। जेवलिन थ्रो में भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा भाग ले रहे थे। और उन्होंने भारतवासियों को खुश होने का मौका दिया और पदक की उम्मीद भी दी। फाइनल राउंड में क्वालीफाई करने के लिए प्रतिभागी को 83.50 मीटर थ्रो या पहले प्रतिभागियों में आना था। नीरज ने अपने पहले ही प्रयास में 86.65 मीटर थ्रो के साथ फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। वे क्वालीफाइंग राउंड में प्रथम स्थान पर रहे। अब पूरी उम्मीद है भारत को एथलेटिक्स का पहला ओलंपिक पदक मिल जाए। इसका फाइनल 07 अगस्त को होगा। इस स्पर्धा में भारत के दूसरे प्रतिभागी शिवपाल सिंह थे। वे 76.40 मीटर की थ्रो के साथ ग्रुप में 12वें स्थान पर रहे और प्रतियोगिता से बाहर हो गए।

आज कुश्ती में भारत के तीन पहलवानों रवि कुमार दाहिया,दीपक पुनिया और अंशु मालिक के भाग्य दांव पर थे। पहलवान कसौटी पर खरे उतरे और शानदार जीत हासिल कर आगे बढ़े।  महिलाओं की 57 किलोग्राम कैटेगरी में आज अंशु मलिक का पहले राउंड में मुकाबला विश्व नंबर 03 बेलारूस की इरिना कुराचिकिना से था। वे इरिना से  2-8 अंकों हार गईं। क्योंकि इरिना फाइनल में पहुंच गई हैं,इसलिए अंशु के पास रेपिचेज के जरिए कांस्य पदक जीतने का अभी मौका है।

लेकिन बाकी दो पहलवान आगे बढ़े। 57 किलोग्राम के फ्रीस्टाइल स्पर्धा में रवि कुमार दहिया ने प्री क्वार्टर फाइनल में कोलंबिया के ऑस्कर एडुआर्डो को टेकनिकल श्रेष्ठता के आधार पर 13-2 अंकों से हराया। उसके बाद क्वार्टर फाइनल में बुल्गारिया के जॉर्जी वोलेंटिनोव  वोंगेलोव को भी टेक्निकल श्रेष्ठता के आधार पर 14-04 अंकों से हराकर सेमीफाइनल में पहुच गए। 

यहां कजाकिस्तान के नूरइस्लाम सानायेव से कड़ा मुकाबला हुआ। 2-1 की प्राम्भिक बढ़त लेने के बाद  वे 2-9 अंकों से पिछड़ गए। लेकिन उन्होंने शानदार कमबैक कर स्कोर 7-9 किया और जब एक मिनट से भी कम समय था तो नूरइस्लाम को चित कर फाइनल में रजत पदक पक्का किया। वे ओलंपिक में पदक जीतने वाले के डी जाधव,सुशील कुमार,योगेश्वर दत्त और साक्षी मलिक के बाद 5वें भारतीय पहलवान होंगे। फाइनल में उनका मुकाबला रूस के ज़ेर उगुएव से होगा।

उसके बाद 86 किलोग्राम फ्रीस्टाइल पुरुष स्पर्धा में दीपक पुनिया भाग ले रहे थे। पहले रॉयन्ड में उन्होंने  नाइजीरिया के इकेरेकेमे  अगिओमोर को टेक्निकल श्रेष्ठता के आधार पर 12-1 अंकों से हराया। फिर क्वार्टर फाइनल में चीन के जुशेन लिन को कड़े मुकाबले में 6-3 उनको से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। यहां उनका मुकाबला डेविड मोरिस टेलर से था लेकिन दीपक उनका सामना नहीं कर पाए और टेक्निकल श्रेष्ठता के आधार पर 0-10 से हार गए। अब वे कांस्य पदक के लिए खेलेंगे। और ऊनसे भी पदक की उम्मीद रहेगी।

आज भारत की लोवलीना बोरगोइन का 69 किलोग्राम वर्ग में सेमीफाइनल मुकाबला वर्तमान विश्व चैंपियन टर्की की बुसेनाज़ सुरमनेली से था। लोवलीना संघर्ष किया परन्तु विश्व चैंपियन के सामने नहीं टिक सकीं और मुकाबला 0-5 से हार गईं। वे अपना कांस्य पदक सेमीफाइनल में प्रवेश करते ही सुरक्षित कर चुकी थीं। और आज का मुकाबला पदक का रंग बदलने के लिए था। फिलहाल उन्हें कांस्य पर संतोष करना पड़ा। वे ओलंपिक में मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली तीसरी खिलाड़ी हैं। इससे पहले 2008 बीजिंग में बिजेन्दर सिंह ने और 2012 लंदन में मेरीकॉम ने कांस्य पदक जीता था।

आज महिला हॉकी के पहले सेमीफाइनल में नीदरलैंड ने इंग्लैंड को 5-1 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। दूसरा सेमीफाइनल भारत और अर्जेंटीना के बीच था। भारत ने एक बार फिर शानदार शुरुआत की। आठवें मिनट में भारत ने पहला पेनाल्टी कॉर्नर हासिल किया और पिछले मैच की तरह गुरजीत ने इस बार भी गेंद को गोल में भेजने में कोई गलती नहीं की। भारत ने 1-0 की बढ़त ले ली। दूसरे क्वार्टर में अर्जेंटीना ने भारत पर दबाव बनाया और तीन पेनाल्टी कॉर्नर अर्जित किए और तीसरे पेनाल्टी कॉर्नर पर 18वें मिनट में मारिया बारिनोवा ने गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। हाफ टाइम तक स्कोर 1-1 था। तीसरे क्वार्टर में 36 वें मिनट ने एक बार फिर अर्जेंटीना ने पेनाल्टी कॉर्नर लिया और  फिर से कप्तान मारिया ने पेनाल्टी को गोल में बदलकर अर्जेंटीना को 2-1 से आगे कर दिया। और अंत तक यही स्कोर बना रहा। अब भारत का कांस्य पदक के लिए ब्रिटेन से खेलेगी।

गोल्फ में अदिति अशोक ने अच्छी शुरुआत की। वे पहले राउंड के बाद 4 अंडर 67 के स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर थीं। लेकिन दीक्षा डगर अच्छी शुरुआत नहीं कर सकीं। वे 5 ओवर 76 स्कोर के साथ 56वें स्थान पर हैं।

अब बात टोक्यो के ओलंपिक स्टेडियम में चल रही एथलेटिक्स की। पुरुषों की तरह महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ भी बहुत ही रोमांचक रही। इसे अमेरिका की 21 वर्षीया सिडनी मैकलौघलीन ने 51.46 सेकंड का  समय निकालकर नए विश्व रिकॉर्ड के साथ जीता। उन्होंने जून में बनाए अपने 51.90 सेकंड रिकॉर्ड में सुधार किया। रजत रियो की विजेता और 2019 कि विश्व चैंपियन अमेरिका की दलीलाह मुहम्मद ने जीता जिन्होंने 51.58 सेकंड का अपना  सर्वश्रेष्ठ समय निकाला। उन्होंने भी वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा। कांस्य पदक 52.02 सेकंड के समय के साथ नीदरलैंड फेमके बोल ने जीता। उन्होंने नया यूरोपियन रिकॉर्ड बनाया।

पोलैंड के डब्ल्यू नोविकी ने पुरुषों की हैमर थ्रो स्पर्धा जीती। नॉर्वे के ई.हेंरिकसन ने सिल्वर और पोलैंड के पावेल फजदेक ने ब्रॉन्ज मैडल जीता।

केन्या के इमेनुएल कोरीर ने पुरुषों की 800 मीटर दौड का स्वर्ण,केन्या के ही फर्गुसन रोटिच ने चांदी का और पोलैंड के पैट्रिक डोबेक ने  कांसे का तमगा जीता।

महिलाओं की 3000 मीटर स्टेपलचेज स्पर्धा उगांडा की पेरुथ चेमुताई ने जीत ली। उन्होंने 09 मिनट और 01.45 सेकंड का समय लिया। अमेरिका की  कोर्टनी फ्रेरिच ने रजत पदक और केन्या की  हेविन  कियेंग ने कांस्य पदक जीता। केन्या की विश्व रिकॉर्ड धारी बैट्रिस चेप्कोएच सातवें स्थान पर रहीं

कनाडा के आंद्रे डी ग्रासे ने  पुरुषों की 200 मीटर दौड़  जीती। इसका रजत अमेरिका के केनी बेडनारेक ने और अमेरिका के ही नोह लीलेस ने कांस्य पदक जीता।

आज बास्केटबॉल में महिलाओं के क्वार्टर फाइनल मुकाबले सम्पन्न हुए। इनमें सर्बिया ने चीन को 77-70 अंकों से,अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया को 79-55 से,जापान ने बेल्जियम को 86-85 से और 

फ्रांस ने स्पेन को 67-64अंकों से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

इनोशीमा याच हारबर में चल रही पुरुषों की 470 सेलिंग क्लास स्पर्धा में ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू बेल्च और विल रयान ने स्वर्ण पदक जीता। स्वीडन के एंटोन देल्बर्ग और फ्रेडरिक बेर्गस्ट्रोम ने रजत और स्पेनिश जोड़ी जोरड़ी और निकोलस रोड्रिगेज़  गार्सिया ने कांस्य पदक जीते।

10 किलोमीटर की तैराकी मैराथन स्पर्धा ब्राज़ील की एना मार्सेला कुन्हा ने एक घंटा 59 मिनट और 30.8सेकंड का समय निकालकर जीत ली।वर्तमान चैंपियन नीदरलैंड की शेरोन वां रोवेंडल ने रजत और  ऑस्ट्रेलिया की करीना ली ने कांस्य पदक जीता।

वेटलिफ्टिंग की 109 किलोग्राम से अधिक भारवर्ग स्पर्धा में जॉर्जिया के लाशा तालाकुल 488 किलोग्राम वजन उठाकर अपना ही विश्व रिकॉर्ड तीन किलोग्राम से बेहतर किया। ईरान के अली दाउदी ने रजत और सीरिया के मान आसा ने कांस्य पदक जीता।

यूक्रेन के झान बेलेनुइक ने पुरुषों की ग्रीको रोमन मिडिलवेट  स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। हंगरी के विक्टर लोरिक्ज़ ने चांदी का और सर्बिया के जुराबी ने कांसे का तमगा हासिल किया।

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 32 स्वर्ण पदकों सहित 70 पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 25 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 79 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 21 स्वर्ण पदक सहित कुल 40 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत एक रजत और दो कांस्य सहित कुल तीन पदकों के साथ पदक तालिका में अब 65वें स्थान पर पहुंच गया है। 

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और चलते चलते बात खेल भावना की। ये पुरुषों की ऊंची कूद प्रतियोगिता की बात है। क़तर के मुताज़ ईसा बरशिम,इटली के जी तांबेरी और बेलारूस के नेदासकू तीनों ने 2.37 मीटर ऊंची कूद लगाई। क्योंकि नेदासकू ने ये ऊंचाई दूसरे प्रयास में क्लियर की,जबकि बरशिम और तांबेरी पहले ही प्रयास में इसे पार करने सफल हो गए थे। तो तीसरे स्थान का फैसला हो गया था जो नेदासकू के हिस्से में आया। अब तांबेरी और बरशिम ने 2.39 मीटर ऊंचाई लांघने का प्रयास किया। इसमें दोनों असफल रहे। अब नियमानुसार स्वर्ण और रजत के लिए 'जम्प ऑफ' से होना था। लेकिन इस समय तक तांबेरी चोटिल हो चुके थे और जम्प ऑफ करने की स्थिति में नहीं थे। यानी उन्हें रजत पदक पर संतोष करना पड़ता। जब बरशिम को ये पता चला तो वे अधिकारियों के पास गए और उन्होंने कहा यदि जम्प ऑफ के लिए दोनों मना कर दें तो क्या दोनों को स्वर्ण पदक दिए जा सकते हैं। अधिकारियों ने हां कर दी। एथलेटिक्स के इतिहास में पहली बार हुआ कि एक ही स्पर्धा में दो स्वर्ण पदक दिए गए और कोई रजत नहीं। ऐसा होते ही तांबेरी दौड़ कर बरशिम की की गोद में चढ़ कर उनसे लिपट गए। ये एक अद्भुत दृश्य की निर्मिति हो रही थी। एक बार फिर साबित हुआ कि खेल सिर्फ हार जीत नहीं होते, प्रतिस्पर्धाएं नहीं होते। ये एक दूसरे के प्रति आदर और सम्मान भी होते है। ये ईमानदार भी होते है। ये आपसी भाई चारा और बंधुत्व की भावना भी होते हैं। और ये कड़ी प्रतिस्पर्द्धा नहीं स्वथ्य प्रतिस्पर्धा होते हैं। यही सच्ची खेल भावना है। यही ओलंपिक खेलों की भावना है।

टोक्यो ओलंपिक डायरी_11



 03 अगस्त 2021

टोक्यो ओलंपिक

स्पर्द्धाओं का 11 वां दिन


हर दिन एक सा नहीं होता। हर दिन आपको खुशियां नसीब नहीं होती। हर दिन उम्मीदें पूरी नहीं होती। कभी कभी टूटती भी हैं। साल भर तो सूरज भी नहीं चमकता। साल में कुछ दिन बादल बरसते हैं। कुछ दिन हम सूरज से झुलसते हैं, कुछ दिन हम सर्दी में ठिठुरते हैं। उतार चढ़ाव तो दिन प्रतिदिन का हिस्सा हैं। खेलों में भी ऐसा होता है। उतार चढ़ाव यहां भी होते हैं। आज भारत के लिए उतार का दिन था। थोड़ी उदासी का दिन। थोड़ी मायूसी का दिन।

ये दिन की खराब शुरुआत थी। महिला जेवलिन थ्रो में भारत की अन्नु रानी प्रतिभाग कर रही थीं। फाइनल राउंड के लिए क्वालीफाई करने के लिए 63 मीटर की थ्रो या पहले 12 प्रतिभागियों में आना ज़रूरी था। अन्नु केवल 54.04 मीटर भाला ही फेंक सकीं। वे 14वें स्थान पर रहीं और क्वालिफिकेशन राउंड से ही बाहर हो गईं।  इस स्पर्धा का स्वर्ण पोलैंड की एम अंद्रेजिक ने 65. 24 मीटर थ्रो के साथ जीता। रजत ऑस्ट्रेलिया की एम लिटिल ने 62.37 मीटर और कांस्य चीन की एच एच ल्यु ने 61.99 मीटर थ्रो के साथ जीता। आप इस बात पर गौर कर सकते हैं अन्नु की सर्वश्रेष्ठ थ्रो 63.24 मीटर की है। ये इस बार की रजत पदक विजेता से बेहतर है। उधर पुरुषों की शॉटपुट स्पर्धा में तेजिन्दरपाल सिंह तूर भाग ले रहे थे। फाइनल राउंड के लिए 21.20मीटर थ्रो या टॉप 12 खिलाड़ियों में आना ज़रूरी था। लेकिन तूर 19.99 मीटर थ्रो के साथ अपने ग्रुप के 16 प्रतिभागियों में 13वें स्थान पर रहे और फाइनल राउंड में जगह बनाने में असफल भी।

पुरुष हॉकी में भारत का विजय अभियान आज सेमीफाइनल में थम गया। पहले सेमीफाइनल में भारत विश्व नंबर दो टीम बेल्जियम से खेल रही थी और 2-5 से हार गई। पूल में ऑस्ट्रेलिया से  1-7से हार के बाद दूसरी और करारी हार थी। शुरू में भारत ने कड़ा मुकाबला किया। पहले क्वार्टर की समाप्ति पर भारत  2-1 से आगे था। तीसरे क्वार्टर की समाप्ति तक भी भारत 2-2 से बराबरी पर था। पर चौथे क्वार्टर में वे खेल को संभाल नहीं सके और हार गए। भारत बहुत ज़्यादा रक्षात्मक हो गया और भारत का डिफेंस एकदम बिखर गया। भारतीय टीम आखिरी समय में जरूरत से अधिक डिफेंसिव नजर आई। बेल्जियम ने भारत के पांच के मुकाबले  14 पैनल्टी कॉर्नर अर्जित किए। बेल्जियम ने 03 गोल पैनल्टी कॉर्नर से और एक पैनल्टी स्ट्रोक से किया। पांचवां फील्ड गोल था। उसकी तरफ से एलेग्जेंडर हेंड्रिक्स ने शानदार हैट्रिक लगाई। भारत की और से हरमनप्रीत और मनदीप ने एक एक गोल किए। अब 5 अगस्त को भारत कांस्य पदक के लिए जर्मनी से खेलेगा। दूसरे सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने जर्मनी को 3-1 से हराया।

कुश्ती में भी भारत की खराब शुरुआत हुई। महिलाओं की फ्रीस्टाइल के 62 किलोग्राम के प्री क्वार्टर फाइनल के पहले मुकाबले में सोनम मलिक मंगोलिया की पहलवान बोलोरतुया खुरेलखू से हार गई। उनकी हार दुर्भाग्यपूर्ण रही। क्योंकि बाउट खत्म होने पर स्कोर 2-2अंकों की बराबरी पर था। सोनम को 1 के मुकाबले 3 चेतावनी मिलने के कारण हार का सामना करना पड़ा।

टोक्यो ओलंपिक से कुछ और खबरें !

  • आज एथलेटिक्स में कई स्पर्द्धाओं के फाइनल मुकाबले सम्पन्न हुए।बात शुरू करते पुरुषों की 400 मीटर बाधा दौड़ से। आज की ये फाइनल दौड़ अविस्मरणीय बन गई।  नॉर्वे के अखबारों ने इसे नॉर्वे के वारहोल और अमेरिका के राय  बेंजामिन के मध्य 'सुपर डुएल' की संज्ञा दी। इसे विश्व रिकॉर्ड के साथ जीता नॉर्वे के कर्सटीन वारहोल ने 45.94 सेकंड के समय के साथ। उन्होंने केवल एक महीने पहले ही 46.70 सेकंड का विश्व रिकॉर्ड बनाया था जिसे उन्होंने ध्वस्त किया। दूसरे स्थान पर रहे बेंजामिन ने भी वारहोल के पहले के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ा और 46.17 सेकंड का समय लिया। यहां तक की तीसरे स्थान पर रहे ब्राज़ील के एलिसन डॉस सैंटोस भी मात्र सेकंड के 200वें हिस्से से विश्व रिकॉर्ड तोड़ने से चूक गए। उन्होंने 46.72 सेकंड का समय लिया। कमाल की बात तो ये है कि इस रेस के आठ में से 6 प्रतिभागियों ने विश्व रिकॉर्ड या महाद्वीपीय या राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। दरअसल ये 1960 के रोम ओलंपिक की 800 मीटर की दौड़ की याद दिलाती है जिसमें मिल्खा सिंह सेकंड के 100वें हिस्से से कांस्य पदक चूक गए थे और चौथे स्थान पर रहे थे। और कमाल की बात थी कि पहले चार रेसर ने विश्व रिकॉर्ड तोड़ा था। निसन्देह ये दौड़ पिछली एक सदी की सबसे शानदार नहीं तो चुनिंदा सबसे शानदार रेसों में एक होगी। 
  • सर्गेई बुबका के बाद स्वीडन के 21 साल के अमांडा डुपलांटिस पोलवॉल्ट का सबसे बड़ा नाम हैं। आज वे 6.19 मीटर का नया विश्व रिकॉर्ड तो नहीं बना पाए, परन्तु 6.02 मीटर ऊंची छलांग के साथ पोल वॉल्ट का स्वर्ण पदक जीत लिया। 5.97मीटर के साथ रजत अमेरिका के क्रिस नीलसन ने और 5.87 मीटर के साथ कांस्य ब्राजील के थियागो ब्राज़ ने जीता
  • महिलाओं की हैमर थ्रो स्पर्धा का स्वर्ण विश्व रिकॉर्ड धारी पोलैंड की अनीता वोडरजिक ने 78.74 मीटर थ्रो के साथ लगातार तीसरी बार जीत लिया। एथलेटिक्स की व्यक्तिगत स्पर्धा में लगातार तीन बार खिताब जीतने वाली पहली महिला एथलीट हो गयी हैं। चीन की वांग झेंग ने रजत और पोलैंड की मलविना  कोपरोन ने कांस्य पदक जीता।
  • जैमेका की थॉमसन हेराह ने 100 मीटर के बाद महिलाओं की 200 मीटर दौड़ भी 21.53 सेकंड के  समय से  जीतकर अपना डबल पूरा किया। नामीबिया की क्रिस्टीन एमबोमा ने चांदी का अमेरिका की गैबी थॉमस ने कांसे का तमगा जीता।
  • अमेरिका की एनथिंग मू ने महिलाओं की 800 मीटर दौड़ 1 मिनट और55.21 सेकंड का समय निकाल कर जीत ली। ब्रिटेन की  कीली होड़किनसन ने चांदी का अमेरिका की रविन रोजर्स ने कांसे का पदक जीता। अमेरिका की कोई धावक इस रेस को 50 से भी अधिक सालों के बाद जीत सकी है।
  • आज बास्केटबॉल के क्वार्टर फाइनल मैच खेले गए। स्लोवेनिया ने जर्मनी को 94-70 अंकों से और अमेरिका ने स्पेन को 95-81 अंकों से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। सेमीफाइनल में प्रवेश पाने वाली दो अन्य टीमें हैं फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया। फ्रांस ने इटली को 84-75अंकों से हराया जबकि ऑस्ट्रेलिया ने अर्जेंटीना को 97-59 से हराया।
  • आज ही वॉलीबाल के क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेले गए। वर्तमान चैंपियन ब्राज़ील ने मेजबान जापान को 25-20,25-22,25-20 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। जबकि रूस भी  कनाडा को सीधे सेटों में 3-0 से हराकर सेमीफ़ाइनल में पहुंचा। अर्जेंटीना भी एक कड़े मुकाबले में इटली को 3-2 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंच गई है। चौथा क्वार्टर फाइनल पोलैंड और फ्रांस के बीच है।
  • चीन के ज़ी सियी ने पुरुषों की 03 मीटर स्प्रिंगबोर्ड डाइविंग स्पर्द्धा का स्वर्ण पदक जीता। रजत पदक उन्हीं के साथी वांग जोंगयुआन ने और कांस्य पदक ब्रिटेन के जैक लौघर ने जीता।
  • इजू वेलोड्रम में साइक्लिंग में महिला टीम परसुइट स्पर्धा का स्वर्ण जर्मनी ने,रजत ब्रिटेन ने और  कांस्य अमेरिका की टीम ने जीता। जबकि पुरुषों की टीम स्प्रिंट स्पर्धा का स्वर्ण नीदरलैंड ने,रजत ब्रिटेन ने और कांस्य फ्रांस ने जीता।
  • एरिआके  जिम्नास्टिक सेन्टर पर चल रही जिम्नास्टिक  की पुरुष पैरेलल बार स्पर्धा का स्वर्ण चीन के  जोउ जिंग युआन ने जीता। इस स्पर्धा का रजत जर्मनी के लुकास दोसर ने और कांस्य टर्की के फरहत अरिकान ने जीता। महिला बैलेंस बीम का स्वर्ण चीन की गुआन चेनचेन ने जीता। रजत भी चीन की तांग सिजिंग ने और कांस्य पदक अमेरिका की सिमोन बाइल्स ने जीता। ये प्रतिस्पर्धा इसलिए उल्लेखनीय है कि इससे अमेरिका की सुप्रसिद्ध जिम्नास्ट सिमोन स्पर्धा में वापसी कर रही थीं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के आधार पर बीच में ही प्रतियोगिता छोड़ दी थी। ये सिमोन की शानदार वापसी थी। यहां पर उन्होंने एक कांस्य और टीम स्पर्धा में रजत पदक जीते हैं। अब उनके खाते में दो ओलंपिक में चार स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक सहित कुल 07 पदक हो गए हैं। जिम्नास्टिक की टोक्यो ओलंपिक की अंतिम स्पर्धा पुरुषों की होरिजेंटल बार स्पर्धा  थी जिसमें जापान के डायक़ी हाशिमोतो ने स्वर्ण पदक जीता। इसका रजत पदक क्रोशिया के टिन सर्बिक  ने और कांस्य रूस के निकिता नगोर्णी ने जीता।
  • वेटलिफ्टिंग के 109 किलोग्राम भार वर्ग में 21 वर्षीय उज़बेकिस्तान के अकबर जुरेव ने 430 किलोग्राम वजन उठाकर नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाया। आर्मीनिया के सिमोन मार्टिरॉयन ने चांदी का लातविया के आर्थर प्लेसनिएक्स ने कांसे का तमगा अपने नाम किया।
  • कुश्ती में फ्रीस्टाइल लाइटवेट महिला स्पर्धा में अमेरिका की तमिर एम स्टॉक ने स्वर्ण,नाइजीरिया की ब्लेसिंग ओबोरुडुडु ने रजत और यूक्रेन की चेरकासोवा ने कांस्य पदक जीता

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 32 स्वर्ण पदकों सहित 69पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 24 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 73 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 19 स्वर्ण पदक सहित कुल 36 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत एक रजत और एक कांस्य सहित कुल दो पदकों के साथ पदक तालिका में अब 64वें स्थान पर पहुंच गया है। 

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और चलते चलते बात टोक्यो के दो विशिष्ट खिलाड़ियों की।

इयान थोर्पे केवल ऑस्ट्रेलिया के ही नहीं बल्कि विश्व के  महानतम तैराकों से एक हैं जिन्होंने 05 ओलंपिक गोल्ड जीते हैं। अब एमा मैकेन उन्हीं की राह पर हैं। वे कुल 11 ओलंपिक पदक जीत कर ऑस्ट्रेलिया की सर्वश्रेष्ठ एथलीट बन गई हैं। उन्होंने टोक्यो में तैराकी में कुल 07 पदक जीते हैं। 04 स्वर्ण पदक और 03 कांस्य। इसके अलावा 01 स्वर्ण,02 रजत और एक कांस्य पदक उन्होंने रियो में जीता था। टोक्यो में 50 मीटर फ्रीस्टाइल,100 मीटर फ्रीस्टाइल,4×100मीटर  फ्रीस्टाइल और 4×100 मीटर मेडले में स्वर्ण और 100 मीटर बटरफ्लाई,4×200 मीटर फ्रीस्टाइल और 4×100 मीटर  मिक्स्ड मेडले में कांस्य पदक जीतकर ये उपलब्धि प्राप्त की। उधर अमेरिका के कैलब ड्रेसेल ने तैराकी में 05 स्वर्ण पदक जीतकर रिकॉर्ड कायम किया। ड्रेसेल ने 50 मीटर फ्रीस्टाइल,100 मीटर फ्रीस्टाइल,100 मीटर बटरफ्लाई,4×100 मेडले,और 4×100मिक्स्ड रिले में जीते हैं।वे अब तक 07 ओलंपिक स्वर्ण पदक जीत कर माइकेल फेल्प्स एयर मार्क स्पिट्ज की राह पर हैं।

इन दोनों तैराकों को सलाम।

Monday, 2 August 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी_10



02 अगस्त 2021

टोक्यो ओलंपिक 

स्पर्द्धाओं का 10वां दिन


ये रोमांच से भर देने वाला दृश्य और भाव विभोर कर देने वाला दृश्य दोनों एक साथ था।  भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच महिला हॉकी के क्वार्टर फाइनल मैच की समाप्ति का हूटर बजते ही भारतीय लड़कियां एक दूसरे की ओर भागीं। कुछ ही क्षणों में सबके हाथ एक दूसरे के गले में थे। उनमें से कुछ की आंखों में आंसू थे। कुछ खिलखिला रही थीं। वे सभी खुशी से उछल रही थीं और चिल्ला रही थीं। भले ही ये अंतिम जीत नहीं थी। ये किसी पदक का मिलना भी नहीं था। लेकिन उन्होंने कुछ  ऐसा किया था जो अब तक नहीं हुआ था और ये कुछ ऐसा भी था जिसकी बहुत सारे लोगों को उम्मीद भी नहीं रही होगी। उन्होंने एक इतिहास बनाया था। आज भारतीय महिला हॉकी में भारत की जीत के बाद के मैदान के दृश्य पर जाने माने पत्रकार  प्रियदर्शन ने लिखा 'ये कात्यायनी की हॉकी खेलती लडकियां हैं। ये वीरेन डंगवाल की पी टी उषा हैं।' दरअसल टोक्यो ओलंपिक में अभी तक भारत के लिए जितने भी सर्वश्रेष्ठ क्षणों की निर्मिति हुई है उन सब को लड़कियों ने बनाया है। वो चाहे सिंधु हों,लोवलीना बोरगोइन हों, मीराबाई चानु हो या हॉकी टीम हो। अगर इन सारे दृश्यों का एक कोलाज आप बनाएंगे तो ये प्रतिभा कटियार की 'खेलती हुई लड़कियां' ज़्यादा हैं जिन्होंने खेलों की बाज़ियों को जीतना तो सीख लिया है ज़िन्दगी की बाज़ियों को अभी सीखना बाकी है।


महिला हॉकी के आज क्वार्टर फाइनल मुकाबले हुए जिसमें भारतीय लड़कियों ने दो बार की ओलंपिक चैंपियन और  विश्व नंबर दो टीम ऑस्ट्रेलिया को  1-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर एक इतिहास रचा। मैच का एकमात्र गोल दूसरे क्वार्टर में 22वें मिनट में आया जब ड्रैग फ्लिकर गुरजीत कौर ने पेनाल्टी कॉर्नर से गोल किया। ये भारतीय लड़कियों का तीसरा ओलंपिक है। इससे पहले 1980 मास्को और 2016 रियो में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। मास्को में 6 टीमों में भारत ने चौथा स्थान प्राप्त किया था और रियो में 12 टीमों में अंतिम स्थान पर रहीं थी। इस बार वे सेमीफाइनल खेल रही हैं और बुधवार को भारत का मुकाबला अर्जेंटीना से होगा जिन्होंने एक अन्य क्वार्टर फाइनल मुकाबले में जर्मनी को 3-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। दूसरा सेमीफाइनल नीदरलैंड और इंग्लैंड के बीच होगा। इंग्लैंड ने रेगुलर टाइम में 2-2 की बराबरी के बाद शूट आउट में स्पेन को 2-0 से हराया तो नीदरलैंड ने न्यूजीलैंड को 3-0 से हराया।

भारत के शूटिंग दल में 15 सदस्य थे। कई विश्व विजेता और विश्व रैंकिंग में टॉप पोजीशन पर थे।उनसे एक नहीं अनेक पदकों की उम्मीद भारत ने लगा रखी थी। आज शूटिंग में कोई भी पदक जीतने की अंतिम उम्मीद भी खत्म हुई और शूटिंग में भारत का अभियान खत्म हुआ। वे खाली हाथ वापस लौट रहे हैं। आज शूटिंग की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन  स्पर्धा में भारत के ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर और संजीव राजपूत भाग ले रहे थे। क्वालिफिकेशन राउंड में ऐश्वर्य 21वें और संजीव 32वें स्थान पर रहे। दोनों ही फाइनल में पहुंचने में विफल रहे। इस बार सबसे अच्छा प्रदर्शन सौरभ चौधरी का 10 मीटर एयर पिस्टल पुरुष स्पर्धा में रहा जहां वे फाइनल में पहुंचे और 7वें स्थान पर रहे। इसके अलावा 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड स्पर्धा में मनु भाखर व सौरभ दूसरे दौर तक पहुंचे। बाकी सभी स्पर्द्धाओं में शूटर पहले ही राउंड से बाहर हो गए। निसन्देह शूटरों का ये निराश करने वाला प्रदर्शन था। आज की 50 मीटर 3 पोजीशन स्पर्धा का स्वर्ण पदक चीन के झांग चांग होंग ने 466 अंकों के नए विश्व रिकॉर्ड के साथ जीता। रजत रूस के सेर्गई कामेन्स्की ने और कांस्य सर्बिया ने जीता।

आज एथलेटिक्स में भारत दो स्पर्द्धाओं में प्रतिभाग कर रहा था। 200 मीटर महिला दौड़ में दुति चंद और डिस्कस थ्रो के फाइनल में कमलप्रीत कौर। सुबह 200 मीटर दौड़ की आरंभिक चौथी हीट में दुति 23.85 सेकेण्ड के समय के साथ हीट में अंतिम स्थान पर रहीं और स्पर्धा से बाहर हो गईं। हालांकि ये इस सीजन का दुति का सबसे अच्छा समय रहा। आज सबकी निगाहें महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा पर थीं। कमलप्रीत 64 मीटर की थ्रो के साथ दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल राउंड में पहुंची थीं। उन्होंने उम्मीदें बढ़ा दी थीं। उन्होंने अभी हाल ही में  राष्ट्रीय रिकॉर्ड 66.59 मीटर का बनाया था। फाइनल में वे 63.70 मीटर थ्रो के साथ 6ठवें स्थान पर रहीं। हालांकि ये अब तक का किसी भी भारतीय डिस्कस थ्रो स्पर्धा का सबसे अच्छा प्रदर्शन था। इस स्पर्धा का स्वर्ण अमेरिका की वेलेरी ऑलमन ने 68.98 मीटर की थ्रो के साथ जीता जबकी रजत 66.86 मीटर थ्रो के साथ जर्मनी की के.पुडेन्ज़ ने और क्यूबा की पेरेज ने 65.72 मीटर थ्रो के साथ कांस्य जीता।


घुड़सवारी में फवाद मिर्ज़ा आज की स्पर्धा के फाइनल में तो पहुंचे पर फाइनल में वे 25 प्रतिभागियों में 23वें स्थान पर रहे।

और टोक्यो ओलंपिक से ही कुछ और खबरें।

  • 100 मीटर महिला बाधा दौड़ का स्वर्ण पदक प्यूर्टो रिको की जैस्मिन कैमेचो  क्विन ने  12.37 सेकंड का समय निकाल कर जीता। प्यूर्टो रिका का टोक्यो ओलंपिक का ये पहला और एथलेटिक्स का अब तक का देश का पहला स्वर्ण पदक है। इस स्पर्धा का रजत पदक 12.52 सेकंड के समय के साथ अमेरिका की के. हैरिसन ने और कांस्य पदक 
  • जैमेका की मेगन टैपर ने जीता। क्विन ने सेमीफाइनल में 12.26 सेकंड का समय निकालकर नया ओलंपिक रिकॉर्ड बनाया था।
  • पुरुषों की लंबी कूद का स्वर्ण पदक ग्रीस के मिलतियादिस टेंतोगलौ ने जीता। उन्होंने 8.41 मीटर लंबी छलांग लगाई। रजत और कांस्य पदक क्यूबा के खाते में गए। जुआन एचेवरी ने रजत और माइक मासो ने कांस्य पदक जीते।
  • वेटलिफ्टिंग की महिलाओं की  87 किलोग्राम भार वर्ग में चीन के वांग झाऊ यू ने स्वर्ण पदक जीता है।
  •  इसमें रजत इक्वेडोर के तमारा सालाजार ने रजत और  रिपब्लिक की क्रिसमेरी सैन्टाना ने कांस्य पदक जीता है।
  • बैडमिंटन की महिला युगल स्पर्धा का स्वर्णपदक इंडोनेशिया की जी. पोली और ए. रहायू ने चीन की चेन किंग चेन और यी फैन को 21-19 और 21-15 से हराकर जीता।जबकि किम सोयेनग व कॉन्ग ही योंग ने कांस्य पदक जीता। आज पुरुष सिंगल फाइनल में डेनमार्क के विक्टर एक्सेलसन का मुकाबला चीन के चेन लांग के बीच था। इसमें एक्सेलसन ने लांग को 21-15  21-12 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।
  • जिम्नास्टिक में पुरुषों की वॉल्ट स्पर्धा का स्वर्ण दक्षिण कोरिया के शिन जी हान ने जीता,जबकि रजत के डेनिस आबलियाजिन ने और कांस्य अर्टर डेवत्यान ने जीता। अमेरिका की ज़ेड कैरे ने महिला फ्लोर  एक्सरसाइज का स्वर्ण पदक जीता, जबकि इस स्पर्धा का रजत पदक इटली की वेनेसा फेरारी और कांस्य जापान की माई मुराकामी  तथा रूस की एंजेलिना मेलनिकोवा ने संयुक्त रूप से जीता। चीन के लियू यांग ने पुरुषों की रिंग स्पर्धा का स्वर्ण,रजत भी चीन के यू हाओ ने और कांस्य ग्रीस के पेट्रोनियास ने जीता।
  • इजू वेलोड्रम में महिलाओं की साइकलिंग टीम स्प्रिंट स्पर्धा का स्वर्ण चीन ने,रजत जर्मनी ने और काँस्य रूस ने जीता। इस स्पर्धा के पहले राउंड में चीन ने बेलारूस को हराते हुए नया विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए हराया था।
  • आज से कुश्ती के मुकाबले भी शुरू हुए। क्यूबा के लुइस ओरटा ने ग्रीको रोमन के बेंटमवेट स्पर्धा में जापान के केनिचिरो फुटिमा को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया है। जबकि चीन के वालिहान सैलिके और रूस के सेर्गेई एमेलिन ने कांस्य पदक जीते।
  •  एक उलटफेर महिला फुटबॉल में भी हुआ। आज खेल गए सेमीफाइनल मैच में चार बार के ओलंपिक चैंपियन अमेरिका को कनाडा की टीम ने 1-0 से हरा दिया। एकमात्र विजयी गोल कनाडा की जैसी फ्लेमिंग ने 74वें मिनट में किया।

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 29 स्वर्ण पदकों सहित 62 पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 22 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 64 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 17 स्वर्ण पदक सहित कुल 33 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत एक रजत और एक कांस्य सहित कुल दो पदकों के साथ पदक तालिका में अब 62वें स्थान पर पहुंच गया है। 

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और चलते चलते बात खेल भावना की। चीनी ताइपे की बैडमिंटन खिलाड़ी ताई जू यिंग ने ट्वीट किया कि महिला एकल के फाइनल में हार के बाद सिंधु उनके पास आईं और गले लगाकर उन्हें सांत्वना दी जिससे उन्हें हार से उबरने में बहुत सहायता मिली। वे सिंधु की इस भावना से अभिभूत थीं। सेमीफाइनल में सिंधु ताई जू से ही हारी थीं। कमलप्रीत कौर ने एक साक्षात्कार में बताया कि क्वालिफिकेशन राउंड में 64 मीटर की शानदार थ्रो के बाद दो बार की चैंपियन क्रोशिया की सांद्रा परकोवा और पहले नंबर पर आने वाली अमेरिका की ऑलमन दोनों उनके पास आईं और उन्हें बधाई दी जिससे वे भावविह्वल हैं। और फिर आज  बैडमिंटन के पुरुष सिंगल फाइनल के बाद का अद्भुत दृश्य। विक्टर जैसे ही जीते अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और फूट फूट कर रोने लगे और सबसे पहले अपने कोच के पास गए। इस बीच चेन लांग उनके कोर्ट में आए और कोच के पास से वापस आने का इंतज़ार किया। उसके बाद चेन ने विक्टर को गले लगाया,उन्हें बधाई दी,धीरज बंधाया,शर्ट्स की अदला बदली की और मुस्करा कर एक दूसरे को विदा कहा। और मेरी कॉम की हार के बाद मुस्कुराकर सभी का अभिवादन कर रिंग से विदा होने का दृश्य। दरअसल ओलंपिक इसी भावना के लिए जाने जाते हैं। खेल केवल हार जीत और प्रतिद्वंदिता भर नहीं होते,ये एक दूसरे की भावनाओं को समझना,उनका आदर करना,एक दूसरे का सहयोग करना और बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देना भी है।

Sunday, 1 August 2021

टोक्यो ओलंपिक डायरी_9




01 अगस्त, 2021

टोक्यो ओलंपिक 

स्पर्धाओं का नवां दिन

            हर रात का एक सवेरा होता है। निराशाओं और हताशाओं के बादल चाहे जितने घने हों रोशनी उनसे होकर रास्ता बना ही  लेती है। कल का हार की उदासी आज की जीत से हवा में रुई की माफिक उड़ गई। आज भारत ने अपने खाते में एक और पदक जमा किया। तो हॉकी ने अपनी खोई प्रतिष्ठा का एक अंश और जमा किया। ये दीगर बात है कि हॉकी में ये सवेरा एक लंबी रात के बाद हो रहा है। ये 41 साल  लंबी रात थी। और ये भी कि सतीश ने बताया वे एक सच्चे खिलाड़ी और बहादुर सैनिक हैं।



          आज बैडमिंटन के महिला एकल स्पर्धा का कांस्य पदक का मुकाबला पीवी सिंधु और चीन की ही बिंग जियाओ के बीच खेला गया। पहले पॉइंट के लिए चली लंबी रैली ने इस बात के संकेत दे दिए थे कि ये कड़ा मुकाबला होने जा रहा है। सिंधु ने शुरु में ही 3-0 बढ़त ले ली। लेकिन बिंग ने स्कोर 8-8 किया। उसके बाद सिंधु ने आक्रामक खेल दिखाया और शानदार स्मैश लगाए और 6 अंकों की साथ बढ़त के साथ स्कोर 14-8 किया। ये अंतर अंत तक बना रहा और पहला गेम 21-13  से जीत लिया। दूसरे गेम में भी सिंधु ने आक्रामक स्मैश लगाए और 5-2 की बढ़त बना ली। लेकिन लंबी रैलियां हुई और कड़ा संघर्ष। स्कोर 11-11 हुआ। सिंधु ने जल्द ही 4 अंकों की बढ़त से 15-11 स्कोर किया।अंततः इस गेम को 21-15 से जीतकर एक नया इतिहास रचा। स्कोर से मैच के संघर्ष का पता नही चलता। बिंग ने कड़ा संघर्ष किया और पूरे मैच में लंबी रैलियां खेली गई। ये सिंधु की संघर्ष से अर्जित की गई जीत थी। आज वे इतना आक्रामक खेल रहीं थी और इतने तेज स्मैशेज लगा रहीं थी मानो वो कल की हार का गुस्सा निकाल रही हों और उसका बदला ले रही हों। वे दो ओलंपिक मैडल जीतने वाली सुशील कुमार के बाद दूसरी भारतीय खिलाड़ी और पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। इस तरह भारत को इस ओलंपिक का दूसरा पदक मिला। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक चीन की चेन यू फेई ने चाइनीज ताइपे की ताई जू यिंग को 21-18,19-21,21-18 आए हराकर जीत लिया।

                 बैडमिंटन की एकल पुरुष स्पर्धा में डेनमार्क के विक्टर एक्सेलसेन का मुकाबला चीन के  चेन लांग से होगा। चेन लांग इंडोनेशिया के एंथोनी जिंटिंग को 21-16 21-11 से हराया।जबकि दूसरे सेमीफाइनल में एक्सेलसेन ने गुआटेमाला के केविन कोर्डिन को 21-18,21-11से हराया।


                आज टोक्यो में हॉकी के क्वार्टर फाइनल मुकाबले सम्पन्न हुए। पहले क्वार्टर फाइनल में जर्मनी ने अर्जेंटीना को 3-1 से हराया। दूसरे क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने रेगुलर टाइम में 2-2 से बराबरी के बाद पेनाल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को 3-0 से हराया। तीसरे क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम ने स्पेन को 3-1 से हराया। चौथा क्वार्टर फाइनल भारत और ग्रेट ब्रिटेन से था। ये भारत के लिए बहुत अहम मुकाबला था और 49 साल में पहली बार अंतिम चार में जगह बनाने और खोई प्रतिष्ठा पाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण था। इस मैच में भारत ने बहुत ही शानदार शुरुआत की। और आठवें मिनट में ही दिलप्रीत ने फील्ड गोल करके 1-0 की बढ़त दिला दी। उसके बाद दूसरे क्वार्टर में गुरजंत ने एक और फील्ड गोल्ड कर भारत की 2-0 की बढ़त बना दी। हाफ टाइम के बाद इंग्लैंड की टीम ने भारत पर दबाव बनाया और इसका उन्हें फायदा मिला। तीसरे क्वार्टर में बिल्कुल अंतिम एक गोल कर स्कोर 2-1 कर दिया। चौथे क्वार्टर में खराब अंपायरिंग के कारण अंतिम 7 मिनट के रहते कप्तान हरमनप्रीत येलो कार्ड से बाहर कर दिए गए। भारत ने फिर भी शानदार खेल दिखाया और 57वें मिनट में हार्दिक ने एक गोल और करके भारत की बढ़त 3-1 की कर दी। यही अंतिम स्कोर लाइन रही और 49 साल बाद भारत ने ओलंपिक हॉकी के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इससे पहले 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में सेमीफाइनल खेली थी और पाकिस्तान से 2-0 से हार गई थी। हालांकि 1980 में भारत ने मास्को ओलंपिक में स्वर्ण जीता था। पर इसमें पश्चिमी देशों के बहिष्कार के कारण केवल 6 टीमों ने भाग लिया था और सेमीफाइनल फॉरमेट नहीं था। अब सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला बेल्जियम से होगा।

                 आज मुक्केबाजी में भारत का एक मुकाबला था। सुपर हैवीवेट वर्ग में क्वार्टर फाइनल में सतीश कुमार का मुकाबला वर्तमान एशियन और विश्व चैंपियन उज़्बेकिस्तान के बखोदिर जालोलोव से था। ये मुकाबला वे 0-5 से हार गए। लेकिन सतीश कुमार की तारीफ करनी कि माथे में सात टांके लगाने के बावजूद वे रिंग में उतरे और पूरा मुकाबला खेला। पिछले मुकाबले में उन्हें चोट लग गयी थी। उनके इस मुकाबले में उतरने में संदेह था। लेकिन मेडिकल में परीक्षण के बाद उन्हें खेलने की अनुमति मिल गयी। वे भले ही हार गए हों लेकिन खेल जीत-हार भर नहीं होते,वे एक खिलाड़ी का साहस,उसका दृढ़ निश्चय और खेल के प्रति उसकी प्रतिबद्धता भी होते हैं। आज सतीश ने रिंग में उतरकर ये साबित किया। वे एक खिलाड़ी ही नहीं एक सैनिक भी हैं। उन्हें वहां आखिर दम तक लड़ना सिखाया जाता है। और उन्होंने यहां एक सैनिक और एक खिलाड़ी की सच्ची भावना का प्रदर्शन किया। ये ओलंपिक भावना की जीत थी।

                गोल्फ में भारत के अनिर्बान लाहिरी तीसरे राउंड के बाद 43वें और उदयन माने 56वें स्थान पर थे।  चौथे राउंड के बाद भी स्थिति में कोई अंतर नहीं आया। लाहिरी 42वें और माने 56वें स्थान पर रहे।

टोक्यो से ही कुछ और खबरें

  • टेनिस में पुरूष एकल का स्वर्ण पदक जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने रूस के करें खाचानोव को 6-3,6-1 से हराकर जीत लिया। ज्वेरेव ने सेमीफाइनल में जोकोविच को हराया था। छह फुट छह इंच के ज्वेरेव ने अपनी दमदार सर्विस और विश्वास से भरे बैकहैंड से मैच पर नियंत्रण बनाए रखा. उन्होंने पूरे मैच के दौरान 25वीं रैंकिंग के खाचनोव को कोई मौका नहीं दिया.कांस्य स्पेन के बुस्ता ने जीता।
  • और एथेलेटिक्स की पुरुषों की 100 मीटर दौड़ जमैका के धावकों की अनुपस्थिति में इटली के लमोंत मार्सेल जैकब्स ने  10.80 सेकंड का समय निकाल कर जीत ली। अमेरिका के फ्रेड केरले ने 10.84 सेकंड निकालकर रजत और कनाडा के आंद्रे ग्रास ने 10.89 सेकंड का समय लेकर कांस्य पदक जीता। 1996 के अटलांटा ओलंपिक के बाद ये पहला अवसर है जब अमेरिका और जमैका के अलावा किसी और देश के धावक ने ये दौड़ जीती है। अटलांटा में कणाद के डोनावेल वैली ने ये स्पर्धा जीती थी।
  • वेनेजुएला की दो बार की विश्व  चैंपियन युलिमार रोजस ने नए विश्व रिकॉर्ड के साथ महिलाओं की ट्रीपल जम्प में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 15.67 मीटर की जम्प के साथ यूक्रेन की इनेसा क्रवेट द्वारा 1995 में बनाया 15.50मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा। इस स्पर्धा का रजत पुर्तगाल की पैट्रिशिया ममोना ने और कांस्य स्पेन की एना पेलेटीरो ने जीता ।
  • क़तर के मुताज़ ईसा बरशिम ने इटली के जिनमार्को  तांबेरी के साथ संयुक्त रूप से पुरुषों का ऊंची कूद का स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 2.37 मीटर ऊंची कूद लगाई। हालांकि बेलारूस के मक्सिम नेदसेकौ ने भी 2.37 मीटर ऊंची कूद लगाई पर उनके असफल प्रयास अधिक होने के कारण उन्हें कांस्य पदक पर संतोष करना पड़ा।
  • महिलाओं की शॉटपुट स्पर्धा का स्वर्ण चीन की एल जे गोंग ने 20.58 मीटर गोला फेंक कर जीता। अमेरिका की आर सॉन्डर्स ने 19.79मीटर की थ्रो के साथ रजत और न्यूज़ीलैंड की वी एडम्स ने 19.62 की थ्रो के साथ कांस्य पदक जीता।

और अब बात पदक तालिका की। आज खेल प्रतिस्पर्धाओं की समाप्ति पर पदक तालिका में चीन 24 स्वर्ण पदकों सहित 51 पदक जीत कर पहले स्थान पर,अमेरिका 20 स्वर्ण  पदकों सहित कुल 59 पदक लेकर दूसरे पर और जापान 17 स्वर्ण पदक सहित कुल 31 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर है। भारत एक रजत और एक कांस्य सहित कुल दो पदकों के साथ पदक तालिका में अब 59वें स्थान पर पहुंच गया है। 

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और आज फिर पदकों की उम्मीद का भार लड़कियों के कांधों ने उठाया। एक सलाम सिंधु को और निसन्देह राष्ट्रीय खेल के गौरव के एक अंश को प्रतिष्ठापित करने के लिए एक सलाम लड़कों को भी।

ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेल 2026

एक : फीके फीके से खेल इस बार के ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ खेल बहुत फीके फीके से हैं। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया द्वारा मेजबानी...